Posted in श्रीमद्‍भगवद्‍गीता

♨♨♨

जिस आदमी ने श्रीमदभगवद गीता का पहला उर्दू अनुवाद किया वो था मोहम्मद मेहरुल्लाह!
बाद में उसने सनातन धर्म अपना लिया!

पहला व्यक्ति जिसने श्रीमदभागवद गीता जी का अरबी अनुवाद किया वो एक फिलिस्तीनी था अल फतेह कमांडो नाम का!
जिसने बाद में जर्मनी में इस्कॉन जॉइन किया और अब हिंदुत्व में है!

पहला व्यक्ति जिसने इंग्लिश अनुवाद किया उसका नाम चार्ल्स विलिक्नोस था!
ईसने भी बाद में हिन्दू धर्म अपना लिया उसका तो ये तक कहना था कि दुनिया मे केवल हिंदुत्व बचेगा!

हिब्रू में अनुवाद करने वाला व्यक्ति Bezashition le fanah नाम का इसरायली था जिसने बाद में हिंदुत्व अपना लिया था भारत मे आकर!

पहला व्यक्ति जिसने रूसी भाषा मे अनुवाद किया उसका नाम था नोविकोव जो बाद में भगवान कृष्ण का भक्त बन गया था!

आज तक 283 बुद्धिमानों ने श्रीमद भगवद गीता जी का अनुवाद किया है अलग अलग भाषाओं में जिनमें से 58 बंगाली, 44 अंग्रेजी, 12 जर्मन, 4 रूसी, 4 फ्रेंच, 13 स्पेनिश, 5 अरबी, 3 उर्दू और अन्य कई भाषाएं थी!

जिस व्यक्ति ने कुरान को बंगाली में अनुवाद किया उसका नाम गिरीश चंद्र सेन था!
लेकिन वो इस्लाम मे नहीं गया शायद इसलिए कि वो इस अनुवाद करने से पहले श्रीमद भागवद गीता जी को भी पढ़ चुके थे!
और जिन्होंने कुरान शरीफ को देव नागरी लिपि में अनुवाद किया है वह हैं लखनऊ, उत्तर प्रदेश के स्वर्गीय पण्डित नन्द कुमार अवस्थी ( पद्मश्री ) उन्होंने भी इस्लाम ग्रहण नहीं किया! क्योंकि वह एक कट्टर सनातन धर्मी थे।

ये है सनातन धर्म और इसके धार्मिक ग्रंथों की ताकत!

जय श्री कृष्णा।
🌹🌹🌹🙏🌹🌹🌹

Posted in कविता - Kavita - કવિતા

👉 આ રચના કોની છેએ જાણી શકાયું નથી.પરંતુ જેમણે પણ લખ્યું છે તેમણે ખુબ જ સચોટ લખ્યું છે…👈

અતિશ્રદ્ધા છે અવળચંડી,
વેવલાપણાંનાં વાવેતર કરે.

🔹યુરોપે અટપટાં યંત્રો શોધી ફીટ
કર્યાં ફૅક્ટરીમાં;
🔸આપણે સિદ્ધિયંત્રો બનાવી,
ફીટ કર્યાં ફોટામાં.

🔹પશ્ચિમે ઉપગ્રહ બનાવી,
ગોઠવી દીધા અંતરિક્ષમાં;
🔸આપણે ગ્રહોના નંગ બનાવી,
મઢી દીધા અંગુઠીમાં.

🔹જાપાન વિજાણુ યંત્રો થકી,
સમૃદ્ધ બન્યું જગમાં;
🔸આપણે વૈભવલક્ષ્મીનાં વ્રતો કરી,
ગરીબી રાખી ઘરમાં.

🔹અમેરીકા વૈજ્ઞાનિક અભિગમથી
બળવાન બન્યો વિશ્વમાં;
🔸આપણે ધાર્મિક કર્મકાંડો થકી,
કંગાળ બન્યા દેશમાં.

🔹પશ્ચિમે પરિશ્રમ થકી, સ્વર્ગ ઉતાર્યું
આ લોકમાં;
🔸આપણે પુજાપાઠ–ભક્તિ કરી,
સ્વર્ગ રાખ્યું પરલોકમાં.

🔹ઍડવર્ડ જેનરે રસી શોધી, શીતળા
નાબુદ કર્યા જગમાં;
🔸આપણે શીતળાનાં મંદિર બાંધી,
મુર્ખ ઠર્યા આખા જગમાં.

🔹 પર્યાવરણ–પ્રદુષણથી જયારે
જગત આખું છે ચિંતામાં;
🔸આપણે વૃક્ષો જંગલો કાપી,
લાકડાં ખડક્યાં ચીતામાં..

🔹 વાસ્તુશાસ્ત્રનો દંભ ને વળગાડ,
લોકોને પીડે આ દેશમાં;
🔸 ફાલતુશાસ્ત્ર છે એ,છેતરાશો નહીં,
ઠગનારા ઘણા છે આ દેશમાં.

🔹સાયંટિફિકલિ બ્લડ ચૅક કરી,
ઍંગેજમેન્ટ કરે પશ્ચિમમાં,
🔸સંતાનોને ફસાવી જન્મકુંડળીમાં,
લગ્નકુંડાળાં થાય આ દેશમાં.

🔹 લસણ–ડુંગળી–બટાકા ખાવાથી
પાપ લાગે આ દેશમાં,
🔸 આખી ને આખી બેન્ક ખાવા છતાં
પાપ ન લાગે આ દેશમાં.

( અજ્ઞાત )

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🎋”भूतपूर्व वैयाकरणज्ञ 🔥भव्य-भारत”🎋
एक समय था, जब भारत सम्पूर्ण विश्व में प्रत्येक क्षेत्र सबसे आगे था । प्राचीन काल में सभी भारतीय बहुश्रुत,वेद-वेदाङ्गज्ञ थे । राजा भोज को तो एक साधारण लकडहारे ने भी व्याकरण में छक्के छुडा दिए थे ।व्याकरण शास्त्र की इतनी प्रतिष्ठा थी की व्याकरण ज्ञान शून्य को कोई अपनी लड़की तक नही देता था ,यथा :- “अचीकमत यो न जानाति,यो न जानाति वर्वरी।अजर्घा यो न जानाति,तस्मै कन्यां न दीयते”

यह तत्कालीन लोक में ख्यात व्याकरणशास्त्रीय उक्ति है ‘अचीकमत, बर्बरी एवं अजर्घा इन पदों की सिद्धि में जो सुधी असमर्थ हो उसे कन्या न दी जाये” प्रायः प्रत्येक व्यक्ति व्याकरणज्ञ हो यही अपेक्षा होती थी ताकि वह स्वयं शब्द के साधुत्व-असाधुत्व का विवेकी हो,स्वयं वेदार्थ परिज्ञान में समर्थ हो, इतना सम्भव न भी हो तो कम से कम इतने संस्कृत ज्ञान की अपेक्षा रखी ही जाती थी जिससे वह शब्दों का यथाशक्य शुद्ध व पूर्ण उच्चारण करे :-
यद्यपि बहु नाधीषे तथापि पठ पुत्र व्याकरणम्।
स्वजनो श्वजनो माऽभूत्सकलं शकलं सकृत्शकृत्॥

अर्थ : ” पुत्र! यदि तुम बहुत विद्वान नहीं बन पाते हो तो भी व्याकरण (अवश्य) पढ़ो ताकि ‘स्वजन’ ‘श्वजन’ (कुत्ता) न बने और ‘सकल’ (सम्पूर्ण) ‘शकल’ (टूटा हुआ) न बने तथा ‘सकृत्’ (किसी समय) ‘शकृत्’ (गोबर का घूरा) न बन जाय। ”

भारत का जन जन की व्याकरणज्ञता सम्बंधित प्रसंग “वैदिक संस्कृत” पेज के महानुभव ने भी आज ही उद्धृत की है जो महाभाष्य ८.३.९७ में स्वयं पतञ्जलि महाभाग ने भी उद्धृत की हैं ।

सारथि के लिए उस समय कई शब्द प्रयोग में आते थे । जैसे—सूत, सारथि, प्राजिता और प्रवेता ।

आज हम आपको प्राजिता और प्रवेता की सिद्धि के बारे में बतायेंगे और साथ ही इसके सम्बन्ध में रोचक प्रसंग भी बतायेंगे ।

रथ को हाँकने वाले को “सारथि” कहा जाता है । सारथि रथ में बाई ओर बैठता था, इसी कारण उसे “सव्येष्ठा” भी कहलाता थाः—-देखिए,महाभाष्य—८.३.९७

सारथि को सूत भी कहा जाता था , जिसका अर्थ था—-अच्छी प्रकार हाँकने वाला । इसी अर्थ में प्रवेता और प्राजिता शब्द भी बनते थे । इसमें प्रवेता व्यकारण की दृष्टि से शुद्ध था , किन्तु लोक में विशेषतः सारथियों में “प्राजिता” शब्द का प्रचलन था ।

भाष्यकार ने गत्यर्थक “अज्” को “वी” आदेश करने के प्रसंग में “प्राजिता” शब्द की निष्पत्ति पर एक मनोरंजक प्रसंग दिया है । उन्होंने “प्राजिता” शब्द का उल्लेख कर प्रश्न किया है कि क्या यह प्रयोग उचित है ? इसके उत्तर में हाँ कहा है ।

कोई वैयाकरण किसी रथ को देखकर बोला, “इस रथ का प्रवेता (सारथि) कौन है ?”

सूत ने उत्तर दिया, “आयुष्मन्, इस रथ का प्राजिता मैं हूँ ।”

वैयाकरण ने कहा, “प्राजिता तो अपशब्द है ।”

सूत बोला, देवों के प्रिय आप व्याकरण को जानने वाले से निष्पन्न होने वाले केवल शब्दों की ही जानकारी रखते हैं, किन्तु व्यवहार में कौन-सा शब्द इष्ट है, वह नहीं जानते । “प्राजिता” प्रयोग शास्त्रकारों को मान्य है ।”

इस पर वैयाकरण चिढकर बोला, “यह दुरुत (दुष्ट सारथि) तो मुझे पीडा पहुँचा रहा है ।”

सूत ने शान्त भाव से उत्तर दिया, “महोदय ! मैं सूत हूँ । सूत शब्द “वेञ्” धातु के आगे क्त प्रत्यय और पहले प्रशंसार्थक “सु” उपसर्ग लगाकर नहीं बनता, जो आपने प्रशंसार्थक “सूत” निकालकर कुत्सार्थक “दुर्” उपसर्ग लगाकर “दुरुत” शब्द बना लिया । सूत तो “सूञ्” धातु (प्रेरणार्थक) से बनता है और यदि आप मेरे लिए कुत्सार्थक प्रयोग करना चाहते हैं, तो आपको मुझे “दुःसूत” कहना चाहिए, “दुरुत” नहीं ।

उपर्युक्त उद्धरण से यह स्पष्ट है कि सारथि, सूत और प्राजिता तीनों शब्दों का प्रचलन हाँकने वाले के लिए था । व्याकरण की दृष्टि से प्रवेता शब्द शुद्ध माना जाता था । इसी प्रकार “सूत” के विषय में भी वैयाकरणों में मतभेद था ।
✍🏼
इत्यलयम् 🌺 संलग्न कथानक के लिये “वैदिक संस्कृत” पृष्ठ के प्रति कृतज्ञ हूँ।💐

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक व्यापारी बैंक मे 5 लाख का लोन लेने के उद्देश्य से गया।
मैनेजर: सर collateral Security (गिरवी) क्या दोगे?
व्यापारी : वो क्या होता है जी?
मैनेजर: सर आपकी Property गिरवी रख लेंगे। अगर आपने लोन नही चुकाया तो बैंक प्रापर्टी बेच के अपना घाटा पूरा कर लेगा।
व्यापारी ने कागज sign किये, 5 लाख लोन लिया और घर चला गया। लगभग 1 साल बाद व्यापारी वापस आया और ब्याज समेत सारे पैसे बैंक को वापस दे गया।
मैनेजर: धन्यवाद सर। और बताइए काम कैसे चल रहा है?
व्यापारी: सब ठीक है, दुकान भी ठीक है, मुनाफा भी अच्छा हो गया और क्या चाहिये?
मैनेजर: सर पैसे तो सारे आपने जमा कर दिए कुछ और बचत हुई या नही आपको?
व्यापारी : हाँ बिल्कुल हुई है। 3 लाख बचत हुई थी।
मैनेजर: तो सर बैंक मे FD करवा लें 6% का ब्याज देंगे आपको 5 साल तक।
अब बारी व्यापारी की थी। बोला, करवा तो दूं FD, पर बैंक मुझे collateral (गिरवी) क्या रखेगा। अगर बैंक ने वापस ना दिए तो मैं क्या बेच कर अपना पैसा वसूल करूँगा?
आज की स्तिथियों में ये सवाल जायज है 🤣🤣

Posted in कविता - Kavita - કવિતા

પારખી લીધું તો કોઈ આપણું નથી,

સમજી લીધું તો કોઈ પારકું નથી….!!

“નફરત તો જુઓ ”
લોકો “એક મિનિટ માં સમજી” જાય છે,
અને
“એક લાગણી છે,”
જેને “સમજવામાં વર્ષો” નીકળી જાય છે.

ઝવેરચંદ મેધાણી

ધીમે ધીમે વૃદ્ધિ પામી તું વૃધ્ધ થા,
કાં પછી સર્વસ્વ ત્યાગી તું બુધ્ધ થા;

સ્નાન હો ઘરમાં કે પછી હો ગંગા તટે,
છે શરત એક જ કે તું ભીતરથી શુધ્ધ થા!

પાણીથી ન્હાય તે કપડાં બદલી શકે છે,
પણ પરસેવે ન્હાય તે કિસ્મત બદલી શકે છે.

પ્રભુ એટલું આપજો શોધવું પણ ના પડે,
અને સંતાડવું પણ ના પડે.

વિચાર ગમે તેટલો સુંદર હોય
તે આચાર વિના નકામો છે.

પ્રભુ હું ક્યાં કહુ છું કે તૂ આંગણસુધી આવ?
આંખ મીચું… ને બસ પાંપણ સુધી તો આવ..!