Posted in सुभाषित - Subhasit

🤩मजेदार मस्ती भरे दोहे….

बुरे समय को देखकर, गंजे तू क्यों रोए ।
किसी भी हालत में तेरा बाल न बांका होय।।
🤗🤗🤗🤗🤗🤗
कर्ज़ा देता मित्र को, वह मूर्ख कहलाए।
महामूर्ख वह यार है, जो पैसे लौटाए।।
😇😇😇😇😇😇😇😇
दोस्तो खैनी खाइए, इससे खांसी होय।
फिर उस घर में रात को, चोर घुसे न कोय।।
😆😆😆😆😆😆😆😆😆
दोस्त काले रंग पर, रंग चढ़े न कोय।
लक्स लगाकर कांबली, तेंदुलकर न होय।।
😊😊😊😊😊😊😊😊😊😊
बूढ़ा बोला, वीर रस मुझसे पढ़ा न जाए।
कहीं दांत का सैट ही, नीचे न गिर जाए।।
🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣
बिना जुर्म के पिटेगा, समझाया था तोय।
पंगा लेकर पुलिस से, साबुत बचा न कोय।।
😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜😜
दोहों को स्वीकारिये, या दीजे ठुकराय।
जैसे मुझसे बन पड़ा, मैंने आगे दिए सरकाय।।

Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s