Posted in ज्योतिष - Astrology

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तन्त्र मन्त्र यन्त्र ग्रुप
की सादर भेंट
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अलौकिक विज्ञान का एक महत्वपूर्ण ग्रुप
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हँस जैन रामनगर खण्डवा
98272 14427
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आज शनिश्चरी अमावस्या,पितृ अमावस्या पर क्या करें
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दोस्तों,

आज शनिश्चरी अमावस्या, पितृ मोक्ष अमावस्या एवं भूतड़ी अमावस्या है। आज तन्त्र विद्या में कई प्रयोग किये जाते हैं, जिसके अशुभ परिणाम हम सब पर भी हो सकते हैं ।

वर्तमान वैज्ञानिक युग में तंत्र-मंत्र और तांत्रिक क्रिया की बात बेमानी लगती है। इस पर यकीन करना वैज्ञानिक तथ्‍यों और सुबूतों के सामने बेहद मुश्‍किल है, लेकिन कुछ घटनाएं ऐसी भी होती है जिनका जवाब मेडिकल साइंस और विज्ञान दोनों के पास नहीं मिलता। ऐसी स्‍थिति में व्‍यक्‍ति का विश्‍वास दूसरी ओर जाता है। जीवन में कई बार ऐसा समय आता है, जब ग्रहों की स्थिती में इस कदर बदलाव आता है की व्यक्ति का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसे में वो इधर-उधर भटकता है, स्वयं का अच्छा करने के चक्कर में वो दूसरे का बुरा करने से भी नहीं चूकता।

दोस्तों की भीड़ में दुश्मनों को पहचानना मुश्किल हो जाता है. आप नहीं समझ सकते कि कब कौन आपके पीठ पीछे वार कर आपको धोखा देकर चला जाए. दोस्ती और प्यार के नाम पर दगा देने वाले भी बहुत लोग होते हैं.

आपकी कोई बात किसी को कितनी बुरी लग गई और इसका बदला लेने के लिए वो किस हद तक पहुंच जाएगा आप इस बात का अंदाजा भी नहीं लगा सकते | ज्योतिष और शास्त्रों के अनुसार जब अचानक से आपका अच्छा समय बुरे समय में बदल जाता है तो ऐसी संभावनाएं हो सकती हैं कि आपको या आपके घर को किसी की बुरी नजर लग गई हो। कई बार किसी की सफलता और समृद्धि से जलने वाले लोग उन्हें क्षति पहुंचाने के लिए टोने-टोटके या तंत्र-मंत्र जैसी नकारात्मक शक्तियों का उपयोग करते हैं। इन नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से एकदम ही सबकुछ गड़बड़ हो जाता है।

हम कैसे बचें
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भूत-प्रेत की अथवा बाहरी बाधा को दूर करने के लिए शनिवार के दिन करने का एक टोटका बहुत ही सरल उपाय है, जिसके करने से समुचित लाभ तुरंत मिलता है। उसके लिए दोपहर में सवा किलो बाजरे का दलिया पका लें। उसमें थोड़ा गुड़ मिला दें। उसे एक मिट्टी की हांडी में रखकर उससे सूर्यास्त के बाद प्रेत से प्रभावित व्यक्ति के पूरे शरीर पर घड़ी की विपरीत दिशा में अर्थात बाएं से दाएं सात बार घुमाते हुए नजर उतारें। लोगों की नजर बचाकर हांडी को किसी सुनसान चैराहे पर रख दें और वापस घर लाटते समय न तो पीछे मुड़कर देखें और न ही किसी के रास्ते में कोई बात करें।

कुछ और उपाय
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कई बार पूरा घर ही प्रेतात्मा की चपेट में आ जाता है और इससे घर के कई सदस्य अज्ञात परेशानियों से घिर जाते हैं। उसे दूर करने के लिए जलते हुए गोबर के उपले के साथ गुग्गल की धूनी जलाने से प्रेत-बाधा खत्म हो जाती है। परिवार के सभी सदस्य इसके भभूत का तिलक लगाएं। घर को प्रेत-बाधा से मुक्त करने के लिए ओम के प्रतीक का त्रिशूल दरवाजे पर लगाना भी एक अचूक उपाय है।

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नींबू के प्रयोग
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अगर बीमारी पीछा नहीं छोड़ रही है तो तीन पके हुए नींबू लेकर एक को नीला एक को काला तथा तीसरे को लाल रंग कि स्याही से रंग दे। अब तीनों नीबुओं पर एक एक साबुत लौंग गांड दें। इसके बाद तीन मोटी चूर के लड्डू लेकर तथा तीन लाल पीले फूल लेकर एक रुमाल में बांध दें। अब प्रभावित व्यक्ति के ऊपर से सात बार उबार कर बहते जल में प्रवाहित कर दें। ध्यान रहे प्रवाहित करते समय आसपास कोई खड़ा न हो।

काले तिल के प्रयोग
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आज पूरे दिन रात काले कपड़े में काले तिल बांधकर अपनी जेब में रखें। कल उसे दिन में जलती आग में उन्हें डाल दें। इससे कोई तंत्र का प्रभाव आप पर काम नहीं करेगा।

जायफल से शत्रु नाश
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अगर आपका शत्रु परेशान कर रहा है और हर कार्य में अड़ंगा डाल रहा है तो शत्रु का नाम लेकर दो जायफल कपूर से जलाकर उसकी राख को नाले में बहा दें। ऐसा करने से शत्रु आपको परेशान करना बन्द कर देता है।

इस पोस्ट का ये उद्देश्य नही की आप भूत प्रेत बाधा ऊपरी हवा आदि से डरे। इस पोस्ट के माध्य्म से बस यही कहना चाहता हूं कि स्वयं की एवम परिवार की सुरक्षा हम करें क्योंकि आज साथ देने वाले कम और खींचने वाले ज्यादा है।आपके पीठ पीछे आपके लिये कौन सी चाल कौन चल रहा पता नही चलेगा।

हँस जैन रामनगर खण्डवा मध्यप्रदेश
98272 14427

तन्त्र मन्त्र यन्त्र ग्रुप

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Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

मांग


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Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

👌🏼 शानदार फैसला ✅✅

“पिताजी ! पंचायत इकठ्ठी हो गई, अब बँटवारा कर दो।” अमरचंद जी के बड़े लड़के ने रूखे लहजे में कहा।

“हाँ पिताजी ! कर दो बाँटवारा अब इकठ्ठे नहीं रहा जाता” छोटे लड़के भंवर लाल ने भी उसी लहजे में कहा।

“जब साथ में निबाह न हो तो औलाद को अलग कर देना ही ठीक है, अब यह बताओ तुम किस बेटे के साथ रहोगे ?” सरपंच ने अमरचंद जी के कन्धे पर हाथ रख कर के पूछा।

“अरे इसमें क्या पूछना, छ: महीने पिताजी मेरे साथ रहेंगे और छ: महीने छोटे भंवर लाल के पास रहेंगे।”

” चलो तुम्हारा तो फैसला हो गया, अब करें जायदाद का बँटवारा !” सरपंच बोला।

अमरचंद जी जो काफी देर से सिर झुकाये बैठा था, एकदम उठ के खड़ा हो गया और चिल्ला के बोला,

” कैसा फैसला हो गया, अब मैं करूंगा फैसला, इन दोनों लड़कों को घर से बाहर निकाल कर !,”

“छः महीने बारी बारी से आकर मेरे पास रहें, और छः महीने कहीं और इंतजाम करें अपना….”

“जायदाद का मालिक मैं हूँ यह नहीं।”

दोनों लड़कों और पंचायत का मुँह खुला का खुला रह गया, जैसे कोई नई बात हो गई हो…..

उदाहरण-
इसे कहते हैं फैसला
फैसला औलाद नहीं करती फैसला मां-बाप करते हैं ।🙏🙏🌹🌹😂😃😭🙏🙏

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🌹🌹 एक सुंदर सीख🌹🌹

एक पत्नी ने अपने पति से आग्रह किया कि वह उसकी छह कमियाँ बताए .. जिन्हें सुधारने से वह बेहतर पत्नी बन जाए..

पति यह सुनकर हैरान रह गया और असमंजस की स्थिति में पड़ गया,

उसने सोचा कि मैं बड़ी आसानी से उसे 6 ऐसी बातों की सूची थमा सकता हूँ , जिनमें सुधार की जरूरत थी और ईश्वर जानता है कि वह ऐसी 60 बातों की सूची थमा सकता था , जिसमें सुधार की जरूरत थी..

परंतु पति ने ऐसा नहीं किया और कहा –
‘मुझे इस बारे में सोचने का समय दो ,
मैं तुम्हें सुबह इसका जबाब दे दूँगा.’

पति अगली सुबह जल्दी ऑफिस गया और फूल वाले को फोन करके उसने अपनी पत्नी के लिए छह गुलाबों का तोहफा भिजवाने के लिए कहा जिसके साथ यह चिट्ठी लगी हो,
“मुझे तुम्हारी छह कमियाँ नहीं मालूम, जिनमें सुधार की जरूरत है..
तुम जैसी भी हो मुझे बहुत अच्छी लगती हो.”

उस शाम पति जब आफिस से लौटा तो देखा कि..
उसकी पत्नी दरवाज़े पर खड़ी उसका इंतज़ार कर रही थी,
उसकी आंखौं में आँसू भरे हुए थे, यह कहने की जरूरत नहीं कि उनके जीवन की मिठास कुछ और बढ़ गयी थी।

पति इस बात पर बहुत खुश था कि पत्नी के आग्रह के बावजूद उसने उसकी छह कमियों की सूची नहीं दी थी..
इसलिए यथासंभव जीवन में
सराहना करने में कंजूसी न करें और
आलोचना से बचकर रहने में ही समझदारी है।

“ज़िन्दगी का ये हुनर भी,
आज़माना चाहिए,
जंग अगर अपनों से हो,
तो हार जाना चाहिए..

पसीना उम्र भर का उसकी गोद में सूख जाएगा…
हमसफ़र क्या चीज है ये बुढ़ापे में समझ आएगा..!!

शुभरात्री सभी दोस्तो को
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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બાજ પક્ષી પોતાના બચ્ચા ના જન્મ પછી થોડા જ સમય માં એને પોતાની પાખો માં સમેટી ને ઉપર આકાશ માં લઈ જાય છે…..એટલું ઊચે કે જ્યાં વિમાન ઉડતા હોય…

આટલે ઉપર જઇ ને એ સ્થિર થઈ જાય છે…A highest distance from earth where a natural creature can fly…અને પછી શરૂ થાય છે ખતરનાક ટ્રેનીંગ…

એક એવી ટ્રેનીંગ કે જેમાં બાજ પક્ષી પોતાના બચ્ચા ને એ સમજાવવા માગે છે કે એ કોઈ સામાન્ય પક્ષી નથી અને એનું કામ આસમાન ની બુલંદીએ ઊડવાનું છે નહીં કે મકાનની છત પર બેસીને ચુ-ચુ કરવાનું… પછી એ બચ્ચાને આટલી ઊચાઈએ થી છૂટું મૂકી દેવામાં આવે છે…

આટલી ઊચાઇએ થી નીચે પડતી વખતે બચ્ચાને એ સમજાતું નથી કે મારી સાથે આ શું થઈ રહ્યું છે !!!

થોડું નીચે આવવા થી બચ્ચા ની પાંખ ખુલવા લાગે છે અને ધરતી થી અંદાજે 9 કિલોમીટર ઉપર સુધી માં એની પૂરી પાંખો ખૂલી જાય છે અને એ પાંખ ફફડાવે છે એટ્લે એને એહસાસ થાય છે કે એ કોઈ સામાન્ય પક્ષી તો નથી જ !!!

એ હજુ વધુ નીચે આવે છે પણ હજુ એની પાંખ એટલી સક્ષમ તો નથી જ કે એ ઊડી શકે અને જમીન થી 700-800 મીટરે ઊચાઇ થી નીચે પડતી વખતે એને એમ લાગવા લાગે છે કે આ એની જિંદગી ની આખરી સફર છે ત્યાં જ અચાનક એક મહાકાય પંજો એને પોતાની બાહોમાં લઈ લ્યે છે અને એ પંજો એની માં નો જ હોય છે જે એને નીચે પડતું મૂક્યા પછી એની સાથે જ આવતી હોય છે !!!

આવી ટ્રેનીંગ બાજ પક્ષી એના બચ્ચા ને ત્યાં સુધી આપ્યા રાખે છે જ્યાં સુધી એ બરાબર ઉડતા ના શીખી જાય…

મિત્રો આવી રીતે તૈયાર થાય છે એક મહાન બાજ પક્ષી જે આસમાન માં રાજ કરે છે અને એના થી 10 ગણા વધુ વજન વાળા પક્ષી ને પણ ઉપાડી ને આસમાનની બુલંદીયો સર કરે છે !!!

આ વાર્તા કે જે એક સત્ય હકીકત છે એ અહી કહી ને હું તમામ માં બાપ ને કહેવા માગું છુ કે તમે તમારા બાળકો ને છાતી એ ચીપકાવી ને જરૂર રાખો પણ એક બાજના બચ્ચા ની જેમ એને દુનિયા ની મુશ્કેલીઓ થી વાકેફ પણ કરો, એનો સામનો કરાવો અને લડતા શીખવો…

હકીકતે આજના સમય માં કાર્ટૂન, ટીવી માં આવતા રિઆલિટી શો અને વિડિયો ગેમે આપણા બાળકો ને બોઈલર મુરઘાં જેવા બનાવી નાખ્યા છે જેની પાસે પગ તો છે પણ ચાલી નથી શકતો અને પાંખ છે પણ ઊડી નથી શકતો…

મિત્રો કુંડા માં લગાવેલા છોડ માં અને જંગલ માં ઉગેલા છોડ માં કેટલો ફર્ક હોય છે એ તો આપ સૌ જાણો જ છો !!!

એક નાનકડી પણ સરસ પંક્તિ…

બહુ મીઠો પ્રેમ…બહુ ખારા આંસુ પડાવે છે…અને આ વાત ફક્ત પ્રેમીઑ ને જ નહીં પણ તમારા બાળકો પ્રત્યે ના પ્રેમ ને પણ લાગુ પડે છે માટે મિત્રો તમારા બાળક ને કોઈ વસ્તુ નો ભાવ કરતાં નહીં પણ તેની કિમત કરતાં જરૂર શિખડાવજો 🙏🙏

આ મેસેજ જો ગમે તો દરેક ગૃપ માં મોકલશો

Posted in रामायण - Ramayan

जयू भा जाला

नैमिषारण्य

तीरथ वर नैमिष विख्याता ।
अति पुनीत साधक सिधि दाता ।।

“वाल्मीकि-रामायण में ‘नैमिष’ नाम से उल्लिखित इस स्थान के बारे में कहा गया है कि श्री राम ने गोमती नदी के तट पर अश्वमेध यज्ञ सम्पन्न किया था- ‘ऋषियों के साथ लक्ष्मण को घोड़े की रक्षा के लिये नियुक्त करके रामचन्द्र जी सेना के साथ नैमिषारण्य के लिए प्रस्थित हुए।’ महाभारत के अनुसार युधिष्ठिर और अर्जुन ने इस तीर्थ-स्थल की यात्रा की थी। ‘आइने अकबरी’ में भी इस स्थल का वर्णन मिलता है। हिन्दी साहित्य के गौरव महाकवि नरोत्तमदास की जन्म-स्थली (बाड़ी) भी नैमिषारण्य के समीप ही स्थित है।”
जिस प्रकार मानव-शरीर में मस्तिष्क अपने गुणों के कारण विशिष्ट महत्व रखता है, उसी प्रकार पृथ्वी पर अवस्थित कुछ विशेष स्थान अपनी विशिष्टता के कारण पवित्र माने जाते हैं कि, ये स्थान जनमानस में ‘तीर्थ’ या ‘पावन धाम’ के रूप में समादृत हैं। पवित्र नदियों के तट पर स्थित ये तीर्थ कभी ऋषि-मुनियों की तपस्या और आराधना के केन्द्र हुआ करते थे क्योंकि वनों की हरीतिमा और वहाँ का शुद्ध वातावरण आध्यात्मिक अन्वेषकों के लिये अनुकूल होता था। इसके साथ ही सुख-शान्ति-प्रदायक ये तीर्थ केन्द्र श्रद्धालुजनों को भी आकर्षित करते थे।

आधुनिक सभ्यता के विकास के साथ ये तीर्थस्थल आध्यात्मिकता के साथ-साथ व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ गए लेकिन उनकी मूल आस्था निरन्तर बनी रही ।

ऐसा ही एक तीर्थस्थल उत्तर प्रदेश के सीतापुर जनपद में नैमिषारण्य है, जिसकी महिमा पुराणों में वर्णित है। कहा जाता है कि शौनक ऋषि ज्ञान की पिपासा शान्त करने के लिए ब्रहमा जी के पास गए। ब्रहमा जी ने उन्हें एक चक्र दिया और कहा कि इसे चलाते हुए चले जाओ। जहाँ चक्र की नेमि (बाहरी परिधि) गिरे, उसे पवित्र स्थान समझकर- वहाँ आश्रम स्थापित कर लोगों को ज्ञानार्जन कराओ। शौनक ऋषि के साथ कई अन्य ऋषिजन इसी प्रयोजन से चले।

अन्तत: गोमती नदी के तट पर चक्र की नेमि गिरी और भूमि में प्रवेश कर गयी। तभी से यह स्थल चक्रतीर्थ तथा नैमिषारण्य के नाम से विख्यात हुआ। जनश्रुति के अनुसार नैमिषारण्य का नाम ‘निमिषा’ का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ होता है नेत्र की आभा। वैदिक काल में यह तपस्थली एक प्रमुख शिक्षा-केन्द्र के रूप में विख्यात थी। पौराणिक मान्यतानुसार नैमिषारण्य 88000 ऋषि-मुनियों के तप-ज्ञानार्जन का केन्द्र था।

कहा जाता है कि शौनक आदि ऋषियों को सूत जी ने अट्ठारह पुराणों की कथा और मर्म का यही उपदेश दिया था। द्वापर में श्री कृष्ण के भाई बलराम भी यहाँ आए थे और यज्ञ किया था। प्राचीनकाल में इस सुरम्य स्थल का वृहद् भू-भाग वनाच्छादित था। शान्त और मनोरम वातावरण के कारण यह अध्ययन, मनन और ज्ञानार्जन हेतु एक आदर्श स्थान है।

यज्ञवाटश्व सुमहान् गोमत्या नैमिषे वने ।
आज्ञाप्यतां महाबाहो तद्धि पुण्यमनुत्तमम् ।।
-वाल्मीकि- रामायण
प्राचीन और घर-घर में प्रचलित श्री सत्यनारायण भगवान की कथा का प्रवर्तन नैमिषारण्य की पावन धरा से ही हुआ, जिसका प्रारम्भ नैमिषारण्य के उल्लेख के साथ होता है-

एकदा नैमिषारण्ये ऋषय: शौनकादय: ।
प्रपच्छुर्मुनय: सर्वे सूतं पौराणिकं खलु ।।
एक बार भगवान विष्णु एवं देवताओं के परम पुण्यमय क्षेत्र नैमिषारण्य में शौनक आदि ऋषियों ने भगवत्-प्राप्ति की इच्छा से सहस्र वर्षो में पूरे होने वाले एक महान यज्ञ का अनुष्ठान किया।

-श्रीमद्भागवत महापुरण – प्रथम स्कन्ध
नैमिषारण्य का उल्लेख कूर्म पुराण में मिलता है, जिसमें इसे तीनों लोकों में प्रसिद्ध बताया गया है –

इदं त्रैलोक्य विख्यातं, तीर्थ नैमिषमुत्तमम् ।
महादेव प्रियकरं, महापातकनाशनम् ।।
जहाँ श्रीदेवीभागवत में नैमिषारण्य स्थित चक्रतीर्थ एवं पुष्कर को सर्वश्रेष्ठ तीर्थ कहा गया है, वहीं आस्थावानजन ऐसा विश्वास करते है कि बदरीनाथ व केदारनाथ धाम की यात्रा नैमिषारण्य की यात्रा के उपरान्त ही पूर्ण होती है।

श्रीरामचरितमानस में गोस्वामी तुलसीदास जी ने नैमिषारण्य का माहात्म्य-निदर्शन करते हुए तभी तो कहा है-

तीरथ वर नैमिष विख्याता ।
अति पुनीत साधक सिधि दाता ।।

ऐसे विशिष्ट माहात्म्य के कारण ही नैमिषारण्य को महिमामण्डित तीर्थ-स्थल के रूप में सर्वत्र मान्यता प्राप्त है। इसी कारण यहाँ प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में दूर-दूर से श्रद्धालुजन दर्शनार्थ आते हैं। चक्रतीर्थ, भूतेश्वरनाथ मन्दिर, व्यासगद्दी, हवनकुण्ड, ललितादेवी का मन्दिर, पंचप्रयाग, शेष मन्दिर, क्षेमकाया मन्दिर, हनुमानगढ़ी, शिवाला-भैरव जी मन्दिर, पंच पाण्डव मन्दिर, पुराण मन्दिर माँ आनन्दमयी आश्रम, नारदानन्द सरस्वती आश्रम-देवपुरी मन्दिर, रामानुज कोट, अहोबिल मठ, परमहंस गौड़ीय मठ आदि के साथ ही लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित मिश्रिख व दधीचिकुण्ड तथा 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हत्याहरण तीर्थ नैमिषारण्य के प्रमुख आकर्षण है।

ब्रहमा के चक्र की नेमि के शीर्ण होने से वह मुनि-पूजित वन नैमिष नाम से विख्यात हुआ।
तभी से नैमिषारण्य ऋषियों की तपस्या के योग्य स्थान बन गया।
-शिवपुराण

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पंकज त्रिवेदी

मधु एक बकरी थी, जाे की माँ बनने वाली थी। माँ बनने से पहले ही मधू ने भगवान् से दुआएं मांगने शुरू कर दी। कि “हे भगवान् मुझे बेटी देना बेटा नही”। पर किस्मत काे ये मन्जूर ना था, मधू ने एक बकरे काे जन्म दिया, उसे देखते ही मधू राेने लगी। साथ की बकरियां मधू के राेने की वजह जानती थी, पर क्या कहती। माँ चुप हाे गई आैर अपने बच्चे काे चाटने लगी। दिन बीत ते चले गए आैर माँ के दिल मे अपने बच्चे के लिए प्यार उमडता चला गया। धीरे- धीरे माँ अपने बेटे में सारी दुनियाँ काे भूल गई, आैर भूल गई भविष्य की उस सच्चाई काे जाे एक दिन सच हाेनी थी।
मधू राेज अपने बच्चे काे चाट कर दिन की शुरूआत करती, आैर उसकी रात बच्चे से चिपक कर साे कर ही हाेती। एक दिन बकरी के मालिक के घर बेटे जन्म लिया। घर में आते महमानाे आैर पड़ोसियों की भीड देख बकरी ने साथी बकरी से पूछा “बहन क्या हुआ आज बहुत भीड है इनके घर पर” ये सुन साथी बकरी ने कहा की “अरे हमारे मालिक के घर बेटा हुआ है, इसलिए चहल पहल है” बकरी मालिक के लिए बहुत खुश हुई आैर उसके बेटे को बहुत दुआए दी। फिर मधू अपने बच्चे से चुपक कर साे गई। मधू साे ही रही थी के तभी उसके पास एक आदमी आया, सारी बकरियां डर कर सिमट गई, मधू ने भी अपने बच्चे काे खुद से चिपका लिया। के तभी उस आदमी ने मधू के बेटे काे पकड लिया आैर ले जाने लगा। मधू बहुत चिल्लाई पर उसकी सुनी ना गई, बच्चे काे बकरियां जहाँ बंधी थी उसके सामने वाले कमरे में ले जाया गया। बच्चा बहुत चिल्ला रहा था, भुला रहा था अपनी माँ काे, मधू भी रस्सी काे खाेलने के लिए पूरे पूरे पाँव रगड दिए पर रस्सी ना खुली। थाेडी देर तक बच्चा चिल्लाया पर उसके बाद बच्चा चुप हाे गया, अब उसकी आवाज नही आ रही थी। मधू जान चुकी थी केे बच्चे के साथ क्या हुआ है, पर वह फिर भी अपने बच्चे के लिए अाँख बंद कर दुआए मांगती रही। पर अब देर हाे चुकी थी बेटे का सर धड से अलग कर दिया गया था।
बेटे का सर मा के सामने पडा था, आज भी बेटे की नजर माँ की तरफ थी, पर आज वह नजरे पथरा चुकी थी, बेटे का मुह आज भी खुला था, पर उसके मुह से आज माँ के लिए पुकार नही निकल रही थी, बेटे का मूह सामने पडा था माँ उसे आखरी बार चूम भी नही पा रही थी इस वजह से एक आँख से दस दस आँसू बह रहे थे। बेटे काे काट कर उसे पका खा लिया गया। आैर माँ देखती रह गई, साथ में बेठी हर बकरियाँ इस घटना से अवगत थी पर काेई कुछ कर भी क्या सकती थी।
दाे माह बीत चुके थे मधू बेटे के जाने के गम में पहले से आधी हाे चुकी थी, के तभी एक दिन मालिक अपने बेटे काे खिलाते हुए बकरियाें के सामने आया, ये देख एक बकरी बाेली “ये है वाे बच्चा जिसके हाेने पर तेरे बच्चे काे काटा गया” मधू आँखाें में आँसू भरे अपने बच्चे की याद में खाेई उस मालिक के बच्चे काे देखने लगी।🌻🌹

वह बकरी फिर बाेली “देख कितना खुश है, अपने बालक काे खिला कर, पर कभी ये नही साेचता की हमें भी हमारे बालक प्राण प्रिय हाेते है, मैं ताे कहू जैसे हम अपने बच्चाे के वियोग में तडप जीते है वैसे ही ये भी जिए, इसका पुत्र भी मरे” ये सुनते ही मधू उस बकरी पर चिल्लाई कहा “उस बेगुनाह बालक ने क्या बिगाडा है, जाे उसे मारने की कहती हाें, वाे ताे अभी धरा पर आया है, एेसा ना कहाे भगवान् उसे लम्बी उम्र दे, क्यू की एक बालक के मरने से जाे पीडा हाेती है मैं उससे अवगत हूँ, मैं नही चाहती जाे पीडा मुझे हाे रही है वाे किसी आैर काे हाे” ये सुन साथी बकरी बाेली कैसी है तू उसने तेरे बालक काे मारा आैर तू फिर भी उसी के बालक काे दुआ दे रही है।”
मधू हँसी आैर कहा “हाँ, क्याेकी मेरा दिल एक जानवर का है इंसान का नही। ये कहना मात्र ही उस बकरी के लिए जवाब हाे गया था कि मधू ने एेसा क्यू कहा। मधू ने फिर कहा “ना जाने किस जन्म के पापाे की वजह से आज इस याेनी में जन्म मिला, ना जाने किस के बालक काे छीना था जाे पुत्र वियोग मिला, अब किसी को बालक काे बद्दुआ दे उसे मारे फिर पाप पुण्य जन्म मृत्यु के चक्कर में नही फंसना, इसके कर्माे का दण्ड भगवान् देगा मैं नही।।।

बकरी की यह बात सुन साथी बकरी चुप हाे गई, क्याे की वह समझ चुकी थी के करनी की भरनी सबकी हाेती है मालिक की भी हाेगी।।।।

( कई बार सच समझ नही आता की जानवर असल में है काैन)