Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

अरुण पांडे

।। हम और हमारे कर्म ।।
एक चित्रकार था , जो अद्धभुत चित्र बनाता था . लोग उसकी चित्रकारी कीकाफी तारीफ़ करते थे .एक दिन कृष्ण मंदिर के भक्तों ने उनसे कृष्ण और कंस का एक चित्र बनाने की इच्छा प्रगट की .
चित्रकार इसके लिये तैयार हो गया आखिरभगवान् का काम था , पर उसने कुछ शर्ते रखी . उसने कहा मुझे योग्य पात्र चाहिए , अगर वे मिल जाएं तो मैं आसानी से चित्र बना दूंगा .कृष्ण के चित्र लिए एक योग्य नटखट बालक और कंस के लिए एक क्रूर भाव वाला व्यक्ति लाकर दें तब मैं चित्र बनाकर दूंगा कृष्ण मंदिर के भक्त एक बालक ले आये , बालक सुन्दर था .चित्रकार ने उसे पसंद किया और उस बालक को सामने रख बालकृष्ण का एक सुंदर चित्र बनाया .अब बारी कंस की थी पर क्रूर भाव वाले व्यक्ति को ढूंढना थोडा मुश्किल था . जो व्यक्ति कृष्ण मंदिर वालो को पसंद आता वो चित्रकार को पसंद नहीं आता उसे वो भाव मिल नहीं रहे थे… वक्त गुजरता गया . आखिरकार थक-हार कर सालों बाद वो अबजेल में चित्रकार को ले गए , जहा उम्रकेद काट रहे अपराधी थे . उन अपराधीयों में से एक कोचित्रकार ने पसंद किया और उसे सामने रखकर उसने कंस का एक चित्र बनाया .कृष्ण और कंस की वो तस्वीर आज सालों के बाद पूर्ण हुई . कृष्ण मंदिर के भक्त वो तस्वीरे देखकर मंत्रमुग्ध हो गए . उस अपराधी ने भी वह तस्वीरे देखने की इच्छा व्यक्त की .उस अपराधी ने जब वो तस्वीरें देखी तो वो फूट-फूट कर रोने लगा . सभी ये देख अचंभित हो गए .चित्रकार ने उससे इसका कारण बड़े प्यार सेपूछा . तब वह अपराधी बोला :”शायद आपने मुझे पहचाना नहीं , मैं वो ही बच्चा हूँ जिसे सालों पहले आपने बालकृष्ण के चित्र के लिए पसंद किया था . मेरे कुकर्मो से आज में कंस बन गया , इस तस्वीर मैं मैं ही कृष्ण मैं ही कंस हूँ .हमारे कर्म ही हमे अच्छा और बुरा इंसान बनाते हैं. भावार्थ :- अगर हमारे कर्म अच्छे और महान होते है तो लोग आपे ही हमे देवी-देवता का सम्मान देते हैं . कहते है देखो वो इन्सान देवता का रूप है .इसलिए कर्म का हमारे जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है .लोग कहते भी है-.कर्म करो तुम ऐसे भाई पड़े ना फिर पछताना ,एक दिन तो धर्मराज को पड़ेगा मुख दिखलाना .कर्म हमारे श्रेष्ठ बनेंगे जब हम खुद पर गौर करेंगे ,जैसा कर्म हम करेंगे हमे देखकर और करेंगे .
🌷राधे राधे🌷
🌷जय माता की🌷

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