Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

देव कृष्णा

शीर्षक…….,मेहमान

बात छोटी सी थी परन्तु न जाने कैसे बढ़ गयी।पति पत्नी की ज़ुबां से जो न निकलना चाहिये था वह निकल गया और तैश में आ कर राघव ने सिया को बोल दिया,”इस तरह मेरे साथ तुम्हारा गुज़ारा नहीं हो सकता…मैं तुम्हारे साथ और नहीं रह सकता”।
राघव तो कह कर दफ्तर चला गया पर सिया सन्न रह गयी।जिस लहज़े में यह बात बोली गई थी उससे यहां रहने में उसे अपमानित महसूस हो रहा था।’क्या करे वह……’
इसी उधेड़बुन में उसने अपना सूटकेस पैक कर लिया।’रात की गाड़ी से वह आगरा चली जाएगी मां के पास और अभी राघव के आने से पहले ही वह अपनी सहेली के घर चली जाएगी’।
“सिया जल्दी तैयार हो जाओ मैं पिक्चर के टिकट ले कर आ रहा हूं”,तीन बजे ही राघव का फ़ोन आया तो वह असमंजस में पड़ गई तभी डोर बैल बजने पर उसने दरवाज़ा खोला तो राघव था मुस्कुराता हुआ,”अरे…तुम तैयार नहीं हुईं?”
“पर सुबह आपका गुस्सा…….”
“अरे वह तो मेहमान था आया और चला गया मैहमान भी कभी ज्यादा देर रुकते हैं……और तुमसे ज़्यादा मुझे मेहमान थोड़े ही अज़ीज़ है”,एक मीठी मुस्कुराहट के साथ उसने अपनी एक आंख दबा दी।
सिया की आंखों में आशाओं के अनगिनत इन्द्रधनुशी दीप जगमगा उठे थे।
एक अनचाहा मेहमान घर मे ठहरने से पहले ही वापस लौट गया था। Copied

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