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अजय वर्मा

तेलगु फिल्मों के महानायक हुआ करते थे स्व नन्दमूरी तारक रामाराव जिन्हें उनके प्रशंसक एन टी आर भी कहा करते थे। साठ के दशक में उनकी कृष्ण अर्जुन की कहानी पर फिल्म आई थी। आलम यह था कि टिकट पाने के लिए लोग घण्टों तक लाईन में लगा करते थे। वे दक्षिण भारत में भगवान की तरह पूजे जाते हैं। बहुचर्चित फिल्म बाहुबली के निर्देशक राजामौली इसी फिल्म का रिमेक बना रहे हैं। फिल्म के रिमेक में उनके पोते जूनियर एनटीआर भी काम कर रहे हैं। जूनियर एनटीआर को टीवी पर फिल्म देखने वाले कृष और जनता गैराज के हीरो के रूप में पहचानते हैं। जूनियर एनटीआर की शक्ल अपने दादा से मिलती है। प्रशंसको की मांग पर वह मात्र 16 साल की उम्र में ही फिल्में करने लगे। उनकी लगातार सात फिल्में सुपरहिट हुई थी। एनटीआर जूनियर लगभग हर फिल्म में अपने जंघे को थाप देते हैं। यह उनके दादा के स्टाइल की कापी है। फिल्म कृष के आखरी सीन में एनटीआर सीनियर भी दिखते हैं, जो कि उनकी पुरानी फिल्म की क्लिपिंग है।
अस्सी के दशक में किसी बात को लेकर वे देश की प्रधानमंत्री स्व इंदिरा गांधी से मिलने के लिए दिल्ली पहुंचे थे। तीन दिनों तक समय मिलने का इंतजार करते रहे। किन्तु श्रीमती गांधी ने उन्हें मिलने का समय ही नहीं दिया। इससे वे खूब खफा हुए। इसे उन्होंने तेलगु विडा मतलब तेलगु जनता का अपमान निरूपित किया। वापस आंध्र लौटे और तेलगु अस्मिता के नाम पर उन्होंने तेलगु देशम पार्टी बनाई। कुछ समय बाद हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी प्रचंड बहुमत से जीती और वे राज्य के मुख्यमंत्री बने। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्व वीपी सिंह जब जनमोर्चा पार्टी बनाकर कांग्रेस की खिलाफत कर रहे थे, तब स्व एनटीआर ने कांग्रेस विरोधी सभी पार्टियों को एकजुट कर राष्ट्रीय मोर्चा का गठन किया। राष्ट्रीय मोर्चा के वे संयोजक बनाए गए थे।
उनकी उम्र ढल रही थी और वे बीमार भी रहने लगे थे। इसी दौरान उनके दामाद चन्द्र बाबू नायडू ने उनकी पार्टी का हाईजैक कर लिया था। चंद्रबाबू नायडू आंध्र के मुख्यमंत्री भी बने। अटल सरकार के समय उन्होंने बाहर से समर्थन किया। तब उन्ही की पार्टी के स्व जीएमसी बालयोगी लोकसभा के अध्यक्ष बनाए गए थे। नरेंद्र मोदी की जब साल 2014 में सरकार आई तब भी शुरुआती दौर में सरकार का वे बाहर से समर्थन कर रहे थे। बाद में सरकार का विरोध करने लगे। अभी हुए लोकसभा चुनाव के समय भाजपा विरोधी हर पार्टी प्रमुख से मिलकर उन्होंने ना जाने क्या चर्चा की। आंध्र में लोकसभा के साथ ही विधानसभा चुनाव भी हुए। जिसमें उनकी पार्टी बुरी तरह से हार गई। इस तरह से वे ना तो घर के रहे ना तो घाट के। तेलगु अस्मिता के नाम पर उनके ससुर एनटीआर की पार्टी तेलगु देशम की साख भी वे ले डूबे।

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

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