Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

. “जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि”

राम-रावण युद्ध के बाद एक दिन सभी श्रीराम के सम्मुख बैठे थे। इस बैठक में युद्ध एवं युद्ध से जुड़े विषयों पर चर्चा हो रही थी। एकाएक श्रीराम ने पूछा कि लंका की जिस वाटिका में सीता को रखा गया था, उसमें सबसे ज्यादा किस रंग के फूल थे ? सीता ने कहा- “मैं अशोक वाटिका में एक माह तक रही और मैंने देखा कि वहाँ सभी फूल सफेद रंग के थे।” हनुमानजी ने बड़ी विनम्रता से कहा- “प्रभु ! माता सीता शायद भूल गयी हैं। अशोक वाटिका में मैं भी गया था, वहाँ की सारी वाटिका मैंने सुक्ष्मता से देखी है, लेकिन वहाँ मैंने एक भी सफेद रंग का फूल नहीं देखा। वहाँ सभी फूल लाल रंग के थे। माता सीता मेरी धृष्टता को क्षमा करें।”
सीता और हनुमान् दोनों के कथन परस्पर विरोधाभासी थे। दोनों अपने कथन का पुरजोर समर्थन कर रहे थे। इससे एक विवाद की स्थिति उत्पन्न हो गयी। दोनों ही प्रत्यक्षद्रष्टा थे, किन्तु दोनों का कथन एक दूसरे के विपरीत था। स्थिति को नियंत्रित करने की दृष्टि से आखिर श्रीराम ने ही उसका समाधान दिया। उन्होंने कहा- “दोनों का ही कथन सत्य है।” बैठक में श्रीराम के कथन ने रहस्य को और गहरा कर दिया। सबकी दृष्टि श्रीराम की ओर गई-जैसे सभी पूछ रहे हों- “प्रभु ! दोनों सही कैसे हो सकते हैं ?”
श्रीराम ने कहा- “सीता उस समय शांत चित्त थीं, अधिकांश समय वे ध्यान में मग्न रहती थीं इसलिए उन्हें पुष्प ही क्या वहाँ की हर वस्तु उन्हें शांत स्वेत ही नजर आती थी। किन्तु हनुमान् उस समय सीता की व्यथा और रावण के अन्याय को याद कर क्रोधित हो रहे थे, उनकी आँखों में लाल ड़ोरे पड़े हुए थे इसलिए उन्हें अशोक वाटिका ही नहीं अपितु पूरी लंका पूरी ही उग्र लाल रंग की नजर आ रही थी।” जिसकी जैसी दृष्टि होती है उसे वैसी ही सृष्टि नजर आती है।

“जय श्रीराम”


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