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संजय गुप्ता

दशहरे के दिन क्यों की जाती है, शमी के वृक्ष की पूजा??????

भारतीय संस्कृति में हर त्योहार का अपना एक अलग खास महत्व होता है। हर त्योहर अपने साथ बेहतर जीवन जीने का एक अलग संदेश देता है। नवरात्रि में मां भगवती के 9 स्वरूपों की पूजा के बाद दशहरे के दिन रावण का दहन किया जाता है। दहन के बाद कई प्रांतों में शमी के पत्ते को सोना समझकर देने का प्रचलन है तो कहीं इस वृक्ष की पूजा की जाती है।

बताया जाता है कि दशहरे के दिन शमी के वृक्ष की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। खासकर क्षत्रियों में इस पूजन का महत्व ज्यादा है। इसी तरह मान्यता है कि शमी का वृक्ष घर में लगाने से देवी-देवताओं की कृपा बनी रहती है। शमी के वृक्ष की पूजा करने से घर में शनि का प्रकोप कम होता है। शमी के वृक्ष होने से सभी तंत्र-मंत्र और नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत युद्ध में पांडवों ने शमी के वृक्ष पर ही अपने हथियार छुपाए थे। बाद में उन्हीं हथियारों से पांडवों कौरवों को हराकर विजय प्राप्त की थी। एक मान्यता के अनुसार कवि कालिदास को शमी के वृक्ष के नीचे बैठकर तपस्या करने से ही ज्ञान की प्राप्ति हुई थी। बता दें गुजरात कच्छ के भुज शहर में लगभग 450 साल पुराना एक शमीवृक्ष है।

विजयादशमी के दिन इसकी पूजा करने के पीछे एक वजह यह भी है कि यह वृक्ष कृषि विपदा पर आने वाली समस्याओं के बारे में पहले ही संकेत दे देता है। गुजरात में कई किसान अपने खेतों में शमी का वृक्ष लगाते हैं। जिससे उन्हें लाभ होता है। साथ ही बिहार और झारखंड में यह वृक्ष अधिकतर घरों के दरवाजे के बाहर लगा हुआ मिलता है।

विजयादशमी के संदर्भ में एक पौराणिक कथा भी है। महर्षि वर्तन्तु का शिष्य कौत्स थे। महर्षि ने अपने शिष्य कौत्स से शिक्षा पूरी होने के बाद गुरू दक्षिणा के रूप में 14 करोड़ स्वर्ण मुद्रा की मांग की थी। महर्षि को गुरू दक्षिणा देने के लिए कौत्स महाराज रघु के पास गए। महाराज रघु ने कुछ दिन पहले ही एक महायज्ञ करवाया था, जिसके कारण खजाना खाली हो चुका था।

कौत्स ने राजा से स्वर्ण मुद्रा की मांग की तब उन्होंने तीन दिन का समय मांगा। राजा धन जुटाने के लिए उपाय खोजने लग गया। उसने स्वर्गलोक पर आक्रमण करने का विचार किया। राजा ने सोचा स्वर्गलोक पर आक्रमण करने से उसका शाही खजाना फिर से भर जाएगा। राजा के इस विचार से देवराज इंद्र घबरा गए और कोषाध्याक्ष कुबेर से रघु के राज्य में स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा करने का आदेश दिया।

इंद्र के आदेश पर रघु के राज्य में कुबेर ने शमी वृक्ष के माध्यम से स्वर्ण मुद्राओं की वर्षा करा दी। माना जाता है कि जिस तिथि को स्वर्ण की वर्षा हुई थी उस दिन विजयादशमी थी। राजा ने शमी वृक्ष से प्राप्त स्वर्ण मुद्राएं कौत्स को दे दीं। इस घटना के बाद विजयादशमी के दिन शमी के वृक्ष के पूजा होने लगी।

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