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कुछ महान जातियों के कुछ हिस्सों का एक छोटा सा अंश

१. चर्मकार या चमार : आज सबसे नीची दृष्टि से देखे जाने वाली ये जाती एक समय बड़ी समृद्ध होती थी | १९वि सदी के प्रारंभ में कानपुर के सम्हाल दास चमार प्रसिद्ध है धन ऐश्वर्य के लिए | जो जानवर मरता था उसकी खाल को उतारकर वैदिक पद्धति से शोधित किया जाता था | कबूतर के मल को डाल कर पैरों से मसलने की विधि थी | ना जल दूषित होता था जैसा के आज टेनरियो के जल से नदिया दूषित हों रही है जिसमे गंगा माता प्रमुख है | अंग्रेजो ने सामूहिक बूचड़ खाने यानी पशुवध शालाये खुलवा के चर्मकारो की रोजी रोटी बंद कर दी | एक तों जीव हत्या ऊपर से समाज के सबसे समृद्ध वर्ग को तोड़ दिया | आज ये कार्य मुसलमानों ने प्रमुखता से पकड लिया है और टेनरी उद्योग मे अरबो कमा रहे है | अखबार उनके, संचार माध्यम उनके, तों दबे वर्ग की आवाज लोगो तक पहुचाये कौन ?

२. कुम्भकार या कुम्हार या प्रजापति : समृद्ध वर्गों में ये वर्ग भी रहा क्यों के सब बर्तन प्रयोग करते थे | जैसे ही फसल होती थी फसल के बदले बर्तन ले लिए जाते थे | मृदा वर्तन प्रयोग करने से कोई बीमार नहीं पड़ता था | शरीर पुष्ट रहता था और समाज के बड़े वर्ग की आर्थिक समृधि रहती थी | धातु के वर्तन उद्योगों को चला कर कुम्भकारो के काम को शनैः-शनैः बंद करवा दिया गया | आज कुम्हारों ने अधिकतर अपना कार्य छोड़ हि दिया है | प्रजापति यानि प्रजा की रक्षा करने वाला स्वास्थ की रक्षा तों कर्ता ही था इस प्रकार के भी वर्तनो को बनाने की विद्या रही है भारत में के विषयुक्त भोजन होने पर वर्तन चिटक जाते थे |

३. सविता या कलपक या वृत्ति या नाऊ : ये शैल्य चिकित्सक होते थे | आज भी फोड़ा इत्यादि होता तों नाइ उस्तरे से काट देते | अंग्रेजो ने भारत से सर्जेरी सीखी और भारत में ही प्राचीन पद्धति से सर्जरी खत्म करा दी | आज यदि लोग स्वास्थ सेवाओ के महंगे होने का रोना रो रहे है वो ब्राह्मणों द्वारा संचालित शिक्षा व्यवस्था के बंद होने के कारण ही है | आज के नाऊ सविता नाम इसलिए पड़ा क्यों के परमात्मा का नाम है उत्पादक होने के कारण, इसी प्रकार नाऊ बच्चा होता था तों नाडा काटता था | आज ये वर्ग या तों अन्य नौकरी ढूंड रहा है या बाल काट के अपनी जीविकोपार्जन कर्ता है |

४. लोहार या विश्वकर्मा : ये भी वेद में परमात्मा का नाम था इनकी कमर तोड़ी इन्डियन फोरेस्ट एक्ट १८६५ बना कर | भारत का इस्पात उद्योग जो कुटीर उद्योग था वो खत्म कर दिया एक तों इस से भारतीय स्वतंत्र रूप से हथियार नहीं बना सकते थे ऊपर विकेन्द्रित अर्थ व्यवस्था को तोडना आवश्यक था लोग स्वतंत्र थे उन्हें गुलाम बनाने के लिए आपको उनके अर्थ के मार्ग को नियंत्रित करना था वही किया गया | बड़े-२ उद्योगपति खड़े किये गए जो केंद्रित थे उन्हें नियंत्रण करना कर कानूनों से अधिक सरल था बजाये बड़े समाज को नियंत्रित करने के |

५. जुलाहे : हाथ से कपडे बनाने वालो को पावर लूम खड़ा कर के खत्म कर दिया गया | कुछ विद्वानों ने तों ये भी कहा के अंग्रेजो ने जुलाहों के हाथ तक कटवाए ठीक वैसे ही जैसे गुरुकुलो को बंद करने के लिए ब्राह्मणों के हाथ कटवाए हत्या करवाई |

६. रजका या वरिष्ठा या दिवाकर धोबी : मिट्टी से कपडे धोने की विद्या थी और कपडे उद्योग पर पकड़ से इनका व्यवसाय प्रभावित हुआ | आज ये प्रभावित वर्ग है |

७. मोची : मोची चर्मकार का सीधा सम्बन्ध था जब चमार प्रभावित हुआ तों मोची भी प्रभावित हुआ आज मोची सड़क पर है |

८. कहार या बाथम : ये डोली उठाने का कार्य करते थे श्रमिक कार्य के लिए अधिक धन दिया जाता था क्यों के उसे धन की अधिक आवयश्कता थी | आज अंग्रेजो का ब्रास बैंड चलता है | डोली की परंपरा पुनः चालु की जाए तों ये ब्रास बैंड जैसी गुलामी की निशानी बंद हों जाये |

९. कश्यप या केवट : नाव चलाने का कार्य कर्ता था | क्यों के सभी वर्ग प्रभावित हों रहे थे अंग्रेजो की नीतियों से तों श्रमिक वर्ग पर भी प्रभावित हुआ | याद करिये श्री राम ने केवट को नदी पार कराइ मुद्रिका दी थी |

दक्षिण भारत की जातियों के साथ भी यही सब हुआ | इसके अतिरिक्त अंग्रेजो ने योद्धा ज्ञातियो को पिछड़ा वर्ग घोषित कर दिया जैसे यादव, जाट, गुर्जर इत्यादि क्यों के ये लड़ाकू कौम थी | कितना आश्चर्य है के श्री कृष्ण के वंशज आज गर्व से अपने को पिछड़ा कहते हैं। अंग्रेजो ने जाल में ऐसा फसाया के आज तक आपस में ही उलझे पड़े है | कुछ कौमों को तों जन्मजात अपराधी घोषित कर दिया अंग्रेजो ने | ठगी प्रथा है इस जाती मे ऐसा प्रचार किया उस देश मे जो त्याग और तपस्या के सिधान्तो पर चलता रहा है लाखो वर्षों से और वो कह रहे थे ये बात जो इस देश मे लूटने आये थे | उस वक्त तों राष्ट्रभक्तो पर इसका प्रभाव नहीं पड़ा।

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