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ज्योति अग्रवाल

मित्रोआज गणेश चतुर्थी है, आपको आपके परिवार को इस पावन पर्व की बहुत बहुत शुभकामनाएं!!!!!!

विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लम्बोदराय सकलाय जगद्धितायं।
नागाननाय श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते॥

भावार्थ : विघ्नेश्वर, वर देनेवाले, देवताओं को प्रिय, लम्बोदर, कलाओंसे परिपूर्ण, जगत् का हित करनेवाले, गजके समान मुखवाले और वेद तथा यज्ञ से विभूषित पार्वतीपुत्र को नमस्कार है , हे गणनाथ ! आपको नमस्कार है ।

एक बार महादेवजी स्नान करने के लिए भोगावती गयें, उनके जाने के पश्चात माता पार्वतीजी ने अपने तन के मैल से एक पुतला बनाया और उसका नाम गणेश रखा, पार्वतीजी ने अपने पुत्र से कहा कि तुम एक मुगदल लेकर द्वार पर बैठ जाओ, मैं भीतर जाकर स्नान कर रही हूँ, जब तक मैं स्नान न कर लूं, तब तक तुम किसी भी पुरुष को भीतर मत आने देना।

भोगावती में स्नान करने के बाद जब भगवान् शिवजी आये तो गणेशजी ने उन्हें द्वार पर रोक लिया, इसे शिवजी ने अपना अपमान समझा और क्रोधित होकर उनका सिर धड़ से अलग करके भीतर चले गयें, पार्वतीजी ने उन्हें नाराज देखकर समझा कि भोजन में विलंब होने के कारण महादेवजी नाराज हैं।

इसलिये उन्होंने तत्काल दो थालियों में भोजन परोसकर शिवजी को बुलाया, तब दूसरा थाल देखकर तनिक आश्चर्यचकित होकर शिवजी ने पूछा देवी! यह दूसरा थाल किसके लिये है? पार्वतीजी बोलीं पुत्र गणेश के लिये है, जो बाहर द्वार पर पहरा दे रहा है, यह सुनकर शिवजी और अधिक आश्चर्यचकित हुयें, तुम्हारा पुत्र पहरा दे रहा है? हाँ नाथ! क्या आपने उसे देखा नहीं?

शिवजी ने कहाँ- देखा तो था, किन्तु मैंने तो अपने रोके जाने पर उसे कोई उद्दण्ड बालक समझकर उसका सिर काट दिया, यह सुन पार्वतीजी बहुत दुःखी हुईं और वे विलाप करने लगीं, तब पार्वतीजी को प्रसन्न करने के लिये भगवान् शिवजी ने एक हाथी के बच्चे का सिर काटकर बालक के धड़ से जोड़ दिया, पार्वतीजी इस प्रकार पुत्र गणेश को पाकर बहुत प्रसन्न हुई।

उन्होंने पति तथा पुत्र को प्रीतिपूर्वक भोजन कराकर बाद में स्वयं भोजन किया, यह घटना भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को हुई थी, इसीलिये यह तिथि पुण्य पर्व के रूप में मनाई जाती है, सज्जनों! भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को रात्रि में चन्द्र-दर्शन (चन्द्रमा देखने को) निषिद्ध किया गया है, जो व्यक्ति इस रात्रि को चन्द्रमा को देखते हैं उन्हें झूठा-कलंक प्राप्त होता है।

ऐसा शास्त्रों का निर्देश है, यह अनुभूत भी है, इस गणेश चतुर्थी को चन्द्र-दर्शन करने वाले व्यक्तियों को उक्त परिणाम अनुभूत होते हैं इसमें संशय नहीं है, यदि जाने-अनजाने में चन्द्रमा दिख भी जाये तो इस मंत्र का पाठ अवश्य कर लेना चाहिये।

सिहः प्रसेनम्‌ अवधीत्‌, सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्वमन्तकः।।

भगवान् श्री गणेशजी हिन्दुओं के आदि आराध्य देव है, हिन्दू धर्म में गणेशजी को एक विशष्टि स्थान प्राप्त है, कोई भी धार्मिक उत्सव हो, यज्ञ, पूजन इत्यादि सत्कर्म हो या फिर विवाहोत्सव हो, निर्विध्न कार्य सम्पन्न हो इसलिये शुभ के रूप में गणेशजी की पूजा सबसे पहले की जाती है, यह मनुष्यों के लिये ही नहीं, बल्कि देवताओं के लिये भी जरूरी है।

वक्रतुण्ड महाकाय सुर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्न कुरुमेदेव सर्वकार्य सर्वदा।।

भाई-बहनों! श्री गणपति बप्पा आज आप सभी के लिए ढेरों खुशीया लेकर आवे, पूरा वर्ष आपका खुशीयों भरा एवम् आनन्दमय हो, श्री गणेश चतुर्थी पर्व एवम् गणेश उत्सव के पावन अवसर पर आप सभी को बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें, .विध्न विनाशक गौरीनंदन प्रथमपूज्य श्री गणेशजी रिद्दी-सिद्दी, लाभ-शुभ सहित आपके घर आँगन पधारें और आपके जीवन में आनंद की वृद्धि करें, गणेश उत्सव की आपको और आपके समस्त परिवार को हार्दिक सुभकामनाये।

ॐ गं गणपतये नमः
जय श्री गणेश!

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