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क्रान्तिवीर भंगी गंगू मेहतर


बलिदान दिवस #

क्रान्तिवीरभंगीगंगूमेहतर गंगू मेहतर को कई नामों से पुकारा जाता है । भंगी जाति के होने से गंगू मेहतर, पहलवानी का शौक होने से गंगू पहलवान, सती चौरा गांव में इनका पहलवानी का अखाड़ा था, कुश्ती के दांव पेच एक मुस्लिम उस्ताद से सीखने के कारण गंगूदीन और लोग इन्हें श्रद्धा प्रकट करने के लिए गंगू बाबा कहकर भी पुकारते हैं । गंगू मेहतर के पुरखे जिले कानपुर के अकबरपुरा गांव के रहने वाले थे । उच्चवर्णों की बेगार, शोषण और अमानवीय व्यवहार से दुखी होकर इनके पुरखे कानपुर शहर के चुन्नी गंज इलाके में आकर रहने लगे थे । कानपुर में जन्मे ग़दर के जाबांज गंगादीन मेहतर जिन्हें गंगू बाबा के नाम से भी जाना जाता है । गंगू बाबा एक उच्च कोटि के पहलवान भी थे । वह 1857 में अंग्रेज़ों के विरुद्ध सतीचौरा के करीब वीरता से लड़े । 1857 की लडा़ई में इन्होने 200 अंग्रेजों को मौत के घाट उतारा था । और 200 अंग्रेजो की मौत के कारण अंग्रेजी सरकार बहुत सहम सी गई थी । अंग्रेजी कुत्तों ने गंगू मेहतर जी को गिरफ्तार करने का आदेश दे दिया । और अंग्रेज़ कुत्ते की तरह इनके पीछे लग गए और वीर गंगू मेहतर जी अंग्रेजों से घोड़े पर सवार होकर वीरता से लड़ते रहे । अंत में गिरफ्तार कर लिए गए । जब वे गिरफ्तार हुए उनको हथकड़ियाँ और पैरों में बेड़ियाँ पहनाकर जेल की काल कोठरी में रखा गया था और कड़ा पहरा लगा दिया गया था । उसके बाद कानपुर में इन्है बिच चौराहा पर #8सितंबर_1859 फाँसी दे दी गई । लेकिन दुर्भाग्यवश भारत के इतिहास में इनका नामो निशान नही है । यह नाम जातिवाद के कारण इतिहास के पन्नों में कहीं सिमट सा गया है । अंतिम सांस तक अंग्रेजों को ललकारते रहे,, “भारत की माटी में हमारे पूर्वजों का खून व कुर्बानी कि गंध है, एक दिन यह मुल्क आजाद होगा ।” ~शहीद सिरोमणी गंगू मेहतर जी ऐसा कहकर उन्होंने आने वाली पीढ़ियों को क्रान्ति का संदेश दिया और देश के लिए शहीद हो गए । कानपुर के चुन्नी गंज में इनकी प्रतिमा लगाई गई है । वहां इनकी स्मृति में हर वर्ष मेला लगता है । लोग श्रद्धा सुमन अर्पित करते हैं ।। इंकलाब जिन्दाबाद ।। इस तस्वीर कानपुर के सिविल सर्जन जॉन निकोलस का जिन्होंने गंगू मेहतर को फांसी देने के पहले ये तस्वीर लिया था । ~आजाद

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