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हिंदुओ के मूल ग्रन्थ

देव शर्मा

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(१)👉 वेद { जिनको श्रुति भी कहते हैं }
ऋग्वेद ( ज्ञान ) = १०५७९ मंत्र
यजुर्वेद ( कर्म ) = १९७५ मंत्र
सामवेद ( उपासना ) = १८७५ मंत्र
अथर्ववेद ( विज्ञान ) = ५९७० मंत्र
कुल मंत्र = २०४१६
वेदों के अर्थों को समझाने के लिए जिन ग्रन्थों का प्रवचन वैदिक ऋषियों ने किया है, उनको शाखा कहते हैं ।
कुल शाखाएँ = ११२७
वर्तमान में उपलब्ध शाखाएँ = १२

उपलब्ध शाखाओं के नाम
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{१} ऋग्वेद की उपलब्ध शाखाएँ
(क) शाकल (ख) वाष्कल

{२} यजुर्वेद की उपलब्ध शाखाएँ
(क) काण्व (ख) मध्यन्दिनी (ग) तैत्तिरीय संहिता (घ) काठक (ङ) मैत्रायणी

{३} सामवेद की उपलब्ध शाखाए
(क) जैमिनीया (ख) राणायसीम

{४} अथर्ववेद की उपलब्ध शाखाएँ
(क) शौनक (ख) पिप्पलाद

वेदों में से कुछ लघु वेद भी ऋषियों ने बनाए थे जिनको उपवेद कहते हैं , भिन्न भिन्न विषयों को समझाने के लिए चार उपवेद हैं।

{१} ऋग्वेद ——————- आयुर्वेद
{२} यजुर्वेद——————- धनुर्वेद
{३} सामवेद —————— गन्धर्ववेद
{४} अथर्ववेद —————– अर्थवेद

चारों वेदों में से विज्ञान के उत्कृष्ट स्वरूप को समझाने के लिए वेदों में से ब्राह्मण ग्रन्थ भी बनाए हैं।

{१} ऋग्वेद का ब्राह्मण ————- ऐतरेय
{२} यजुर्वेद का ब्राह्मण ————- शतपथ
{३} सामवेद का ब्राह्मण ———— सामविधान
{४} अथर्ववेद का ब्राह्मण ———– गोपथ
[ इन्हीं ब्राह्मणों को पुराण भी कहते हैं । ]

६ वैदिक शास्त्र :–
(क) न्याय (ख) वैशेषिक
(ग) साङ्ख्य (घ) योग
(ङ) मिमांसा (च) वेदांत
{ ये छः शास्त्र तर्क प्रणाली को प्रस्तुत करते हैं, इनको पढ़ने से तर्क के द्वारा मनुष्य धर्म और अधर्म के भेद को जान सकता है }

६ वेदाङ्ग वे हैं जिनको पढ़कर मनुष्य वेदों का अर्थ करने में समर्थ होता है।
(क) शिक्षा
(ख) कल्प
(ग) व्याकरण
(घ) निरुक्त
(ङ) छंद
(च) ज्योतिष

वेदांत शास्त्र को ब्रह्मसूत्र भी कहते हैं और इसको समझने के लिए ११ मुख्य उपनिषदें हैं :-
(१) ईश
(२) कठ
(३) केन
(४) प्रश्न
(५) मुण्डक
(६) माण्डुक्य
(७) ऐतरेय
(८) तैत्तिरीय
(९) छांदोग्य
(१०) बृहदारण्यक
(११) श्वेताश्वतर

ऐतिह्या ( इतिहास ग्रन्थ ) :-
(१) योगवशिष्ठ महारामायण
(२) वेदव्यास कृत महाभारतम्
समृति ग्रन्थ :-
(१) मनुस्मृति ( विशुद्ध – कर्म पर आधारित न कि जन्म पर )
(२) विधुर नीति
(३) चाणक्य नीति

ओ३म् तत् सत्
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