Posted in श्री कृष्णा

[02/09, 3:43 p.m.] संस्कृति ईबुक्स: 1भगवान् श्री कृष्ण जी के 51 नाम और उन के अर्थ:…..

1 कृष्ण : सब को अपनी ओर आकर्षित करने वाला.।


2 गिरिधर: गिरी: पर्वत ,धर: धारण करने वाला। अर्थात गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले।


3 मुरलीधर: मुरली को धारण करने वाले।


4 पीताम्बर धारी: पीत :पिला, अम्बर:वस्त्र। जिस ने पिले वस्त्रों को धारण किया हुआ है।


5 मधुसूदन: मधु नामक दैत्य को मारने वाले।


6 यशोदा या देवकी नंदन: यशोदा और देवकी को खुश करने वाला पुत्र।


7 गोपाल: गौओं का या पृथ्वी का पालन करने वाला।


8 गोविन्द: गौओं का रक्षक।


9 आनंद कंद: आनंद की राशि देंने वाला।


10 कुञ्ज बिहारी: कुंज नामक गली में विहार करने वाला।


11 चक्रधारी: जिस ने सुदर्शन चक्र या ज्ञान चक्र या शक्ति चक्र को धारण किया हुआ है।


12 श्याम: सांवले रंग वाला।


13 माधव: माया के पति।


14 मुरारी: मुर नामक दैत्य के शत्रु।


15 असुरारी: असुरों के शत्रु।


16 बनवारी: वनो में विहार करने वाले।


17 मुकुंद: जिन के पास निधियाँ है।


18 योगीश्वर: योगियों के ईश्वर या मालिक।


19 गोपेश :गोपियों के मालिक।


20 हरि: दुःखों का हरण करने वाले।


21 मदन: सूंदर।


22 मनोहर: मन का हरण करने वाले।


23 मोहन: सम्मोहित करने वाले।


24 जगदीश: जगत के मालिक।


25 पालनहार: सब का पालन पोषण करने वाले।


26 कंसारी: कंस के शत्रु।


27 रुख्मीनि वलभ: रुक्मणी के पति ।


28 केशव: केशी नाम दैत्य को मारने वाले. या पानी के उपर निवास करने वाले या जिन के बाल सुंदर है।


29 वासुदेव:वसुदेव के पुत्र होने के कारन।


30 रणछोर:युद्ध भूमि स भागने वाले।


31 गुड़ाकेश: निद्रा को जितने वाले।


32 हृषिकेश: इन्द्रियों को जितने वाले।


33 सारथी: अर्जुन का रथ चलने के कारण।



35 पूर्ण परब्रह्म: :देवताओ के भी मालिक।


36 देवेश: देवों के भी ईश।


37 नाग नथिया: कलियाँ नाग को मारने के कारण।


38 वृष्णिपति: इस कुल में उतपन्न होने के कारण


39 यदुपति:यादवों के मालिक।


40 यदुवंशी: यदु वंश में अवतार धारण करने के कारण।


41 द्वारकाधीश:द्वारका नगरी के मालिक।


42 नागर:सुंदर।


43 छलिया: छल करने वाले।


44 मथुरा गोकुल वासी: इन स्थानों पर निवास करने के कारण।


45 रमण: सदा अपने आनंद में लीन रहने वाले।


46 दामोदर: पेट पर जिन के रस्सी बांध दी गयी थी।


47 अघहारी: पापों का हरण करने वाले।


48 सखा: अर्जुन और सुदामा के साथ मित्रता निभाने के कारण।


49 रास रचिया: रास रचाने के कारण।


50 अच्युत: जिस के धाम से कोई वापिस नही आता है।


51 नन्द लाला: नन्द के पुत्र होने के कारण।
🌺 ।। जय श्री कृष्णा ।।

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“श्री कृष्ण: शरणं मम “

🌹🙏जय श्री कृष्ण🙏🌹
[02/09, 3:56 p.m.] संस्कृति ईबुक्स: कृष्ण जी के 108 नाम

1 अचला : भगवान।
2 अच्युत : अचूक प्रभु, या जिसने कभी भूल ना की हो।
3 अद्भुतह : अद्भुत प्रभु।
4 आदिदेव : देवताओं के स्वामी।
5 अदित्या : देवी अदिति के पुत्र।
6 अजंमा : जिनकी शक्ति असीम और अनंत हो।
7 अजया : जीवन और मृत्यु के विजेता।
8 अक्षरा : अविनाशी प्रभु।
9 अम्रुत : अमृत जैसा स्वरूप वाले।
10 अनादिह : सर्वप्रथम हैं जो।
11 आनंद सागर : कृपा करने वाले
12 अनंता : अंतहीन देव
13 अनंतजित : हमेशा विजयी होने वाले।
14 अनया : जिनका कोई स्वामी न हो।
15 अनिरुध्दा : जिनका अवरोध न किया जा सके।
16 अपराजीत : जिन्हें हराया न जा सके।
17 अव्युक्ता : माणभ की तरह स्पष्ट।
18 बालगोपाल : भगवान कृष्ण का बाल रूप।
19 बलि : सर्व शक्तिमान।
20 चतुर्भुज : चार भुजाओं वाले प्रभु।
21 दानवेंद्रो : वरदान देने वाले।
22 दयालु : करुणा के भंडार।
23 दयानिधि : सब पर दया करने वाले।
24 देवाधिदेव : देवों के देव
25 देवकीनंदन : देवकी के लाल (पुत्र)।
26 देवेश : ईश्वरों के भी ईश्वर
27 धर्माध्यक्ष : धर्म के स्वामी
28 द्वारकाधीश : द्वारका के अधिपति।
29 गोपाल : ग्वालों के साथ खेलने वाले।
30 गोपालप्रिया : ग्वालों के प्रिय
31 गोविंदा : गाय, प्रकृति, भूमि को चाहने वाले।
32 ज्ञानेश्वर : ज्ञान के भगवान
33 हरि : प्रकृति के देवता।
34 हिरंयगर्भा : सबसे शक्तिशाली प्रजापति।
35 ऋषिकेश : सभी इंद्रियों के दाता।
36 जगद्गुरु : ब्रह्मांड के गुरु
37 जगदिशा : सभी के रक्षक
38 जगन्नाथ : ब्रह्मांड के ईश्वर।
39 जनार्धना : सभी को वरदान देने वाले।
40 जयंतह : सभी दुश्मनों को पराजित करने वाले।
41 ज्योतिरादित्या : जिनमें सूर्य की चमक है।
42 कमलनाथ : देवी लक्ष्मी की प्रभु
43 कमलनयन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
44 कामसांतक : कंस का वध करने वाले।
45 कंजलोचन : जिनके कमल के समान नेत्र हैं।
46 केशव :
47 कृष्ण : सांवले रंग वाले।
48 लक्ष्मीकांत : देवी लक्ष्मी की प्रभु।
49 लोकाध्यक्ष : तीनों लोक के स्वामी।
50 मदन : प्रेम के प्रतीक।
51 माधव : ज्ञान के भंडार।
52 मधुसूदन : मधु- दानवों का वध करने वाले।
53 महेंद्र : इन्द्र के स्वामी।
54 मनमोहन : सबका मन मोह लेने वाले।
55 मनोहर : बहुत ही सुंदर रूप रंग वाले प्रभु।
56 मयूर : मुकुट पर मोर- पंख धारण करने वाले भगवान।
57 मोहन : सभी को आकर्षित करने वाले।
58 मुरली : बांसुरी बजाने वाले प्रभु।
59 मुरलीधर : मुरली धारण करने वाले।
60 मुरलीमनोहर : मुरली बजाकर मोहने वाले।
61 नंद्गोपाल : नंद बाबा के पुत्र।
62 नारायन : सबको शरण में लेने वाले।
63 निरंजन : सर्वोत्तम।
64 निर्गुण : जिनमें कोई अवगुण नहीं।
65 पद्महस्ता : जिनके कमल की तरह हाथ हैं।
66 पद्मनाभ : जिनकी कमल के आकार की नाभि हो।
67 परब्रह्मन : परम सत्य।
68 परमात्मा : सभी प्राणियों के प्रभु।
69 परमपुरुष : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले।
70 पार्थसार्थी : अर्जुन के सारथी।
71 प्रजापती : सभी प्राणियों के नाथ।
72 पुंण्य : निर्मल व्यक्तित्व।
73 पुर्शोत्तम : उत्तम पुरुष।
74 रविलोचन : सूर्य जिनका नेत्र है।
75 सहस्राकाश : हजार आंख वाले प्रभु।
76 सहस्रजित : हजारों को जीतने वाले।
77 सहस्रपात : जिनके हजारों पैर हों।
78 साक्षी : समस्त देवों के गवाह।
79 सनातन : जिनका कभी अंत न हो।
80 सर्वजन : सब- कुछ जानने वाले।
81 सर्वपालक : सभी का पालन करने वाले।
82 सर्वेश्वर : समस्त देवों से ऊंचे।
83 सत्यवचन : सत्य कहने वाले।
84 सत्यव्त : श्रेष्ठ व्यक्तित्व वाले देव।
85 शंतह : शांत भाव वाले।
86 श्रेष्ट : महान।
87 श्रीकांत : अद्भुत सौंदर्य के स्वामी।
88 श्याम : जिनका रंग सांवला हो।
89 श्यामसुंदर : सांवले रंग में भी सुंदर दिखने वाले।
90 सुदर्शन : रूपवान।
91 सुमेध : सर्वज्ञानी।
92 सुरेशम : सभी जीव- जंतुओं के देव।
93 स्वर्गपति : स्वर्ग के राजा।
94 त्रिविक्रमा : तीनों लोकों के विजेता
95 उपेंद्र : इन्द्र के भाई।
96 वैकुंठनाथ : स्वर्ग के रहने वाले।
97 वर्धमानह : जिनका कोई आकार न हो।
98 वासुदेव : सभी जगह विद्यमान रहने वाले।
99 विष्णु : भगवान विष्णु के स्वरूप।
100 विश्वदक्शिनह : निपुण और कुशल।
101 विश्वकर्मा : ब्रह्मांड के निर्माता
102 विश्वमूर्ति : पूरे ब्रह्मांड का रूप।
103 विश्वरुपा : ब्रह्मांड- हित के लिए रूप धारण करने वाले।
104 विश्वात्मा : ब्रह्मांड की आत्मा।
105 वृषपर्व : धर्म के भगवान।
106 यदवेंद्रा : यादव वंश के मुखिया।
107 योगि : प्रमुख गुरु।
108 योगिनाम्पति : योगियों के स्वामी।

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