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हैमिलटन बुचनन की ये पुस्तक 1807 में पब्लिश हुई थी।


हैमिलटन बुचनन की ये पुस्तक 1807 में पब्लिश हुई थी।


1799 में टीपू को हराने के बाद 1800 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने उनको ईस्ट इंडिया के अधिकार क्षेत्र में दौरा करके उस क्षेत्र की कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, जलवायु , जियोग्राफी, का विस्तार पूर्वक वर्णन करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया था।

अभी प्रथम वॉल्यूम का 52 पेज तक पढा है।
वर्ण को वो pure Caste के नाम से संबोधित करते हैं।

पेज 29 पर वेलोर से पिलिगोंडा नामक स्थान की यात्रा का वर्णन है। जहां 1 मई 1800 को पिलिगोंडा मंदिर में एक शोभा यात्रा निकाली गई, बुचनन की आंख के सामने, जिसमे उज़को सीखने को मिला कि उस शोभायात्रा में ब्राम्हण वैश्य और शूद्र वर्ण (Pure Caste) के लोग सम्मिलित हुए। क्षत्रिय उस शोभा यात्रा में नही थे क्योंकि वे समूल नष्ट हो चुके थे। ( हेमिल्टन ने उनको messanger, robbers, और warriors) में बांटा है)

पेज 29 पर लिखा कि इस्पात का निर्माण Malawanalu समुदाय द्वारा किया जाता है, जिनको मद्रास के निवासी उनके तिलंग भाषा में पेरियार कहते हैं।

पेज 35 पर क्षारीय मिट्टी से नमक बनाने की तकनीक का वर्णन है। ( आधुनिक नमक निर्माता इस तकनीक को आज तक नही खोंज पाये)।

पेज 39 और 40 में वलुरु नामक साप्ताहिक बाजार में गांव गांव में बनने वाले कपड़ो के निर्माण का वर्णन है। जिसमें दो किस्म के कपड़े बनाये जाते थे। मोटे कपड़े देश मे प्रयोग हेतु , और महीन कपड़े विदेश में एक्सपोर्ट करने हेतु, जो व्यापारियों से एडवांस मिलने पर निर्मित किय्ये जाते थे।

पेज 52 पर लिखता है कि हुक्का सिर्फ मुसलमान पीते थे। बीड़ी लोग पीते हैं, लेकिन यदि किसी ब्राम्हण ने बीड़ी पिया तो उसको जात बाहर कर दिया जाएगा।
और धनी शूद्रों में भी यह अच्छा नही माना जाता है।

अभी तक अछूतपन का वर्णन एक बार भी नही आया है।

छोटे तबके, और बड़े तबके की बात अवश्य लिखी है।

लेकिन वो तो अनादिकाल से हर देश और समुदाय में रहे हैं और रहेंगे।

दलित चिन्तक #Karls #बॉयज एंड #गर्ल्स इस रहस्य को समझाएं।

इकॉनोमिक हिस्ट्री तो सबको मुंहजबानी याद ही है।

भारत के बुद्धुजीवियों जिन कारणों से संविधान में कास्ट को समाहित किया गया वह तुम जानते ही होंगे।

संविधान के निर्माता ब्रिटिश एडुकेटेड इनोसेंट इडियट इंडियन बरिस्टर्स (BEIIBS) यदि इन तथ्यों को पढ़ लेते तो आत्महत्या कर लेते।

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