Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

ज्योति अग्रवाल

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आस्था का रंग 🌹
एक मुसलमान फकीर हुआ–बड़े से बड़े सूफियों में एक–जलालुद्दीन रूमी। वह अल्लाह-अल्लाह का स्मरण करता रहता था। एक दिन गुजर रहा था, रास्ते से; जहां से गुजर रहा था, वहां सुनारों की दुकानें थीं। लोग सोने-चांदी के पत्तर पीट रहे थे।🌷🌷

                 🍀🌷कुछ हुआ! जलालुद्दीन खड़ा हो गया। उसे लुहार सुनार, जो हथौड़ियों से पीट रहे थे सोने-लोहे के पत्तरों को, उनमें अल्लाह की आवाज सुनाई पड़ने लगी। वह नाचने लगा। वह घंटों नाचता रहा। पूरा गांव इकट्ठा हो गया। ऐसी महिमा उस गांव में कभी देखी नहीं गई थी।🍀🌷

🌷जलालुद्दीन प्रकाश का एक पुंज मालूम होने लगा। वह नाचता ही रहा, नाचता ही रहा। लुहारों के सुनारों के हथौड़े बंद हो गए; क्योंकि भीड़ बहुत बढ़ गई। वे भी इकट्ठे हो गए देखने। वह जो चोट पड़ती थी, जिससे अल्लाह का स्मरण आया था, वह भी बंद हो गई, लेकिन स्मरण जारी रहा, और वह नाचता रहा।🌷

            🍀उस रात, उस संध्या दरवेश-नृत्य का जन्म हुआ।

और जब बाद में, उसके शिष्य उससे पूछते कि तुमने इसे कैसे खोजा, तो वह कहता, कहना मुश्किल है, परमात्मा ने ही मुझे खोजा। मैं तो बाजार किसी दूसरे काम से जा रहा था। अचानक उसकी आवाज मुझको सुनाई पड़ी।🍀

🍀🌷लेकिन यह आवाज किसी और को सुनाई नहीं पड़ी थी। उसके मन में एक धागा था। एक सेतु था। निरंतर अल्लाह का स्मरण कर रहा था। उस चोट से, उसका मन तैयार था, उस तैयार मन में…अन्यथा कहीं सुनारों या लुहारों की हथौड़ियों से कहीं किसी को परमात्मा का बोध हुआ है!🍀🌷

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