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(((( द्वारकाधीश की कृपा ))))

विजेता मलिक
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कहते हैं भक्ति सच्ची हो तो ईश्वर को भक्त के सामने आना ही पड़ता है और ईश्वर के जिसे दर्शन हो जाएं उसे कुछ न कुछ देकर ही जाते हैं।
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यह एक ऐसे ही भक्त की कथा है जिसे भगवान श्री कृष्ण ने दर्शन दिए और जाते-जाते छोड़ गए शरीर पर शंख और चक्र के निशान।
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यह कथा है आमेर नरेश श्री पृथ्वीराज जी स्वामी की। एक बार इनके गुरु पयोहारी जी द्वारिका जी यात्रा पर जाने लगे तो पृथ्वीराज भी द्वारिका जाने की तैयारी करने लगे। इन्होंने कहा कि द्वारिका जाकर शरीर पर शंख चक्र बनवाउंगा।
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गुरु पयोहारी जी ने कहा कि अगर तुम राज्य छोड़कर चले जाओगे तो राज्य में अव्यवस्था फैल जाएगी। धर्म-कर्म से लोगों का ध्यान हट जाएगा। इसलिए आमेर में रहकर ही कृष्ण की भक्ति करो।
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गुरु की बात मानकर श्रीपृथ्वीराज जी आमेर में ही रह गए लेकिन इनका ध्यान द्वारकाधीश में ही लगा रहा। रात में जब यह सोए हुए थे तब इन्हें लगा कि अचानक तेज प्रकाश फैल गया है और भगवान श्री द्वारकाधीश स्वयं प्रकट हो गए हैं।
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राजा श्रीपृथ्वीराज जी ने द्वारकाधीश जी की परिक्रमा की और प्रणाम किया। भगवन ने कहा कि तुम अब गोमती संगम में डूबकी लगाओ। राजा को लगा कि वह गोमती तट पर पहुंच गए हैं और गोमती में डूबकी लगा रहे हैं।
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सुबह जब राजा महल से बाहर नहीं निकले तो रानी उनके शयन कक्ष में पहुंची। रानी ने देखा राजा सोए हुए हैं और उनका पूरा शरीर भींगा हुआ है जैसे स्नान करके आए हों। रानी ने देखा कि राजा के बाजू पर शंख और चक्र के निशान उभर आए हैं।
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राजा की नींद खुली तो वह भी इस चमत्कार को देख कर हैरान थे। उन्हें लगा कि भगवान स्वयं उनकी इच्छा पूरी करने के लिए आए थे। इसके बाद राजा पूरी तरह से कृष्ण भक्ति में लीन हो गए।
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मुस्कान तेरी सांवरे मेरे मन मे बस रही हैं
जादू भरी नजर से कई तीर कस रही हैं
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कुर्बान हो चुके है तेरी हर अदा पे मोहन
तेरे रूप के भँवर मे मेरी जान फँस रही हैं
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चित्त को चुरा रही है चितवन तुम्हारी झाँकी
तेरी झाँकी सांवरे तेरी प्यारी सी झाँकी
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खुद को भुला रही हे सुध बुध गवा रही है
मुस्कान तेरी प्यारे मेरे मन मे बस रही है ।

  ((((((( जय जय श्री राधे )))))))

via MyNt

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ज्योति अग्रवाल

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आस्था का रंग 🌹
एक मुसलमान फकीर हुआ–बड़े से बड़े सूफियों में एक–जलालुद्दीन रूमी। वह अल्लाह-अल्लाह का स्मरण करता रहता था। एक दिन गुजर रहा था, रास्ते से; जहां से गुजर रहा था, वहां सुनारों की दुकानें थीं। लोग सोने-चांदी के पत्तर पीट रहे थे।🌷🌷

                 🍀🌷कुछ हुआ! जलालुद्दीन खड़ा हो गया। उसे लुहार सुनार, जो हथौड़ियों से पीट रहे थे सोने-लोहे के पत्तरों को, उनमें अल्लाह की आवाज सुनाई पड़ने लगी। वह नाचने लगा। वह घंटों नाचता रहा। पूरा गांव इकट्ठा हो गया। ऐसी महिमा उस गांव में कभी देखी नहीं गई थी।🍀🌷

🌷जलालुद्दीन प्रकाश का एक पुंज मालूम होने लगा। वह नाचता ही रहा, नाचता ही रहा। लुहारों के सुनारों के हथौड़े बंद हो गए; क्योंकि भीड़ बहुत बढ़ गई। वे भी इकट्ठे हो गए देखने। वह जो चोट पड़ती थी, जिससे अल्लाह का स्मरण आया था, वह भी बंद हो गई, लेकिन स्मरण जारी रहा, और वह नाचता रहा।🌷

            🍀उस रात, उस संध्या दरवेश-नृत्य का जन्म हुआ।

और जब बाद में, उसके शिष्य उससे पूछते कि तुमने इसे कैसे खोजा, तो वह कहता, कहना मुश्किल है, परमात्मा ने ही मुझे खोजा। मैं तो बाजार किसी दूसरे काम से जा रहा था। अचानक उसकी आवाज मुझको सुनाई पड़ी।🍀

🍀🌷लेकिन यह आवाज किसी और को सुनाई नहीं पड़ी थी। उसके मन में एक धागा था। एक सेतु था। निरंतर अल्लाह का स्मरण कर रहा था। उस चोट से, उसका मन तैयार था, उस तैयार मन में…अन्यथा कहीं सुनारों या लुहारों की हथौड़ियों से कहीं किसी को परमात्मा का बोध हुआ है!🍀🌷

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એક ઈડલી વાળો હતો. જયારે પણ ઈડલી ખાવા જાઓ ત્યારે એમ લાગતું કે એ આપણી જ રાહ જોઈ રહ્યો છે. દરેક વિષય પર એને વાત કરવામાં મજા આવતી. ઘણીવાર એને કીધું કે ભાઈ મોડું થઇ જાય છે જલ્દી ઈડલી ની પ્લેટ બનાવી દે પણ એની વાતો ખતમ જ થતી નહિ.

એકવાર અચાનક જ કર્મ અને ભાગ્ય પર વાત શરૂ થઇ.
નસીબ અને પ્રયત્નની વાત સાંભળીને મેં વિચાર્યું કે ચાલો આજે એની ફિલોસોફી જોઈએ. મેં એક સવાલ પૂછ્યો.

મારો સવાલ હતો કે માણસ મહેનતથી આગળ વધે છે કે નસીબ થી?

અને એના જવાબ એ મારા મગજ ના તમામ જાળા સાફ કરી નાખ્યા.
એ કહેવા લાગ્યો કે તમારું કોઈક બેન્કમાં લોકર તો હશે જ? એની ચાવીઓ જ આ સવાલનો જવાબ છે. દરેક લોકરની બે ચાવીઓ હોય છે.

એક ચાવી તમારી પાસે હોય છે અને એક મેનેજર પાસે.
તમારી પાસે જે ચાવી છે એ પરિશ્રમ અને મેનેજર પાસે છે એ નસીબ.
જ્યાં સુધી બન્ને ચાવી નાં લાગે ત્યાં સુધી તાળું ખુલી શકે નહિ.
તમે કર્મયોગી પુરૂષ છો અને મેનેજર ભગવાન.

તમારે તમારી ચાવી પણ લગાવતા રહેવું જોઈએ. ખબર નહિ ઉપર વાળો ક્યારે પોતાની ચાવી લગાવી દે. ક્યાંક એવું ના થાય કે ભગવાન પોતાની ભાગ્યવળી ચાવી લગાવતો હોય અને આપણે પરિશ્રમ વાળી ના લગાવી શકીએ અને તાળું ખોલવાનું રહી જાય.
👌👌👌

આ કર્મ અને ભાગ્યનું સુંદર અર્થઘટન છે.