Posted in हास्यमेव जयते, ઉત્સવ

[11/08, 9:44 a.m.] ‪+91 88511 97413‬: जब भी मैं भगवान शिव की यह तस्वीर देखता हूं तो मुझे बहुत दुख होता है। दिल रोता है। अपने खुद के नशे की लत के लिए हम और कितना महादेव जी को बदनाम करेंगे ?? भगवान शिव की कृपा से मैंने कुछ समय पहले शिव पुराण पढ़ा था ओर कहीं भी यह वर्णन नहीं आया कि भगवान शिव ने गांजा या चरस फूंकी हो, विपरीत इसके महादेव जी ने संसार की रक्षा के लिए हलाहल विष पिया था, लेकिन इसके बारे में कोई बात तक भी नहीं करता , परंतु हां 80% गंजेडी-चरसी जब गांजा चरस फूंकते है तो वे यही कहते हैं कि फिर क्या हुआ यह तो भोले का प्रसाद है। इन जैसे लोगों ने ना तो कभी भगवान शिव को जाना होता है ना कभी पढ़ा होता है ओर ना कभी जानने की कोशिश करते हैं परन्तु हां फूंकने के समय इनको शिव जी की याद आ जाती है। ऐसे लोगों को मैं कहना चाहूंगा कि ज़रा सोचो जो शिव ब्रह्मांड पिता है ब्रह्मांड रचियता है ब्रह्मांड आत्मा है ,जो कण कण में समाया हुआ है , जो निराकार होके भी साकार है , जो निर्गुण होके भी सगुण है , जिनके आंखे मूंदते ही यह ब्रह्मांड अंधकारमय हो जाता है , क्या ऐसे शिव को किसी भी तरह के नशे की जरूरत है ?? वे भगवान है ना कि हम जैसे तुच्छ इंसान । उनको किसी सहारे की जरूरत नहीं है ,अपने आप में ही संपूर्ण हैं शिव। हां उन्हें भांग के पत्ते अवश्य चढ़ते हैं क्योंकि आयुर्वेद में भांग को एक बहुत ही उपयोगी औषधि माना जाता है और इसे अब पूरा विश्व भी स्वीकार कर रहा है। शिव पुराण के अनुसार समुद्र मंथन सावन के महीने में हुआ था तो जब मंथन में से अमृत निकला था तो उस अमृत को पाने के लिए तो देवता दैत्यों में भगदड़ मच गई थी परंतु ठीक जब अमृत के बाद पृथ्वी को नष्ट कर देने वाला हलाहल विष निकला तो कोई आगे ना आया,तब भगवान शिव आए और उन्होंने उस भयानक विष को अपने कंठ में धारण किया, जिसके कारण वे नीलकंठ व देवों के देव महादेव कहलाए। भगवान शिव के सहस्त्रो नाम में एक नाम है कर्पूरगौरम , जिसका अर्थ है पूर्णतः सफेद । लेकिन उस हलाहल विष के सेवन के बाद उनका शरीर नीला पड़ना शुरू हो गया था , भगवान शिव का शरीर तपने लगा लेकिन शिव फिर भी पूर्णतः शांत थे लेकिन देवताओं ने सेवा भावना से भगवान शिव की तपण शांत करने के लिए उन्हें जल चढ़ाया और विष के प्रभाव कम करने के लिए विजया ( भांग का पौधा )को दूध में मिला कर भगवान शिव को औषधि रूप में पिलाया। बस यही एक प्रमाण है भगवान शिव के भांग सेवन का,ओर हमने उन्हें चरस गांजा फूंकने वाला एक साधारण बना दिया,अब आप ही बताइए कि क्या हम सही न्याय कर रहे हैं उस ब्रह्मांड पिता की छवि के साथ ?? क्या हम उनका नाम बदनाम नहीं कर रहे ??
[11/08, 2:36 p.m.] ‪+91 73891 60409‬: एक सुपर स्टार थे राजेश खन्ना ।
शूटिंग के बाद रात तीन बजे तक स्काच पीते थे चार बजे खाना खाते थे । शूटिंग होती थी सुबह दस बजे पहुंचते थे शाम चार बजे ।। एक दिन एक बहुत स्वाभिमानी निर्माता ने कहा काका घड़ी देख रहो हो । घमंड से चूर काका ने कहा – हम नहीं , घड़ी हमारा टाइम देखती हैं

निर्देशक ने बिना शूटिंग किए पैकअप किया और बोले जो वक्त की इज्ज़त नहीं करता वक्त उन्हें सबक सिखा देता है।

एक समय ऐसा भी आया जब काका के पास वक़्त ही वक़्त था । ना फिल्में थीं, न शूटिंग थी, ना बीवी थी, ना बच्चे थे और न ही पैक अप कहने वाला ।

चमचों के साथ अपनी पुरानी फिल्मों को देख कभी खुश होते तो कभी रोते रहते । सभी साथ छोड़ गए अकेले पीकर और दो कौर खाकर लुढ़क जाना ही उनकी नियति बन गयी थी और बाकी आगे की कहानी आपसभी जानते है ।

ये वक़्त है , जो सबका आता है लेकिन हमेशा के लिऐ नहीं । समय और भाग्य अगर आपके साथ नही हैं तो आपकी कीमत दो कौड़ी की है । जीवन मे कर्म और पुरुषार्थ की महत्ता है , लेकिन कर्म करने के लिए आप जिंदा भी रहेंगे या नहीं ये आपका भाग्य तय करता है आपका पुरुषार्थ नहीं ।

अच्छे समय को भरपूर जियें लेकिन बुरे वक्त के लिए भी तैयार रहें । आपके बुरे वक्त में कोई आपके साथ हो न हो अपने अच्छे समय मे आप किसी को मत दुत्कारिये ।

विनम्रता अच्छे समय की पूंजी है और अहंकार आपके अच्छे समय को असमय ही खत्म कर देने वाला हथियार । भाग्य की सीढ़ी का सहारा लेकर ऊपर चढ़ते समय ये ध्यान जरूर रखें कि नीचे उतरते समय फिर वही लोग आपसे मिलेंगे ।

ये पोस्ट सिर्फ राजनीति या सार्वजनिक जीवन जीने वालों के लिए ही नहीं ये एक शाश्वत सत्य है जो सब पर बराबर लागू होता है.

👌✍
[11/08, 5:27 p.m.] ‪+91 83080 30439‬: मैंने फैसला किया है कि अब खाना खाते समय साउथ की फिल्म नहीं देखुंगा

अभी अभी एक स्कॉर्पियो का टायर मेरी थाली में आते आते बचा

😂😂😜😜😜😜
[12/08, 11:22 a.m.] Vishnu Arodaji: गुलामी के दिन थे। प्रयाग में कुम्भ मेला चल रहा था। एक अंग्रेज़ अपने द्विभाषिये के साथ वहाँ आया। गंगा के किनारे एकत्रित अपार जन समूह को देख अंग्रेज़ चकरा गया।

उसने द्विभाषिये से पूछा, “इतने लोग यहाँ क्यों इकट्टा हुए हैं?”

द्विभाषिया बोला, “गंगा स्नान के लिये आये हैं सर।”

अंग्रेज़ बोला, “गंगा तो यहां रोज ही बहती है फिर आज ही इतनी भीड़ क्यों इकट्ठा है?”

द्विभाषीया: – “सर आज इनका कोई मुख्य स्नान पर्व होगा।”
अंग्रेज़ :- ” पता करो कौन सा पर्व है ?”

द्विभाषिये ने एक आदमी से पूछा तो पता चला कि आज बसंत पंचमी है।

अंग्रेज़:- “इतने सारे लोगों को एक साथ कैसे मालूम हुआ कि आज ही बसंत पंचमी है?”

द्विभाषिये ने जब लोगों से पुनः इस बारे में पूछा तो एक ने जेब से एक जंत्री निकाल कर दिया और बोला इसमें हमारे सभी तिथि त्योहारों की जानकारी है।

अंग्रेज़ अपनी आगे की यात्रा स्थगित कर जंत्री लिखने वाले के घर पहुँचा। एक दड़बानुमा अंधेरा कमरा, कंधे पर लाल फटा हुआ गमछा, खुली पीठ, मैली कुचैली धोती पहने एक व्यक्ति दीपक की मद्धिम रोशनी में कुछ लिख रहा था। पूछने पर पता चला कि वो एक गरीब ब्राह्मण था जो जंत्री और पंचांग लिखकर परिवार का पेट भरता था।

अंग्रेज़ ने अपने वायसराय को अगले ही क्षण एक पत्र लिखा :- “इंडिया पर सदा के लिए शासन करना है तो सर्वप्रथम ब्राह्मणों का समूल विनाश करना होगा सर क्योंकि जब एक दरिद्र और भूँख से जर्जर ब्राह्मण इतनी क्षमता रखता है कि दो चार लाख लोगों को कभी भी इकट्टा कर सकता है तो सक्षम ब्राह्मण क्या कर सकते हैं, गहराई से विचार कीजिये सर।”

इसी युक्ति पर आज भी सत्ता की चाह रखने वाले चल रहे हैं, “अबाध शासन करना है तो बुद्धिजीवियों और राष्ट्रभक्तों का समूल उन्मूलन करना ही होगा.”

#साभार 🙏🌹
[12/08, 12:17 p.m.] ‪+91 94137 78285‬: सुपर मेसेज 👌👌👌👌👌

एक मनोवैज्ञानिक स्ट्रेस मैनेजमेंट के बारे में,
अपने दर्शकों के सामने था..

उसने पानी से भरा एक गिलास उठाया…
सभी ने समझा की अब “आधा खाली या आधा भरा है”.. यही पूछा और समझाया जाएगा..

मगर मनोवैज्ञानिक ने पूछा..
कितना वजन होगा इस पानी के गिलास का ?
सभी ने 300 से 400 ग्राम तक अंदाज बताया..

मनोवैज्ञानिक ने कहा..
कुछ भी वजन मान लो..फर्क नहीं पड़ता..
फर्क इस बात का पड़ता है.. कि
मैं कितनी देर तक इस गिलास उठाए रखता हूँ ?

अगर मैं इस गिलास को एक मिनट तक उठाए रखता हूँ.. तो क्या होगा? शायद कुछ भी नहीं…

अगर मैं इस गिलास को एक घंटे तक उठाए रखता हूँ.. तो क्या होगा? मेरे हाथ में दर्द होने लगेगा और शायद अकड़ भी जाए.

अब अगर मैं इस गिलास को एक दिन तक उठाए रखता हूँ.. तो ??

मेरा हाथ… यकीनऩ, बेहद दर्दनाक हालत में होगा, हाथ पैरालाईज भी हो सकता है और मैं हाथ को हिलाने तक में असमर्थ हो जाऊंगा ।

लेकिन… इन तीनों परिस्थितियों में ग्लास के पानी का वजन न कम हुआ.. न ज्यादा.

चिंता और दुःख का भी जीवन में यही परिणाम है।

यदि आप अपने मन में इन्हें एक मिनट के लिए रखेंगे.. आप पर कोई दुष्परिणाम नहीं होगा..

यदि आप अपने मन में इन्हें एक घंटे के लिए रखेंगे आप दर्द और परेशानी महसूस करने लगेंगें..

लेकिन यदि आप अपने मन में इन्हें पूरा पूरा दिन बिठाए रखेंगे..

ये चिंता और दुःख.. हमारा जीना हराम कर देगा.. हमें पैरालाईज कर के कुछ भी सोचने – समझने में असमर्थ कर देगा..

और याद रहे..
इन तीनों परिस्थितियों में चिंता और दुःख.. जितना था, उतना ही रहेगा..

इसलिए.. यदि हो सके तो.. अपने चिंता और दुःख से भरे “ग्लास” को…एक मिनट के बाद.. नीचे रखना न भुलें..
[12/08, 1:51 p.m.] ‪+91 98299 94321‬: एक बोध कथा
|| कर्मो की दौलत ||

एक राजा था जिसने ने अपने राज्य में क्रूरता से बहुत सी दौलत इकट्ठा करके( एकतरह शाही खजाना ) आबादी से बाहर जंगल एक सुनसान जगह पर बनाए तहखाने मे सारे खजाने को खुफिया तौर पर छुपा दिया था खजाने की सिर्फ दो चाबियां थी एक चाबी राजा के पास और एक उसकेएक खास मंत्री के पास थी इन दोनों के अलावा किसी को भी उस खुफिया खजाने का राज मालूम ना था एक रोज़ किसी को बताए बगैर राजा अकेले अपने खजाने को देखने निकला , तहखाने का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हो गया और अपने खजाने को देख देख कर खुश हो रहा था , और खजाने की चमक से सुकून पा रहा था।

उसी वक्त मंत्री भी उस इलाके से निकला और उसने देखा की खजाने का दरवाजा खुला है वो हैरान हो गया और ख्याल किया कि कही कल रात जब मैं खजाना देखने आया तब शायद खजाना का दरवाजा खुला रह गया होगा, उसने जल्दी जल्दी खजाने का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और वहां से चला गया . उधर खजाने को निहारने के बाद राजा जब संतुष्ट हुआ , और दरवाजे के पास आया तो ये क्या …दरवाजा तो बाहर से बंद हो गया था . उसने जोर जोर से दरवाजा पीटना शुरू किया पर वहां उनकी आवाज सुननेवाला उस जंगल में कोई ना था ।

राजा चिल्लाता रहा , पर अफसोस कोई ना आया वो थक हार के खजाने को देखता रहा अब राजा भूख और पानी की प्यास से बेहाल हो रहा था , पागलो सा हो गया.. वो रेंगता रेंगता हीरो के संदूक के पास गया और बोला ए दुनिया के नायाब हीरो मुझे एक गिलास पानी दे दो.. फिर मोती सोने चांदी के पास गया और बोला ए मोती चांदी सोने के खजाने मुझे एक वक़्त का खाना दे दो..राजा को ऐसा लगा की हीरे मोती उसे बोल रहे हो की तेरे सारी ज़िन्दगी की कमाई तुझे एक गिलास पानी और एक समय का खाना नही दे सकती..राजा भूख से बेहोश हो के गिर गया ।

जब राजा को होश आया तो सारे मोती हीरे बिखेर के दीवार के पास अपना बिस्तर बनाया और उस पर लेट गया , वो दुनिया को एक पैगाम देना चाहता था लेकिन उसके पास कागज़ और कलम नही था ।

राजा ने पत्थर से अपनी उंगली फोड़ी और बहते हुए खून से दीवार पर कुछ लिख दिया . उधर मंत्री और पूरी सेना लापता राजा को ढूंढते रहे पर बहुत दिनों तक राजा ना मिला तो मंत्री राजा के खजाने को देखने आया , उसने देखा कि राजा हीरे जवाहरात के बिस्तर पर मरा पड़ा है , और उसकी लाश को कीड़े मोकड़े खा रहे थे . राजा ने दीवार पर खून से लिखा हुआ था…ये सारी दौलत एक घूंट पानी ओर एक निवाला नही दे सकी…

यही अंतिम सच है |आखिरी समय आपके साथ आपके कर्मो की दौलत जाएगी , चाहे आप कितनी बेईमानी से हीरे पैसा सोना चांदी इकट्ठा कर लो सब यही रह जाएगा |इसीलिए जो जीवन आपको प्रभु ने उपहार स्वरूप दिया है , उसमें अच्छे कर्म लोगों की भलाई के काम कीजिए बिना किसी स्वार्थ के ओर अर्जित कीजिए अच्छे कर्मो की अनमोल दौलत |जो आपके सदैव काम आएगी |
[12/08, 2:13 p.m.] ‪+91 94137 78285‬: बड़े बावरे हिन्दी के मुहावरे
😄😄
हिंदी के मुहावरे, बड़े ही बावरे हैं,
खाने पीने की चीजों से भरे हैं….
कहीं पर फल है तो कहीं आटा-दालें हैं,
कहीं पर मिठाई है, कहीं पर मसाले हैं,
फलों की ही बात ले लो…

आम के आम और गुठलियों के भी दाम मिलते हैं, कभी अंगूर खट्टे हैं,
कभी खरबूजे, खरबूजे को देख कर रंग बदलते हैं,
कहीं दाल में काला है तो कहीं किसी की दाल ही नहीं गलती,

कोई डेड़ चावल की खिचड़ी पकाता है
तो कोई लोहे के चने चबाता है,
कोई घर बैठा रोटियाँ तोड़ता है,
कोई दाल भात में मूसरचंद बन जाता है,
मुफलिसी में जब आटा गीला होता है
तो आटे दाल का भाव मालूम पड़ जाता है,

सफलता के लिए बेलने पड़ते है कई पापड़,
आटे में नमक तो जाता है चल,
पर गेंहू के साथ घुन भी पिस जाता है,
अपना हाल तो बेहाल है, ये मुंह और मसूर की दाल है,

गुड़ खाते हैं और गुलगुले से परहेज करते हैं
और कभी गुड़ का गोबर कर बैठते हैं,
कभी तिल का ताड़, कभी राई का पहाड़ बनता है,
कभी ऊँट के मुंह में जीरा है, कभी कोई जले पर नमक छिड़कता है,
किसी के दांत दूध के हैं तो कई दूध के धुले हैं,

कोई जामुन के रंग सी चमड़ी पा के रोई है,
तो किसी की चमड़ी जैसे मैदे की लोई है,
किसी को छटी का दूध याद आ जाता है,
दूध का जला छाछ को भी फूंक फूंक पीता है
और दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता है,

शादी बूरे के लड्डू हैं, जिसने खाए वो भी पछताए और जिसने नहीं खाए, वो भी पछताते हैं, पर शादी की बात सुन, मन में लड्डू फूटते है,
और शादी के बाद, दोनों हाथों में लड्डू आते हैं,

कोई जलेबी की तरह सीधा है, कोई टेढ़ी खीर है,
किसी के मुंह में घी शक्कर है, सबकी अपनी अपनी तकदीर है…
कभी कोई चाय-पानी करवाता है, कोई मक्खन लगाता है
और जब छप्पर फाड़ कर कुछ मिलता है,
तो सभी के मुंह में पानी आता है,

भाई साहब अब कुछ भी हो,
घी तो खिचड़ी में ही जाता है,
जितने मुंह है, उतनी बातें हैं,
सब अपनी-अपनी बीन बजाते है,
पर नक्कारखाने में तूती की आवाज कौन सुनता है,
सभी बहरे है, बावरें है
ये सब हिंदी के मुहावरें हैं…

ये गज़ब मुहावरे नहीं बुजुर्गों के अनुभवों की खान हैं…
सच पूछो तो हिन्दी भाषा की जान हैं…😊
[12/08, 3:40 p.m.] ‪+91 98803 03018‬: 👦पति– जब हमारी नई-नई शादी हुई थी,
तब तुम कितना तहजीब से बोलती थी
और अब….???

👩पत्नि — पहले मै रामायण देखती थी,
और
अब क्राईम पेट्रोल देखती हू ।😂😂😂😉😉
[13/08, 7:48 a.m.] ‪+91 80584 98386‬: यूपी ,हरियाणा और राजस्थान की रोडवेज बसें ,

ड्राइवर के बीड़ी पीने से चलती है …..😂😂
[13/08, 7:48 a.m.] ‪+91 80584 98386‬: एक अंग्रेज़, भारतीय रेल के Toilet में Bisleri की बोतल देख के बेहोश हो गया।

Oh my God! हम तो इसे पीते हैं, ……😝😝😝😝😝
[13/08, 10:40 a.m.] ‪+91 94144 62843‬: अब्दुल की फेसबुक पर एक लड़की से दोस्ती हो गयी। अब्दुल ने उसे इम्प्रेस करने के लिये लिखा ..,
“चौदहवीं का चांद हो या आफताब हो”.. 😍

थोड़ी देर में लड़की का जवाब आ गया, 🤠

आफताब ही हूँ अब्दुल भाई, फेक आईडी बनाई थी, फिर भी आपने पहचान लिया..
😳😬😂

By @sap_saket
[13/08, 10:40 a.m.] ‪+91 94144 62843‬: आदमी हवाई जहाज़ 🛬से उतरा
तो दरवाज़े पर खड़ी एयर होस्टेस बोली,
“उम्मीद है फ्लाइट में घर जैसा माहौल मिला होगा”!
आदमी ~ जी बिल्कुल नहीं, घर में तो मेरी कोई नहीं सुनता पर यहां तो बटन दबाते ही चार चार आ जाती हैं।।😜😂


दुनियादारी का फर्क तब समझ में आया 😉
जब एक कुंवारे के दरवाज़े पर लिखा देखा:
“Sweet Home”
.
और 😎
.
शादी-शुदा के दरवाजे पे : “ॐ शांति ॐ” 😝😀😁😂


ससुर का फ़ोन: दामाद जी, कल तुम्हारे साले के लिये लड़की देखने जाना है , हो सके तो आ जाओ

दामाद: आप लोग देखलो, मेरा तो खुदका डिसीजन गलत हुआ पड़ा है 😉😜


Wife : शादी से पहले तुम बहुत मंदिर जाते थे । अब क्या हो गया ?

HUsband : फिर तुमसे शादी हो गयी …
और भगवान से भरोसा उठ गया…….😜😜😜😜😜


साला आज-कल के साबुन देख कर,

पता ही नहीं चलता की नहाने के लिए है या खाने के लिए!!

मलाई..दूध..केशर..युक्त.😋😜


👼.. Bacha: मम्मी आप तो कहते थे कि परी उड़ती है ……….फिर अपनी पड़ोसन आंटी क्यों नहीं उड़ती????!!!

मम्मी : उस बंदरिया को परी किसने कहा??

बच्चा :डैडी ने . . .
मम्मी: तो फिर ….बेटा आज उड़ेगी ….वो भी और तेरा baap भी….
😄😜😜😜😝😝😂😂
[13/08, 10:40 a.m.] ‪+91 94144 62843‬: 😜😜

😃”….अरे बेटा ये पैर में पट्टी कैसी बांध रखी है क्या हुआ”,
“….कुछ नही अंकल बाइक से गिर गया चोट लग गयी है”
“….ओह हो हो बेटा “दवा-दारु” ले ली”
….”हां अंकल दारू तो गिरने से पहले ही ली थी और दवा गिरने के बाद….”

😇😁

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Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks