Posted in Rajniti Bharat ki

🙏भाजपा की मजबूरी >>><<<

🚩 समस्त कट्टर हिंदू “भाइयों से निवेदन है “की पूरा पोस्ट जरूर पढ़ें!
तथा इस पोस्ट को “अधिक से अधिक शेयर कर” भाजपा की मजबूरी को बताएं !

😣कुछ लोग यह “अफवाह फैलाते हैं “कि भाजपा की केंद्र में पूर्ण बहुमत की” मोदी सरकार है !

तथा उत्तर प्रदेश में भी पूर्ण बहुमत की” योगी सरकार है !

तब भी भाजपा “क्यों राम मंदिर का निर्माण तथा कश्मीर में धारा 370 हटाने का निर्णय” क्यों नहीं लेती है!

भाजपा सिर्फ” हिंदुत्व के नाम पर
हिंदू का वोट लेकर” हिंदू के लिए कोई काम नहीं करती !

👕 ऐसे लोगो के प्रश्न का उत्तर “मैं देता हूं !

😎कृपया ध्यान से पढ़ें “और समझे फिर विचार करें !

राज्यसभा में “”भाजपा के पास” बहुमत नहीं है !!!

🇮🇳भारत में किसी भी “बिल को कानून बनाने के लिए” संसद के दोनों सदनों में “बिल को पास कराना पड़ता है!
तभी वह बिल कानून बनता है !

🇮🇳 भारत में दो सदन हैं !
(1) लोकसभा (2) राज्यसभा

वर्तमान में “भाजपा के पास लोकसभा में बहुमत है !

🎇लेकिन “राज्यसभा में बहुमत नहीं है !

नोट >><< ( विधानसभा अलग होता है)

🌷लोकसभा का आशय >>><< लोकसभा में बहुमत ” सरकार बनाने के लिए होता है !
अर्थात- सरकार चलाने के लिए होता है !

💥राज्यसभा का आशय >>><<< राज्यसभा में बहुमत बिल को” पास कराकर “कानून बनाने के लिए होता है!
अर्थात- राज्यसभा में बहुमत संविधान” संशोधन के लिए होता है !

🏛 अगर भाजपा ” राम मंदिर निर्माण का बिल “लोकसभा में लाती है !

तो भाजपा “लोकसभा में अपने दम पर बिल को” लोकसभा मे पास करा ले जाएगी !

क्योंकि भाजपा के पास लोकसभा में बहुमत है !

अर्थात “भाजपा के अपने पास लोकसभा की 272 सीटें हैं !
जो पूर्ण बहुमत है !

लोकसभा में” बिल पास होने के बाद “राम मंदिर निर्माण का बिल राज्यसभा में जाएगा !

👎राज्यसभा में भाजपा के पास बहुमत नहीं है !

तथा कोई भी “राजनीतिक पार्टी राम मंदिर निर्माण के “इस बिल का समर्थन नहीं करेंगे !
👎जिससे बिल गिर जाएगा !

अर्थात राम मंदिर निर्माण का बिल” पास नहीं हो पाएगा !
जिससे राम मंदिर वाला” बिल कानून नहीं बनेगा !

😪सपा “बसपा” कांग्रेस तथा अन्य दल जो सेकुलर के नाम पर” इस बिल के विरोध में ही वोट करेंगी!

👉जैसे कि >><< तीन तलाक का मामला ही ले लीजिए!

✂भाजपा तीन तलाक के बिल को लोकसभा में “अपने दम पर पास करा ली!

लेकिन राज्यसभा में “भाजपा की बहुमत ना होने के कारण राज्यसभा में “तीन तलाक का बिल गिर गया !

जिससे तीन तलाक का बिल कानून नहीं बन सका !

🚩भाजपा को राज्य सभा में” 2019 के अंत तक “बहुमत होने की पूरी आशा है !

क्योंकि भारत के अधिकांश राज्यों में “भाजपा की सरकार बनी है !

जिस -जिस राज्य में “भाजपा की सरकार बनी है !
वहां पर “राज्यसभा की सीट खाली होने में अभी “2019 तक का समय लगेगा !

उसके बाद” उस राज्य की राज्य सभा सीट “पर
(राज्य सभा) सांसद” भाजपा का होगा !

🎠लेकिन उससे पहले” लोकसभा चुनाव में “भाजपा को अपने दम पर 272 सीटे ले कर पूर्ण बहुमत से जीतने के बाद ही” राज्यसभा में बहुमत का लाभ” भाजपा को मिल सकेगा !

👑राज्यसभा का चुनाव कैसे होता है आइए जाने >>><<<

भारत में 2 सदन होता है !

(1) लोकसभा (2) राज्यसभा

☝लोकसभा >><< लोकसभा का चुनाव” जनता सीधे अपने मत से करती है !

तथा जिस पार्टी के अधिक से अधिक सांसद जीतते हैं !
और बहुमत जिस पार्टी की होती है !
उसकी सरकार बनती हैं

जैसे >> वर्तमान में मोदी सरकार

✌राज्यसभा >>><< राज्यसभा का चुनाव जनता द्वारा “सीधे ना करके “जनता द्वारा चुने गए विधायक द्वारा होता है !

जिस भी पार्टी की” भारत के अधिक से अधिक राज्यों में सरकार होगी ”
उस पार्टी की राज्यसभा की सीट अधिक से अधिक होगी !

राज्यसभा संसद का कार्यकाल 6 वर्ष का होता है !

🌹अतः सभी राज्य सभा की सीट” एक साथ रिक्त (खाली) नहीं होती हैं !

( राज्यसभा को उच्च सदन भी कहते हैं)

जैसे >><< उत्तर प्रदेश में राज्यसभा सांसद “की कुल 31 सीटें हैं !

लेकिन वर्तमान में” सिर्फ 10 ही सीट खाली हो रही हैं !

एक बार “जो भी पार्टी की”राज्यसभा की सीटें चुनने लायक विधायक है” तो राज्यसभा सांसद चुनने के बाद”
उस पार्टी की सरकार भी गिर जाए या सरकार की कार्यकाल की अवधि भी पूरा हो जाए !

लेकिन उस पार्टी के” विधायक द्वारा चुने गए” राज्यसभा सांसद” अपने 6 साल के “कार्यकाल को पूरा करने के बाद ही “वह राज्य सभा सीट खाली होगी !

जब वह सीट रिक्त होंगी !
और उस समय” जिसकी पार्टी की” सरकार होगी या जिसके विधायक अधिक होंगे !

वह पार्टी “उस सीट पर “अपना राज्य सभा “सांसद चुनकर भेजेगीं !

वर्तमान में( भाजपा 323”
सपा 57 “बसपा 19 “कांग्रेस 7 “आरएलडी के एक विधायक हैं)

🤝 वर्तमान में उत्तर प्रदेश की 31 में से 10 सीटें खाली हो रही हैं !

भाजपा व भाजपा के सहयोगी पार्टी के पास” उत्तर प्रदेश में “अपना कुल मिलाकर 323 विधायक हैं !

इस हिसाब से भाजपा “8 राज्य सभा सांसद “अपने विधायको के बल पर जीत लेगी !

8 राज्य सभा सांसद चुनने के पश्चात” भाजपा व उसके सहयोगी पार्टी के पास 28 अतिरिक्त विधायक बचेंगे !

यानी नौवें राज्य सभा सांसद चुनने के लिए”” भाजपा को 9 अतिरिक्त ( एक्स्ट्रा) विधायक की जरूरत होगी !

🚲सपा के पास” वर्तमान में 47 विधायक हैं !

अर्थात सपा 47 विधायक के दम पर “एक राज्यसभा सांसद आसानी से चुन सकती है !

राज्य सभा सांसद चुनने के पश्चात “”सपा के पास 10 अतिरिक्त विधायक बचेंगे!

🐘बसपा के पास” इस समय 19 विधायक हैं !

इस हिसाब से” मायावती अपने विधायक के बल पर “एक भी राज्य सभा सांसद नहीं चुन सकती हैं !

इसलिए मायावती ने “सपा “बसपा “कांग्रेस “आरएलडी से समर्थन मांगी है

अगर सपा के 10 विधायक
(जो अतिरिक्त बचे हैं )

सपा के 10 “बसपा के 19
कांग्रेस के 7 तथा आरएलडी के एक विधायक मिलकर 37 का आंकड़ा पार कर लेंगे !

जिससे मायावती की पार्टी “को भी एक राज्य सभा सांसद मिल जाएग!

भाजपा अतिरिक्त “8 विधायकों की “व्यवस्था नहीं कर पा रही है

लेकिन बसपा 18 विधायक का समर्थन पा रही है !

⛲इसी प्रकार “भारत के सभी राज्यों में “राज्यसभा का चुनाव होता है !

🇮🇳भारत में जो भी पार्टी ” हिंदुत्व की बात करेगा !
वह पार्टी “संप्रदायिक हो जाती है !
जैसे >><< भाजपा

🍏जो भी पार्टी “मुस्लिम तुष्टिकरण करेंगी !
वह सेकूलर हो जाती हैं!

जैसे <<>> सपा “बसपा” कांग्रेस

सभी पार्टी “भाजपा को संप्रदायिक कह कर “भाजपा पार्टी” साथ कोई नहीं देंगी!

🌹 राज्यसभा में कुल 225 सीटें हैं !
वर्तमान में भाजपा के पास 75 सीटें हैं !
जो बहुमत से कम हैं ”

बहुमत के लिए “”राज्य सभा में 112 राज्य सभा सांसद होना चाहिए !

🐵राज्य सभा कभी “भंग नहीं होता है !

6 महीने या साल भर” के अंदर किसी ना किसी “राज्य मे राज्य सभा सांसद “”की सीट
रिक्त (खाली )होती रहती हैं!

#Copy#

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Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

बुद्धिमानों के साथ से मंद व्यक्ति भी बुद्धि प्राप्त कर लेते हैं जैसे रीठे के फल से उपचारित गन्दा पानी भी स्वच्छ हो जाता है

Posted in सुभाषित - Subhasit

दुर्जन: सज्जनो भूयात सज्जन: शांतिमाप्नुयात्।
शान्तो मुच्येत बंधेम्यो मुक्त: चान्यान् विमोच्येत्॥

दुर्जन सज्जन बनें, सज्जन शांति बनें। शांतजन बंधनों से मुक्त हों और मुक्त अन्य जनों को मुक्त करें।

Posted in संस्कृत साहित्य

🔴भारत मे व्यक्ति की उम्र-

स्वामी राम भारत के बाहर यात्रा में पहली दफा गये थे। जिस जहाज पर वे यात्रा कर रहे थे, उस पर एक बूढ़ा जर्मन था, जिसकी उम्र कोई 90 साल होगी। उसके सारे बाल सफेद हो चुके थे, उसकी आंखों में 90 साल की स्मृति ने गहराइयां भर दी थीं, उसके चेहरे पर झूर्रियां थीं लम्बे अनुभवों की; लेकिन वह जहाज के डैक पर बैठकर चीनी भाषा सीख रहा था!

चीनी भाषा सीखना साधारण बात नहीं है, क्योंकि चीनी भाषा के पास कोई वर्णमाला नहीं है, कोई अ ब स नहीं होता चीनी भाषा के पास। वह पिक्टोरियल लैंग्वेज है, उसके पास तो चित्र हैं। साधारण आदमी को साधारण शान के लिए कम से कम पांच हजार चित्रों का ज्ञान चाहिए तो एक लाख चित्रों का ज्ञान हो, तब कोई आदमी चीनी भाषा का पंडित हो सकता है। दस—पन्द्रह वर्ष का श्रम मांगती है चीनी भाषा। 90 साल का बूढ़ा सुबह से बैठकर सांझ तक चीनी भाषा सीख रहा है!

रामतीर्थ बेचैन हो गये। यह आदमी पागल है, 90 साल की उस में चीनी भाषा सीखने बैठा है, कब सीख पायेगा? आशा नहीं कि मरने के पहले सीख जायेगा। और अगर कोई दूर की कल्पना भी करे कि यह आदमी जी जायेगा दस—पन्द्रह साल, सौ साल पार कर जायेगा, जो कि भारतीय कभी कल्पना नहीं कर सकता कि सौ साल पार कर जायेगा। 35 साल पार करना तो मुश्किल हो जाता है, सौ कैसे पार करोगे? लेकिन समझ लें भूल—चूक भगवान की कि यह सौ साल से पार निकल जायेगा तो भी फायदा क्या है? जिस भाषा को सीखने में 15 वर्ष खर्च हों, उसका उपयोग भी तो दस—पच्चीस वर्ष करने का मौका मिलना चाहिए। सीखकर भी फायदा क्या होगा?

दो तीन दिन देखकर रामतीर्थ की बेचैनी बढ़ गयी। वह का तो आंख उठाकर भी नहीं देखता था कि कहां क्या हो रहा है, वह तो अपने सीखने में लगा था। तीसरे दिन उन्होंने जाकर उसे हिलाया और कहा कि महाशय, क्षमा करिये, मैं यह पूछता हूं कि आप यह क्या कर रहे हैं? इस उम्र में चीनी भाषा सीखने बैठे हैं? कब सीख पाइयेगा? और सीख भी लिया तो इसका उपयोग कब करियेगा? आपकी उम्र क्या है?

तो उस बूढ़े ने कहा, उम्र? मैं काम में इतना व्यस्त रहा कि उम्र का हिसाब रखने का कुछ मौका नहीं मिला। उम्र अपना हिसाब रखती होगी। हमें फुर्सत कहां कि उम्र का हिसाब रखें। और फायदा क्या है उम्र का हिसाब रखने में? मौत जब आनी है, तब आनी है। तुम चाहे कितने हिसाब रखो, कि कितने हो गये, उससे कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है। मुझे फुर्सत नहीं मिली उम्र का हिसाब रखने की, लेकिन जरूर नब्बे तो पार कर गया हूं।

रामतीर्थ ने कहा कि फिर यह सीखकर क्या फायदा? बूढ़े हो। अब कब सीख पाओगे? उस बूढ़े आदमी ने क्या कहा? उसने कहा, मरने का मुझे ख्याल नहीं आता, जब तक मैं सीख रहा हूं। जब सीखना खत्म हो जाएगा तो सोचूंगा मरने की बात। अभी तो सीखने में जिंदगी लगा रहा हूं अभी तो मैं बच्चा हूं क्योंकि मैं सीख रहा हूं। बच्चा सीखता है। लेकिन उस बूढ़े ने कहा कि चूंकि मैं सीख रहा हूं इसलिए बच्चा हूं।

यह आध्यात्मिक जगत में परिवर्तन हो गया।

उसने कहा, चूंकि मैं सीख रहा हूं और अभी सीख नहीं पाया, अभी तो जिंदगी की पाठशाला में प्रवेश किया है। अभी तो बच्चा हूं अभी से मरने की कैसे सोचें? जब सीख लूंगा, तब सोचूंगा मरने की बात।

फिर उस बूढ़े ने कहा, मौत हर रोज सामने खड़ी है। जिस दिन पैदा हुआ था, उस दिन उतनी ही सामने खड़ी थी, जितनी अभी खड़ी है। अगर मौत से डर जाता तो उसी दिन सीखना बंद कर देता। सीखने का क्या फायदा नहीं था? मौत आ सकती है कल, लेकिन 90 साल का अनुभव मेरा कहता है कि मैं 90 साल मौत को जीता हूं। रोज मौत का डर रहा है कि कल आ जायेगी, लेकिन आयी नहीं। 90 साल तक मौत नहीं आयी तो कल भी कैसे आयेगी? 90 साल का अनुभव कहता है कि अब तक नहीं आयी तो कल भी कैसे आ पायेगी? अनुभब करे मानता हूं। 90 साल तक डर फिजूल था। वह बूढ़ा पूछने लगा रामतीर्थ से आपकी उम्र क्या है?

रामतीर्थ तो घबरा ही गये थे उसकी बात सुनकर। उनकी उम्र केवल 30 वर्ष थी।

उस बूढ़े ने कहा, तुम्हें देखकर, तुम्हारे भय को देखकर मैं कह सकता हूं, भारत बूढ़ा क्यों हो गया। तीस साल का आदमी मौत की सोच रहा है! मर गया। मौत की सोचता कोई तब है, जब मर जाता है। तीस साल का आदमी सोचता है कि सीखने से क्या फायदा, मौत करीब आ रही है! यह आदमी जवान नहीं रहा। उस बूढ़े ने कहां, मैं समझ गया कि भारत बूढा क्यों हो गया है? इन्हीं गलत धारणाओं के कारण l♣️

ओशो

Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

संजय गुप्ता

प्राचीन काल की बात है, राजा भरत शालग्राम क्षेत्र में रहकर भगवान् वासुदेव की पूजा आदि करते हुए तपस्या कर रहे थे| उनकी एक मृग के प्रति आसक्ति हो गई थी, इसलिए अंतकाल में उसी का स्मरण करते हुए प्राण त्यागने के कारण उन्हें मृग होना पड़ा। मृगयोनि में भी वे ‘जातिस्मर’ हुए- उन्हें पूर्वजन्म की बातों का स्मरण रहा।

अतः उस मृगशरीर का परित्याग करके वे स्वयं ही योगबल से एक ब्राह्मण के रुप में प्रकट हुए।उन्हें अद्वैत ब्रहमा का पूर्ण बोध था।वे साक्षात् ब्रह्मास्वरुप थे, तो भी लोक में जडवत् (ज्ञानशून्य मूक की भाँति) व्यवहार करते थे।उन्हें हष्ट-पुष्ट देखकर सौवीर-नरेश के सेवक ने बेगार में लगाने के योग्य समझा और राजा की पालकी ढोने में नियुक्त कर दिया। सेवक के कहने से वे सौवीर-राजकी पालकी ढोने लगे। यधपि वे ज्ञानी थे, तथापि बेगार में पकड़े जाने पर अपने प्रारब्ध भोग का क्षय करने के लिए राजा का भार वहन करने लगे, परंतु उनकी गति मंद थी।वे पालकी में पीछे की ओर लगे थे तथा उनके सिवा दूसरे जितने कहार थे, वे सब-के-सब तेज चल रहे थे।राजा ने देखा अन्य कहार शीघ्रगामी है तथा तीव्र गति से चल रहे है, किंतु यह जो नया आया है, इसकी गति बहुत मंद है।तब वे बोले- ‘अरे! क्या तू थक गया? अभी तो तूने थोड़ी ही दूर तक मेरी पालकी ढोयी है। क्या परिश्रम नही सहा जाता? क्या तू मोटा-ताजा नही है? देखने में तो अत्यंत हष्ट-पुष्ट जान पड़ता है।

ब्राह्मण ने कहा- ‘राजन्! न मैं मोटा हूँ, न मैंने तुम्हारी पालकी ढोयी है, न मुझे थकावट आई है, न परिश्रम करना पड़ा है और न मुझ पर तुम्हारा कुछ भार ही है। पृथ्वी पर दोनों पैर है, पैरों पर जंघाएँ है, जंघाओं के ऊपर ऊरू और ऊरुओं के ऊपर उदर (पेट) है। उदर के ऊपर वक्षः स्थल, भुजाएँ और कंधे है तथा कंधों के ऊपर यह पालकी रखी गई है। फिर मेरे ऊपर यहाँ कौन-सा भार है? इस पालकी पर तुम्हारा कहा जाने वाला यह शरीर रखा हुआ है।वास्तव में तुम वहाँ (पालकी में) हो और मैं यहाँ (पृथ्वी)- पर हूँ- ऐसा तो कहा जाता है, वह सब मिथ्या है। सौवीर नरेश! मैं, तुम तथा अन्य जितने भी जीव है, सबका भार पंचभूतों के द्वारा ही ढोया जा रहा है।ये पंचभूत भी गुणों के प्रवाह में पड़कर चल रहे है। पृथ्वीनाथ! सत्व आदि गुण कर्मों के अधीन है तथा कर्म अविधा के द्वारा संचित है, जो संपूर्ण जीवों में वर्तमान है।आत्मा तो शुद्ध, अक्षय (अविनाशी), शांत, निर्गुण और प्रकृति से परे है। संपूर्ण प्राणियों में एक ही आत्मा है। उसकी न तो कभी वृद्धि होती है और न हास ही होता है। राजन्! जब उसकी वृद्धि नही होती और हास भी नही होता, तब तुमने किस युक्ति से व्यंगपूर्वक यह प्रश्न किया है कि ‘क्या तू मोटा-ताजा नही है?’ यदि पृथ्वी, पैर, जंघा, ऊरू, कटि और उदर आदि आधारों एवं कँधो पर रखी हुई यह पालकी मेरे लिए भार स्वरुप हो सकती है तो यह आपत्ति तुम्हारे लिए भी समान ही है, अर्थात् तुम्हारे लिए भी यह भार स्वरूप कही जा सकती है तथा इस युक्ति से अन्य सभी जंतुओं ने भी केवल पालकी ही नही उठा रखी है, पर्वत, पेड़, घर और पृथ्वी आदि का भार भी अपने ऊपर ले रखा है।नरेश! सोचो तो सही, जब प्रकृति जन्य साधनों से पुरुष सर्वथा भिन्न है तो कौन-सा महान् भार मुझे सहन करना पड़ता है? जिस द्रव्य से यह पालकी बनी है, उसी से मेरे, तुम्हारे तथा इन संपूर्ण प्राणियों के शरीरों का निर्माण हुआ है, इन सबकी समान द्रव्यों से पुष्टि हुई है।

यह सुनकर राजा पालकी से उतर पड़े और ब्राह्मण के चरण पकड़कर क्षमा माँगते हुए बोले- ‘भगवान्! अब पालकी छोड़कर मुझ पर कृपा कीजिऐ।मैं आपके मुख से कुछ सुनना चाहता हूँ, मुझे उपदेश दीजिए। साथ ही यह भी बताइए कि आप कौन है?’ और किस निमित अथवा किस कारण से यहाँ आपका आगमन हुआ है?
जयश्रीकृष्ण