Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार एक राजा ने दर्पण में अपना झुर्रिंयों से भरा चेहरा और सफेद केश देखे तो उसका मन व्याकुल व विरक्त हो गया। राजा अपना राजपाट अपने पुत्र को सौंप साधना हेतु वन की ओर चल दिया।

उधर राजकुमार शासन संभालने को पूरी तरह तैयार न था। राजकुमार ने अपने गुरु के पास जा राजपाट कैसे संभाले के बारे में मार्ग-दर्शन करने की विनती की।

गुरु ने कहा, ‘मैं तुम्हें एक मंत्र देता हूं, इस मंत्र का नाम है- ‘यह भी नहीं रहेगा।’ तुम इस मंत्र को अपनी भुजा पर गुदवा लो। जब भी तुम्हें राज-सत्ताया ऐश्वर्य और योग्यता का नशा छाए, तुम इस मंत्र का मनन करना औरसोचना कि यह क्षणिक है। इसी प्रकार जब कभी तुम्हें निराशा घेरने लगे और मन व्याकुल हो, तब भी इसी मंत्र का ध्यान करना कि यह भी नहीं रहेगा।‘ इस मंत्र से तुम्हारी बुद्धि सदा निर्मल रहेगी और तुम कभी अधीर नहीं होओगे। तुम सदैव संतुलित रहोगे

राजकुमार ने इस गुरु-मंत्र का निर्वाह करते हुए अपने पिता से भी अधिक अच्छी तरह राजभार संभाला और एक अच्छा शासक प्रमाणित हुआ।

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