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माँ भारती के इस बलिदानी बेटे का जन्म 23 जुलाई 1906 मध्यप्रदेश के गांव भाँवरा में हुआ ।
ये शहीदे आजम भगत सिंह से लगभग 1 वर्ष 2 महीने बड़े थे
भारत माता उस समय परतंत्रता की बेड़ियों में जकड़ी हुई थी अंग्रेजों ने भारतीयों को मानसिक रूप से गुलाम बनाने के लिये,
1857 की क्रांति की पुनरावर्ती से बचने के लिये और भारतीयों के गुस्से को एक मंच के माध्यम से बचने के लिये अंग्रेज अधिकारी ए.ओ.ह्यूम 1885 काँग्रेस की स्थापना कर चुके थे और अब दौर आया क्रान्तिकारियों के जन्म का। अधिकतर क्रांतिकारी 1905 से 1908 के बीच में जन्म लिये थे जिनमें हिंदुस्तान रिपब्लिकन आर्मी के संस्थापक अमर शहीद #चंद्रशेखरआजाद, नौजवान भारत सभा के संस्थापक शहीदे आजम #भगतसिंह, बटुकेश्वर दत्त , राजगुरु , सुखदेव , दुर्गा भाभी , आदि बड़ी संख्या में थे इधर क्रांति जन्म ले रहे थे ,और दूसरी तरफ काँग्रेस को अंग्रेजो के हाथ की कटपुतली बना देख , #लालालाजपतराय , बिपिन चन्द्र पाल , और बाल गंगाधर तिलक ने उस काँग्रेस से किनारा कर लिया और काँग्रेस 2 हिस्सो में बट गई गर्म दल ओर नरम दल। जब -जब जिस जिसको भी अंग्रेजो और काँग्रेस की मिली भगत का पता चलता वो वो कोंग्रेस छोड़ देता जैसे नेता जी सुभाष चन्द्र बोस कोंग्रेस में मगर सत्य का पता चलने पर कोंग्रेस को छोड़ दिया।

ऐसे ही अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद का बचपन भी क
काँग्रेस में बिता और कोंग्रेस के आंदोलन में बालक चंद्रशेखर ने भी बचपन में भाग लिया , चंद्रशेखर की गिरफ्तारी हुई कोड़े लगाए गए , और गिरफ्तार बालक को बना दिया आज़ाद , और जीवन भर आजादी के लिये संघर्ष करने वाले मां भारती के सच्चे सपूत ने इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क (वर्तमान के आज़ाद पार्क) में , #नेतराम_हलवाई (जिसकी दुकान अभी इलहाबाद आज़ाद पार्क के सामने है ) मोती लाल नेहरू (जिनका परिवार आज़ादी दिलाने का दम्भ भरता है) की #मुखबरी से 28 फरवरी 1931 को जब वो शहीदे आजम भगत को जेल से छुड़वाने की योजना बना रहे थे।
अंग्रेजो की पूरी बटालियन ने उन्हें घेर लिया , और माँ भारती के सच्चे सपूत ने अकेले घंटो तक अंग्रेजो का सामना किया अनेक अंग्रेजो को मृत्यु शय्या पर सुला दिया।
अंत में उनके पास 1 गोली बची उस अंतिम शेष बची गोली से और अपनी .32 mm की पिस्टल से खुद को गोली मारकर कभी जीवित अंग्रेजो के हाथ न आने वाली प्रतिज्ञा को पूरा करते हुए माँ भारती के चरणों में राष्ट्र के गौरव इस बेटे ने अपना अमर बलिदान दे दिया ।

माँ भारती के बलिदानी बेटे को आज 23 जुलाई को ,उनकी जयंती पर शत् शत् नमन !

हम #ह्रदयकीगहराईयों से #अश्रुपूर्ण_श्रद्धांजलि देते है।।

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