Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

संजय गुप्ता

सर आए हैं

“मम्मी, जल्दी करो। बस के हॉर्न की आवाज आयी थी, शायद सर आ गए हैं”, आप सोच रहे होंगे मैं ये क्या लिख रहा हूँ! सर स्कूल में पढ़ाते हैं और बस लेकर ड्राइवर आते हैं। बस आयी है तो सर कैसे आए हैं! बिल्कुल सही सोच रहे हैं आप लेकिन मैं भी ठीक लिख रहा हूँ। ये सर है राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, बारली के राजाराम जी जो स्कूल बस लेकर बच्चों को लेने-छोड़ने भी आते हैं, स्कूल में बच्चों को गणित और विज्ञान भी पढ़ाते हैं और वे ही उनके पी.टी. सर भी है।

है ना हैरत! पर हुआ यूँ कि पिछले चार-पाँच सालों सर देख रहे थे कि हर सप्ताह एक-दो, एक-दो बच्चे स्कूल छोड़ रहे हैं। माजरा कुछ समझ नहीं आ रहा था! नए सेशन के शुरू होते-होते तो कुल जमा 60 बच्चे ही रह गए थे। आखिर उन्होंने घर-घर जाकर बच्चों के अभिभावकों से मिलने की सोची। और बात समझ में आयी,- उन्हें चिन्ता थी बच्चों के सुरक्षित स्कूल पहुँचने की। असल में स्कूल गाँव से 6 कि.मी. दूर थी जिसे जंगल से गुजरता कच्चा रास्ता जोड़ता था। माता-पिताओं की चिन्ता वाजिब थी खासकर लड़कियों को लेकर।

अब एक ही समाधान था कि स्कूल के पास अपनी बस हो, लेकिन ऐसा कोई सरकारी प्रावधान तो था नहीं।

बच्चों के बारे में ही सोच रहे थे, ऐसे ही सोचते-सोचते उन्हें अपने ही पढ़ाये वे कुछ बच्चे याद आने लगे जो आज अच्छे पदों पर थे। बस उन्हें सिरा मिल गया, उन्होंने सम्पर्क साधना शुरू किया। उनमें से एक विजय ने 3 लाख की हामी भरी, और भी कईयों ने अपने हिसाब से मदद की, कुछ ने डीजल का खर्चा उठाने की कही तो कुछ ने रिपेयरिंग का और इस तरह 16-सीटर की एक मिनी बस का जुगाड़ हो गया।

अब सवाल था, ड्राइवर का। महीने की कम से कम 7-8 हजार की तनख्वाह के बिना यह सम्भव नहीं था। और हर महीने इसकी व्यवस्था करना बहुत मुश्किल था। पर ऐसे हमारे राजाराम सर भी कहाँ छोड़ने वाले थे!

आगे तो आप समझ ही गए।
वे सुबह बच्चों को लाने के चार-पाँच चक्कर लगाते हैं और इतने ही उनको छोड़ने के। बच्चे 60 से 90 तो हो ही गए हैं और लगता है जल्दी ही ये आँकड़ा 100 को पार कर जाएगा।

मैं इस कहानी को पढ़ते वक्त सोचने लगा था, हम सब राजाराम की ही तरह अपने काम से प्यार करने लगें, उसे अपना पूरा मन देने लगें तो उसी के सहारे हम अपने और समाज के लिए वो कर सकते हैं जो न जाने कितने ही साधनों और अवसरों से सम्भव नहीं।

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