Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

संजय गुप्ता

बहुत सुंदर भाव है एक भक्त का ठाकुर जी के प्रति अवश्य पढे श्री राधे 🙏जय हो राधे कृष्णा 🙏

(((((( मदन टेर के अन्धेबाबा ))))))
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आज से लगभग 70 वर्ष पूर्व वृन्दावन में मदनमोहन जी मंदिर के निकट किसी कुटिया में अन्धे बाबा रहते थे !
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उनका नाम कोई नहीं जानता था , सब लोग उन्हें मदन टेर के अन्धेबाबा के नाम से पुकारते थे , क्योंकि वे मदन टेर परही अधिक रहते थे !
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दिनभर राधा कृष्ण की लीलायों का स्मरण कर हुए आँसू बहाते ! संध्या समय गोविन्द देव जी के मन्दिर में जाकर रो-रो कर उनसे कुछ निवेदन करते हुए चले आते ,
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लोटते समय 2-4 घरो से मधुकरी मांग लेते और खाकर सो जाते ! पर आते-जाते , खाते-पीते हर समय उनके आँसू बहते रहते …
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आँसू बहने के कारण वे अपनी दृष्टि खो बेठे थे…. पर इस कारण वे तनिक भी घबराये नहीं ,
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घबराना तो तब होता जब वे इस जगत से कोई सरोकार रखते , जिसका नेत्रों को दर्शन करते थे… उनके नेत्रों की सार्थकता थी केवल प्रभु दर्शन में..
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जो नेत्र प्रभु का दर्शन नहीं करा सके थे , उनका ना रहना ही अच्छा था उनके लिए…
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पर अब दिन-रात रोते-रोते 40 साल बीत चुके थे.. जीवन की संध्या आ पहुँची थी .. अब उनसे रहा ना जाता… विरह वेदना असहय हो चली थी..
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वे कभी-कभी उस वेदना के कारण मुर्छित हो घंटो मदन टेर की झाड़ियो के बीच अचेत पड़े रहते थे…
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उनसे सहानुभूति करने वाला वह कोई ना था , केवल वहां के पक्षी मोर , कोकिल आदि अपने कलरव से उनकी चेतना जगाने की चेष्टा किया करते….
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एक दिन जब वे मदन टेर पर बेठे रो रहे थे , तो राधा कृष्ण टहलते हुए उधर आ निकले….
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बाबा को रोते देख राधाजी ने श्री कृष्ण को कहा….. ” प्यारे या बाबा बड़ो रोये है जाकर हँसा दो….
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“श्री कृष्ण ने बाबा के पास जाकर कहा…. “बाबा क्यों रो रहे हो.. आप को किसने मारा है…..कोई आपसे कुछ छीन के ले गया है….? ”
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बाबा ने कहा…. ” ना , तू जा यहाँ से
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“श्री कृष्ण ने कहा.. ” बाबा आप के लिए कुछ ला दूँ , रोटी ला दूँ और कुछ कहे सो ला दूँ , तू पर रो मत”
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बाबा ने कहा… ” तू जा ना जाके अपनी गईया चरा , तुझे काहे मतलब मुझसे ”
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कृष्ण ने राधाजी से जा कर कहा…. “बाबा तो नहीं मान रहे मुझसे , और बहुत रो रहे है…….
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“राधे ने कहा…….” प्यारे तुम नहीं हँसा सके उनको…. अब मैं हंसाती हूँ उनको..
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“श्री राधे ने बाबा के पास जाकर कहा…. “बाबा तू क्यों रो रहा है ? तेरा कोई मर गया है क्या…. ? ”
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बाबा हँस दिए और बोले… ” लाली मेरा कोई नहीं है……
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“तो राधे बोली….. ” अच्छा तो , जब तेरा कोई नहीं है तो तू क्यों रो रहा है..?
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“बाबा बोले…… ” लाली मैं इसलिए रो रहा हूँ , क्योंकि जो मेरा है वो मुझे भूल गया है..
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“श्री राधे बोली….. “कौन है तेरा बाबा..?
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बाबा बोले…. ” तू ना जाने ब्रज के छलिया के भजन करते- करते मैं बुडा हो गया. और उसने एक झलक भी नही दिखाई….
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और लाली क्या कहूँ…. . उसके संग से लाली……. राधे भी निष्ठुर हो गयी है… ”
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राधे चौंक पड़ी और बोली……. ” मैं-मैं निष्ठुर…. “दूसरे ही पल अपने को छिपाते बोली… “मेरो नाम भी राधे है , तू बता तू का चाहे…
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“बाबा बोले.. ” भोरी तो तू है….. जिस समय वे अपने कर-कमलों से स्पर्श करेंगे…… आँख में ज्योति ना आ जाएगी……
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“भोरी लाली से और रहा ना गया….. उसने अपने कर-कमलों से बाबा की एक आँख स्पर्श कर दी…
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उसी समय कान्हा ने भी बाबा की दूसरी आँख स्पर्श कर दी..
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स्पर्ष करते ही बाबा की आँखों की में ज्योति आ गयी. सामने खड़े राधा कृष्ण के दर्शन कर वे आनंद के कारण मुर्छित हो गए.
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मुर्छित अवस्था में वे सारी रात वही पड़े रहे.. प्रातः काल वृन्दावन परिक्रमा में निकले कुछ लोगो ने उन्हें पहचान लिया.
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वे उन्हें उसी अवस्था में मदनमोहन जी के मंदिर ले गए…
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मंदिर के गोस्वामी समझ गए की उनके ऊपर मदनमोहन जी की विशेष कृपा हुई है.
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उन्होंने उन्हें घेर कर सब के साथ कीर्तन किया……. कीर्तन की ध्वनि कान में पड़ते ही उन्हें धीरे-धीरे चेतना हो आई..
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तब गोस्वामी जी उन्हें एकांत में लेकर गए.. उनकी सेवा के बाद जब उन्होंने उनसे मूर्छा का कारण पूछा तो..
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उन्होंने रो-रो कर सारी घटना बता दी.. बाबा ने जिस वस्तु की कामना की थी….. वह उन्हें मिल गयी….. फिर भी उनका रोना बंद नहीं हुआ…
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रोना तो पहले से और भी ज्यादा हो गया…
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राधाकृष्ण से मिल कर बिछुड़ जाने का दुख उनके ना मिलने से भी कही ज्यादा तकलीफ वाला था..
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इस दुःख में रोते-रोते वे कुछ दिन के बाद जड़ देवत्याग कर सिद्ध देह से उनसे जा मिले..

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(((((((((( जय जय श्री राधे ))))))))))🙏हे मेरे कन्हैया
” अरमान तो बहुत मचलते हैं दिल में ”
” कि तुमसे मिलेंगे तो ये करेंगे ”
,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,वो कहेंगे ,,,,,,,,,,,,

” मगर जब दीदार होता हैं तुम्हारा ”
,,,,,,तो ,,,,,,
” हर बंधन से हम खुल जाते हैं ”
” तुम्हारी छवि में कुछ युँ खो जाते हैं ”
” कि बाकी सब भूल जाते हैं “

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