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लुटेरा पंडित

पंडित जी गांव मे एक यजमान के यहॉ सत्यनारायण कथा करके घर आए , और पत्नी सावित्री से बोले जरा एक गिलास पानी पिलाना । तभी पंडित जी की छोटी बेटी व बेटा दौडते हुए आए और बोले पापा हमारे लिए क्या लेकर आए तो पंडित जी ने थैली मे रखी आटे की प्रसाद और कुछ फल बच्चो को देते हुए कहा बेटा ये लो प्रसाद तुम्हारे लिए , बेटी बोली पापा मिठाई नही लाए पंडित जी बोले बेटा मिठाई यजमान लाए तो थे पर इतनी की सिर्फ वो व उनके घरवाले खा सके हमारे लिए तो सिर्फ आटे की प्रसाद बची ये खाऔ अगली बार मिठाई ले आऊंगा ।
तभी बेटा बोला पापा हमारे मास्टर जी कह रहे थे जल्दी स्कूल की फीस ( शुल्क ) भरदो नही तो परीक्षा मे नही बैठने देंगे । दुखी मन से पंडित जी ने कहा बेटा मास्टरजी से कहना जल्दी ही भर देगे ।
इतना सुनकर पंडिताईन ( पत्नी ) बोली सुनते हो दूर के रिश्तेदार के यहॉ शादी है हमे उनको कुछ तो देना चाहिए न ? यदि नही देगे तो कल को हमारे बच्चों की शादी मे नही आएगे वो ।
पंडित जी की ऑखो मे आंसू आ गए और बोले पंडिताईन तुम जानती हो पुरोहित कर्म करके मैं तुम सबकी इच्छाएँ पूरी नही कर पा रहा हूँ। आज सत्यनारायण कथा करवाई बदले मे 101 रुपये दक्षिणा मिली है और पचास रुपये चढावे मे आए अब तुम ही बताऔ इन 150 रुपये में बेटे की स्कूल फीस भरूँ या बेटी को कपडे दिलवाऊ या रिश्तेदार की शादी के लिए सामान खरीदूँ ??
आज अगर पैसा होता तो बच्चों को सरकारी स्कूल मे नही पढा रहा होता बल्कि किसी अच्छे प्रायवेट स्कुल मे पढाता ।
ब्राह्मण कुल मे पैदा हुआ हूँ यदि अपना पुरोहित कर्म छोड़ूँ तो पूर्वजो की कीर्ति को ठेस पहुचे और ये सब ही करता रहूँ तो बच्चो के भविष्य को बिगाडूं। पंडिताईन आज हमारा दुर्भाग्य ये है कि हम गरीब है फिर भी लोग मुझसे कहते है जब मै पूजा करवाकर घर आता हूँ तो कि यजमान को कितने का चूना लगाया । ये तो प्रभु जानते हे मैने चूना लगाया या नही लगाया । हम ब्राह्मण हैं तो हमे राशन नही मिलता , ब्राह्मण हैं तो मेरे बच्चों को छात्रवृत्ति ( स्कालरशिप ) नही मिलती , ब्राह्मण हैं तो मेरे बच्चो को निशुल्क किताबे नही मिलती , ब्राह्मण हैं इसलिए मेरे बच्चे की स्कूल फीस ज्यादा है ।
पंडिताईन हम ब्राह्मण कुल मे पैदा हुए क्या ये हमारा दोष है ??? ब्राह्मण गरीब नही हो सकता ??? पता नही हम ब्राह्मणो को सब लुटेरा क्यो समझते है ?? हमने किसका पैसा लूटा है ?? हे प्रभु हम कब तक ऐसे दयनिय स्थिति मे रहेगे ।
पंडिताईन बोली आप चिंता मत करिए ब्राह्मणो के हितैषी भगवान जानते है हमने कभी गलत नही किया एक न एक दिन हमारा भी भला होगा आप रोइए मत मेरे पायल और बिछिया गिरवी रखकर बेटे की फीस भर दीजिए और शादी का सामान ले आइए , इतना कहकर पंडिताईन रसोई मे भोजन बनाने चली गई व पंडित जी बच्चौ से बात करने लग गए…….।

ये अधिकांश ब्राह्मणो के घर की सच्ची कहानी है । हर ब्राह्मण अमीर नही होता ये बात समाज को समझ लेना चाहिए और इंसानों का हित करना चाहिए ना कि किसी जाति विशेष का।.

Saa

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