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#संजू

लखनऊ में एक तवायफ थी #जद्दनबाई।
नामचीन हस्तियों की रातें गुलज़ार होतीं थीं उसके कोठे पर।

ये भारत की आज़ादी के पहले की बात है।
आते रहे नवाबज़ादे, सेठ, ठाकुर, अंग्रेज साहब और देखते ही देखते जद्दनबाई की गोद में तीन फूल खिला गए।
जद्दनबाई तवायफ थी मगर दूरदर्शी महिला थी। उसने वक्त की नब्ज़ पढ़ ली कि दो बेटे और एक बेटी के साथ इस कोठे पर कोई भविष्य नहीं है। कल बेटी तवायफ बनेगी और उसके भाई उसकी दलाली खाएंगे। जद्दनबाई ने मुंबई की गाड़ी पकड़ ली और बच्चों के साथ मुंबई आ गई। स्थानीय मुस्लिम समाज की सहायता से उसे सर छुपाने की जगह मिल गई और धंधा भी, वही पुराना वाला।

बेटी नरगिस को उसने फिल्मों में आगे बढ़ने की प्रेरणा दी और अपने पहचान के लोगों से मदद लेकर उभरते हुए बॉलीवुड में प्रवेश करवा दिया।
नरगिस एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री साबित हुई और नई दूकान अच्छी तरह चल निकली। भाई लोगों को भी जूनियर आर्टिस्ट टाइप रोल मिलने लगे।
इसी समय लाहौरी लाला राज कपूर के नैना नरगिस से लड़ गए और फिर ये कहानी लंबी चली।
पृथ्वीराज कपूर को तवायफ की बेटी अपनी बहू के रूप में स्वीकार नहीं हुई और ये इश्क आधे रास्ते में ही निपट गया। तबतक राज कपूर और नरगिस के संबंध में बस विवाह की औपचारिकता बाकी थी। बाकी सब कुछ हो चुका था।
जबलपुर की घरेलू लड़की कृष्णा से विवाह कर राज कपूर ने कल्टी मार ली। नरगिस फोकट में लुटीपिटी भौंचक्की देखती रही।
इसके बाद उसका कैरियर ढलान पर आने लगा । अपनी संध्या वेला में उसने ख़्वाजा अहमद अब्बास की कालजयी रचना #मदरइंडिया की। इसमें उसके पुत्र की भूमिका निभाई थी तब के दमदार अभिनेता #सुनीलदत्त ने। फिल्म के एक दृश्य में आग में घिरने का सीन शूट करते हुए नरगिस सचमुच आग में घिर गई।
तब सुनील दत्त ने जान पर खेल कर उसको बचाया। इसके बाद परदे पर मां बेटे को प्यार हुआ और फिर उन्होंने शादी कर ली। नरगिस सुनील दत्त से उम्र में खासी बड़ी थी।

सुनील दत्त पंजाब के हुसैनी ब्राह्मण परिवार से हैं। हुसैनी ब्राह्मण वो लोग हैं जो कर्बला के युद्ध में हसन हुसैन की तरफ से वीरता से लड़े थे। ये भारत से वहाँ गए थे।

सुनील दत्त के परिवार को ये बेहूदा रिश्ता हजम नहीं हो सका होगा इसलिये आजतक उनके बारे में कोई चर्चा नहीं होती।
दो मुसलमान मामाओं और उनके मित्रों की परवरिश से सुनील दत्त का बेटा #संजय_दत्त हिंदुओं के प्रति घृणा पालते हुए बड़ा हुआ। नरगिस की मौत पर इन लोगों ने उसे हिंदू सुहागिन की तरह अंत्येष्टि प्राप्त नहीं होने दी और जद्दनबाई की कब्र के पास दफनाने को लेकर शवयात्रा में ही बवाल खड़ा कर दिया।
संजय दत्त अपने मामाओं के साथ था।

बाबरी विध्वंस के समय संजय दत्त के मन में हिंदुओं के लिए घृणा का उफान था और उसने दाउद इब्राहिम के विस्फोटक सामग्री से लदे दो ट्रक एक रात भर के लिए अपने यहाँ छुपाए। बदले में उसे दो ए.के. 47 गिफ्ट दी गई।
बमकाण्ड में गिरफ्तारी के बाद जेलयात्रा के लंबे अनुभव से उसे कुछ अकल आई होगी ऐसा सोचना मूर्खता होगी।

अभी जम्मू के कठुआ में एक मुस्लिम बच्ची के पाशविक बलात्कार पर जम्मू कश्मीर पुलिस के हिंदुओं पर थोपे झूठे केस में ये महान अभिनेता हिंदू होने पर शर्मसार होता दिखाई दिया था।
किंतु मंदसौर में साफ साफ इस्लामी बलात्कार के खिलाफ बोलने की न इसमें हिम्मत है और न इसे कोई संवेदना है।

ऐसे लोगों पर फिल्में बन रही हैं और हम मरे जा रहे हैं देखने के लिए। फिल्म बनाने वाले #राजकुमार_हीरानी की तारीफ़ में क्या कहें??? इतना ही पर्याप्त है कि इनकी पिछली फिल्म #पीके हिंदू धर्म का मजाक उड़ाने के लिए ही बनी थी और हमने उसे भी ५००+ करोड़ की कमाई दी थी।
राष्ट्रवादी भविष्य में संन्यासी ही होंगे। दीमक अंदर तक घुस गई है। अब इस वृक्ष को आग लगा कर ही समस्त वन को बचाया जा सकता है।
#BoycottMovie”SANJU”

निओ डीप

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