Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

नाकारा पति
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राशि का आज शादी के बाद पहला दिन था। बहुत सपने देखे थे उसने। पर सुबह होते ही टूट गए।
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सासु माँ ने उठते ही बोल दिया, कल से जल्दी उठना। उसने सोचा थोड़ा प्यार से ही बोल देती…..खैर कुछ दिन और बीते उसे समझ में आया कि …उसका पति मनोज है तो बहुत अच्छा …. उसे प्यार भी करता है …. पर… राशि बस अपनी सासु माँ के ताने ही सुनती रहती। पति के साथ तो मौका ही नहीं था दो पल बैठने का।…….मेरे बेटे के लिए ये बना दे।उसके महंगे कपड़े हाथ से धो। सुबह जल्दी उठा करो।तैयार हो कर रहा करो,दिन भर यही कुछ ना कुछ सुनती रहती। कभी अच्छा बोला ही नहीं।
मनोज सब देखता पर चुप रहता। क्या करता वो भी।माँ को बोले तो पत्नी नाराज और…… । ….पापा बीच में पड़ते नहीं थे। राशि बहुत बुझी सी रहती। मनोज को वो बहुत चाहती थी पर ये चाहत गुस्से में बदल रही थी।…..वो हमेशा सोचती कभी तो उसका साथ दे मनोज।
डेढ़ साल बाद राशि और मनोज के यहाँ बेटा हुआ। सब खुुश थे। पर राशि की सास के वही हाल थे ।राशि अब कभी कभी सोचती …क़ि ये बच्चा ना होता तो वो एेसे खड़ूस आदमी के साथ रहती ही नहीं| राशि… पागल सी हो गई थी राशि …. बच्चा… घर.. काम…ऊपर से सासु माँ ।…. सूख के कांटा हो गई थी वो ।
मनोज ने टोका भी। तो उसने कहा कि घर के कामों के लिए मैड रख ले जब तक छोटा है बच्चा । सासु माँ ने मना कर दिया।मनोज सब समझता था कि घर में चल क्या रहा है पर उसका फायदा? राशि चिडचिड़ी हो गई उसके दिल में सिर्फ कड़वाहट भरती जा रही थी।
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एक दिन मनोज ऑफिस से आया और सबको बताया कि उसको ऑफिस से नयी साइट मिली है .. जो घर से बहुत दूर है। दो घन्टे आने जाने में लगेंगे। सबको चिंता हुई। इतना ट्रैफिक है पहले ही, वो लेट हो जाता है, इतनी दूर कैसे जाएगा?मनोज के पापा ने राय दी कि वहीं घर लेकर रह लेना चाहिए मनोज और राशि को। ….राशि सब सुन रही थी, उसकी आँखों में चमक अा गई। सासु मां को ये बिलकुल अच्छा न लगा। मनोज ने समझाया कि बहुत देर हो जाया करेगी आने में। इतनी गाड़ी कैसे चलाउंगा। राशि की सासु माँ को लगा बेटा परेशान होगा । बेटे की तकलीफ देख वो भी आखिर मान गई।
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सासु माँ ने मनोज को बोला कि हमने तेरी शादी में दहेज़ का सामान तो लिया नहीं। अब मांग ले इसके पापा से। शिफ़्ट करेगा तो सामान तो चाहिए ही।
मनोज ने माँ को बताया कि कंपनी फर्नीचर सहित घर दे रही है। तो क्या मांगू।राशि और मनोज दोनो एक दूसरे के लिए बहुत अच्छे थे ये बात दोनो जानते भी थे,लेकिन मनोज माँ के मामले में लाचार था….माँ को दुखी कैसे करे। …. सब जानते हुए भी दोनो के रिश्ते मे दूरियाँ आ गई थी।
आखिर वो दिन आ गया जब मनोज और राशि अपने नए घर में चले गए। राशि अगले दिन जल्दी उठ गई, कि आज अपनी पसंद का टिफ़िन बना के देगी। उसने सोचा अब तो ऑफिस पास है तो मनोज और थोड़ा देर तक सोएगा। पर मनोज तो नहाने की तैयारी कर रहा था। राशि ने उससे कहा कि ऑफिस तो पास है। क्यों इतना जल्दी तैयार हो रहे हो?
मनोज मुस्कुरा के बोला, “नहीं राशि, ऑफिस तो वहीं हैं जहाँ था। अब दूरी बढ़ गई ,क्यूंकि हम यहाँ अा गए। तो जल्दी निकलना होगा अब “। राशि को कुछ समझ नहीं आया। वो अागे बोला, “राशि मैंने झूठ कहा था। मुझे कोई नई साइट नहीं दी गई है | यहाँ तुम्हारे लिए आया हूँ”। राशि हैरान थी कि मनोज ने इतना बड़ा कदम उठा लिया और वो कितना गलत सोच रही थी|
मनोज आगे बोला, “राशि अगर माँ को बोलता कि मुझे उनके साथ नहीं रहना तो उनको दुःख होता। इस उम्र में उनको क्या दुःख देता ।मैैं जानता हूँ राशि , तुम पर क्या क्या बीती है। सब देखता था मैं। पर क्या करता। दोनों को ही दुःख नहीं पहुँचा सकता था।
माँ की ये उम्र नहीं कि वो बदल जाए।….. तुमसे भी वादा किया था कि हमेशा खुश रखूँगा । बच्चे के लिए माँ और माँ के लिए उसका बच्चा, दुनिया में हमेशा सबसे अच्छे होते हैं एक दूसरे के लिए। …..उन्होंने तुमको नहीं अपनाया पर मैं तो उनकी औलाद हूँ। मेरी तकलीफ देख उन्होंने झट से मुझे भेज दिया। पर यही मैं सीधा बोलता तो सारी उम्र वो दुखी रहती। मुझे लगा कि हमारे बच्चा होने के बाद माँ बदल जाएगी पर एेसा कुछ नहीं हुआ| ……..
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तुम बहुत अच्छी हो राशि ।तुमने बहुत सहा,उसके लिए माफ़ कर देना माँ को और मुझे। पर अब तुम्हारी बारी है खुश रहने की। अब मेरी बारी है तुमको खुश रखने की। थोड़ी देर हुई है मुझसे….लड़के फंस जातेे हैं कभी कभी माँ और बीवी मेें…. पर तुम समझोगी मेरी मज़बूरी मुझे यकीन है ….हर दो हफ्ते में मिलने चले जाया करेंगे और रात को वापस आजाएंगे।
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राशि को यकीन नहीं हो रहा था। सारा घर का सामान मनोज ने अपने पैसों से लिया था। तभी मनोज हंस के बोला, अच्छा सुनो, सोसाइटी के गेट पर मैड के लिए कल कहा था। आएगी तो तुम देख लेना। राशन तो मुझे लेना अाता नहीं। …ज़रूरी चीजें रख दी हैं बाकि तुम नीचे दुकान से आर्डर कर देना वो दे जाएगा और सुनो अपनी पसंद का टिफ़िन बना दो”।राशि खड़ी सुन रही थी बस।या तो इन्सान खुशी से नाचता है या बिलकुल चुप हो जाता है। राशि के साथ भी यही हुआ ,उसको उम्मीद ही नहीं थी यह दिन कभी आएगा………

संजय गुप्ता

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😎 सत्य कथा :- एक लड़का मुम्बई से रेलवे का परीक्षा देकर, अपने सीट पर जैसे ही बैठा। एक लड़की हाँफते हुए आयी। लड़के से बोली, की मुझे बचा लो, प्लीज! लड़का कुछ समझता कि वह लड़की कम्बल लेकर लड़के के पैर के ऊपर अपना सर रखकर सो गयी। काफी दूर जब ट्रेन निकल गयी। तो उस लड़की ने लड़के से पूछी की यह ट्रेन कहाँ तक जायेगी।

लड़के ने कहा कि लखनऊ! तब तक टीसी आया। बोला कि टिकट दिखाइये। लड़की ने कहा कि आप लखनऊ तक का टिकट बना दीजिये। लड़का लखनऊ तक आते आते उस लड़की से घुलमिल गया था। ट्रेन जब लखनऊ स्टेशन पर रुकी। तो उस लड़के से बोली कि, मैं इस शहर में नई हूँ। मेरे एक रिश्तेदार रहते हैं। लेकिन बैग में पता रखते समय भूल गयी। आप दो चार दिन अपने घर मुझे रख लीजिये। लड़के ने कहा कि ठीक हैं। जब लड़का अपने घर पहुँचा, घर की बेल बजायी। तो लड़के की बहन देख कर हैरान रह गयी। कि भैया परीक्षा देने गया था। तो रिजेल्ट भी साथ लाया हैं। लड़के ने लड़की की मजबूरी बतायी। घर वाले राजी हो गए। लड़की दूसरे दिन घर मे इतना राशन खरीद कर रख दी। कि घर वाले भूल ही गये कि, इस लड़की को इसके रिश्तेदार के यहाँ छोड़ना हैं। लड़के के बहन की शादी तो तय हो गयी। लेकिन 80 हजार रुपये दहेज में कम पड़ रहे थे। लड़के के पिता जी लोन लेने की बात कर रहे थे। इतने में वह लड़की बोली कि बाबू जी, आप लोन मत लीजिये। हम आप को दे देंगे। शादी बड़ी धूमधाम से हुई।

बहन की शादी के बाद लड़के ने लड़की से कहा कि, मैं तुमसे प्यार करता हूँ। मुझसे शादी करोगी। लड़की बोली कि यही बात अम्मा बाबूजी के सामने रखिये। लड़के ने कहा कि यह बात अम्मा बाबूजी जी से राय लेकर बोला हूँ। लड़की सबके सामने कही की मेरे बारे में बेगैर जाने ही आप लोग शादी के बारे में सोच लिये। सच्चाई जानने के बाद क्या आप मुझसे शादी करेंगे। जब वह बतायी कि, मुम्बई के रेड एलर्ड एरिया के एक कोठे के मालकिन की बेटी हूँ। जब मुझे मालूम हुआ कि आज मेरी कीमत लग गयी हैं। तो माँ से बोली कि इस दलदल में मुझे मत डालो। मुझे पढ़ा लिखाकर क्या यही करने के लिये सोची हो। मुझे मेरी माँ ने कहा कि, बेटी तू ग्राहक आने से पहले कही भाग जा।

तब मैं भाग कर यहाँ आ गयी। यह सुनकर सबके पाव तले जमीन खिसक गई। और उस लड़की से बोलना बन्द कर दिए। यह बात तत्काल बेटी को ससुराल में मालूम हुई। लड़की ने अपने पति से बोली कि, मुझे अपने मायके जाना हैं। वह तत्काल अपने मायके जैसे ही पहुँची। लड़की अपना कपड़ा समेट कर घर से निकलने वाली थी। लड़की ने कहा कि कहाँ जा रही हो। तो वह बोली कि भगवान जाने। इतना कहकर वह फफककर रोने लगी। और कहने लगी कि आप लोग का प्यार बहुत मिला।

लड़की ने अपने माता पिता भाई से बोली कि, आप लोग बहुत गिरे इंसान हो। जबसे भाभी घर मे आयी। आज दो साल से यह साग सब्जी राशन पानी लायी। तब गन्दी नही थी। जब मेरे शादी में 80 हजार दी तब गन्दी नही थी। मेरे शादी का सारा सामान खरीदकर मुझे दी। तब गन्दी नही थी। ये जेवर बनवाकर मुझे दी। तब गन्दी नही थी। मेरे शादी में सारा खर्च जब यह उठाई तो गन्दी नही थी। तब तो आप लोग प्रसन्सा की पुल आप लोग बांधते थे। की यह बेटी नही साक्षात लक्ष्मी हैं। अगर भाभी की जगह आप की बेटी होती तो आप मुझे भी घर से निकाल देते। भाई का हाथ पकड़ कर बोली, क्यो भैया जब आप भाभी को लेकर दिन रात घुमते थे। तब गन्दी नही थी। आज गन्दी हो गयी। अगर भाभी से आप भैया शादी नही किये। तो मैं कभी नही आप के दरवाजे पर आऊँगी। हम लड़कियों को यही समाज गन्दा बनाता हैं। कोठे पर ले जाकर बेच देता हैं। और कोठे पर जाकर सोता हैं। तब कुछ इज्जत के बारे में नही सोचता हैं। अपनाने में इज्जत चली जाती हैं। बेटी की बात सुनकर सब कहे कि शादी होगी।

लड़की ने कहा कि नही बाबू जी, शादी तब करूँगी। जब यह घर इस महल्ले में सबसे आलीशान बन जायेगा। लड़के ने कहा कि मेरे बाबूजी के पास इतना पैसा नही हैं। लड़की ने कहा कि मैं बनवाऊँगी। लड़की ने अपने माँ को टेलीफोन की। लड़की की माँ ने 50 लाख रुपया एक आदमी के माध्यम से भेजवा दी। आलीशान मकान बनने के बाद, एक बहुत बड़ी TV फ्रिज की दुकान खोलवाई। तब शादी की। यह समाज जानने के बाद भी, शादी में गया। किसीं ने कोई गलत बात नही की। सच्चाई जानने के बाद भी समाज ने यह कहना शुरू कर दिया। कि यह तो साक्षात लक्ष्मी हैं। घर की तस्वीर बदल दी।

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संजय गुप्ता