Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

बहुत सुन्दर लाइन
Ek bar jroor pdhe

एक संत की कथा में एक बालिका खड़ी हो गई।
चेहरे पर झलकता आक्रोश…

संत ने पूछा – बोलो बेटी क्या बात है?

बालिका ने कहा- महाराज हमारे समाज में लड़कों को हर प्रकार की आजादी होती है।
वह कुछ भी करे, कहीं भी जाए उस पर कोई खास टोका टाकी नहीं होती।
इसके विपरीत लड़कियों को बात बात पर टोका जाता है।
यह मत करो, यहाँ मत जाओ, घर जल्दी आ जाओ आदि।

संत मुस्कुराए और कहा…

बेटी तुमने कभी लोहे की दुकान के बाहर पड़े लोहे के गार्डर देखे हैं?
ये गार्डर सर्दी, गर्मी, बरसात, रात दिन इसी प्रकार पड़े रहते हैं।
इसके बावजूद इनका कुछ नहीं बिगड़ता और इनकी कीमत पर भी कोई अन्तर नहीं पड़ता।
लड़कों के लिए कुछ इसी प्रकार की सोच है समाज में।

अब तुम चलो एक ज्वेलरी शॉप में।
एक बड़ी तिजोरी, उसमें एक छोटी तिजोरी।
उसमें रखी छोटी सुन्दर सी डिब्बी में रेशम पर नज़ाकत से रखा चमचमाता हीरा।
क्योंकि जौहरी जानता है कि अगर हीरे में जरा भी खरोंच आ गई तो उसकी कोई कीमत नहीं रहेगी।

समाज में बेटियों की अहमियत भी कुछ इसी प्रकार की है।
पूरे घर को रोशन करती झिलमिलाते हीरे की तरह।
जरा सी खरोंच से उसके और उसके परिवार के पास कुछ नहीं बचता।
बस यही अन्तर है लड़कियों और लड़कों में।

पूरी सभा में चुप्पी छा गई।
उस बेटी के साथ पूरी सभा की आँखों में छाई नमी साफ-साफ बता रही थी लोहे और हीरे में फर्क।।।

प्लीज , आप से मेरा
हाथ जोडकर निवेदन हैं कि ये मैसेज अपनी बेटी-बहन को अवश्य पढायें और दोस्तों में , रिश्तेदारों के साथ, सभी ग्रुप्स में शेयर करें ।

मिस रीमा सिंघ

Posted in हिन्दू पतन

1948 में हिन्दू मुस्लिम दंगा हुवा
एक मुस्लिम लड़का हिन्दुओं के एक गांव में फस गया था एक हिन्दु ने उसे साडी पहनाकर उसके घर ले जाकर छोड़ा ।
लड़का घर के अंदर गया और हिन्दु दरवाजे पर खड़ा था की उसके माँ बाप खुश होकर बधाई देगे
मुस्लिम के माँ बाप ने कहा बेटे तू कैसे बच गया
लड़का बोला एक नेक हिन्दु लड़के ने मुझे साडी पहनाकर घर तक छोड़ा आप लोग उसका धन्यवाद करिये
मुस्लिम लड़के के बाप ने कहा की बेटे हमारे धर्म में किसी का कोई एहसान नही होता हैं ।
तू अपने धर्म का पालन कर जाकर मार दे उस हिन्दु को और अपने लड़के के हाथ में तलवार दे दी ।
मुस्लिम लड़का तलवार लेकर बाहर आया हिन्दु लड़का जो सारी बाते सुन रहा था वह बोला की भाई यह क्या हैं
मुस्लिम लड़के ने कहा की हमारे धर्म में काफिर पर रहम नही किया जाता चाहे वह हमारे घर पर शरण में ही क्यू न आया हो ।
हिन्दु ने कहा की हमने तो तुमारी जान बचाई और तुम हमे ही मार रहे हो कोई बात नही एक गिलास पानी तो पिला दो फिर मार देना मुस्लिम लड़का जैसे पानी लेने के लिए मुड़ा हिन्दु ने तुरन्त उसकी तलवार छीनकर उसकी गर्दन उड़ा दी और घर में घुसकर बोला
की तुम्हारे में शरण में आये को भी नही छोड़ते
और हम गद्दारो को उसके घर में घुसकर काट देते हैं ।
7 मुसलमान को काट कर वह हिन्दु भाई खुनी तलवार लेकर अपने घर गया और अपने बाप को सारी हकीकत बतायी ॥
भिवानी से आये महमलडलेश्वर ने यह सच्ची घटना धर्म संसद हरिद्वार 2016 में बताई
आस्तीन में साप पालोगे तो जहर ही मिलेगा ॥

Posted in હાસ્ય કવિતા

पता नहीं किसकी रचना है लेकिन बड़े ही तीखे व्यंग कसे हैं । ज़बरदस्त !!!

एकदम फ्रेश एवं समसामयिक….😊😊👍👍

तुम मायावती सी स्वप्नसुंदरी,
मै राहुल सा समझदार प्रिये।
कर्नाटक के गठबंधन सा,
हैं तेरा मेरा प्यार प्रिये।।👏👏👏👏

मैं आरएसएस का उग्रवाद,
तुम आईएसएस का शान्तरूप।
मैं मंदिर का कर्णकटु शंखनाद,
तुम अजान सी मधुर झंकार प्रिये।।😜😜😜😜😜

तुम व्हाटसैप मैं टेलीग्राम,
तुम नेट बैंकिंग मैं मनिऑर्डर।
तुम बुलेट ट्रेन सी द्रुतगामी,
मैं खच्चर ऊंट सवार प्रिये।।
😍😍😍😍😍😍😍
सोनिया सी त्यागमूर्ति हो तुम,
मैं हूं अटल सा पद लोलुप।
मैं नाम का पीएम मनमोहन,
तुम ही असली सरकार प्रिये।।
👏👏👏👏👏👏👏👏
तुम रेणुका की सी स्मित मंद,
और मैं स्मृति का अटृहास।
तुम मर्यादित भाषा निरुपम की,
मैं अडवाणी वाचाल प्रिये।😜😜😜😜😜😜😜😜😜

तुम गगनचुम्बी पेट्रोल भाव,
मैं इंटरनेट सा सस्ता हूं।
लेकिन हम दोनों से ही है,
इस दुनियां की रफ्तार प्रिये।।
👏👏👏👏👏👏
तुम लालू जैसी पशुप्रेमी,
निर्दोष टूजी, सीजी बोफोर्स
तुम चिदम्बरम सी ईमानदार,
मुझसे लज्जित भ्रष्टाचार प्रिये।।😍😍😍😍😍😍😍

तुम सेकुलर कांग्रेस जैसी,
मैं साम्प्रदायिक बीजेपी सा।
तेरी काली करतूतों का,
मैं ढोता सर पर भार प्रिये।।
👏👏👏👏👏👏👏👏👏
तुम दिग्विजय सिंघवी चरित्रवान,
मैं योगी मोदी सा पतित।
तुम औवेसी जैसी देशभक्त,
मैं द्रोही गुनाहगार प्रिये।।😜😜😜😜😜😜😜

तुम मासूम हो पत्थरबाजों सी,
मैं तुझसे पिटता क्रूर सैनिक।
तू वोट बैंक का स्ट्रांग रूम,
मैं तेरे आगे लाचार प्रिये।।👏👏👏👏👏👏👏👏

तुम वेटिकन का लव लेटर,
तुम देवबंद का फतवा हो।
मैं खामोशी संत महंतों की,
और मिथ्या गीता सार प्रिये।।
😜😜😜😜😜😜😜😜😜
मैं कश्मीरी पंडित अतिक्रमी,
तुम पीड़ित निरीह रोहिंग्या हो।
मैं रिफ्यूजी कैंप के हूं काबिल,
तुम भारत की हकदार प्रिये।।

😍😍😍😍😍😍😍😍😍तुम भारत गौरव जिन्ना हो,
मैं भगतसिंह आतंकवादी।
भारत की आज़ादी के श्रेय पर,
है तेरा ही अधिकार प्रिये।।👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏
🌹🙏🌹🌹🙏🌹🙏

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

दूसरों को सही-गलत साबित करने में जल्दबाजी न करें | 2 कहानियाँ

पहली कहानी :

ट्रेन में एक पिता-पुत्र सफर कर रहे थे.

24 वर्षीय पुत्र खिड़की से बाहर देख रहा था, अचानक वो चिल्लाया – पापा देखो पेड़ पीछे की ओर भाग रहे हैं !
पिता कुछ बोला नहीं, बस सुनकर मुस्कुरा दिया. ये देखकर बगल में बैठे एक युवा दम्पति को अजीब लगा और उस लड़के के बचकाने व्यवहार पर दया भी आई.

तब तक वो लड़का फिर से बोला – पापा देखो बादल हमारे साथ दौड़ रहे हैं !

युवा दम्पति से रहा नहीं गया और वो उसके पिता से बोल पड़े – आप अपने लड़के को किसी अच्छे डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते ?

लड़के का पिता मुस्कुराया और बोला – हमने दिखाया था और हम अभी सीधे हॉस्पिटल से ही आ रहे हैं. मेरा लड़का जन्म से अंधा था और आज वो यह दुनिया पहली बार देख रहा है.

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दूसरी कहानी :

एक प्रोफेसर अपनी क्लास में कहानी सुना रहे थे, जोकि इस प्रकार है –

एक बार समुद्र के बीच में एक बड़े जहाज पर बड़ी दुर्घटना हो गयी. कप्तान ने शिप खाली करने का आदेश दिया. जहाज पर एक युवा दम्पति थे. जब लाइफबोट पर चढ़ने का उनका नम्बर आया तो देखा गया नाव पर केवल एक व्यक्ति के लिए ही जगह है. इस मौके पर आदमी ने औरत को धक्का दिया और नाव पर कूद गया.

डूबते हुए जहाज पर खड़ी औरत ने जाते हुए अपने पति से चिल्लाकर एक वाक्य कहा.
अब प्रोफेसर ने रुककर स्टूडेंट्स से पूछा – तुम लोगों को क्या लगता है, उस स्त्री ने अपने पति से क्या कहा होगा ?

ज्यादातर विद्यार्थी फ़ौरन चिल्लाये – स्त्री ने कहा – मैं तुमसे नफरत करती हूँ ! I hate you !

प्रोफेसर ने देखा एक स्टूडेंट एकदम शांत बैठा हुआ था, प्रोफेसर ने उससे पूछा कि तुम बताओ तुम्हे क्या लगता है ?

वो लड़का बोला – मुझे लगता है, औरत ने कहा होगा – हमारे बच्चे का ख्याल रखना !

प्रोफेसर को आश्चर्य हुआ, उन्होंने लडके से पूछा – क्या तुमने यह कहानी पहले सुन रखी थी ?

लड़का बोला- जी नहीं, लेकिन यही बात बीमारी से मरती हुई मेरी माँ ने मेरे पिता से कही थी.

प्रोफेसर ने दुखपूर्वक कहा – तुम्हारा उत्तर सही है !

प्रोफेसर ने कहानी आगे बढ़ाई – जहाज डूब गया, स्त्री मर गयी, पति किनारे पहुंचा और उसने अपना बाकि जीवन अपनी एकमात्र पुत्री के समुचित लालन-पालन में लगा दिया. कई सालों बाद जब वो व्यक्ति मर गया तो एक दिन सफाई करते हुए उसकी लड़की को अपने पिता की एक डायरी मिली.

डायरी से उसे पता चला कि जिस समय उसके माता-पिता उस जहाज पर सफर कर रहे थे तो उसकी माँ एक जानलेवा बीमारी से ग्रस्त थी और उनके जीवन के कुछ दिन ही शेष थे.

ऐसे कठिन मौके पर उसके पिता ने एक कड़ा निर्णय लिया और लाइफबोट पर कूद गया. उसके पिता ने डायरी में लिखा था – तुम्हारे बिना मेरे जीवन को कोई मतलब नहीं, मैं तो तुम्हारे साथ ही समंदर में समा जाना चाहता था. लेकिन अपनी संतान का ख्याल आने पर मुझे तुमको अकेले छोड़कर जाना पड़ा.

जब प्रोफेसर ने कहानी समाप्त की तो, पूरी क्लास में शांति थी.

      —————

इस संसार में कईयों सही गलत बातें हैं लेकिन उसके अतिरिक्त भी कई जटिलतायें हैं, जिन्हें समझना आसान नहीं. इसीलिए ऊपरी सतह से देखकर बिना गहराई को जाने-समझे हर परिस्थिति का एकदम सही आकलन नहीं किया जा सकता.

मिस रीमा सिंघ

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किसी गाँव में चार मित्र रहते थे।
चारों में इतनी घनी मित्रता थी कि हर समय साथ रहते उठते बैठते, योजनाएँ बनाते।
एक ब्राह्मण
एक ठाकुर
एक बनिया और
एक नाई था
पर कभी भी चारों में जाति का भाव नहीं था गज़ब की एकता थी।

इसी एकता के चलते वे गाँव के किसानों के खेत से गन्ने
चने
आदि चीजे उखाड़ कर खाते थे।

एक दिन इन चारों ने किसी किसान के खेत से चने के झाड़ उखाड़े और खेत में ही बैठकर हरी हरी फलियों का स्वाद लेने लगे।

खेत का मालिक किसान आया
चारों की दावत देखी उसे बहुत क्रोध आया
उसका मन किया कि लट्ठ उठाकर चारों को पीटे
पर चार के आगे एक?
वो स्वयं पिट जाता
सो उसने एक युक्ति सोची।

चारों के पास गया,
ब्राह्मण के पाँव छुए,
ठाकुर साहब की जयकार की
बनिया महाजन से राम जुहार और फिर
नाई से बोला–
देख भाई
ब्राह्मण देवता धरती के देव हैं,
ठाकुर साहब तो सबके मालिक हैं अन्नदाता हैं,
महाजन सबको उधारी दिया करते हैं
ये तीनों तो श्रेष्ठ हैं
तो भाई इन तीनों ने चने उखाड़े सो उखाड़े पर तू? तू तो ठहरा नाई तूने चने क्यों उखाड़े?
इतना कहकर उसने नाई के दो तीन लट्ठ रसीद किये।
बाकी तीनों ने कोई विरोध नहीं किया क्योंकि उनकी तो प्रशंसा हो चुकी थी।

अब किसान बनिए के पास आया और बोला-
तू साहूकार होगा तो अपने घर का
पण्डित जी और ठाकुर साहब तो नहीं है ना! तूने चने क्यों उखाड़े?
बनिये के भी दो तीन तगड़े तगड़े लट्ठ जमाए।

पण्डित और ठाकुर ने कुछ नहीं कहा।

अब किसान ने ठाकुर से कहा–
ठाकुर साहब
माना आप अन्नदाता हो पर किसी का अन्न छीनना तो ग़लत बात है
अरे पण्डित महाराज की बात दीगर है
उनके हिस्से जो भी चला जाये दान पुन्य हो जाता है
पर आपने तो बटमारी की! ठाकुर साहब को भी लट्ठ का प्रसाद दिया,

पण्डित जी बोले नहीं,

नाई और बनिया अभी तक अपनी चोट सहला रहे थे।
जब ये तीनों पिट चुके
तब किसान पण्डितजी के पास गया और बोला–
माना आप भूदेव हैं
पर इन तीनों के गुरु घण्टाल आप ही हैं
आपको छोड़ दूँ
ये तो अन्याय होगा
तो दो लट्ठ आपके भी पड़ने चाहिए।
मार खा चुके बाकी तीनों बोले
हाँ हाँ, पण्डित जी को भी दण्ड मिलना चाहिए।
अब क्या पण्डित जी भी पीटे गए।

किसान ने इस तरह चारों को अलग अलग करके पीटा
किसी ने किसी के पक्ष में कुछ नहीं कहा,
उसके बाद से चारों कभी भी एक साथ नहीं देखे गये।

मित्रों पिछली दो तीन सदियों से हिंदुओं के साथ यही होता आया है,
कहानी सच्ची लगी हो तो समझने का प्रयास करो और
अगर कहानी केवल कहानी लगी हो
तो आने वाले समय के लट्ठ तैयार हैं।
#divide
&
#rull

मिस रीमा सिंघ

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

🍁 संपर्क 🍁

पुजारी और नाई (जो बाल काँटता है) दोनों मित्र थे | नाई हमेशा पुजारी से कहता है, ईश्वर हमेशा ऐसा क्यों करता है, वैसा क्यों करता है ? यहाँ बाढ़ आ गई, वहाँ सूखा हो गया, यहाँ एक्सीडेंट हुआ, यहाँ भुखमरी चल रही है, नौकरी नहीं मिल रहीं हमेशा लोगों को ऐसी बहुत सारी परेशानियां बताता रहता है |

तो उस पुजारी ने उसे एक इंसान से मिलाया | जो भिखारी था, बाल बहुत बढ़े थे, दाढ़ी भी बहुत बढ़ी थी और उस नाई को कहा, ” देखो उस इंसान को, जिसके बाल बढ़े हुए हैं, दाढ़ी भी बहनत बढ़ी हुई है | तुम्हारे होतें हुए ऐसा क्यों है ?”

नाई बोला, अरे उसने मेरे साथ संपर्क ही नहीं किया | पुजारी ने भी बताया यही तो बात है | जो लोग ईश्वर से संपर्क करते हैं, उनका दुःख खतम हो जाता है | लोग संपर्क ही नहीं करतें और कहतें हैं, दुःख क्यों है ? जो संपर्क करेगा वो दुःख से मुक्त हो जाएगा |
🚩 🌼 🚩

रीमा सिंघ

Posted in हिन्दू पतन

✊🚩

पनपते आतंकीयों का समाधान… पूरा लेख पढ़ें..…
🔵🛑⚫😡👇🏿
आज बर्मा में करोड़ो रुपये के बने मस्जिद वीरान पड़े हैं… क्यूंकि देश में मुसलमान देखने को नहीं, कि वहां जाए, और जो है वहां, उसकी तबीयत से ठुकाई हो रही है ।

विराथु जिसके बाद ही लोग जान पाए कि ये महान इंसान कौन है .. और इन्होने क्या कर डाला है … पुरे संसार की मीडिया ने इनका बहिस्कार कर रखा है … मीडिया इनको “बौद्धों का ओसामा बिन लादेन ” पुकारती है .. या सीधा आतंकवादी ही बोल देती है …
बौद्धों के धर्मगुरु विराथू ने पुरे देश को जगाया इस्लाम के खतरे को कुछ इस तरह से समझाया कि लोगों ने सेकुलरिज्म का त्याग कर दिया और हथियार उठा लिए .. इसके पहले तक बौद्ध महात्मा बुद्ध के रास्ते पर चल कर प्रताड़ित हो रहे थे पर विराथू जी ने नया मन्त्र दिया …कहा ..
“अब समय शांत रहने का नहीं है .. खतरे की घंटी बज चुकी है .. ”

ये उनका एक बहुत ही विवादित प्रवचन है .. जिसके बाद बर्मा में .. बौद्धों ने हथियार ले कर आक्रमण कर दिया । हथियार का जवाब हथियार से देने लगे … वहाँ भी सेक्युलर नेता थे तुरंत विराथू जी को सांप्रदायिक घोषित कर के जेल में डाल दिया २५ साल की सजा के साथ … पर विराथू जी के कई विडियो सोशल मीडिया पर तब तक आ चुके थे .. घर घर में लोगों ने सुना और नजरें खुल गयी .. क्यूंकि किसी के बोलने में इतना आकर्षण और ताकत होता है कि आँखों के ऊपर बंधी पट्टी उतर जाती है । हमारे देश में ऐसे बोलने वाले कई हिन्दू साधू संत साध्वियां है .. परन्तु ये लोग कभी इस विषय पर बोलते ही नहीं.. इस्लाम में खास कर ऐसे बोलने वाले लोग आतंकवादी शिविरों में जाकर बोलते हैं .. ये सम्मोहन की तरह है । जिसके बाद एक मुस्लिम किसी गुलाम की तरह हो जाता है … आपको हर उस आदमी से नफरत होने लगती है जो मुस्लिम नहीं है .. यही वजह है की बहुत लोग आपको हमेशा कहेंगे … “एक बार कुरआन पढ़ के तो देखो”

बर्मा के सारे बौद्धों को विराथू जी ने समझाया और सीधे घोषणा की .. अगर देश बचाना है और खुद बचना है .. अगर अपनी लड़कियों को बचाना है तो एक एक मुस्लिम को बाहर करो उसके बाद तो जो हुआ आज वो इतिहास है ..
संसार भर में उनके खिलाफ हिंसक प्रदर्शन हुए भारत में भी हुए .. लेकिन ९९% लोग भारत के जानते ही नहीं थे कि म्यांमार में ऐसा क्या हो रहा है जिसके खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं .. यहाँ मीडिया से सिर्फ एकतरफा न्यूज़ चलाये गए ….
विराथू जी जेल में थे सरकार ने हवा का रुख भांपते हुए विराथू जी को १० साल के बाद जेल से छोड़ दिया और एलान किया कि मुस्लिम इस देश के निवासी नहीं हो सकते .. वो देश छोड़ कर चले जाएँ …खास बात ये थी कि जेल जाने के बाद भी ये डिगे नहीं .. और जेल से निकलते ही एकसूत्री कार्यक्रम, इस देश में सिर्फ बौद्ध रहेंगे ..

रातों रात भगदड़ मच गयी .. पूरा देश खाली हो गया .. जबकि इन लोगों को पाकिस्तान के सारे आतंकवादी संगठन बैकअप दे रहे थे .. बाहर से आतंकी भी आकर लड़ाई लड़ते थे लेकिन .. सब फेल हो गया.. बौद्धों की जीत हुयी ।
आज बर्मा इस्लाम मुक्त देश है .. विराथू जी आज पूरी दुनिया के मीडिया के विलेन जैसे हैं पर बर्मा में वो नायक है ..
⚫🔵🛑⚫🔵🛑
👉काश ऐसे साधू संत हिन्दू धर्म में भी होते !!!……..
⚜🌹🕉🔱🕉🌹⚜

मिस रीमा सिंघ

Posted in हिन्दू पतन

महाभारत से पहले कृष्ण भी गए थे दुर्योधन के दरबार में. यह प्रस्ताव लेकर, कि हम युद्ध नहीं चाहते….
तुम पूरा राज्य रखो…. पाँडवों को सिर्फ पाँच गाँव दे दो…
वे चैन से रह लेंगे, तुम्हें कुछ नहीं कहेंगे.
………..बेटे ने पूछा – “पर इतना unreasonable proposal लेकर कृष्ण गए क्यों थे ?
अगर दुर्योधन प्रोपोजल एक्सेप्ट कर लेता तो..?

पिता :- नहीं करता….!
कृष्ण को पता था कि वह प्रोपोजल एक्सेप्ट नहीं करेगा…

उसके मूल चरित्र के विरुद्ध था.

फिर कृष्ण ऐसा प्रोपोजल लेकर गए ही क्यों थे..?

वे तो सिर्फ यह सिद्ध करने गए थे कि दुर्योधन कितना अनरीजनेबल, कितना अन्यायी था.

वे पाँडवों को सिर्फ यह दिखाने गए थे,
कि देख लो बेटा…
युद्ध तो तुमको लड़ना ही होगा… हर हाल में…
अब भी कोई शंका है तो निकाल दो….मन से.
तुम कितना भी संतोषी हो जाओ,
कितना भी चाहो कि “घर में चैन से बैठूँ “…

दुर्योधन तुमसे हर हाल में लड़ेगा ही.

“लड़ना…. या ना लड़ना” – तुम्हारा ऑप्शन नहीं है…”

फिर भी बेचारे अर्जुन को आखिर तक शंका रही…
“सब अपने ही तो बंधु बांधव हैं….”😞

कृष्ण ने सत्रह अध्याय तक फंडा दिया…फिर भी शंका थी..

ज्यादा अक्ल वालों को ही ज्यादा शंका होती है ना 😄

दुर्योधन को कभी शंका नहीथी…
उसे हमेशा पता था कि “उसे युद्ध करना ही है… “उसने गणित लगा रखा था….

हिन्दुओं को भी समझ लेना होगा कि :-
“कन्फ्लिक्ट होगा या नहीं,
यह आपका ऑप्शन नहीं है…

आपने तो पाँच गाँव का प्रोपोजल भी देकर देख लिया…

देश के दो टुकड़े मंजूर कर लिए,

(उस में भी हिंदू ही खदेड़ा गया अपनी जमीन जायदाद ज्यों की त्यों छोड़कर….)

हर बात पर विशेषाधिकार देकर देख लिया….

हज के लिए सबसीडी देकर देख ली,

उनके लिए अलग नियम
कानून (धारा 370) बनवा कर देख लिए…

“आप चाहे जो कर लीजिए, उनकी माँगें नहीं रुकने वाली”

उन्हें सबसे स्वादिष्ट उसी गौमाता का माँस लगेगा जो आपके लिए पवित्र है,
उसके बिना उन्हें भयानक कुपोषण हो रहा है.

उन्हें “सबसे प्यारी” वही मस्जिदें हैं,
जो हजारों साल पुराने “आपके” ऐतिहासिक मंदिरों को तोड़ कर बनी हैं….
उन्हें सबसे ज्यादा परेशानी उसी आवाज से है
जो मंदिरों की घंटियों और पूजा-पंडालों से है.

ये माँगें गाय को काटने तक नहीं रुकेंगी…
यह समस्या मंदिरों तक नहीं रहने वाली,
यह हमारे घर तक आने वाली है…
हमारी बहू-बेटियों तक जाने वाली है…
आज का तर्क है:-
तुम्हें गाय इतनी प्यारी है तो सड़कों पर क्यों घूम रही है ?
हम तो काट कर खाएँगे….
हमारे मजहब में लिखा है !

कल कहेंगे,
“तुम्हारी बेटी की इतनी इज्जत है तो वह अपना *खूबसूरत चेहरा ढके बिना घर से निकलती ही क्यों है ?

हम तो उठा कर ले जाएँगे.”

उन्हें समस्या गाय से नहीं है,
हमारे “अस्तित्व” से है.

तुम जब तक हो,
उन्हें कुछ ना कुछ प्रॉब्लम रहेगी.

इसलिए हे अर्जुन,
और डाउट मत पालो…
कृष्ण घंटे भर की क्लास बार-बार नहीं लगाते..

25 साल पहले कश्मीरी हिन्दुओं का सब कुछ छिन गया….. वे शरणार्थी कैंपों में रहे, पर फिर भी वे आतंकवादी नहीं बनते….

जबकि कश्मीरी मुस्लिमों को सब कुछ दिया गया….
वे फिर भी आतंकवादी बन कर जन्नत को जहन्नुम बना रहे हैं ।

पिछले साल की बाढ़ में सेना के जवानों ने जिनकी जानें बचाई वो आज उन्हीं जवानों को पत्थरों से कुचल डालने पर आमादा हैं….

इसे ही कहते हैं संस्कार…..
ये अंतर है “धर्म” और “मजहब” में..!!

एक जमाना था जब लोग मामूली चोर के जनाजे में शामिल होना भी शर्मिंदगी समझते थे….

और एक ये गद्दार और देशद्रोही लोग हैं जो खुले आम… पूरी बेशर्मी से एक आतंकवादी के जनाजे में शामिल हैं..!

सन्देश साफ़ है,,,
एक कौम,
देश और तमाम दूसरी कौमों के खिलाफ युद्ध छेड़ चुकी है….
अब भी अगर आपको नहीं दिखता है तो…
यकीनन आप अंधे हैं !
या फिर शत प्रतिशत देश के गद्दार..!!

आज तक हिंदुओं ने किसी को हज पर जाने से नहीं रोका…
लेकिन हमारी अमरनाथ यात्रा हर साल बाधित होती है !
फिर भी हम ही असहिष्णु हैं…..?
ये तो कमाल की धर्मनिरपेक्षता है भाई Jai Bharat 🚩

रीमा सिंग

Posted in गौ माता - Gau maata

कसाई गाय काट रहा था
और गाय हँस रही थी….
.
.
.
ये सब देख के कसाई बोला..
“मै तुम्हे मार रहा हू
और तुम मुझपर हँस क्यो रही हो…?”
.
.
.
.
.
गाय बोलीः जिन्दगी भर मैने घास के
सिवा कुछ नही खाया…
फिर भी मेरी मौत इतनी दर्दनाक है.
तो
हे इंसान जरा सोच
तु मुझे मार के खायेगा तो
तेरा अंत
कैसा होगा…?.
दूध पिला कर 🐄
मैंने तुमको बड़ा किया…🐄
अपने बच्चे से भी छीना 🐄
पर मैंने तुमको दूध दिया🐄…
रूखी सूखी खाती थी मैं, 🐄
कभी न किसी को सताती थी मैं…🐄
कोने में पड़ जाती थी मैं, 🐄
दूध नहीं दे सकती मैं,🐄
अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं,मेरे उपलों की🐄 आग
से तूने, 🐄
भोजन अपना पकाया था…🐄
गोबर गैस से रोशन कर के, 🐄
तेरा घर उजलाया था…🐄
क्यों मुझको बेच रहा रे, 🐄
उस कसाई के हाथों में…??🐄
पड़ी रहूंगी इक कोने में, 🐄
मत कर लालच माँ हूँ मैं…🐄
मैं हूँ तेरे कृष्ण की प्यारी, 🐄
वह कहता था जग से न्यारी…🐄
उसकी बंसी की धुन पर मैं, 🐄
भूली थी यह दुनिया सारी..🐄.
मत कर बेटा तू यह पाप,🐄
अपनी माँ को न बेच आप…🐄
रूखी सूखी खा लूँगी मैं 🐄
किसी को नहीं सताऊँगी मैं 🐄
तेरे काम ही आई थी मैं🐄
तेरे काम ही आउंगी मैं…🐄
अगर आप गौमाता से प्यार करते हैं🐄
और आपने गौमाता का दूध पिया है1🐄
तो इस मेसेज को शेयर करके थोडा बहुत दूध का कर्ज🐄
चुकता करे….🐄…!!!!
सb कि एक पुकार…🐄.!🐄
गौ हत्या अब नहीं स्वीकार….!!🐄
गौमाता की यह पीड़ा जन जन तक 🐄
पहुँचाने के लिये केवल 2 मिनट का 🐄
समय निकाल कर दोस्तों को 🐄
शेयर जरुर करें………🐄
Save cow🐄..🐄

Hanuman भगवान कि कसम
ये Message गोकूल नगरि से आया है
ईसे 9 लोगो को FORWARD करो 3 दिन मे आपकी मनोकामना पुरी होगी ईनकार करोगे तो 2
साल तक कोई भी काम नही होगा…

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

युधिष्ठर को पूर्ण आभास था,
कि कलयुग में क्या होगा ?
पूरा अवश्य पढें।
अच्छा लगेगा।
पाण्डवों का अज्ञातवाश समाप्त होने में कुछ समय शेष रह गया था।

पाँचो पाण्डव एवं द्रोपदी जंगल मे छूपने का स्थान
ढूंढ रहे थे।

उधर शनिदेव की आकाश मंडल से पाण्डवों पर नजर पड़ी शनिदेव के मन विचार आया कि इन 5 में बुद्धिमान कौन है परीक्षा ली जाय।

शनिदेव ने एक माया का महल बनाया कई योजन दूरी में उस महल के चार कोने थे, पूरब, पश्चिम, उतर, दक्षिण।

अचानक भीम की नजर महल पर पड़ी
और वो आकर्षित हो गया ,

भीम, यधिष्ठिर से बोला- भैया मुझे महल देखना है भाई ने कहा जाओ ।

भीम महल के द्वार पर पहुंचा वहाँ शनिदेव दरबान के रूप में खड़े थे,

भीम बोला- मुझे महल देखना है!

शनिदेव ने कहा- महल की कुछ शर्त है ।

1- शर्त महल में चार कोने हैं आप एक ही कोना देख सकते हैं।
2-शर्त महल में जो देखोगे उसकी सार सहित व्याख्या करोगे।
3-शर्त अगर व्याख्या नहीं कर सके तो कैद कर लिए जाओगे।

भीम ने कहा- मैं स्वीकार करता हूँ ऐसा ही होगा ।

और वह महल के पूर्व छोर की ओर गया ।

वहां जाकर उसने अद्भूत पशु पक्षी और फूलों एवं फलों से लदे वृक्षों का नजारा देखा,

आगे जाकर देखता है कि तीन कुंए है अगल-बगल में छोटे कुंए और बीच में एक बडा कुआ।

बीच वाला बड़े कुंए में पानी का उफान आता है और दोनों छोटे खाली कुओं को पानी से भर देता है। फिर कुछ देर बाद दोनों छोटे कुओं में उफान आता है तो खाली पड़े बड़े कुंए का पानी आधा रह जाता है इस क्रिया को भीम कई बार देखता है पर समझ नहीं पाता और लौटकर दरबान के पास आता है।

दरबान – क्या देखा आपने ?

भीम- महाशय मैंने पेड़ पौधे पशु पक्षी देखा वो मैंने पहले कभी नहीं देखा था जो अजीब थे। एक बात समझ में नहीं आई छोटे कुंए पानी से भर जाते हैं बड़ा क्यों नहीं भर पाता ये समझ में नहीं आया।

दरबान बोला आप शर्त के अनुसार बंदी हो गये हैं और बंदी घर में बैठा दिया।

अर्जुन आया बोला- मुझे महल देखना है, दरबान ने शर्त बता दी और अर्जुन पश्चिम वाले छोर की तरफ चला गया।

आगे जाकर अर्जुन क्या देखता है। एक खेत में दो फसल उग रही थी एक तरफ बाजरे की फसल दूसरी तरफ मक्का की फसल ।

बाजरे के पौधे से मक्का निकल रही तथा
मक्का के पौधे से बाजरी निकल रही । अजीब लगा कुछ समझ नहीं आया वापिस द्वार पर आ गया।

दरबान ने पूछा क्या देखा,

अर्जुन बोला महाशय सब कुछ देखा पर बाजरा और मक्का की बात समझ में नहीं आई।

शनिदेव ने कहा शर्त के अनुसार आप बंदी हैं ।

नकुल आया बोला
मुझे महल देखना है ।

फिर वह उत्तर दिशा की और गया वहाँ उसने देखा कि बहुत सारी सफेद गायें जब उनको भूख लगती है तो अपनी छोटी बछियों का दूध पीती है उसे कुछ समझ नहीं आया द्वार पर आया ।

शनिदेव ने पूछा क्या देखा ?

नकुल बोला महाशय गाय बछियों का दूध पीती है यह समझ नहीं आया तब उसे भी बंदी बना लिया।

सहदेव आया बोला मुझे महल देखना है और वह दक्षिण दिशा की और गया अंतिम कोना देखने के लिए क्या देखता है वहां पर एक सोने की बड़ी शिला एक चांदी के सिक्के पर टिकी हुई डगमग डोले पर गिरे नहीं छूने पर भी वैसे ही रहती है समझ नहीं आया वह वापिस द्वार पर आ गया और बोला सोने की शिला की बात समझ में नहीं आई तब वह भी बंदी हो गया।

चारों भाई बहुत देर से नहीं आये तब युधिष्ठिर को चिंता हुई वह भी द्रोपदी सहित महल में गये।

भाइयों के लिए पूछा तब दरबान ने बताया वो शर्त अनुसार बंदी है।

युधिष्ठिर बोला भीम तुमने क्या देखा ?

भीम ने कुंऐ के बारे में बताया

तब युधिष्ठिर ने कहा- यह कलियुग में होने वाला है एक बाप दो बेटों का पेट तो भर देगा परन्तु दो बेटे मिलकर एक बाप का पेट नहीं भर पायेंगे।

भीम को छोड़ दिया।

अर्जुन से पुछा तुमने क्या देखा ??

उसने फसल के
बारे में बताया

युधिष्ठिर ने कहा- यह भी कलियुग में होने वाला है।
वंश परिवर्तन अर्थात ब्राह्मण के घर शूद्र की लड़की और शूद्र के घर बनिए की लड़की ब्याही जायेंगी।

अर्जुन भी छूट गया।

नकुल से पूछा तुमने क्या देखा तब उसने गाय का वृतान्त बताया ।

तब युधिष्ठिर ने कहा- कलियुग में माताऐं अपनी बेटियों के घर में पलेंगी बेटी का दाना खायेंगी और बेटे सेवा नहीं करेंगे ।

तब नकुल भी छूट गया।

सहदेव से पूछा तुमने क्या देखा, उसने सोने की शिला का वृतांत बताया,

तब युधिष्ठिर बोले- कलियुग में पाप धर्म को दबाता रहेगा परन्तु धर्म फिर भी जिंदा रहेगा खत्म नहीं होगा।। आज के कलयुग में यह
सारी बातें सच
साबित हो रही है ।।

मुझे अच्छा लगा।
आपके समक्ष रखा है ।
मैं आशा करती हूँ
🙏 कि आप इसे और भी लोगों तक पहुचायेंगे !!!!!!!

👏🏻👏🏻 जयश्रीकृष्ण, जय श्रीराधे 👏🏻👏🏻
🙏🏻 ॐ शांति🙏🏻

रीमा सिंह