Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

संजय गुप्ताRpd

बटवारा
“माँजी के सामान पर हम सब का बराबर अधिकार है.” सास की तेरहवीं के दिन ही बड़ी बहू ने कहना शुरू कर दिया. मझली ने भी हाँ में हाँ मिलाई.
“हाँ हाँ क्यों नहीं भाभी वैसे भी हम अपने साथ कहाँ कुछ ले जा पाएंगे..” सबसे छोटे ने कहा तो पत्नी ने खा जाने वाली नज़रों से घूरा.
अब तक जो आँगन मेहमानों से भरा था वो घर-गृहस्थी के सामान से भर गया.
चांदी के गिलास-प्लेट,पीतल के कलश,बड़े-बड़े थाल, सब आँगन में सज गए. पुराने डिब्बों से लेकर दीवार घड़ियाँ बिस्तर सब छोटा बड़ा सामान आँगन में जुट गया था..
दस मिनट बाद मैदान खाली था.
छोटे बेटे ने झुककर फर्श से कुछ उठाया तो दोनों बहुओं की सांस थम गई… “ये क्या है जो हमसे छूट गया.”
कागज़ का टुकड़ा था..
दादी के ज़माने की वो तस्वीर, जिस में माँ घूँघट में और तीनों भाई निक्कर में थे..

संजय गुप्ता

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