Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

प्रेरक प्रसंग

जिन खोजा तिन पाइयाँ

   बालक शेख फरीद को जब पढ़ - लिख सकने का ज्ञान आया, तो माता ने उसे रोज नमाज़ पढ़ने के लिए कहा ।  नमाज़ पढ़ने के बाद जब वह कपड़ा उठाता तो उसे नीचे मिठाई दिखाई देती ।  वह खा लेता और ख़ुश हो जाता ।  बात यह थी कि माँ कपड़े के नीचे पहले ही मिठाई रख देती थी, लेकिन फरीद यह समझता था कि अल्लाह ही उसे नमाज़ पढ़ने के बदले मिठाई देते हैं ।
   एक दिन उसने माता से पूछा,  "अम्मा !  क्या मुझे अल्लाह नहीं मिल सकते ?  "क्यों नहीं",  माँ ने कहा,  "मगर तुझे इसके लिए दूर जाना होगा ।"  और बालक अल्लाह की खोज में निकल पड़ा और अल्लाह का नाम जपते हुए उनका इन्तजार करता रहा ।  इस दौरान उसने भोजन तो नहीं किया, बस पेड़ों के पत्ते चबा - चबाकर खा जाता ।  जब खुदा का दीदार नहीं हुआ, तो वह वापस घर आया और उसने माँ से शिकायत की कि अल्लाह तो उसे मिले ही नहीं ।  माँ ने उससे सारी हकीकत पूछी और कहा,  "अल्लाह तुम्हें मिलेंगे कैसे ?  तुम्हारा जी पत्तों से पेट भरने में लगा रहता था ।  तुम जिन पेड़ों के पत्ते तोड़ते थे, क्या उन पेड़ों को दर्द नहीं होता रहा होगा ?  अगर तुम सचमुच अल्लाह को पाना चाहते हो, तो तुम्हें लकड़ी की रोटियाँ दूँगी ।  भूख लगने पर वे तेरे दिल को समझाया करेंगी ।"
  फरीद माँ की दी हुई लकड़ी की रोटियाँ लेकर फिर जंगल की ओर निकल पड़ा ।  काफी अरसे के बाद भी जब अल्लाह नहीं मिले, तो घर वापस आ गया ।  माँ से फिर शिकायत की, तो माँ बोली,  "बेटा, तू अल्लाह का नाम लेता तो था, मगर भूख लगने पर यह सोचता था कि रोटियाँ पेट में बँधी हैं, अब खा लूँगा, तब खा लूँगा ।  अरे, जिसका दिल रोटियों में लगा रहता है, अल्लाह भला उसे कभी मिल सकते हैं ?"
  अब फरीद अपने अरब देश से बहुत दूर निकल आया और वर्धा जिले के गिरर नामक स्थान पर रूक गया ।  वहाँ एक बड़ा पेड़ था, जिसके नीचे बहुत बड़ा गड्ठा था ।  वह उस पेड़ पर उल्टा लटक गया और अल्लाह का नाम जपने लगा ।  अब न उसे भूख की चिन्ता थी, न प्यास की ।  खुदा की याद में वह ऐसा डूबा कि अपने शरीर की भी परवाह न रही ।  आखिर एक दिन आवाज आयी ___ "ऐ शेख फरीद !  तेरी इबादत कबूल की गयी है ।  अब पेड़ से उतर जा ।"  मगर उसे यकीन न हुआ, तो पूछा,  "क्या मेरी इच्छा पूरी हो गयी ?"। आवाज आयी,  "हाँ, तेरी हर इच्छा पूरी हो गयी ।  यकीन न आता हो, तो यह कहकर देख ले ___ 'जो खुदा करे, वही हो, और जो शेख़ फरीद कहे, वही हो ।"
  यह सुनते ही फरीद बोल उठा,  "नीचे वाला गड्ढ़ा शक्कर से भर जाय ।"  उसका वाक्य पूरा हुआ भी न था कि गड्ढा शक्कर से भर गया । फिर क्या था, वह नीचे उतर आया और आनन्द में मगन होकर बोल उठा,  "मिल गया, मुझे मेरा अल्लाह मिल गया !"  वह गिरर में ही रह गया और अल्लाह का नाम जपता रहा ।  उसकी याद में आज भी वहाँ दरगाह मौजूद है ।

अनूप सिन्हा

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