Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

प्रेरक प्रसंग

श्रम से दुःख रूज सब मिटै

  सुप्रसिद्ध दार्शनिक सन्त कन्फयूशियस के बुद्धिमान शिष्य चाँग - हो - चाँग एक बार भ्रमण को निकले ।  लोगों के दैनन्दिन जीवन की जानकारी प्राप्त कर उपयुक्त वातावरण निर्माण करना उनके भ्रमण का उद्देश्य था ।  घूमते-घूमते वे ताईवान पहुँचे ।  वहाँ एक स्थान पर उन्होंने एक युवा माली को कुएँ से बाल्टी- बाल्टी पानी निकालते पाया ।  वे थोड़ी देर रुक गये ।  उन्होंने देखा कि वह माली पानी को स्वयं ढोकर हर पौधे को सींच रहा था ।  पसीने से वह तर हो गया था, लेकिन अभी भी बहुत से वृक्षों में पानी सींचना बाकी था ।  चाँग को उसपर दया आयी, सोचते रहे कि क्या कोई ऐसा उपाय नहीं कि पौधों को कम समय में सींचा जाए और माली को इतना श्रम न करना पड़े ।
  चाँग के मन में विचार आया कि लकड़ियों की एक घिर्री बनाकर एवं उसमें रस्सी लपेटकर खड़े-खड़े पानी सींचा जाए और कुएँ के पास से ही प्रत्येक पेड़ तक नाली खोद दी जाए, तो माली को इतना परिश्रम न करना पड़ेगा ।  उन्होंने अपना यह सुझाव माली को बताया ।  उसे वह पसन्द आया ।  थोड़ी ही देर में उसने घिर्री की व्यवस्था की ।  नाली भी खोदी गयी तथा नाली से प्रत्येक वृक्ष तक पानी पहुँचने लगा ।
  चाँग सन्तुष्ट हो आगे बढ़े, मगर रास्ते में सोचते रहे कि क्या इसके श्रम की और बचत नहीं की जा सकती और तब उनके मन में विचार आया कि यदि कुएँ में भाप से चलने वाली मशीन डाल दी जाए, तो उसका श्रम काफी कम हो जाएगा और वृक्षों को पानी भी खूब मिलने लगेगा ।  लौटकर उन्होंने माली को इस सुझाव पर विचार करने को कहा।  माली को सुझाव पसन्द आया और उसने चाँग को इसे अमल में लाने का आश्वासन दिया ।  चाँग वहाँ से आगे बढ़ गये ।
  काफी समय बीत गया और एक दिन चाँग को उस माली का ख्याल आया ।  वे सोचने लगे कि बगीचा अब लहलहाता होगा, इसलिए क्यों न प्रत्यक्ष वहाँ जाकर देख आया जाए ।  वे जब वहाँ गये, तो यह देख चकित हुए कि बगीचे की हालत कोई अच्छी नहीं है । माली हरदम बीमार रहता है और वृक्षों को पानी नियमित रूप से नहीं मिल रहा है ।  वे जब उसके घर गये, तो उन्होंने देखा कि माली काफी कमजोर हो गया है और हाथ-पैर सूख गये हैं ।  उसमें पहले जैसा उत्साह भी नहीं रह गया था ।  उन्होंने हँसते हुए माली से पूछा,  "भाई, तुम्हारे समय की बचत होने पर भी तुम्हारी ऐसी हालत कैसे हो गयी ? क्या कोई और तरकीब सोचने की जरूरत है, जिससे तुम्हें और आराम मिले ?"
  माली की स्त्री पास ही खड़ी थी, झल्लाकर बोली,  "श्रीमानजी, तरकीबें लड़ाना बहुत हो चुका ।  इसके बजाय यदि आप ऐसी सीख दें कि ये पहले जैसे हो जाएँ और अपने हाथों से ही काम करने लगें, तो इनकी हालत में सुधार हो सकता है ।  यही आपकी हमपर मेहरबानी होगी ।  घिर्री और भाप की मशीन ही इनकी बीमारी का कारण है ।"  चाँग ने जो सुना, तो सोचने लगे कि क्या उनका सुझाव ही माली की इस हालत के लिए कारणीभूत हैं ?  और तब उन्होंने महसूस किया कि यदि मनुष्य परिश्रम न करे और हाथ पर हाथ धरे मशीनों पर निर्भर रहे, तो वह कभी भी स्वस्थ नहीं रह सकता ।  उन्होंने माली दम्पत्ति से माफी माँगी और कहा उनके सुझाव सचमुच गलत थे ।  यदि माली पूर्ववत् कुएँ से ही बाल्टी - बाल्टी निकालकर सींचे, तभी वह तन्दुरुस्त रह सकता है ।

अनूप सिन्हा

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