Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

: गोपियों के श्रीकृष्ण के प्रति प्रेम की एक बहुत सुन्दर कथा

द्वारका में जब भी गोपियों की बात चलती तो श्रीकृष्ण को रोमांच हो आता। आँसू बहने लगते, वाणी गद्गद् हो जाती और वे कुछ बोल नहीं पाते।

*श्रीकृष्ण की ऐसी दशा देखकर सभी पटरानियों को बड़ा आश्चर्य होता कि हममें ऐसी क्या कमी है और गोपियों में ऐसा क्या गुण है जो श्रीकृष्ण की यह दशा हो जाती है ! क्या नहीं है यहां, जो वहां है।
भगवान ने इसका उत्तर देने के लिए एक नाटक किया। वे सर्वसमर्थ हैं, कुछ भी बन सकते हैं। वे रोगी बन गए और उनका पेट दुखने लगा। सभी रानियों ने काफी दवा की पर श्रीकृष्ण के पेट का दर्द ठीक नहीं हुआ।
वैद्यजी बुलाए गए। उन्होंने पूछा–’महाराज, क्या पहले भी कभी पेट में दर्द हुआ है और कोई दवा आपने प्रयोग की हो तो बताएँ।’
भगवान ने कहा–’हां, दवा तो मैं जानता हूँ। यदि हमारा कोई प्रेमी अपने चरणों की धूल दे दे तो उस धूल के साथ हम दवा ले लें।’ रुक्मिणीजी और सत्यभामाजी ने सोचा–चरणों की धूल तो हमारे पास है ही और प्रेमी भी हम हैं ही, पर शास्त्र कहता है कि पति को चरणों की धूल देने पर पाप लगेगा और नरक में जाना पड़ेगा। अत: पाप और नरक के डर से उन्होंने चरणधूलि देने से मना कर दिया। उनको देखकर अन्य सोलह हजार रानियों व द्वारकावासियों ने भी चरणधूलि देने से मना कर दिया।
उसी समय नारदजी वहां पधारे और बोले– ’महाराज पेट दुखता है, यह कैसी माया रची है आपने?’
भगवान श्रीकृष्ण बोले–’दुखता तो बहुत है, तुम कुछ उपाय कर दो, किसी प्रेमी की चरणधूलि ला दो।’ नारदजी ने सोचा–प्रेमी तो हम भी हैं और हमारे पास भी धूल है पर जब हमसे बड़ा प्रेम का दर्जा रखने वाली रुक्मिणीजी ने ही चरणधूलि नहीं दी तो हम कैसे दे दें?
भगवान श्रीकृष्ण ने कहा–’नारद ! जरा व्रज में तो हो आओ।’ वीणा बजाते हरिगुणगान करते हुए नारदजी व्रज में गोप-गोपियों के बीच जा पहुँचे।
गोपियाँ बोली–’वे प्रेमी मानते हैं हमको? तो ले जाइए चरणों की धूल। जितनी चाहिए उतनी ले जाइए।’ ऐसा कहकर सब गोपियों ने अपने चरण आगे बढ़ा दिए।
जितनी मरजी हो बाँध लें महाराज ! नारदजी ने कहा–’अरे ! पागल हो गयी हो क्या, क्या कर रही हो तुम? जानती नहीं किसको धूल दे रही हो तुम, भगवान को ! नरक मिलेगा तुम्हें।’
गोपियाँ बोली–’हम भगवान तो जानती नहीं, वे तो हमारे प्राणनाथ हैं और यदि उनके पेट का दर्द अच्छा होता है तो हमें अनन्तकाल तक नरक में रहना पड़े तो भी हम नरक में रहेंगी, कभी शिकायत नहीं करेंगी। आप धूल ले जाइए और जल्दी जाइए जिससे उनके पेट का दर्द अच्छा हो जाए।’
तो वो लो राधे राधे

संजय गुप्ता

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