Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

लालची बुढिया ))))
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किसी गांव में एक सास और बहू रहती थी .
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सास बहुत दुश्ट थी और अपने बहू को बहुत सताती थी . बहू बेचारी सीधी साधी सास के अत्याचारों को सहती रहती थी .
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एक दिन तीज का त्यौहार था बहू ने अपने पति की लम्बी उम्र के लिए व्रत रक्खा था .
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मुहल्ले की सभी औरते अच्छे अच्छे पकवान बना रही थी . नए नए कपड़े पहन कर और सज संवर कर मन्दिर जाने की तैयारी कर रही थी .
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पर सास ने अपनी बहू से कहा – अरे कलमुंही तू बैठे बैठे यहाँ क्या कर रही है..
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जा खेत में मक्का लगा है.. कौंवे और तोते फसल नश्ट कर रहे है जा कर उन्हें उड़ा.
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बहू ने कहा माँ आज मेरा व्रत है मै तो पूजा की तैयारी कर रही थी, आज मुझे मन्दिर जाना है .
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सास ने कहा – तू सज संवर कर मन्दिर जा कर क्या करेगी, कौन सा जग जीत लेगी , बहू को गालिया देने लगी .
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बहू बेचारी क्या करती मन मार कर जाना पड़ा लेकिन उसे रोना आ रहा था उसकी आँखे भर आई ,
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वह और औरतों को मन्दिर जाते देख रही थी , औरतें मंगल गीत गा रही थी . उसके सब अरमान पलकों से टपक रहे थे .
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वह आज सजना चाहती थी , अपने पति के नाम की चुड़िया पहनना चाहती थी , मांग में अपने पति के नाम का सिंदूर लगाना चाहती थी
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और वह साड़ी पहनना चाहती थी जो उसके पति ने उसे अपनी पहली कमाई पर दिया था,
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आज उसके लिए मंगल कामना ईश्वर के चरणों में जा कर करना चाहती थी .
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वह अन्दर ही अन्दर रो रही थी और खेत की तरफ़ जा रही थी ,
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खेत पर पहुंच कर , को – कागा – को , यहाँ ना आ , मेरा खेत ना खा – कही और जा जा कहती जा रही थी .
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उसी समय पृथ्वी पर शंकर और पार्वती जी भ्रमन करने निकले थे ,
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पार्वती जी को बहू का रोना देख कर ह्रदय भर आया और उन्होंने शिव जी से कहा की नाथ देखिये तो कोई अबला नारी रो रही है .
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रूप बदल कर शंकर और पार्वती जी बहू के पास पंहुचे और पूछा की बेटी क्या बात है ? क्यूं रो रही हो ? क्या कष्ट है तुम्हे
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तो वह बोली की मै अपनी किस्मत पर रो रही हूँ . आज तीज का व्रत है गांव की सारी औरतें पूजा पाठ कर रही है
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और मेरी सास ने मुझे यहाँ कौवे उड़ाने के लिए भेज दिया है और मै अभागी यहाँ कौवे उड़ा रही हूँ .

भोले बाबा को बहू पर दया आ गई उन्होंने बहू को ढेर सारे गहने और चांदी और सोने के सिक्के दे कर कर कहा की तुम घर जाओ और अपनी पूजा करो , मै तुम्हारे खेत की देख भाल करूँगा .
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जब बहू घर पहुँची तो सास बहू के पास इतना धन देख कर आश्चय चकित रह गई .
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बहू ने सारी बात सास को बता दी . सास बहू से अच्छे से बोली अच्छा तू जा कर पूजा कर ले और अगले साल मै खेत की रखवाली करने जाउंगी .
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अगले साल जब तीज आई बुढ़िया तैयार हो कर खेत पर पहुँच गई और खूब तेज तेज रोने लगी ,
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ठीक उसी समय शंकर और पार्वती उधर से गुजर रहे थे और उन्होंने ने पूछा की क्या बात है
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तो उस बुढिया ने बताया की मेरी बहू मुझे बहुत परेशान करती है और उसने आज भी उसने मुझे खेत की रखवाली के लिए भेज दिया जबकि आज मेरा व्रत है .
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भगवान शंकर उस बुढिया को समझ गए और उन्होंने ने कहा तुम घर जाओ ,
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तो बुढिया ने कहा की आपने मुझे कुछ दिया नही तो भोले बाबा ने कहा की घर जाओ तुम्हे मिल जायेगा .
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जब वह घर पहुची तो उसके पुरे शरीर में छाले पड़ गए .
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बुढ़िया बहू को गलिया देने लगी . बहू ने पूछा तो बुढ़िया ने पुरी कहानी बताई ,
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तब बहू ने कहा की भगवान हमेशा सरल, सच्चे और भोले भाले लोगों की ही सहायता करते है , लालची लोगो की नही .

 

Sanjay Gupta

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Author:

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