Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक औरत थी,
जो अंधी थी❗
जिसके कारण उसके बेटे को
स्कूल
में बच्चे चिढाते थे❗
कि अंधी का बेटा आ गया,❗
हर बात पर उसे ये शब्द
सुनने
को मिलता था कि “अन्धी
का बेटा” ❗
इसलिए वो अपनी माँ से
चिडता था ❗ उसे
कही भी अपने
साथ लेकर जाने में
हिचकता था❗
उसे नापसंद करता था..❗
उसकी माँ ने उसे पढ़ाया..
और उसे इस लायक बना
दिया की वो अपने पैरो
पर
खड़ा हो सके..
लेकिन जब वो बड़ा आदमी
बन
गया तो अपनी माँ को
छोड़
अलग रहने लगा..❗
एक दिन एक बूढी औरत
उसके घर
आई और गार्ड से बोली..
मुझे तुम्हारे साहब से
मिलना है जब गार्ड ने
अपने मालिक से
बोल तो मालिक ने कहा
कि बोल
दो मै अभी घर पर नही हूँ.❗
गार्ड ने जब बुढिया से
बोला कि वो अभी नही
है..‼
तो वो वहा से चली
गयी..‼
थोड़ी देर बाद जब लड़का
अपनी कार से
ऑफिस के लिए
जा रहा होता है..❗
तो देखता है कि सामने
बहुत भीड़
लगी है..❗
और जानने के लिए कि वहा
क्यों भीड़
लगी है वह
वहा गया तो देखा उसकी
माँ वहा मरी पड़ी थी..❗
उसने
देखा की उसकी मुट्ठी में
कुछ है❗उसने जब
मुट्ठी खोली तो देखा की
एक
लेटर जिसमे यह
लिखा था कि बेटा जब तू
छोटा था तो खेलते वक़्त
तेरी आँख में सरिया धंस
गयी थी और तू
अँधा हो गया था तो मैंने
तुम्हे
अपनी आँखे दे दी थी..❗
इतना पढ़ कर लड़का जोर-
जोर से
रोने लगा..❗
उसकी माँ उसके पास नही

सकती थी..
दोस्तों वक़्त रहते ही
लोगो की वैल्यू
करना सीखो..❗
माँ-बाप का कर्ज हम
कभी नही चूका सकत..
हमारी प्यास का अंदाज़
भी अलग है
दोस्तों,❗
कभी समंदर को ठुकरा देते
है,❗
तो कभी आंसू तक पी जाते
है..‼
“बैठना भाइयों के बीच,
चाहे “बैर” ही क्यों ना
हो..💞
और खाना माँ के हाथो
का,
चाहे “ज़हर” ही क्यों ना
हो..‼…
अगर आप अपनी माँ को
बेहद प्यार करते है तो ये
मैसज को इतना फैलाओ
जितना तुम अपनी माॅ को
चाहतें हो❗

I love mom so much. 💞💞
Happy Mother’s Day ❤❤

ललित बूलचंदनी

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🍃🍁मानव की सोच🍁🍃

एक बार पूर्ण संत कही प्रवचन कर रहे तो भक्तों के विषय पर विचर दे रहे थे तभी

एक सज्जन ने कहा –

महात्मा जी सुना है भक्त हर परिस्थिति का सामना कर सकते है पर यह दुनिया क्यो नही समझती उन्हें जब की वो सत्य पथ के अनुगामी होते है ????

संत –सही कहा आपने जब भी एक साधारण व्यक्ति ईश्वर से प्रेम करता है तो यह दुनिया उसे चलने नही देती क्योकि उसकी लगन एक अदृश्य शक्ति से होती है जिसे एक भक्त ही समझ सकता है इसके कई उदाहरण है जैसे हनुमानजी को ही देखे —-

जब हनुमानजी ने अशोक वाटिका उजाड दी ओर तब मेघनाथ ने ब्रह्म फास मे बांध लिया ! ओर लंका के नगर से ले जाया जा रहा था तो नगर वासी कहते है —

मारे हूं लात करे बहु हासी ……

हनुमानजी को कोई लाते मार रहा है कोई हसी उडाता है कि बडा आया राम का दूत बन कर …. .
अनेक प्रकार से अपमानित किया पर हनुमानजी राम नाम का गुणगान करते रहे राम का चिंतन करते रहे ।

वही जब हनुमानजी की पूँछ मे आग लगा दी तो उन्होंने लंका ही जला कर दी तो वही नगर वासी कहते है …..

*हम जो कहा यह कपि नही होई ,
बानर रूप धरे सुर कोई ।

कहते है हम तो पहले ही कहे है यह कोई साधारण वानर नही है यह तो कोई देवता है जो वानर रूप धर कर आया है

यह है दुनिया की रीत
पर भक्त हर परिस्थितियों मे अपने ईश का ही ध्यान करता है दृढ़ विश्वास रखता है।
हर युग मे भक्तों ने अपने पूर्ण संत की महानता को सत्य को सब के सामने रखा है सत्य को किसी का भय नही होता चाहे वह अकेला हो या कारवाँ हो

सज्जन-भक्ति के क्या चरण है ???
कृपा यह भी बता दीजिएगा

संत – — अवश्य

विचार—–
आज की परिस्थितियों मे आपका राम कौन है हनुमानजी ने तो राम को देखा था आपने किसे देखा ?????

भक्त बनने के लिए भगवान को देखना आवश्यक है क्या आपने देखा ????

विचार स्वयं करे

जिसने भगवान को देखा ही नही वो भगवान का कार्य कैसे करेगा ????

सोच आपकी कदम आपके
किस दिशा मे जाना है निर्धारित करे

जय श्री राम

मुकेश अग्नि

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एक सब्ज़ी वाला था, सब्ज़ी की पूरी दुकान साइकल पर लगा कर घूमता रहता था ।”प्रभु” उसका तकिया कलाम था । कोई पूछता आलू कैसे दिये, 10 रुपये प्रभु । हरी धनीया है क्या ? बिलकुल ताज़ा है प्रभु। वह सबको प्रभु कहता था । लोग भी उसको प्रभु कहकर पुकारने लगे।
एक दिन उससे किसी ने पूछा तुम सबको प्रभु-प्रभु क्यों कहते हो, यहाँ तक तुझे भी लोग इसी उपाधि से बुलाते हैं और तुम्हारा कोई असली नाम है भी या नहीं ?
*सब्जी वाले ने कहा है न प्रभु , मेरा नाम भैयालाल है

प्रभु, मैं शुरू से अनपढ़ गँवार हूँ। गॉव में मज़दूरी करता था, एक बार गाँव में एक नामी सन्त विद्या सागर जी के प्रवचन हुए । प्रवचन मेरे पल्ले नहीं पड़े, लेकिन एक लाइन मेरे दिमाग़ में आकर फँस गई , उन संत ने कहा हर इन्सान में प्रभु का वास हैं -तलाशने की कोशिश तो करो पता नहीं किस इन्सान में मिल जाय और तुम्हारा उद्धार कर जाये, बस उस दिन से मैने हर मिलने वाले को प्रभु की नज़र से देखना और पुकारना शुरू कर दिया वाकई चमत्त्कार हो गया दुनिया के लिए शैतान आदमी भी मेरे लिये प्रभु रूप हो गया । ऐसे दिन फिरें कि मज़दूर से व्यापारी हो गया सुख समृद्धि के सारे साधन जुड़ते गये मेरे लिये तो सारी दुनिया ही प्रभु रूप बन गईं।
लाख टके की बात
जीवन एक प्रतिध्वनि है आप जिस लहजे में आवाज़ देंगे पलटकर आपको उसी लहजे में सुनाईं देंगीं। न जाने किस रूप में प्रभु ( ) मिल जाये *

कमलेश सिबरी

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दिल को छू लेने वाली वास्तविक तथ्यों पर आधारित कहानी आपको जरुर पसंद आएगी

मेरी पत्नी ने कुछ दिनों पहले घर की छत पर कुछ गमले रखवा दिए और एक
छोटा सा गार्डन बना लिया।

पिछले दिनों मैं छत पर गया तो ये देख कर हैरान रह गया कि कई गमलों में
फूल खिल गए हैं,
नींबू के पौधे में दो नींबू 🍋🍋भी लटके हुए हैं और दो चार हरी
मिर्च भी लटकी हुई नज़र आई।

मैंने देखा कि पिछले हफ्ते उसने बांस 🎋का जो पौधा गमले में लगाया था,
उस गमले को घसीट कर दूसरे गमले के पास कर रही थी।

मैंने कहा तुम इस भारी गमले को क्यों घसीट रही हो?

पत्नी ने मुझसे कहा कि यहां ये बांस का पौधा सूख रहा है, इसे खिसका कर इस पौधे के पास कर देते हैं।

मैं हंस पड़ा और कहा अरे पौधा सूख रहा है तो खाद डालो, पानी डालो। 💦

इसे खिसका कर किसी और पौधे
के पास कर देने से क्या होगा?” 😕

_पत्नी ने मुस्कुराते हुए कहा ये पौधा यहां अकेला है इसलिए मुर्झा रहा है।

इसे इस पौधे के पास कर देंगे तो ये फिर लहलहा उठेगा। ☺

पौधे अकेले में सूख जाते हैं, लेकिन उन्हें अगर किसी और पौधे का साथ मिल जाए तो जी उठते हैं।”

यह बहुत अजीब सी बात थी। एक-एक कर कई तस्वीरें आखों के आगे बनती
चली गईं।

मां की मौत के बाद पिताजी कैसे एक ही रात में बूढ़े, बहुत बूढ़े हो गए थे।

हालांकि मां के जाने के बाद सोलह साल तक वो रहे, लेकिन सूखते हुए पौधे की तरह। 😞

मां के रहते हुए जिस पिताजी को मैंने कभी उदास नहीं देखा था, वो मां के जाने के बाद
खामोश से हो गए थे।😔

मुझे पत्नी के विश्वास पर पूरा विश्वास हो रहा था।

लग रहा था कि सचमुच पौधे अकेले में सूख जाते होंगे।

बचपन में मैं एक बार बाज़ार से एक छोटी सी रंगीन मछली 🐠खरीद कर लाया था और
उसे शीशे के जार में पानी भर कर रख दिया था।

मछली सारा दिन गुमसुम रही।
मैंने उसके लिए खाना भी डाला, लेकिन वो चुपचाप इधर-उधर पानी में अनमना सा घूमती रही।

सारा खाना जार की तलहटी में जाकर बैठ
गया, मछली ने कुछ नहीं खाया। दो दिनों तक वो ऐसे ही रही, और एक सुबह मैंने देखा कि वो पानी की सतह पर उल्टी पड़ी थी। 😞😞

आज मुझे घर में पाली वो छोटी सी मछली याद आ रही थी।

बचपन में किसी ने मुझे ये नहीं बताया था, अगर मालूम होता तो कम से
कम दो, तीन या ढ़ेर सारी मछलियां खरीद लाता और मेरी वो प्यारी
मछली यूं तन्हा न मर जाती। 😢

बचपन में मेरी माँ से सुना था कि लोग मकान बनवाते थे और रौशनी के लिए कमरे में दीपक🔥 रखने के लिए दीवार में इसलिए दो मोखे बनवाते थे क्योंकि माँ का
कहना था कि बेचारा अकेला मोखा गुमसुम और उदास हो जाता है।

मुझे लगता है कि संसार में किसी को अकेलापन पसंद नहीं।

_आदमी हो या पौधा, हर किसी को
_किसी न किसी के साथ की ज़रुरत होती है।

आप अपने आसपास झांकिए, अगर कहीं कोई अकेला दिखे तो उसे अपना
साथ दीजिए, उसे मुरझाने से बचाइए।

अगर आप अकेले हों, तो आप भी
किसी का साथ लीजिए, आप खुद को भी मुरझाने से रोकिए।

_अकेलापन संसार में सबसे बड़ी सजा है। गमले के पौधे को तो हाथ से खींच
कर एक दूसरे पौधे के पास किया जा सकता है, लेकिन आदमी को करीब लाने के
लिए जरुरत
होती है रिश्तों को समझने की, सहेजने की और समेटने की।😊

अगर मन के किसी कोने में आपको लगे कि ज़िंदगी का रस सूख रहा है,
जीवन मुरझा रहा है तो उस पर रिश्तों के प्यार का रस डालिए। 💧☺

खुश रहिए और मुस्कुराइए।☺ कोई यूं ही किसी और की गलती से आपसे दूर हो
गया हो तो उसे अपने करीब लाने की कोशिश कीजिए और हो जाइए
हरा-भरा।

     _

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आशा चौधरी

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

विदा होते समय
बस एक यही आवाज सुनाई दे रही थी..
भाई साब आप परेशान ना हो भावी को हम बहू नहीं बेटी बनाकर ले जा रहे हैं¡
.
धीरे धीरे सुबह हुई और गाडी एक सजे हुए घर के सामने जा रुकी
और जोर से आवाज आई!
“जल्दी आओ बहू आ गयी heart emoticon
.
सजी हुई थाली लिए एक लड़की दरवाजे पर थी!
ये दीदी थी जो स्वागत के लिए दरवाजे पर थी..
और पूजा के बाद सबने एक साथ कहा “बहू को कमरे में ले जाओ”
.
भावी को समझ नहीं आया
कुछ घंटो पहले तक तो मैं बेटी थी..
फिर अब कोई बेटी क्यों नही बोल रहा!
.
बहू के घर से फोन हैं बात करा दो!
फ़ोन पर माँ थी
“कैसी हो बेटा”
भावी-“ठीक हू माँ- पापा कैसे हैं दीदी कैसी हैं
अभी तक रो रही है क्या?..
.
”माँ- “सब ठीक हैं तुम्हारा मन लगा?
”भावी-“ हाँ माँ लग गया” माँ से कैसे कहती
बिलकुल मन नहीं लग रहा..
.
घर की बहुत याद आ रही हैं
फ़ोन रखते हुए माँ ने कहा
बेटा देखो बहुत अच्छे लोग हैं..
.
बहू नहीं बेटी बनाकर रखेंगे
बस तुम कोई गलती मत करना..
.
भावी और उसकी ननद बेबी का जन्मदिन एक ही महीने में आता था!
.
भावी बहुत खुश थी साथ साथ जन्मदिन मना लेंगे..
और पहली बार ससुराल में जन्मदिन मनाउंगी!
सुबह होते ही घर से सबका फोन आया
मन बहुत खुश था..
और पति के मुबारकबाद देने से दिन और अच्छा हो गया था!
.
खैर शाम होते होते सब लोग एक साथ हुए और बस केक कटकर दिया गया…
और सासु माँ ने एक पचास का नोट दिया..
.
सासु माँ का दिया
ये नोट भावी को बहुत अच्छा लगा !
.
जन्मदिन न मन पाने का थोडा दुख हुआ
पर फिर लगा शायद ससुराल में ऐसे ही जन्मदिन मनता होगा..
.
अगले हफ्ते बेबी दीदी का जन्मदिन आया
सुबह से ही सबके फ़ोन आने शुरू हो गये!
.
सासु माँ ने कहा भावी आज खाना
थोडा अच्छा बनाना बेबी का जन्मदिन हैं..
.
शाम होते ही मोहल्ले भर के लोगो का
घर पर खाने के लिए आगमन हुआ …
.
सबने अच्छे से खाना खाया!
सासु माँ ने बेबी को 1000 का नोट देते हुए कहा बिटिया तुम्हारे कपडे अभी उधार रहे..
.
भावी इस प्यार को देख कर बस मुस्कुरा ही रही थी..
की पड़ोस की काकी ने पूछ लिया
“ बहू तुम्हारा जन्मदिन कब आता हैं”
.
भावी बड़े प्यार से बोली-
“काकी अभी पिछले हफ्ते ही गया हैं
इसलिए हम दोनों ने साथ साथ मना लिया..
क्यू बेबी दीदी सही कहा ना
” बेबी उसकी तरफ देख कर सिर्फ मुस्कुरा दी !
.
रसोई में खाना बनाते हुए
भावी को एक बात आज ही समझ आई !
बेटी बनाकर रखेंगे
कह देने भर से बहू बेटी नही बन जाती”
.
और माँ की बात याद आ गई
“बस बेटा तुम कोई गलती मत करना”
और आंखे न जाने कब नम हो गयी..

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

(((((((((( कलयुगी पुत्र ))))))))))

सर्दियों के मौसम में एक बूढी औरत अपने घर के कोने में ठंड से तड़फ रही थी।।
.
जवानी में उसके पति का देहांत हो गया था, घर में एक छोटा बेटा था, उस बेटे के उज्जवल भविष्य के लिए उस माँ ने घर-घर जाकर काम किया..
.
काम करते-2 वो बहुत थक जाती थी, लेकिन फिर भी आराम नही करती थी वो सोचती थी जिस दिन बेटा लायक हो जाएगा उस दिन आराम करूंगी।।
.
देखते-2 समय बीत गया ! माँ बूढी हो गयी और बेटे को अच्छी नौकरी मिल गयी।
.
कुछ समय बाद बेटे की शादी कर दी और एक बच्चा हो गया। अब बूढी माँ खुश थी कि बेटा लायक हो गया
.
लेकिन ये क्या
.
बेटे व बहू के पास माँ से बात करने तक का वक़्त नही होता था… बस ये फर्क पड़ा था माँ के जीवन में पहले वह बाहर के लोगो के बर्तन व कपड़े धोती थी। अब अपने घर में बहू-बेटे के…
.
फिर भी खुश थी क्योंकि औलाद उसकी थी.. सर्दियों के मौसम में एक टूटी चारपाई पर, बिल्कुल बाहर वाले कमरें में एक फटे से कम्बल में सिमटकर माँ लेटी थी ! और सोच रही थी….
.
आज बेटे को कहूँगी तेरी माँ को बहुत ठंड लगती है एक नया कम्बल ला दे।।
.
शाम को बेटा घर आया तो माँ ने बोला… बेटा मै बहूत बूढी हो गयी हूँ, शरीर में जान नही है, ठंड सहन नही होती मुझे नया कम्बल ला दे।।
.
तो बेटा गुस्से में बोला, इस महीने घर के राशन में और बच्चे के एडमिशन में बहुत खर्चा हो गया !
.
कुछ पैसे है पर तुम्हारी बहू के लिए शॉल लाना है… वो बाहर जाती है। तुम तो घर में रहती हो सहन कर सकती हो।।
.
ये सर्दी निकाल लो, अगले साल ला दुंगा।।
.
बेटे की बात सुनकर माँ चुपचाप सिमटकर कम्बल में सो गयी अगले सुबह देखा तो माँ इस दुनियाँ में नही रही…
.
सब रिश्तेदार, पड़ोसी एकत्रित हुए, बेटे ने माँ की अंतिम यात्रा में कोई कमी नही छोड़ी थी। माँ की बहुत अच्छी अर्थी सजाई थी!
.
बहुत महंगा शॉल माँ को उढाया था।।
.
सारी दुनियां अंतिम संस्कार देखकर कह रही थी। हमको भी हर जन्म में भगवान ऐसा ही बेटा मिले !
.
मगर उन लोगो को क्या पता था कि मरने के बाद भी एक माँ तड़फ रही थी।।।
.
सिर्फ और सिर्फ एक कम्बल के लिए….

मेरा उद्देस्य इन्सानो के अंदर मर चुकी इंसानियत को जिंदा करना है । अगर मेरी कहानी आपके दिल को छु गयी हो तो अपने सभी दोस्तो को भेजो । हो सकता है ऐसे बहू बेटा हमारे दोस्तो मे भी हो। जिन्हे इस बात का एहसास हो…
〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️〰️🌶

देव शर्मा

Posted in भारतीय मंदिर - Bharatiya Mandir

” केदारनाथ को क्यों कहते हैं ‘जागृत महादेव’ ?, दो मिनट की ये कहानी रौंगटे खड़े कर देगी ”
एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता। मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए। आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है। वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की – कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये । लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहुत रोया। बार-बार भगवन शिव को याद किया कि प्रभु बस एक बार दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी नही सुनी।
पंडित जी बोले अब यहाँ 6 महीने बाद आना, 6 महीने बाद यहा के दरवाजे खुलेंगे। यहाँ 6 महीने बर्फ और ढंड पड़ती है। और सभी जन वहा से चले गये। वह वही पर रोता रहा। रोते-रोते रात होने लगी चारो तरफ अँधेरा हो गया। लेकिन उसे विस्वास था अपने शिव पर कि वो जरुर कृपा करेगे। उसे बहुत भुख और प्यास भी लग रही थी। उसने किसी की आने की आहट सुनी। देखा एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आ रहा है। वह सन्यासी बाबा उस के पास आया और पास में बैठ गया। पूछा – बेटा कहाँ से आये हो ? उस ने सारा हाल सुना दिया और बोला मेरा आना यहाँ पर व्यर्थ हो गया बाबा जी। बाबा जी ने उसे समझाया और खाना भी दिया। और फिर बहुत देर तक बाबा उससे बाते करते रहे। बाबा जी को उस पर दया आ गयी। वह बोले, बेटा मुझे लगता है, सुबह मन्दिर जरुर खुलेगा। तुम दर्शन जरुर करोगे।
बातों-बातों में इस भक्त को ना जाने कब नींद आ गयी। सूर्य के मद्धिम प्रकाश के साथ भक्त की आँख खुली। उसने इधर उधर बाबा को देखा, किन्तु वह कहीं नहीं थे । इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा पंडित जी आ रहे है अपनी पूरी मंडली के साथ। उस ने पंडित को प्रणाम किया और बोला – कल आप ने तो कहा था मन्दिर 6 महीने बाद खुलेगा ? और इस बीच कोई नहीं आएगा यहाँ, लेकिन आप तो सुबह ही आ गये। पंडित जी ने उसे गौर से देखा, पहचानने की कोशिश की और पुछा – तुम वही हो जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आये थे ? जो मुझे मिले थे। 6 महीने होते ही वापस आ गए ! उस आदमी ने आश्चर्य से कहा – नही, मैं कहीं नहीं गया। कल ही तो आप मिले थे, रात में मैं यहीं सो गया था। मैं कहीं नहीं गया। पंडित जी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।

उन्होंने कहा – लेकिन मैं तो 6 महीने पहले मंदिर बन्द करके गया था और आज 6 महीने बाद आया हूँ। तुम छः महीने तक यहाँ पर जिन्दा कैसे रह सकते हो ? पंडित जी और सारी मंडली हैरान थी। इतनी सर्दी में एक अकेला व्यक्ति कैसे छः महीने तक जिन्दा रह सकता है। तब उस भक्त ने उनको सन्यासी बाबा के मिलने और उसके साथ की गयी सारी बाते बता दी। कि एक सन्यासी आया था – लम्बा था, बढ़ी-बढ़ी जटाये, एक हाथ में त्रिशुल और एक हाथ में डमरू लिए, मृग-शाला पहने हुआ था। पंडित जी और सब लोग उसके चरणों में गिर गये। बोले, हमने तो जिंदगी लगा दी किन्तु प्रभु के दर्शन ना पा सके, सच्चे भक्त तो तुम हो। तुमने तो साक्षात भगवान शिव के दर्शन किये है। उन्होंने ही अपनी योग-माया से तुम्हारे 6 महीने को एक रात में परिवर्तित कर दिया। काल-खंड को छोटा कर दिया। यह सब तुम्हारे पवित्र मन, तुम्हारी श्रद्वा और विश्वास के कारण ही हुआ है। हम आपकी भक्ति को प्रणाम करते है।
#जयबाबाकेदारनाथ

सअजय गुप्ता

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दान करने का सही तरीका

एक आदमी ने दुकानदार से पूछा – केले और सेब क्या भाव लगाऐ हैं ? केले 20 रु.दर्जन और सेब 100 रु. किलो । उसी समय एक गरीब सी औरत दुकान में आयी और बोली मुझे एक किलो सेब और एक दर्जन केले चाहिये – क्या भाव है भैया ? दुकानदार: केले 5 रु दर्जन और सेब 25 रु किलो। औरत ने कहा जल्दी से दे दीजिये । दुकान में पहले से मौजूद ग्राहक ने खा जाने वाली निगाहों से घूरकर दुकानदार को देखा । इससे पहले कि वो कुछ कहता – दुकानदार ने ग्राहक को इशारा करते हुये थोड़ा सा इंतजार करने को कहा।

औरत खुशी खुशी खरीदारी करके दुकान से निकलते हुये बड़बड़ाई – हे भगवान तेरा लाख- लाख शुक्र है , मेरे बच्चे फलों को खाकर बहुत खुश होंगे । औरत के जाने के बाद दुकानदार ने पहले से मौजूद ग्राहक की तरफ देखते हुये कहा : ईश्वर गवाह है भाई साहब ! मैंने आपको कोई धोखा देने की कोशिश नहीं की यह विधवा महिला है जो चार अनाथ बच्चों की मां है । किसी से भी किसी तरह की मदद लेने को तैयार नहीं है। मैंने कई बार कोशिश की है और हर बार नाकामी मिली है।तब मुझे यही तरीकीब सूझी है कि जब कभी ये आए तो मै उसे कम से कम दाम लगाकर चीज़े दे दूँ। मैं यह चाहता हूँ कि उसका भरम बना रहे और उसे लगे कि वह किसी की मोहताज नहीं है। मैं इस तरह भगवान के बन्दों की पूजा कर लेता हूँ ।

थोड़ा रूक कर दुकानदार बोला : यह औरत हफ्ते में एक बार आती है। भगवान गवाह है जिस दिन यह आ जाती है उस दिन मेरी बिक्री बढ़ जाती है और उस दिन परमात्मा मुझपर मेहरबान होजाता है । ग्राहक की आंखों में आंसू आ गए, उसने आगे बढकर दुकानदार को गले लगा लिया और बिना किसी शिकायत के अपना सौदा खरीदकर खुशी खुशी चला गया ।

कहानी का मर्म :-

खुशी अगर बांटना चाहो तो तरीका भी मिल जाता है l

पोस्ट कैसी लगी कमेन्ट करके bataye jarur

पूजा जैन

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⚛️ इन्सान का भाग्य कैसे तय होता है ? ⚛️

एक छोटी सी कहानी जरुर पढ़े

एक बार महर्षि नारद भगवान विष्णु के पास गए। उन्होंने शिकायती लहजे में भगवान से कहा -” प्रभु ! पृथ्वी पर अब आपका प्रभाव कम हो रहा है। धर्म पर चलने वालों को कोई अच्छा फल नहीं मिल रहा, जो पाप कर रहे हैं उनका भला हो रहा है।
भगवान ने कहा -” नहीं, ऐसा नहीं है, जो भी हो रहा है, सब नियति के मुताबिक ही हो रहा है।” नारद नहीं माने।

उन्होंने कहा – “मैं तो देखकर आ रहा हूं, पापियों को अच्छा फल मिल रहा है और भला करने वाले, धर्म के रास्ते पर चलने वाले लोगों को बुरा फल मिल रहा है।”

भगवान ने कहा – “कोई ऐसी घटना बताओ।”

नारद ने कहा – “अभी मैं एक जंगल से आ रहा हूं, वहां एक गाय दलदल में फंसी हुई थी। कोई उसे बचाने वाला नहीं था। तभी एक चोर उधर से गुजरा, गाय को फंसा हुआ देखकर भी नहीं रुका, उलटे उस पर पैर रखकर दलदल लांघकर निकल गया। आगे जाकर उसे सोने की मोहरों से भरी एक थैली मिल गई। थोड़ी देर बाद वहां से एक वृद्ध साधु गुजरा। उसने उस गाय को बचाने की पूरी कोशिश की। पूरे शरीर का जोर लगाकर उस गाय को बचा लिया लेकिन मैंने देखा कि गाय को दलदल से निकालने के बाद वह साधु आगे गया तो एक गड्ढे में गिर गया। भगवान बताइए यह कौन सा न्याय है।”
भगवान मुस्कुराए, फिर बोले – “नारद यह सही ही हुआ। जो चोर गाय पर पैर रखकर भाग गया था, उसकी किस्मत में तो आगे खजाना लिखा था लेकिन उसके इस पाप के कारण उसे केवल कुछ मोहरे ही मिलीं।वहीं उस साधु को गड्ढे में इसलिए गिरना पड़ा क्योंकि उसके भाग्य में आगे मृत्यु लिखी थी लेकिन गाय के बचाने के कारण उसके पुण्य बढ़ गए और उसे मृत्यु एक छोटी सी चोट में बदल कर रह गई। इंसान के कर्म से उसका भाग्य तय होता है। अब नारद संतुष्ट थे”
🌹जय श्री हरि🌹

कार्तिक

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त्रियुगी नारायण मंदिर, उत्तराखंड।

उत्तराखंड का त्रियुगीनारायण मंदिर पवित्र और विशेष पौराणिक मंदिर है। इस मंदिर के अंदर सदियों से अग्नि जल रही है। शिव-पार्वती जी ने इसी पवित्र अग्नि को साक्षी मानकर विवाह किया था। यह स्थान रुद्रप्रयाग जिले का एक भाग है।

त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में ही यह कहा जाता है कि यह भगवान शिव जी और माता पार्वती का शुभ विवाह स्थल है। मंदिर के अंदर प्रज्वलित अग्नि कई युगों से जल रही है। इसलिए इस स्थल का नाम त्रियुगी हो गया यानी अग्नि जो तीन युगों से जल रही है।

त्रियुगीनारायण हिमावत की राजधानी थी। यहां शिव पार्वती के विवाह में विष्णु ने पार्वती के भाई के रूप में सभी रीतियों का पालन किया था। जबकि ब्रह्मा इस विवाह में पुरोहित बने थे। उस समय सभी संत-मुनियों ने इस समारोह में भाग लिया था। विवाह स्थल के नियत स्थान को ब्रहम शिला कहा जाता है जो कि मंदिर के ठीक सामने स्थित है। इस मंदिर के महात्म्य का वर्णन स्थल पुराण में भी मिलता है।

विवाह से पहले सभी देवताओं ने यहां स्नान भी किया और इसलिए यहां तीन कुंड बने हैं जिन्हें रुद्र कुंड, विष्णु कुंड और ब्रह्मा कुंड कहते हैं। इन तीनों कुंड में जल सरस्वती कुंड से आता है। सरस्वती कुंड का निर्माण विष्णु की नासिका से हुआ था और इसलिए ऐसी मान्यता है कि इन कुंड में स्नान से संतानहीनता से मुक्ति मिल जाती है।

जो भी श्रद्धालु इस पवित्र स्थान की यात्रा करते हैं वे यहां प्रज्वलित अखंड ज्योति की भभूत अपने साथ ले जाते हैं ताकि उनका वैवाहिक जीवन शिव और पार्वती के आशीष से हमेशा मंगलमय बना रहे। वेदों में उल्लेख है कि यह त्रियुगीनारायण मंदिर त्रेतायुग से स्थापित है। जबकि केदारनाथ व बदरीनाथ द्वापरयुग में स्थापित हुए। यह भी मान्यता है कि इस स्थान पर विष्णु भगवान ने वामन देवता का अवतार लिया था। पौराणिक कथा के अनुसार इंद्रासन पाने के लिए राजा बलि को सौ यज्ञ करने थे, इनमें से बलि 99 यज्ञ पूरे कर चुके थे तब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर रोक दिया जिससे कि बलि का यज्ञ भंग हो गया। यहां विष्णु भगवान वामन देवता के रूप में पूजे जाते हैं।

संजय गुप्ता