Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार श्रीकृष्ण एक भक्त के घर स्वयं पधारे।

भक्त से कृष्ण ने पूछा ये घर किसका है?

भक्त :” प्रभू आपका”

श्रीकृष्ण : “ये गाड़ी किसकी है?”

भक्त : “आपकी”

फिर श्रीकृष्ण ने हर एक वस्तु के बारे में पूछा। भक्त का एक ही उतर मिलता ‘आपकी’। यहाँ तक घर के सभी सदस्य के लिए भी पूछा भक्त का फिर वही जबाब ‘आपके’।

पूछा तेरा शरीर किसका?

भक्त : “आपका”

फिर घर के पूजा स्थान पर जाकर श्रीकृष्ण जी अपनी तस्वीर की ओर इशारा करते हुये पूछते हैं ये किसकी है?

भक्त आँखों में आँसू लिए बोला सिर्फ ये ही मेरे हैं बाकि सब आपका भगवान्।

तन भी तेरा, मन भी तेरा, तेरा पिंड और प्राण।

प्रभु सब कुछ तेरा है…बस एक तू ही मेरा है।

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#गुरुदेव_कृपा
एक कन्या की शादी सत्संगी परिवार में हो गयी।उस परिवार में सब लोग भजन सिमरन करते थे।जब वो सब भजन पर बैठते थे तब वह कन्या सतगुरु जी की फोटो निहारती रहती थी।धीरे धीरे समय बीतने लगा, इस दरमियान उस कन्या को एक बेटा भी हो गया।अब बेटा पांच साल का हो गया था।
जब वह कन्या सतगुरु जी की फोटो निहारती थी तब उसका बेटा सतगुरु की फोटो पर कंघी फेरता रहता। खुश किस्मती से उस कन्या को नामदान की अनुमती मिल गई और वह नामदान के लिए चली गयी,साथ में अपने बेटे को भी ले गयी।
वहां उसने बेटे को बच्चों वाले स्टैंड में सेवादारों के पास छोड़ दिया,और खुद अन्दर नाम दीक्षा के लिए बैठ गयी।सतगुरु नामदान के बाद बच्चों को भी दर्शन देने जाते हैं।उस दिन सतगुरु नामदान से पहले ही बच्चों को दर्शन देने चले गए,और उस बीबी के बच्चे को गोद में लेकर पूछते हैं,”आज कंघी नहीं करनी?”
तो वह बच्चा बोला“बाबा मेरी कंघी तो घर पर ही रह गयी है।”
बाद में जब यह बात उसकी माँ को पता चली तो वह बहुत रोई और सतगुरु को बहुत याद किया।
उसका क्या हाल हुआ होगा यह तो कोई सत्संगी ही समझ सकता है।
इस कथा को बताने से भाव सिर्फ इतना है
कि सतगुरु हमें हर पल देख रहे हैं,हम क्या कर रहे हैं और हमें क्या चाहिए। किस चीज़ की कितनी ज़रूरत है वो हम से बेहतर जानते हैं।हमें भी चाहिए कि हम हर पल सतगुरु की मौज में रहें और उन्हें हमेशा अपने अंग-संग महसूस करें।
।।गुरुदेव कृपा करना।।

विजय तिवारी

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👌बहूत सुंदर कथा👌

            ☺मेरा वृन्दावन☺

एक राजा ने भगवान कृष्ण का एक मंदिर बनवाया
और पूजा के लिए एक पुजारी को लगा दिया. पुजारी बड़े भाव से
बिहारीजी की सेवा करने लगे. भगवान की पूजा-अर्चना और
सेवा-टहल करते पुजारी की उम्र बीत गई. राजा रोज एक फूलों की
माला सेवक के हाथ से भेजा करता था.पुजारी वह माला बिहारीजी
को पहना देते थे. जब राजा दर्शन करने आता तो पुजारी वह माला बिहारीजी के गले से उतारकर राजा को पहना देते थे. यह रोज का
नियम था. एक दिन राजा किसी वजह से मंदिर नहीं जा सका.
उसने एक सेवक से कहा- माला लेकर मंदिर जाओ. पुजारी से कहना
आज मैं नहीं आ पाउंगा. सेवक ने जाकर माला पुजारी को दे दी और
बता दिया कि आज महाराज का इंतजार न करें. सेवक वापस आ
गया. पुजारी ने माला बिहारीजी को पहना दी. फिर उन्हें विचार आया कि आज तक मैं अपने बिहारीजी की चढ़ी माला
राजा को ही पहनाता रहा. कभी ये सौभाग्य मुझे नहीं
मिला.जीवन का कोई भरोसा नहीं कब रूठ जाए. आज मेरे प्रभु ने
मुझ पर बड़ी कृपा की है. राजा आज आएंगे नहीं, तो क्यों न माला
मैं पहन लूं. यह सोचकर पुजारी ने बिहारीजी के गले से माला
उतारकर स्वयं पहन ली. इतने में सेवक आया और उसने बताया कि राजा की सवारी बस मंदिर में पहुंचने ही वाली है.यह सुनकर
पुजारी कांप गए. उन्होंने सोचा अगर राजा ने माला मेरे गले में देख
ली तो मुझ पर क्रोधित होंगे. इस भय से उन्होंने अपने गले से
माला उतारकर बिहारीजी को फिर से पहना दी. जैसे ही राजा
दर्शन को आया तो पुजारी ने नियम अुसार फिर से वह माला
उतार कर राजा के गले में पहना दी. माला पहना रहे थे तभी राजा को माला में एक सफ़ेद बाल दिखा.राजा को सारा माजरा समझ गया
कि पुजारी ने माला स्वयं पहन ली थी और फिर निकालकर
वापस डाल दी होगी. पुजारी ऐसाछल करता है, यह सोचकर राजा
को बहुत गुस्सा आया. उसने पुजारी जी से पूछा- पुजारीजी यह
सफ़ेद बाल किसका है.? पुजारी को लगा कि अगर सच बोलता हूं
तो राजा दंड दे देंगे इसलिए जान छुड़ाने के लिए पुजारी ने कहा- महाराज यहसफ़ेद बाल तो बिहारीजी का है. अब तो राजा गुस्से
से आग- बबूला हो गया कि ये पुजारी झूठ पर झूठ बोले जा रहा
है.भला बिहारीजी के बाल भी कहीं सफ़ेद होते हैं. राजा ने कहा-
पुजारी अगर यह सफेद बाल बिहारीजी का है तो सुबह शृंगार के
समय मैं आउंगा और देखूंगा कि बिहारीजी के बाल सफ़ेद है या
काले. अगर बिहारीजी के बाल काले निकले तो आपको फांसी हो जाएगी. राजा हुक्म सुनाकर चला गया.अब पुजारी रोकर
बिहारीजी से विनती करने लगे- प्रभु मैं जानता हूं आपके
सम्मुख मैंने झूठ बोलने का अपराध किया. अपने गले में डाली
माला पुनः आपको पहना दी. आपकी सेवा करते-करते वृद्ध हो
गया. यह लालसा ही रही कि कभी आपको चढ़ी माला पहनने का
सौभाग्य मिले. इसी लोभ में यह सब अपराध हुआ. मेरे ठाकुरजी पहली बार यह लोभ हुआ और ऐसी विपत्ति आ पड़ी है. मेरे
नाथ अब नहींहोगा ऐसा अपराध. अब आप ही बचाइए नहीं तो
कल सुबह मुझे फाँसी पर चढा दिया जाएगा. पुजारी सारी रात रोते
रहे. सुबह होते ही राजा मंदिर में आ गया. उसने कहा कि आज
प्रभु का शृंगार वह स्वयं करेगा. इतना कहकर राजा ने जैसे ही मुकुट
हटाया तो हैरान रह गया. बिहारीजी के सारे बाल सफ़ेद थे. राजा को लगा, पुजारी ने जान बचाने के लिए बिहारीजी के बाल रंग
दिए होंगे. गुस्से से तमतमाते हुए उसने बाल की जांच करनी
चाही. बाल असली हैं या नकली यब समझने के लिए उसने जैसे
ही बिहारी जी के बाल तोडे, बिहारीजी के सिर से खून
कीधार बहने लगी. राजा ने प्रभु के चरण पकड़ लिए और क्षमा
मांगने लगा. बिहारीजी की मूर्ति से आवाज आई- राजा तुमने आज तक मुझे केवल मूर्ति ही समझा इसलिए आज से मैं तुम्हारे
लिए मूर्ति ही हूँ. पुजारीजी मुझे साक्षात भगवान् समझते हैं.
उनकी श्रद्धा की लाज रखने के लिए आज मुझे अपने बाल सफेद
करने पड़े व रक्त की धार भी बहानी पड़ी तुझे समझाने के लिए.

कहते हैं- समझो तो देव नहीं तो पत्थर.श्रद्धा हो तो उन्हीं पत्थरों में भगवान सप्राण
होकर भक्त से मिलने आ जाएंगे ।।

श्री वृन्दावन बांके बिहारी लाल की जय हो ।
🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏

संजय गुप्ता

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🍅 टमाटर या गुलाब🌷

          🌷🍅एक बार गुरु जी ने अपने छात्रों को कुछ टमाटर🍅 लाने को कहा।     
            🌷🍅लेकिन हर टमाटर🍅 को एक सफेद लिफ़ाफ़े में पैक करना था और उस लिफ़ाफ़े पर उस व्यक्ति का नाम लिखना था जिससे छात्र को घृणा या नाराज़गी😡😠 हो।यदि किसी छात्र को किसी एक से घृणा या नाराज़गी है तो वह एक टमाटर🍅 और जिसको अधिक से है तो वह अधिक टमाटर🍅🍅🍅 लाएगा।इस तरह जितने व्यक्तियों से घृणा या नाराज़गी😠😡 हो उतने ही टमाटर🍅🍅 छात्र को लाने हैं। ऐसे निर्देश भी गुरु जी ने छात्रों को दिये।
            🌷🍅अब अगले दिन सभी छात्र बढ़िया सफेद लिफाफों💌 में टमाटर🍅 डाल कर लाये।सभी लिफाफों पर छात्रों द्वारा गुरु जी के निर्देशानुसार उस व्यक्ति का नाम अंकित किया गया था जिससे छात्र को घृणा या नाराज़गी😡😠 थी।
             🌷🍅अब कोई छात्र 1 तो कोई 2 तो कोई 4 तो कोई 8 और कुछ छात्र तो 15 20 टमाटर🍅🍅 युक्त लिफ़ाफ़े💌💌 लेकर शाला पँहुच गए।जो छात्र जितने व्यक्तियों से घृणा करता था या किसी बात पर नाराज़ था वह उतने टमाटर युक्त लिफ़ाफ़े🍅💌 ले आया।
            🌷🍅गुरु जी ने कक्षा में आते ही पूछा, "हाँ बच्चों ले आये टमाटर🍅🍅?"
      सभी छात्र एक साथ बोल उठे, "जी गुरु जी ले आये।"
         कुछ छात्र ऐसे भी थे जो कोई लिफाफा कोई टमाटर🍅❌ नहीं लाये थे।
         पूछने पर उन्होंने बताया कि उन्हें किसी से कोई नाराज़गी या घृणा😡😠❌ नहीं है।
           🌷🍅गुरु जी सभी छात्रों को एक एक कपड़े का थैला🛍 देते हुए अपने लिफ़ाफ़े उसमें रखने के निर्देश दिए।
         जो छात्र टमाटर नहीं लाये थे उन्हें गुरु जी ने थैले में गुलाब के फूल🌷🌷 दिए।
             🌷🍅गुरु जी ने आदेश दिया ये थैले🛍 जिसमें टमाटर🍅 या गुलाब🌷 हैं इन्हें अच्छी तरह से बन्द कर 10 दिन तक लगातार अपने पास रखना है जँहा भी जाएँ यह थैला🛍 अपने साथ रखें।
             🌷🍅एक सप्ताह बाद ही गुरु जी ने पूछा, "क्यों बच्चों थैला🛍 साथ रख रहे हो न?कैसा लग रहा है?"
          🌷🍅छात्र दुःखी स्वर से बोल उठे,"गुरु जी टमाटरों🍅 की दुर्गन्ध और वज़न से परेशानी😫😫 हो रही है।"

गुरु जी गुलाब के फूलों🌷🌷 वाले छात्रों से कहा, “तुम अपना अनुभव बताओ।”
वे छात्र जो कम ही थे बोले “गुरु जी, हमें कोई परेशानी😫❌ नहीं, थै

संजय गुप्ता

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जरूर पढ़िए ,बहुत सुंदर और यथार्थ परक है
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चाबी बन जाइये, हथौडा बन कर क्या फायदा
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*किसी गाँव में एक ताले वाले की दुकान थी। ताले वाला रोजाना अनेकों चाबियाँ बनाया करता था। ताले वाले की दुकान में एक हथौड़ा भी था| वो हथौड़ा रोज देखा करता कि ये चाबी इतने मजबूत ताले को भी कितनी आसानी से खोल देती है।

एक दिन हथौड़े ने चाबी से पूछा कि मैं तुमसे ज्यादा शक्तिशाली हूँ, मेरे अंदर लोहा भी तुमसे ज्यादा है और आकार में भी तुमसे बड़ा हूँ लेकिन फिर भी मुझे ताला तोड़ने में बहुत समय लगता है और तुम इतनी छोटी हो फिर भी इतनी आसानी से मजबूत ताला कैसे खोल देती हो।

चाबी ने मुस्कुरा के ताले से कहा कि तुम ताले पर ऊपर से प्रहार करते हो और उसे तोड़ने की कोशिश करते हो लेकिन मैं ताले के अंदर तक जाती हूँ, उसके अंतर्मन को छूती हूँ और घूमकर ताले से निवेदन करती हूँ और ताला खुल जाया करता है।

वाह! कितनी गूढ़ बात कही है चाबी ने कि मैं ताले के अंतर्मन को छूती हूँ और वो खुल जाया करता है।

आप कितने भी शक्तिशाली हो या कितनी भी आपके पास ताकत हो, लेकिन जब तक आप लोगों के दिल में नहीं उतरेंगे, उनके अंतर्मन को नहीं छुयेंगे तब तक कोई आपकी इज्जत नहीं करेगा।

हथौड़े के प्रहार से ताला खुलता नहीं बल्कि टूट जाता है

ठीक वैसे ही अगर आप शक्ति के बल पर कुछ काम करना चाहते हैं तो आप 100% नाकामयाब रहेंगे क्योंकि शक्ति से आप किसी के दिल को नहीं छू सकते।
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चाबी बन जाइए ,सबके दिल की चाबी
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🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀

संजय गुप्ता

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#एक_गुडिया..

एक 6 वर्ष का लडका अपनी 4 वर्ष की छोटी बहन के साथ बाजार से जा रहा था।
अचानक से उसे लगा की,उसकी बहन पीछे रह गयी है।
वह रुका, पीछे मुडकर देखा तो जाना कि, उसकी बहन एक खिलौने के दुकान के सामने खडी कोई चीज निहार रही है।
लडका पीछे आता है और बहन से पुछता है, “कुछ चाहिये तुम्हे ?” लडकी एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर दिखाती है।
बच्चा उसका हाथ पकडता है, एक जिम्मेदार बडे भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया देता है। बहन बहुत खुश हो गयी है।
दुकानदार यह सब देख रहा था, बच्चे का व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित भी हुआ ….
अब वह बच्चा बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पुछा, “सर, कितनी कीमत है इस गुड़िया की ?”
दुकानदार एक शांत व्यक्ती है, उसने जीवन के कई उतार चढाव देखे होते है। उन्होने बडे प्यार और अपनत्व से बच्चे से पुछा, “बताओ बेटे, आप क्या दे सकते हो?”
बच्चा अपनी जेब से वो सारी सीपें बाहर निकालकर दुकानदार को देता है जो उसने थोडी देर पहले बहन के साथ समुंदर किनारे से चुन चुन कर लाया था ।

दुकानदार वो सब लेकर यूँ गिनता है जैसे पैसे गिन रहा हो।
सीपें गिनकर वो बच्चे की तरफ देखने लगा तो बच्चा बोला,”सर कुछ कम है क्या?”
दुकानदार :-” नही नही, ये तो इस गुड़िया की कीमत से ज्यादा है, ज्यादा मै वापिस देता हूं” यह कहकर उसने 4 सीपें रख ली और बाकी की बच्चे को वापिस दे दी।
बच्चा बडी खुशी से वो सीपें जेब मे रखकर बहन को साथ लेकर चला गया।

यह सब उस दुकान का नौकर देख रहा था, उसने आश्चर्य से मालिक से पुछा, ” मालिक ! इतनी महंगी गुड़िया आपने केवल 4 सिपों के बदले मे दे दी ?”
दुकानदार हंसते हुये बोला,
“हमारे लिये ये केवल सीप है पर उस 6साल के बच्चे के लिये अतिशय मूल्यवान है। और अब इस उम्र मे वो नही जानता की पैसे क्या होते है ?
पर जब वह बडा होगा ना…
और जब उसे याद आयेगा कि उसने सिपों के बदले बहन को गुड़िया खरीदकर दी थी, तब ऊसे मेरी याद जरुर आयेगी, वह सोचेगा कि,,,,,,

“यह विश्व अच्छे मनुष्यों से भरा हुआ है।”
यही बात उसके अंदर सकारात्मक दृष्टीकोण बढाने मे मदद करेगी और वो भी अच्छा इंन्सान बनने के लिये प्रेरित होगा

संजय गुप्ता

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सभी मित्रों को #दीप का प्रणाम।👏⚘

घर को औरत ही घढ़ती है जरा गोर से पढ़ना

एक गांव में एक जमींदार था। उसके कई नौकरों में जग्गू भी था। गांव से लगी बस्ती में, बाकी मजदूरों के साथ जग्गू भी अपने पांच लड़कों के साथ रहता था। जग्गू की पत्नी बहुत पहले गुजर गई थी। एक झोंपड़े में वह बच्चों को पाल रहा था। बच्चे बड़े होते गये और जमींदार के घर
नौकरी में लगते गये।
सब मजदूरों को शाम को मजूरी मिलती। जग्गू और उसके लड़के चना और गुड़ लेते थे। चना भून कर गुड़ के साथ खा लेते थे।
बस्ती वालों ने जग्गू को बड़े लड़के की शादी कर देने की सलाह दी।
उसकी शादी हो गई और कुछ दिन बाद गौना भी आ गया। उस दिन जग्गू की झोंपड़ी के सामने बड़ी बमचक मची। बहुत लोग इकठ्ठा हुये नई बहू देखने को। फिर धीरे धीरे भीड़ छंटी। आदमी काम पर चले गये। औरतें अपने अपने घर। जाते जाते एक बुढ़िया बहू से कहती गई – पास ही घर है। किसी चीज की जरूरत हो तो संकोच मत करना, आ जाना लेने। सबके जाने के बाद बहू ने घूंघट उठा कर अपनी ससुराल को देखा तो उसका कलेजा मुंह को आ गया।जर्जर सी झोंपड़ी, खूंटी पर टंगी कुछ पोटलियां और झोंपड़ी के बाहर बने छः चूल्हे (जग्गू और उसके सभी बच्चे अलग अलग चना भूनते थे)। बहू का मन हुआ कि उठे और सरपट अपने गांव भाग चले। पर अचानक उसे सोच कर धचका लगा– वहां कौन से नूर गड़े हैं। मां है नहीं। भाई भौजाई के राज में नौकरानी जैसी जिंदगी ही तो गुजारनी होगी। यह सोचते हुये वह बुक्का फाड़ रोने लगी। रोते-रोते थक कर शान्त हुई। मन में कुछ सोचा। पड़ोसन के घर जा कर पूछा –
अम्मां एक झाड़ू मिलेगा? बुढ़िया अम्मा ने झाड़ू, गोबर और मिट्टी दी।साथ मेंअपनी पोती को भेज दिया।वापस आ कर बहू ने
एक चूल्हा छोड़ बाकी फोड़ दिये।सफाई कर गोबर-मिट्टी से झोंपड़ीऔर दुआर लीपा।फिर उसने सभी पोटलियों के चने
एक साथ किये और अम्मा के घर जा कर चना पीसा।अम्मा ने उसे सागऔर चटनी भी दी। वापस आ कर बहू ने चने के आटे की रोटियां बनाई और इन्तजार करने लगी।जग्गू और उसके लड़के जब लौटे तो एक ही चूल्हा देख भड़क गये।चिल्लाने
लगे कि इसने तो आते ही सत्यानाश कर दिया। अपने आदमी का छोड़ बाकी सब का चूल्हा फोड़ दिया। झगड़े की आवाज सुन बहू झोंपड़ी से निकली। बोली –आप लोग हाथ मुंह धो कर बैठिये, मैं खाना
निकालती हूं। सब अचकचा गये! हाथ मुंह धो कर बैठे। बहू ने पत्तल पर खाना परोसा – रोटी, साग, चटनी। मुद्दत बाद उन्हें ऐसा खाना मिला था। खा कर अपनी अपनी कथरी ले वे सोने चले गये।
सुबह काम पर जाते समय बहू ने उन्हें एक एक रोटी और गुड़ दिया।चलते समय जग्गू से उसने पूछा – बाबूजी, मालिक आप लोगों को चना और गुड़ ही देता है क्या? जग्गू ने बताया कि मिलता तो सभी अन्न है पर वे चना-गुड़ ही लेते हैं।आसान रहता है खाने में। बहू ने समझाया कि सब
अलग अलग प्रकार का अनाज लिया करें। देवर ने बताया कि उसका काम लकड़ी चीरना है। बहू ने उसे घर के ईंधन के लिये भी कुछ लकड़ी लाने को कहा।बहू सब की मजदूरी के अनाज से एक- एक मुठ्ठी अन्न अलग रखती। उससे बनिये की दुकान से बाकी जरूरत की चीजें लाती। जग्गू की गृहस्थी धड़ल्ले से चल पड़ी। एक दिन सभी भाइयों और बाप ने तालाब की मिट्टी से झोंपड़ी के आगे बाड़ बनाया। बहू के गुण गांव में चर्चित होने लगे।जमींदार तक यह बात पंहुची। वह कभी कभी बस्ती में आया करता था।
आज वह जग्गू के घर उसकी बहू को आशीर्वाद देने आया। बहू ने पैर छू
प्रणाम किया तो जमींदार ने उसे एक हार दिया। हार माथे से लगा बहू ने कहा कि मालिक यह हमारे किस काम आयेगा। इससे अच्छा होता कि मालिक हमें चार लाठी जमीन दिये होते झोंपड़ी के दायें – बायें,तो एक कोठरी बन जाती। बहू की चतुराई पर जमींदार हंस पड़ा। बोला –
ठीक, जमीन तो जग्गू को मिलेगी ही। यह हार तो तुम्हारा हुआ। –औरत चाहे घर को स्वर्ग बना दे, चाहे नर्क! मुझे लगता है कि देश, समाज, और
घर को औरत ही गढ़त।

संजय गुप्ता

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एक बार एक सर्वगुणी राजा घोड़े के तबेलें में घुमनें में व्यस्त थे तभी एक साधु भिक्षा मांगने के लिए तबेलें में ही आए और राजा से बोले “मम् भिक्षाम् देहि..!!” राजा ने बिना विचारे तबेलें से घोडें की लीद उठाई और उसके पात्र में डाल दी। राजा ने यह भी नहीं विचारा कि इसका परिणाम कितना दुखदायी होगा। साधु भी शांत स्वभाव होने के कारण भिक्षा ले वहाँ से चले गए। और कुटिया के बाहर एक कोने में डाल दी। कुछ समय उपरान्त राजा उसी जंगल में शिकार वास्ते गए। राजा ने जब जंगल में देखा एक कुटिया के बाहर घोड़े की लीद का ढेर लगा था। उसने देखा कि यहाँ तो न कोई तबेला है और न ही दूर-दूर तक कोई घोडें दिखाई दे रहे हैं। वह आश्चर्यचकित हो कुटिया में गए और साधु से बोले “महाराज! आप हमें एक बात बताइए यहाँ कोई घोड़ा भी नहीं न ही तबेला है तो यह इतनी सारी घोड़े की लीद कहा से आई !” साधु ने कहा ” राजन्! लगता है आपने हमें पहचाना नही! यह लीद तो आपकी ही दी हुई है!” यह सुन राजा ने उस साधु को ध्यान से देखा और बोले हाँजी महाराज! आपको हमने पहचान लिया। पर आप हमें एक बात का जवाब दीजिए हमने तो थोड़ी-सी लीद दी थी पर यह तो बहुत सारी हो गयी है इतनी सारी कैसे हो गयी कृपया कर हमें विस्तार से समझाइए। साधु ने कहा “आप जितनी भी भिक्षा देते है और जो भी देते है वह दिन-प्रतिदिन प्रफुल्लित हो जाती है यह उसी का परिणाम है। और जब हम यह शरीर छोड़ते है तो आपको यह सब खानी पड़ेगी।” राजा यह सब सुनकर दंग रह गया और नासमझी के कारण आँखों में अश्रु भर चरणों में नतमस्तक हो साधु महाराज से विनती कर बोले “महाराज! मुझे क्षमा कर दीजिए मैं तो एक रत्ती भर लीद नहीं खा सकूँगा।आइन्दा मैं ऐसी गलती कभी नहीं करूँगा।” कृपया कोई ऐसा उपाय बता दीजिए! जिससे मैं अपने कर्मों को वजन हल्का कर सकूँ!” साधु ने जब राजा की ऐसी दुखमयी हालात देखी तो उन्होंने कहा “राजन्! एक उपाय है जिसमें आपको ऐसा कारज करना है जिससे सभी प्रजाजन आपकी निंदा करें आपको ऐसा कोई कारज नहीं करना है जो गलत हो! आपको अपने को दूसरों की नज़र में गलत दर्शाना है बस!! और अपनी नजर में वह कारज आपने न किया हो।” यह सुन राजा ने महल में आ काफी सोच-विचार कर जिससे कि उनकी निंदा हो वह उसी रात एक वैश्या के कोठे पर बाहर ही चारपाई पर रात भर बैठ रात बिता जब सब प्रजाजन उठ गए तो वापिस आये तो सब लोग आपस में राजा की निंदा करने लगे कि कैसा राजा है कितना निंदनीय कृत्य कर रहा है क्या यह शोभनीय है ?? बगैरा-बगैरा!! इसप्रकार की निंदा से राजा के पाप की गठरी हल्की होने लगी। अब राजा दोबारा उसी साधु के पास गए तो घोड़े की लीद के ढेर को मुट्ठी भर में परवर्तित देख बोले “महाराज! यह कैसे हुआ? ढेर में इतना बड़ा परिवर्तन!!” साधू ने कहा “यह निंदा के कारण हुआ है राजन् आपकी निंदा करने के कारण सब प्रजाजनों में बराबर-बराबर लीद आप बँट गयी है जब हम किसी की बेवजह निंदा करते है तो हमें उसके पाप का बोझ उठाना होता है अब जो तुमने घोड़े की लीद हमें दी थी वह ही पड़ी ही वह तो आपको ही थाली में दी जायेगी। अब इसको तुम चूर्ण बना के खाओ, सब्जी में डाल के खाओ या पानी में घोलकर पीओ यह तो आपको ही खानी पड़ेगी राजन्! अपना किया कर्म तो हमें ही भुगतना है जी चाहे हँस के भुगतो या रो कर सब आप ही भोगना है।
“जैसा दोगें वैसा ही लौट कर थाली में वापिस आएगा!”🌷🌷🙏🏼🌷🌷

संजय गुप्ता

Posted in कविता - Kavita - કવિતા

क्या खूब लिखा है.. एक पत्नी ने अपने पति के लिए

प्रिय पतिदेव,

नहीं कहती हूँ आपसे कि चाँद-तारे तोड़कर लाओ,
पर जब आते हो, एक मुस्कान साथ लाया करो..!!

नहीं कहती, कि मुझे सबसे ज्यादा चाहो,
पर एक नज़र प्यार से तो उठाया करो..!!

नही कहती, कि बाहर खिलाने ले जाओ,
पर एक पहर साथ बैठ के तो खाया करो..!!

नही कहती, कि हाथ बटाओ मेरा,
पर कितना करती हूँ, देख तो जाया करो..!!

नही कहती, कि हाथ पकड़ के चलो मेरा,
पर कभी दो कदम साथ तो आया करो..!!

यूँ ही गुज़र जाएगा जिंदगी का सफ़र भागते भागते,
एक पल थक के साथ तो बैठ जाया करो..!!

नही कहती, कि कई नामों से पुकारो,
एक बार फुर्सत से “सुनो” ही कह जाया करो..!!

नहीं कहती हूँ आपसे कि चाँद-तारे तोड़कर लाओ,
पर जब आते हो, एक मुस्कान साथ लाया करो..!

✍……… 🏀👉आखिर पति के लिए पत्नी क्यों जरूरी है?👈🏀

🙏मानो न मानो -🙏
👌(१) जब तुम दुःखी हो,
तो वह तुम्हें कभी अकेला नहीं छोड़ेगी।🎾

👌(२) हर वक्त, हर दिन,
तुम्हें तुम्हारे अन्दर की बुरी आदतें छोड़ने को कहेगी।🌕

👌(३) हर छोटी-छोटी बात पर तुमसे झगड़ा करेगी,
परंतु ज्यादा देर गुस्सा नहीं रह पाएगी।🎾

👌(४)तुम्हें आर्थिक मजबूती देगी।🌕

👌(५) कुछ भी अच्छा न हो, फिर भी,
तुम्हें यही कहेगी; चिन्ता मत करो, सब ठीक हो जाएगा।🎾

👌(६) तुम्हें समय का पाबन्द बनाएगी।🌕

👌(७) यह जानने के लिए कि तुम क्या कर रहे हो, दिन में 15 बार फोन करके हाल पूछेगी। कभी कभी तुम्हें खीझ भी आएगी, पर सच यह है कि तुम कुछ कर नहीं पाओगे।🎾

👌(८) चूँकि, पत्नी ईश्वर का दिया एक विशेष उपहार है,
इसलिए उसकी उपयोगिता जानो और उसकी देखभाल करो।🌕

👌(९) यह सन्देश हर विवाहित पुरुष के मोबाइल पर होना चाहिए,
ताकि उन्हें अपनी पत्नी के महत्व का अंदाजा हो।🎾

👌(१०) अंत में हम दोनों ही होंगे।🌕

👌(११) भले ही झगड़ें, गुस्सा करें,
एक दूसरे पर टूट पड़ें, एक दूसरे पर दादागीरी करने के
लिए; अंत में हम दोनों ही होंगे।🎾

👌(१२) जो कहना है, वह कह लें, जो करना है,
वह कर लें; एक दूसरे के चश्मे और लकड़ी ढूंढने में,
अंत में हम दोनों ही होंगे।🌕

👌(13) मैं रूठूँ तो तुम मना लेना,
तुम रूठो तो मैं मना लूंगा,
एक दूसरे को लाड़ लड़ाने के लिए;
अंत में हम दोनों ही होंगे।🎾

👌(१४) आंखें जब धुंधली होंगी,
याददाश्त जब कमजोर होगी,
तब एक दूसरे को, एक दूसरे
में ढूंढने के लिए, अंत में हम दोनों ही होंगे।🌕

👌(१५) घुटने जब दुखने लगेंगे,
कमर भी झुकना बंद करेगी, तब एक दूसरे के पांव के नाखून काटने के लिए, अन्त में हम दोनों ही होंगे।🎾

👌(१६) “अरे मुुझे कुछ नहीं हुआ,
बिल्कुल नॉर्मल हूं” ऐसा कह कर एक दूसरे को बहकाने के लिए, अंत में हम दोनों ही होंगे।🌕

👌(१७) साथ जब छूट जाएगा,
विदाई की घड़ी जब आ जाएगी,
तब एक दूसरे को माफ करने के लिए
अंत में हम दोनों ही होंगे।🎾

टिप्पणी : पति-पत्नी पर व्यंग्य कितने भी हों,
किन्तु तथ्य यही है।

संजय गुप्ता

Posted in गौ माता - Gau maata

गौमूत्र
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गौमूत्र घर को पवित्र कर बुरी नजर से बचाता है रोगों पर विजय प्राप्त करना है तो गौमूत्र का करें इस्तेमाल अवश्य करना चाहिए।

आज संपूर्ण भारतवर्ष में गाय की उपयोगिता पर भारत सरकार सहित राज्यों की सरकार भी जागरूक हो गई है क्योंकि गौ माता के दूध, मूत्र से लेकर गोबर तक मानव जीवन में इतना उपयोगी है कि समस्त रोग व्याधियां एवं मानव शरीर के पोषण में उसकी महत्ता प्रतिपादित हो रही है। आज मैं गाय के गोमूत्र से किन किन बीमारियों में लाभ होता है और घर कैसे बुरी नजर से बचता है उसके उपयोग की जानकारी दे रहा हूं।

गोमूत्र में किसी भी प्रकार के कीटाणु नष्ट करने की चमत्कारी शक्ति है। सभी कीटानुजन्य व्याधियां नष्ट होती है। वास्तु शास्त्र में गौमूत्र का बहुत महत्व है घर को शुद्ध और पवित्र बनाने के लिए यदि घर में इस का छिड़काव किया जाता है तो जितनी आसुरी शक्तियां हैं वह सब गोमूत्र के प्रभाव से खत्म हो जाती है प्रातः काल सूर्योदय के समय गोमूत्र का छिड़काव घर के सभी कमरों मे मुख्य द्वार से शुरू कर पुणे मुख्य द्वार पर खत्म करें समस्त वास्तु दोष एवं ग्रह दोष खत्म हो जाएंगे।गोमूत्र त्रिदोष को सामान्य बनाता है अत एव रोग नष्ट हो जाते है। प्रातः काल खाली पेट गौ मूत्र का सेवन करें।

गोमूत्र से लाभ-
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गोमूत्र शरीर में लिवर को सही एवं स्वच्छ खून बनाकर किसी भी रोग का विरोध करने की शक्ति प्रदान करता है। प्रतिदिन सेवन करें।

गोमूत्र में सभी तत्व होते है जो हमारे शरीर के आरोग्यदायक तत्वों की कमी की पूर्ति करते है।

गोमूत्र में कई खनिज खासकर ताम्र होता है जिसकी पूर्ति से शरीर के खनिज तत्व पूर्ण हो जाते है। स्वर्ण छार भी होने से बचने की यह शक्ति देता है।

मानसिक छोभ से स्नायु तन्त्र (नर्वस सिस्टम) को आघात होता है। गोमूत्र को मेध्य और ह्रद्य कहा गया है। यानि मष्तिष्क और ह्रदय को शक्ति प्रदान करता है। अतएव मानसिक कारणों से होने वाले आघात से ह्रदय की रक्षा करता है और इन अंगो को होने वाले रोगों से बचत है।

किसी भी प्रकार की औषधि की मात्रा का अतिप्रयोग हो जाने से जी तत्व शरीर में रहकर किसी प्रकार से उपद्रव पैदा करते है उनको गोमूत्र अपनी विषनाशक शक्ति से रोगी को निरोग करता है।

विद्युत् तरंगे हमारे शरीर को स्वस्थ रखती है यह वातावरण में विद्यमान है। सुक्षमाति सूक्ष्म रूप से तरंगे हमारे शरीर में गोमूत्र से प्राप्त ताम्र के रहम से ताम्र के अपने विद्युतीय आकर्षक गुण के कारण शरीर से आकर्षित होकर स्वास्थ्य प्रदान करती है।

गोमूत्र रसायन है यह बुढ़ापा रोकता है व्याधियो को नष्ट करता है। प्रतिदिन सेवन करें।

आहार में जो पोषक तत्व कम प्राप्त होते है उनकी पूर्ति गोमूत्र में विद्यमान तत्वों से होकर स्वास्थ्य लाभ होता है।

आत्मा के विरुद्ध कर्म करने से ह्रदय और मष्तिष्क संकुचित होता है जिससे शरीर में क्रिया कलापो पर प्रभाव पड़कर रिक्त हो जाते है। गोमूत्र सात्विक बुद्धि प्रदान कर सही कार्य कराकर इस तरह के रोगों से बचाता है ।

शास्त्रो में पूर्व कर्मज व्याधियां भी कही गयी है जो हमे भुगतनी पड़ती है गोमूत्र में गंगा ने निवास किया है गंगा पाप नाशिनी है अतएव गोमूत्र पान से पूर्व जन्म के पाप क्षय होकर इस प्रकार के रोग नष्ट हो जाते है ।

शास्त्रो के अनुसार भूतो के शरीर प्रवेश के कारण होने वाले रोगों पर गोमूत्र इसलिए प्रभाव करता है की भूतो के अधिपति भगवान शंकर है। शंकर के शीश पर गंगा है गो मूत्र में गंगा है। अतः गोमूत्र पान से भूतगण अपने अधिपति के मश्तक पर गंगा के दर्शन कर शांत हो जाते है, और इस शरीर को नही सताते है।

जो रोगी वंश परम्परा से रोगी हो रोग के पहले ही गो मूत्र कुछ समय पान करने से रोगी के शरीर में इतनी विरोधी शक्ति हो जाती है की रोग नष्ट हो जाते है।

विषों के द्वारा रोग होने के कारणों पर गोमूत्र विष नाशक होने के चमत्कार के कारण ही रोग नाश करता है। बड़ी-बड़ी विषैली औषधियां गोमूत्र से शुद्ध होती है गोमूत्र मानव शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ाकर रोगों को नाश करने की क्षमता देता है। उन्मुक्ति शक्ति (immunity power) देता है। निर्विष होते हुए यह विष नाशक है।
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