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|| છપ્પન ભોગ એટલે શું ? ||

સમગ્ર વિશ્વમાં માત્ર અને માત્ર એક ‘ કમળ- જ એવું ફૂલ છે જે સાતે સાત રંગોમાં ખીલે છે. લક્ષ્મીજીનું આસન જ કમળ છે. વિષ્ણુ ભગવાનને એટલે જ સ્તો ‘ કમળાપતિ’ પણ કહેવાય છે. દ્વારકાધીશ શ્રીકૃષ્ણ ભગવાન વિષ્ણુ ભગવાનના આઠમાં અવતાર છે. દ્વારકાધીશ અને રણડછોડરાય (ડાકોર)ને ૫૬- છપ્પનભોગ ધરાવવામાં આવે છે એમાં કમળનું ફૂલ નિમિત છે. કઈ રીતે ? આવો.. જાણીએ.

કમળના ફૂલમાં સામાન્ય રીતે ત્રણ પડ હોય છે. સૌથી પહેલા પડમાં આઠ, બીજા પડમાં એનાથી ડબલ સોળ અને ત્રીજા પડમાં એનાથી ડબલ બત્રીસ એમ કુલ મળી છપ્પન પાંખડીઓ હોય છે. આ છપ્પન પાંખડીઓ ખુલી જાય તેની મધ્યમાં ભગવાન બિરાજે છે. પછી દરેક પાંખડીઓ એક એક ગોપી ( રાધા સહિત) ભગવાનને છપ્પન વાનગીઓ ખવરાવે છે તે મુજબ જે છપ્પન અલગ અલગ વાનગીઓ ધરાવવામાં આવે છે તેને જ છપ્પન ભોગ કહેવામાં આવે છે.

કમળ- એ બ્રહ્મનું પ્રતીક છે. ત્રણ પડ એ ત્રણ લોકનું પ્રતીક છે. આઠ પાંખડી શ્રીકૃષ્ણની આઠ પટરાણીઓનું ઃ ૧૬- સોળ પાંખડી એ સોળ શણગાર અને સોળ કળાનું અને બત્રીસ પાંખડી એ શરીરના બત્રીસ કોઠાનું પ્રતીક છે. છપ્પનભોગની વાનગીઓ સગવડ-અગવડ મુજબ સ્થળ અને સમયને ધ્યાનમાં રાખીને કંઈક અંશે ફેરફારને આધીન રહેતી હોય છે.

સામાન્ય રીતે ૫૬ (છપ્પન) ભોગ માટે ૭૦(સિત્તેર) ડબા શુદ્ધ ઘી, ૨૫૦ (બસોપચાસ) કિલો મેંદો, ૫૦ (પચાસ) ગુણી ખાંડ, અન્ય સૂકામેવા અને પૂરક સામગ્રી વપરાય છે. છપ્પન પ્રકારની મીઠાઈ બનતી હોઈ તેને ૫૬ (છપ્પન) ભોગ કહેવાય છે. વાનગીઓ નીચે મુજબ હોય છે.

૧) બુંદી-છૂટી
૨) મોતીચૂર
૩) અડદિયા
૪) ચોખાના લાડું
૫) મગનોશીરો
૬) મોહનથાળ
૭) મૈસૂરઘેબર
૮) બરફીચૂરમું
૯) પેડાં-સાદા
૧૦) શીખંડ
૧૧) રબડી
૧૨) કાજુકાતરી
૧૩) પકવાન
૧૪) બાસૂદી
૧૫) દૂધપાક
૧૬) ચણાલોટશીરો
૧૭) રવાનો શીરો
૧૮) લાપસી
૧૯) સક્કરગુંજા
૨૦) બિરંજ
૨૧) ચંદ્રકળા
૨૨) ગુલાબજાંબુ
૨૩) કેસરપેંડા
૨૪) કંસાર
૨૫) ખાજલી
૨૬) માલપુઆ
૨૭) ગગન
૨૮) સેવ
૨૯) સક્કરપારા
૩૦) છાશ
૩૧) દહીં
૩૨) ઘી
૩૩) માખણ
૩૪) પૂરી
૩૫) રોટલી
૩૬) રોટલા
૩૭) ભાખરી
૩૮) પાપડ
૩૯) ચણાદાળ
૪૦) મગદાળ
૪૧) તુવેર દાળ
૪૨) ખીચડી
૪૩) ભાત
૪૪) તમામ કઠોળ
૪૫) બટાટાવડાં
૪૬) ગાંઠિયા
૪૭) ભજિયાં
૪૮) કચોરી
૪૯) પેટીસ
૫૦) દહીંવડાં
૫૧) રાયતું
૫૨) જલેબી
૫૩) પાતરાં
૫૪) ખાંડવી
૫૫) ખમણ
૫૬) તમામ લીલાં શાકભાજી

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी कीड़े के साथ हो गई । कीड़े ने भंवरे से कहा कि भाई तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो इस लिये मेरे यहाँ भोजन पर आओ
अब अगले दिन भंवरा सुबह सुबह तैयार हो गया और अपने बच्चो के साथ गोबरी कीड़े के यहाँ भोजन के लिये पहुँचा
कीड़ा भी उन को देखकर बहुत खुश हुवा और सब का आदर करके भोजन परोसा
भोजन में गोबर की गोलियां परोसी गई और कीड़े ने कहा कि खाओ भाई रुक क्यों गए
भंवरा सोच में पड़ गया कि मैने बुरे का संग किया इस लिये मुझे तो गोबर खाना ही पड़ेगा।भंवरा ने सोचा की ये मुझे इस का संग करने से मिला और फल भी पाया अब इस को भी मेरे संग का फल मिलना चाहिये..
भंवरा बोला भाई आज तो में आप के यहाँ भोजन के लिये आया अब तुम कल मेरे यहाँ आओगे..
अगले दिन कीड़ा तैयार होकर भंवरे के यहाँ पहुँचा ,भवरे ने कीड़े को उठा कर गुलाब के फूल में बिठा दिया और रस पिलाया भवरे ने खूब फूलो का रस पिया और मजे किये अपने मित्र का धन्यवाद किया और कहाँ मित्र तुम तो बहुत अच्छी जगह रहते हो और अच्छा खाते हो..
इस के बाद कीड़े ने सोचा क्यों न अब में यही रहू और ये सोच कर यही फूल में बैठा रहा इतने में ही पास के मंदिर का पुजारी आया और फूल तोड़ कर ले गया और चढ़ा दिया इस को बिहारी जी और सर्वेश्वरी राधा जी के चरणों में..
कीड़े को भगवन के दर्शन भी हुवे और उनके चरणों में बैठा इस के बाद सन्ध्या में पुजारी ने सारे फूल इक्कठा किये और गंगा जी में छोड़ दिए कीड़ा गंगा की लहरों पर लहर रहा था और अपनी किस्मत पर हैरान था कि कितना पूण्य हो गया इतने में ही भंवरा उड़ता हुवा कीड़े के पास आया और बोला की मित्र अब बताओ क्या हाल है कीड़े ने बोला भाई अब जन्म जन्म के पापो से मुक्ति हो चुकी है जहाँ गंगा जी में मरने के बाद अस्थियो को छोड़ा जाता है वहाँ में जिन्दा ही आ गया हूं ये सब मुझे तेरी मित्रता और अछि संगत का ही फल मिला है और ख़ुशी से नीहाल हु तेरा धन्यवाद जिस को में अपनी जन्नत समझता था वो गन्दगी थी और जो तेरी वजह से मिला ये ही स्वर्ग है..
सही कहाँ हैं:
संगत से गुण उपजे।संगत से गुण जाए।।लोहा लगा जहाज में। पानी मे उतराय।।

     आप का दिन शुभ
     जीवन सुखी और
     *समय अनुकूल हो

संजय गुप्ता

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

आखरी मुलाकात 😢
दोस्तों एक बार पढ़ना जरूर दिल को छू जायेगी ये post 😢 👇👇

लड़की- क्या हम मिल सकते है?
लड़का- हाँ क्यू नाही बताओ कहा मिलना है? 😐
लड़की- नेहरु पार्क मे आजओ मेन वही हूँ!!!
लड़का- बस 15 मिन मे आता हूँ 👍
आफ्टर 15 मिन दोनो पार्क मे मिलते है!!
लड़की- हेल्लो 💕
(फेक स्माइल)
लड़का- हेल्लो(फेक स्माइल) 😊
लड़की- कैसे हो ?💛
लड़का- तुम्हारे बिन जैसे होना चाहिये था 😔
लड़की- क्या मेन तुम्हे हग कर सकती हूँ ?😟
लड़का- इसके लिए पर्मिशन कब से माँगनी पड़ गई?
लड़की- नाही बस इसे ही
दोनो एक दूसरे को हग करते है और रोने लगते है
लड़का- अरे तुम रो क्यों रही हो? तुम्हे पता है ना तुम्हे रोते हुए नाही देख सकता 😦
लड़की- देख तो मैं भी नाही सकती तुम्हे रोते हुए लेकिन
लड़का- लेकिन क्या ……
लड़की- मैं नही रह पाऊँगी तुम्हारे बिना …😢
लड़का- मे कौन्सा रेह पाउँगा तुम्हारे बिन पागल
लड़की- लेकिन रहना पड़ेगा हमे एक दूसरे के बिना क्योंकि दो वीक बाद मेरी इंगेजमेंट है…😔
लड़का- सुनो हम भाग चलते है सबसे दूर!!
लड़की – भागा तो परायो से जाता है अपनों से भाग कर कहा जायेंगे 😢
और मैं अपनी खुशि के लिए अपने परिवार को तो दुख नही दे सकती ……
पता है बिटिया माँ बाप का गुरूर होती है मै कैसे अपने पैरेंट्स का गुरूर तोड़ सकती हु ……
कुछ सालो के प्यार के लिये मैं अपने परिवार से रिश्ते कैसे तोड़ दू ?😭
लड़का- पता है यही कारण है कि मैं तुम्हे पसंद करता हूँ क्युकी मेन जनता हूँ तुम खुद की खुशियो से
ज्यदा दुसरो के बारे मे सोचती हो..
लड़की- मैंने तो पहले ही ये बोला था आपको
लड़का- हाँ मैं हमेशा से जनता हूँ की तुम्हारे लिये बेटी होने का फरज़
निभाना सबसे पहले है!!!
लड़की लड़के को गले लगाती है और रोने लगती है 😭
लड़की- मुझे माफ़ कर देना
लड़का : माफ़ उसे किया जाता है जिसने गलती की हो तुम तो बस अपना फ़र्ज़ निभा रही हो
लड़की- अपना ख्याल रखना हमेशा ! मेरी कसम है आपको 😢
लड़का- और तुम भी अपना ख्याल रखना …बारिश मे मत भीग्ना झुकाम हो जाता तुम्हे….
सर्दियों मे आइस क्रीम खाने की ज़िद मत करना ….और सुनो वो बच्चो के साथ जैसे खेलती हो वैसे ही खेलते रहना….
आई अल्वेज लोव यू दोनो एक दूसरे को
हग करते है और फर चले जाते हैं…
दोस्तों आपको ये स्टोरी कैसे लगी?
इन्होंने ठीक किया या गलत !!
कभी भी नए रिश्तो में बहक कर पुराने रिश्ते नही भूलने चाहिए सभी को अपने परिबार बालो के बारे में सोचना चाहिए !!!
अगर आप इन दोना के फैसले से सहमत है तो प्लीज लाइक और शेयर करे !!! 👍👍

संजय गुप्ता

Posted in कविता - Kavita - કવિતા

क्यों धन्य गृहस्थाश्रम कहलाता
मानव जीवन के तीन लक्ष्य,
धन, काम, धर्म वह पाता

सौमनस्य हो पति-पत्नी में,
स्वर्ग बनाये घर को
परोपकार, परहित सेवा,
कर्तव्य मिलादे हरि को

प्रभु का मंदिर समझे गृह को,
भाव शुद्धता मन में
हरि-कीर्तन प्रातः सन्ध्या हो,
व सदाचार जीवन में

पूजन एवं कृष्ण-कथा हो,
साधु, सन्त सेवा हो
सभी तरह की परम शान्ति हो,
प्रेम भाव सबसे हो

खान-पान परिशुद्ध रहे,
हो अनासक्ति भोगों में
मात-पिता अरु पूज्य जनों प्रति,
समुचित आदर मन में

वातावरण जहाँ ऐसा हो,
स्वर्ग रूप घर होता
सुलभ वहाँ शाश्वत सुख सबको,
वास प्रभु का होता

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

राधे राधे लाड़ली श्री राधेययय…
किसी की मुस्कराहट में दिखते हैं कृष्ण …
….लस्सी……
एक सच्ची घटना जो मुझे प्राप्त हुई है आप सभी से साझा कर रही हूँ…
लस्सी का ऑर्डर देकर हम सब आराम से बैठकर एक दूसरे की खिंचाई और हंसी-मजाक में लगे ही थे कि एक लगभग 70-75 साल की माताजी कुछ पैसे मांगते हुए मेरे सामने हाथ फैलाकर खड़ी हो गईं….
उनकी कमर झुकी हुई थी,. चेहरे की झुर्रियों में भूख तैर रही थी… आंखें भीतर को धंसी हुई किन्तु सजल थीं… उनको देखकर मन मे न जाने क्या आया कि मैने जेब मे सिक्के निकालने के लिए डाला हुआ हाथ वापस खींचते हुए उनसे पूछ लिया……
दादी लस्सी पियोगी ?
मेरी इस बात पर दादी कम अचंभित हुईं और मेरे मित्र अधिक… क्योंकि अगर मैं उनको पैसे देता तो बस 5 या 10 रुपए ही देता लेकिन लस्सी तो 35 रुपए की एक है… इसलिए लस्सी पिलाने से मेरे गरीब हो जाने की और उस बूढ़ी दादी के द्वारा मुझे ठग कर अमीर हो जाने की संभावना बहुत अधिक बढ़ गई थी..
दादी ने सकुचाते हुए हामी भरी और अपने पास जो मांग कर जमा किए हुए 6-7 रुपए थे वो अपने कांपते हाथों से मेरी ओर बढ़ाए… मुझे कुछ समझ नही आया तो मैने उनसे पूछा…
ये किस लिए ?
इनको मिलाकर मेरी लस्सी के पैसे चुका देना बाबूजी …
भावुक तो मैं उनको देखकर ही हो गया था… रही बची कसर उनकी इस बात ने पूरी कर दी…
एकाएक मेरी आंखें छलछला आईं और भरभराए हुए गले से मैने दुकान वाले से एक लस्सी बढ़ाने को कहा… उन्होने अपने पैसे वापस मुट्ठी मे बंद कर लिए और पास ही जमीन पर बैठ गईं…
अब मुझे अपनी लाचारी का अनुभव हुआ क्योंकि मैं वहां पर मौजूद दुकानदार, अपने दोस्तों और कई अन्य ग्राहकों की वजह से उनको कुर्सी पर बैठने के लिए नहीं कह सका…
डर था कि कहीं कोई टोक ना दे…..कहीं किसी को एक भीख मांगने वाली बूढ़ी महिला के उनके बराबर में बिठाए जाने पर आपत्ति न हो जाये… लेकिन वो कुर्सी जिसपर मैं बैठा था मुझे काट रही थी……
लस्सी कुल्लड़ों मे भरकर हम सब मित्रों और बूढ़ी दादी के हाथों मे आते ही मैं अपना कुल्लड़ पकड़कर दादी के पास ही जमीन पर बैठ गया क्योंकि ऐसा करने के लिए तो मैं स्वतंत्र था… इससे किसी को आपत्ति नही हो सकती थी… हां..देखने वालों ने मुझे एक पल को घूरा… लेकिन वो कुछ कहते उससे पहले ही दुकान के मालिक ने आगे बढ़कर दादी को उठाकर कुर्सी पर बैठा दिया और मेरी ओर मुस्कुराते हुए हाथ जोड़कर कहा…….
ऊपर बैठ जाइए साहब.. मेरे यहां ग्राहक तो बहुत आते हैं किन्तु इंसान कभी-कभार ही आता है…
अब सबके हाथों मे लस्सी के कुल्लड़ और होठों पर सहज मुस्कुराहट थी, बस एक वो दादी ही थीं जिनकी आंखों मे तृप्ति के आंसूं… होंठों पर मलाई के कुछ अंश और दिल में सैकड़ों दुआएं थीं…
न जानें क्यों जब कभी हमें 10-20-50 रुपए किसी भूखे गरीब को देने या उसपर खर्च करने होते हैं तो वो हमें बहुत ज्यादा लगते हैं लेकिन सोचिए कि क्या वो चंद रुपए किसी के मन को तृप्त करने से अधिक कीमती हैं?
जब कभी अवसर मिले हमें ऐसे दयापूर्ण और करुणामय काम करते रहने चाहिये भले ही कोई साथ दे या ना दे , समर्थन करे ना करें… सच मे इससे जो आत्मिक सुख मिलेगा वह अमूल्य है…
राधे राधे जय श्री राधेययय राधे गोविंद

संजय गुप्ता

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

समस्याओं पर नहीं लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करें

रामू गाँव का सबसे गरीब किसान था। अपने पिता की चौथी संतान था, ना तो सही से पालन पोषण हुआ और ना ही अच्छी शिक्षा प्राप्त हुई। हाँ लेकिन एक काम रामू को सबसे अच्छा आता था, वो था – समोसा बनाना। रामू कान से बहरा था लेकिन समोसा इतना शानदार बनाता कि खाने वाले उँगलियाँ चांटते रह जाएँ।

रामू ने एक समोसे की दुकान खोली, अब क्यूंकि रामू समोसा स्वादिष्ट बनाता ही था सो उसकी दुकान खूब चल निकली। रामू दिन रात तरक्की करने लगा। अब रामू ने एक नौकर भी रख लिया। रामू रोज आलू का आर्डर बढ़ा देता क्यूंकि दुकान पर समोसे की सेल बढ़ती जा रही थी।

एक दिन ऐसा भी आया जब रामू मंडी में सबसे ज्यादा आलू खरीदने वाला व्यक्ति बन गया। रामू ना तो कभी रेडियों पे ख़बरें सुनता था क्यूंकि बहरा था, टीवी तो उसके पास था ही नहीं और बेचारा पढ़ा लिखा भी नहीं था तो कभी अख़बार में भी ख़बरें नहीं पढ़ पाता था। रामू की दुकान अच्छी चल रही थी तो उसने अपने बेटे को भी समोसे के बिजनिस में लगा दिया जो हॉस्टल में रहकर पढाई कर रहा था।

एक दिन बेटे ने रामू से कहा – पिताजी आज कल टीवी और अख़बार सभी जगह खबर फ़ैल रही है कि आर्थिक मंदी आने वाली है तो क्यों ना आलू की डिमांड कम कर दी जाये जो पैसे हैं उन्हें बचाइए। रामू को लगा बेटा तो पढ़ा लिखा है सब जानता है और उसने आलू की डिमांड कम कर दी।

अब धीरे धीरे समोसे भी कम बिकने लगे क्यूंकि आलू कम ही आते थे। रामू ने आर्थिक मंदी के डर से आलू की डिमांड और कम कर दी। धीरे धीरे रामू की दुकान बंद होने के कगार पर आ गयी। अब रामू अपने बेटे से बोला – बेटा तूने सही कहा था सचमुच आर्थिक मंदी से हमारा धंधा ही बंद हो गया।

दोस्तों हम भी तो कुछ कुछ रामू के जैसे ही हैं – जब तक हम अपने लक्ष्य पर फोकस करके आगे बढ़ते रहते हैं जब तक हम सफल होते जाते हैं लेकिन जैसे ही हम समस्या के बारे में सुनते हैं या कोई समस्या सामने आती है तो हमारा फोकस अपने लक्ष्य पर कम बल्कि अपनी समस्या पर ज्यादा हो जाता है। अगर आप परेशानियां देखेंगे तो हर जगह परेशानियां ही नजर आएँगी, समस्या तो हर काम में आती है, अगर समस्या के बारे में ही सोचते रहेंगे तो परेशानियां आप पर हावी हो जाएँगी और आप अपने लक्ष्य से भटक जायेंगे। अर्जुन की तरह केवल एक लक्ष्य पर नजर रखिये, और भ्रमित करने वाले लोगों से बचिये। अपनी दिशा में आगे बढ़ते जाइये आप जरूर कामयाब होंगे।