Posted in साकाहारी

🚩🚩🙏….आपत्ति जनक भाषा का प्रयोग कर रहा हूँ माफ़ कीजियेगा….प्रश्न मांस का नहीं आस्था-भावना का है,
….एक महिला-लेखिका ( शोभा डे ) की टिपण्णी “मांस तो मांस होता है ,चाहे गाय का हो या बकरे का… फिर हिन्दू जानवरों के प्रति अलग अलग व्यवहार करके क्यों ढोंग करते है कि बकरा काटो पर गाय मत काटो ,ये मुर्खता है की नहीं ”
मेरा उनके लिए जवाब –
….मर्द तो मर्द होता है ,चाहे भाई हो या पति या बेटा फिर तीनो के साथ आप अलग अलग व्यवहार क्यों करती है ,क्या संतान पैदा करने के लिए पति जरुरी है ?
भाई के साथ भी वही व्यवहार लिया जा सकता है जो आप पति के साथ करती है,ये आप की मुर्खता है की नहीं ?
….आपने अपने बच्चों और घर में पति को नाश्ते में दूध तो देती होंगी?
जाहिर हैं वो गौमाता या भैस का ही होगा । तो क्या आप कुतिया का दूध उनको पिला सकती हैं क्या ? नहीं न ?
प्रश्न मांस का नहीं आस्था और भावना का है जिस तरह भाई पति,और बेटा का सम्बन्ध भावना और आस्था के आधार पर चलता है उसी प्रकार गाय ,बकरे या यानी पशु भी हमारे भावना का आधार पर व्यवहृत होता है।
……कृपया शेयर करे ताकि ऐसे सवाल करने वाले की बोलती बन्द हो…🙏🚩🚩

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