Posted in ज्योतिष - Astrology

अक्षय तृतीया पौराणिक महात्म्य एवं शीघ्र विवाह और धन प्राप्ति के लिए शुभ उपाय
〰〰🌼🌼〰〰🌼🌼〰〰🌼🌼〰〰🌼🌼〰〰
हिन्दुओ के प्रमुख त्योहार में से एक अक्षय तृतीया इस वर्ष १८ अप्रैल बुधवार के दिन मनाई जाएगी जानिए इस दिन विशेष की कुछ महत्वपुर्ण जानकारी।

वैशाख शुक्ल तृतीया को अक्षयतृतीया कहते हैं, यह सनातन धर्मियों का प्रधान त्यौहार है, इस दिन दिये हुए दान और किये हुए स्त्रान, होम, जप आदि सभी कर्मोंका फल अनन्त होता है – सभी अक्षय हो जाते हैं ; इसी से इसका नाम अक्षया हुआ है, इसी तिथि को नर – नारायण, परशुराम और हयग्रीव – अवतार हुए थे; इसलिये इस दिन उनकी जयन्ती मनायी जाती है तथा इसी दिन त्रेतायुग भी आरम्भ हुआ था, अतएव इसे मध्याह्न व्यापिनी ग्रहण करना चाहिये, परंतु परशुरामजी प्रदोष काल में प्रकट हुए थे; इसलिये यदि द्वितीयाको मध्याह्नसे पहले तृतीया अ जाय तो उस दिन अक्षयतृत्तीया, नर – नारायण – जयन्ती, परशुराम – जयन्ती और हयग्रीव – जयन्ती सब सम्पत्र की जा सकती हैं और यदि द्वितीया अधिक हो तो परशुराम – जयन्ती दूसरे दिन होती है । यदि इस दिन गौरीव्रत भी हो तो ‘ गौरी विनायकोपेता ‘ के अनुसार गौरीपुत्र गणेशकी तिथि चतुर्थीका सहयोग अधिक शुभ होता है। अक्षयतृत्तीया बड़ी पवित्र और महान् फल देनेवाली तिथि है, इसलिये इस दिन सफलता की आशा से व्रतोत्सवादिके अतिरिक्त वस्त्र, शस्त्र और आभूषणादि बनवाये अथवा धारण किये जाते है तथा नवीन स्थान, संस्था एवं समाज वर्षकी तेजी – मंदी जाननेके लिये इस दिन सब प्रकारके अन्न, वस्त्र आदि व्यावहारिक वस्तुओं और व्यक्तिविशेषोंके नामोंको तौलकर एक सुपूजित स्थानमें रखते हैं और दूसरे दिन फिर तौलवर उनकी न्यूनाधिकता से भविष्य का शुभाशुभ मालूम करते हैं, अक्षयतृत्तीया में तृत्तीया तिथि, सोमवार और रोहिणी नक्षत्र ये तीनों हों तो बहुत श्रेष्ठ माना जाता है, किसान लोग उस दिन चन्द्रमाके अस्त होते समय रोहिणी का आगे जाना अच्छा और पीछे रहे जाना बुरा मानते हैं !!

स्त्रात्वा हुत्वा च दत्त्वा च जप्त्वानन्तफलं लभेत् !! ( भारते )

यत्किञ्चिद् दीयते दानं स्वल्पं वा यदि वा बहु !
तत् सर्वमक्षयं यस्मात् तेनेयमक्षया स्मृता !!

अक्षयतृतीया पूजा मुहूर्त
〰🌼〰🌼〰🌼〰
अक्षय तृतीया पर पूजा करने का शुभ मुहूर्त बुधवार १८ अप्रैल सुबह ०५;५६ मिनट से लेकर दोपहर के १२:२० बजे तक है।

खरीरदारी करने का शुभ मुहूर्त १८ अप्रैल सुबह ०५:५६ से आधी रात तक अक्षय तृतीया के दिन खरीददारी करने का शुभ मुहूर्त है।

वैसे अक्षय तृतीया को स्वयं सिद्ध अखंड मुहूर्त होने से सूर्य उदय से अस्त के बीच कभी भी पूजा पाठ एवं खरीदारी की जा सकता है।

अक्षयतृतीया व्रत -विधि
〰〰🌼〰〰🌼〰〰
इस दिन उपर्युक्त तीनों जयन्तियाँ एकत्र होनेसे व्रतीको चाहिये कि वह प्रातःस्त्रानादि से निवृत्त होकर ”ममाखिलपापक्षयपूर्वक सकलशुभफलप्राप्तये भगवत्प्रीकामनया देवत्रयपूजनमहं करिष्ये ” ऐसा संकल्प करके भगवानका यथाविधि षोडशोपचारसे पूजन करे, उन्हें पञ्चामृत से स्त्रान करावे, सुगान्धित पुष्पमाला पहनावे और नैवेद्यमें नर – नारायण के निमित्त सेके हुए जौ या गेहूँका ‘ सत्तू ‘, परशुरामके निमित्त कोमल ककड़ी और हयग्रीवके निमित्त भीगी हुई चनेकी दाल अर्पण करे, बन सके तो उपवास तथा समुद्रस्त्रान या गङ्गा स्त्रान करे और जौ, गेहूँ, चने, सत्तू, दही – चावल ईखके रस और दुधके बने हुए खाद्य पदार्थ ( खाँड़, मावा, मिठाई आदि ) तथा सुवर्ण एवं जलपूर्ण कलश, धर्मघट, अन्न, सब प्रकारके रस और ग्रीष्म ऋतुके उपयोगी वस्तुओंका दान करे तथा पितृश्राद्ध करे और ब्राह्मण भोजन भी करावे, यह सब यथाशक्ति करने से अनन्त फल होता है !!

यः पश्यति तृतीयायां कृष्णं चन्दनभूषितम् !
वैशाखस्य सिते पक्षे स यात्यच्युतमन्दिरम् !!

युगादौ तु नरः स्त्रात्वा विधिवल्लवणोदधौ !
गोसहस्त्रप्रदानस्य फलं प्राप्रोति मानवः !!

यवगोधूमचणकान् सक्तु दध्योदनं तथा !
इक्षुक्षीरविकाराश्च हिरण्यं च स्वशक्तितः !!
उदकुम्भान् सरकरकान् सन्नान् सर्वरसैः सह !
ग्रैष्मिकं सर्वमेवात्र सस्यं दाने प्रशस्यते !!
‘गन्धोदकतिलैर्मिश्रं सान्नं कुम्भं फलान्वितम् ।
पितृभ्यः सम्प्रदास्यामि अक्षय्यमुपतिष्ठतु !!

अक्षय तृतीया की पौराणिक प्रचलित कथाएं
〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰
अक्षय तृतीया की अनेक व्रत कथाएँ प्रचलित हैं। ऐसी ही एक कथा के अनुसार प्राचीन काल में एक धर्मदास नामक वैश्य था। उसकी सदाचार, देव और ब्राह्मणों के प्रति काफी श्रद्धा थी। इस व्रत के महात्म्य को सुनने के पश्चात उसने इस पर्व के आने पर गंगा में स्नान करके विधिपूर्वक देवी-देवताओं की पूजा की, व्रत के दिन स्वर्ण, वस्त्र तथा दिव्य वस्तुएँ ब्राह्मणों को दान में दी। अनेक रोगों से ग्रस्त तथा वृद्ध होने के बावजूद भी उसने उपवास करके धर्म-कर्म और दान पुण्य किया। यही वैश्य दूसरे जन्म में कुशावती का राजा बना। कहते हैं कि अक्षय तृतीया के दिन किए गए दान व पूजन के कारण वह बहुत धनी प्रतापी बना। वह इतना धनी और प्रतापी राजा था कि त्रिदेव तक उसके दरबार में अक्षय तृतीया के दिन ब्राह्मण का वेष धारण करके उसके महायज्ञ में शामिल होते थे। अपनी श्रद्धा और भक्ति का उसे कभी घमंड नहीं हुआ और महान वैभवशाली होने के बावजूद भी वह धर्म मार्ग से विचलित नहीं हुआ। माना जाता है कि यही राजा आगे चलकर राजा चंद्रगुप्त के रूप में पैदा हुआ।

स्कंद पुराण और भविष्य पुराण में उल्लेख है कि वैशाखशुक्ल पक्ष की तृतीया को रेणुका के गर्भ से भगवान विष्णु ने परशुराम रूप में जन्म लिया। कोंकण और चिप्लून के परशुराम मंदिरों में इस तिथि को परशुराम जयंती बड़ी धूमधाम से मनाई जाती है। दक्षिण भारत में परशुराम जयंती को विशेष महत्व दिया जाता है। परशुराम जयंती होने के कारण इस तिथि में भगवान परशुराम के आविर्भाव की कथा भी सुनी जाती है। इस दिन परशुराम जी की पूजा करके उन्हें अर्घ्य देने का बड़ा माहात्म्य माना गया है। सौभाग्यवती स्त्रियाँ और क्वारी कन्याएँ इस दिन गौरी-पूजा करके मिठाई, फल और भीगे हुए चने बाँटती हैं, गौरी-पार्वती की पूजा करके धातु या मिट्टी के कलश में जल, फल, फूल, तिल, अन्न आदि लेकर दान करती हैं। मान्यता है कि इसी दिन जन्म से ब्राह्मण और कर्म से क्षत्रिय भृगुवंशी परशुराम का जन्म हुआ था। एक कथा के अनुसार परशुराम की माता और विश्वामित्र की माता के पूजन के बाद प्रसाद देते समय ऋषि ने प्रसाद बदल कर दे दिया था। जिसके प्रभाव से परशुराम ब्राह्मण होते हुए भी क्षत्रिय स्वभाव के थे और क्षत्रिय पुत्र होने के बाद भी विश्वामित्र ब्रह्मर्षि कहलाए। उल्लेख है कि सीता स्वयंवर के समय परशुराम जी अपना धनुष बाण श्री राम को समर्पित कर संन्यासी का जीवन बिताने अन्यत्र चले गए। अपने साथ एक फरसा रखते थे तभी उनका नाम परशुराम पड़ा।

शादी में हो रही बाधा दूर करने के उपाय
〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰
-इस उपाय को अक्षय तृतीया के दिन किया जाता है। इस दिन अक्षय मुहूर्त माना गया है। यह शुभ मुहूर्त है। यह उपाय रात के समय में किया जाता है।

१ आप को एक चौकी या पटिए पर पीला कपड़ा बिछाना चाहिए और पूरब दिशा की तरफ मुंह करके बैठ जाए।
२ पूजा स्थल पर मां पार्वती का चित्र रख लें।

३ चौकी पर एक मुट्ठी गेहूं रख दें।

४ गेहूं की ढेरी पर विवाह बाधा निवारण विग्रह स्थापित करने के बाद चंदन अथवा केसर से तिलक लगा दें। यह पूरी प्रक्रिया ठीक से होने के बाद हल्दी की माला से इस मंत्र का जाप करना चाहिए
युवतियों के लिए यह मंत्र

ऊं गं घ्रौ गं शीघ्र विवाह सिद्धये गौर्यै फट्।

युवक करें इस मंत्र का जाप

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम।
तारणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोदभवाम।।

एक सप्ताह तक करें यह जाप
इस मंत्र की तीन-तीन माला ७ दिनों तक नियमित जपना चाहिए। अंतिम दिवस को इस सामग्री को मंदिर में ले जाकर देवी पार्वती के चरणों में समर्पित कर दें। इसे श्रद्धा और विश्वास से करने पर शीघ्र ही विवाह हो जाएगा। यह सिद्ध प्रयोग है, इसलिए मन में कोई संदेह न रखें। नहीं तो यह प्रभावशाली नहीं रहेगा।

अन्य सौभाग्य वर्धक उपाय
〰🌼〰🌼〰🌼〰🌼〰
१ आकस्मिक धन प्राप्ति के लिए अक्षय तृतीया से प्रारंभ करते हुए माता लक्ष्मी के मंदिर में प्रत्येक शुक्रवार धूपबत्ती व गुलाब की अगरबत्ती दान करने से जीवन में अचानक धन प्राप्ति के योग बनते

२ धनधान्य की वृद्धि के लिए अक्षय तृतीया को एक मुट्ठी बासमती चावल बहते हुए जल में श्री महालक्ष्मी का ध्यान करते हुए व श्री मंत्र का जप करते हुए जल प्रवाह कर दें। आश्चर्यजनक लाभ होगा।

३ ऋण से मुक्ति के लिए अक्षय तृतीया पर कनकधारा यंत्र की लाल वस्त्र पर पूजा घर में स्थापना करें। पंचोपचार से पूजा करें। ५१ दिन तक श्रद्धा से यंत्र का पाठ करें। धीरे-धीरे ऋण कैसे उतर गया, यह पता भी न चलेगा।

४ स्फटिक के श्रीयंत्र को पंचोपचार पूजन द्वारा विधिवत स्थापित करें। माता लक्ष्मी का ध्यान करें, श्रीसूक्त का पाठ करें।

जितना संभव हो सके, मंत्र ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णुपत्नयै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी: प्रचोदयात् का कमलगट्टे की माला से नियमित जप करें। नियमित रूप से एक गुलाब अर्पित करते रहें।
इस प्रकार पूजा करके ऐसे श्रीयंत्र को आप इस दिन व्यावसायिक स्थल पर भी स्थापित कर सकते हैं। माँ लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।

५ अक्षय तृतीया का व्रत रखकर और गर्मी में निम्न वस्तुओं जैसे- छाता, दही, जूता-चप्पल, जल का घड़ा, सत्तू, खरबूजा, तरबूज, बेल का सरबत, मीठा जल, हाथ वाले पंखे, टोपी, सुराही आदि वस्तुओं का दान करने से भाग्योन्नति में बाधा पहुचाने वाली समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

अक्षय तृतीया के विषय मे अन्य रोचक जानकारी
〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰
आज ही के दिन माँ गंगा का अवतरण धरती पर हुआ था ।

महर्षी परशुराम का जन्म आज ही के दिन हुआ था ।

माँ अन्नपूर्णा का जन्म भी आज ही के दिन हुआ था

द्रोपदी को चीरहरण से कृष्ण ने आज ही के दिन बचाया था ।

कृष्ण और सुदामा का मिलन आज ही के दिन हुआ था ।

कुबेर को आज ही के दिन खजाना मिला था ।

सतयुग और त्रेता युग का प्रारम्भ आज ही के दिन हुआ था ।

ब्रह्मा जी के पुत्र अक्षय कुमार का अवतरण भी आज ही के दिन हुआ था ।

प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री बद्री नारायण जी का कपाट आज ही के दिन खोला जाता है ।

बृंदावन के बाँके बिहारी मंदिर में साल में केवल आज ही के दिन श्री विग्रह चरण के दर्शन होते है अन्यथा साल भर वो बस्त्र से ढके रहते है ।

इसी दिन महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ था।

अक्षय तृतीया अपने आप में स्वयं सिद्ध मुहूर्त है कोई भी शुभ कार्य का प्रारम्भ किया जा सकता है

पं देवशर्मा
९४१११८५५५२
〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

हनुमान जी की चतुरता की एक अनसुनी कथा !!!!!!

मित्रो ज्ञानियों की जब गढ़ना की जाती है, तब हनुमानजी का नाम सर्वप्रथम लिया जाता है, जैसा कि बाबा तुलसी ने रामचरितमानस में लिखा भी है।

अतुलितबलधामं हेमशैलाभदेहं
दनुजवनकृशानुं ज्ञानिनामग्रगण्यम्‌।
सकलगुणनिधानं वानराणामधीशं
रघुपतिप्रियभक्तं वातजातं नमामि॥

अतुल बल के धाम, सोने के पर्वत (सुमेरु) के समान कान्तियुक्त शरीर वाले, दैत्य रूपी वन (को ध्वंस करने) के लिए अग्नि रूप, ज्ञानियों में अग्रगण्य, संपूर्ण गुणों के निधान, वानरों के स्वामी, श्री रघुनाथजी के प्रिय भक्त पवनपुत्र श्री हनुमान्‌जी को मैं प्रणाम करता हूँ॥

आज हम आपको इन्ही हनुमानजी की चतुरता की एक कथा बतायेगें।

मित्रों, ऐसी हिन्दी पौराणिक कथा प्रचलित है कि एक समय कपिवर की प्रशंसा के आनन्द में मग्न श्रीराम ने सीताजी से कहा-‘देवी! लंका विजय में यदि हनुमान का सहयोग न मिलता तो आज भी मैं सीता वियोगी ही बना रहता।’

सीताजी ने कहा-‘आप बार-बार हनुमान की प्रशंसा करते रहते हैं, कभी उनके बल शौर्य की, कभी उनके ज्ञान की। अतः आज आप एक ऐसा प्रसंग सुनाइये कि जिसमें उनकी चतुरता से लंका विजय में विशेष सहायता हुई हो।’

‘ठीक याद दिलाया तुमने।’ श्रीराम बोले-

युद्ध में रावण थक गया था। उसके अधिकतर वीर सैनिकों का वध हो चुका था। अब युद्ध में विजय प्राप्त करने का उसने अन्तिम उपाय सोचा। यह था देवी को प्रसन्न करने के लिए चण्डी महायज्ञ।

यज्ञ आरंभ हो गया। किंतु हमारे हनुमान को चैन कहां? यदि यज्ञ पूर्ण हो जाता और रावण देवी से वर प्राप्त करने मे सफल हो जाता तो उसकी विजय निश्चित थी। बस, तुरंत उन्होने ब्राह्मण का रूप धारण किया और यज्ञ में शामिल ब्राह्मणों की सेवा करना प्रारंभ कर दिया। ऐसी निःस्वार्थ सेवा देखकर ब्राह्मण अति प्रसन्न हुये। उन्होंने हनुमान से वर मांगने के लिए कहा।

‘पहले तो हनुमान ने कुछ भी मांगने से इनकार कर दिया, किंतु सेवा से संतुष्ट ब्राह्मणों का आग्रह देखकर उन्होंने एक वरदान मांग लिया।’

‘वरदान में क्या मांगा हनुमान ने?’ सीताजी के प्रश्न में उत्सुकता थी।

‘उनकी इसी याचना में तो चतुरता झलकती है’ श्रीराम बोले-

‘जिस मंत्र को बार बार किया जा रहा था, उसी मंत्र के एक अक्षर का परिवर्तन का हनुमान ने वरदान में मांग लिया और बैचारे भोले ब्राह्मणों ने ‘तथास्तु’ कह दिया। उसी के कारण मंत्र का अर्थ ही बदल गया, जिससे कि रावण का घोर विनाश हुआ।’

‘एक ही अक्षर से अर्थ में इतना परिवर्तन!’ सीताजी ने प्रश्न किया ‘कौन सा मंत्र था वह?’

श्रीराम ने मंत्र बताया-

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते।। (अर्गलास्तोत्र-2)

इस श्लोक में ‘भूतार्तिहारिणि’ मे ‘ह’ के स्थान पर ‘क’ का उच्चारण करने का हनुमान ने वर मांगा,,,,

भूतार्तिहारिणि का अर्थ है-‘संपूर्ण प्रणियों की पीड़ा हरने वाली और ‘भूतार्तिकारिणि’ का अर्थ है प्राणियों को पीड़ित करने वाली।’ इस प्रकार एक सिर्फ एक अक्षर बदलने ने रावण का विनाश हो गया।

‘ऐसे चतुरशिरोमणि हैं हमारे हनुमान’-श्रीराम ने प्रसंग को पूर्ण किया। सीताजी इस प्रसंग को सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुई।

मित्रों आज के युग में हमें हनुमान की आवश्यकता है। ऐसे हनुमान की जो देश भक्त हो, ज्ञानी हो, त्यागी हो, चरित्र सम्पन्न और जिसमें चतुरशीलता हो।

सकल सुमंगल दायक रघुनायक गुन गान।
सादर सुनहिं ते तरहिं भव सिंधु बिना जलजान॥

भावार्थ:-श्री रघुनाथजी का गुणगान संपूर्ण सुंदर मंगलों का देने वाला है। जो इसे आदर सहित सुनेंगे, वे बिना किसी जहाज (अन्य साधन) के ही भवसागर को तर जाएँगे॥

संजय गुप्ता

Posted in ज्योतिष - Astrology

~ देवताओं का पक्षी मोर ~

~ स्कन्द वाहन मोर ~

💐💐💐💐💐💐💐💐
हिंदुओं तथा अन्य धर्मावलम्बियों में मोर के
पंख को लेकर यह विश्र्वास हें कि मोर के
पंख के प्रयोग से अमंगल टल जाता है
विशेष रूप से दुरात्माएतो पास ही नहीं
आती है।

शास्त्रों व ग्रंथो तथा वास्तु एवं ज्योतिष शास्त्र
में मोर के पंखों का अति महत्त्वपूर्ण स्थान है
मोर के पंख घर में रखने का बहुत महत्त्व है
इसका धार्मिक प्रयोग भी है।

इसे भगवान श्री कृष्ण ने अपने मुकुट पर
स्थान दे कर सम्मान दिया।
मोर मुख्य रूप से दक्षिण.एशिया का पक्षी
माना जाता है।
भारत में तो इसे अत्यंत सम्मान के साथ
देखा जाता है १९६३ में इसे भारत का
राष्ट्रीय.पक्षी

घोषित किया गया है।

मोर को देवताओं का पक्षी होने का भी
गौरव प्राप्त है।
मोर सरस्वती देवी का भी वाहन है इसलिए
विद्यार्थी इस पंख को अपनी पाठ.पुस्तकों
के मध्य भी प्राचीन काल से रखते आ रहें है।

यही मोर भगवान शंकर के पुत्र कार्तिकेय का
वाहन के रूप में भी प्रतिष्ठित है।
नेपाल आदि देशों में मोर को बर्ह्मा कि सवारी
के रूप में माना जाता है यंहा तक कि जापान, इंडोनेसिया थाईलैंड,और भी देशों में पूज्य है
यह तो सब जानते ही हें कि मोर व सर्प में

अत्यंत शत्रुता का भाव रहता है।

आयुर्वेद में भी मोर के पंख से टीद्बी टीबी,फालिज, दमा,नजला तथा बांझपन जैसे रोगों का सफलता पूर्वक उपचार संभव होता है।

उपरोक्त विवरण से तो ज्ञात हुआ कि विश्र्व में
मोर का पंख कितना उपयोगी व महत्त्वपूर्ण है।

यही मोर का पंख हमारे ज्योतिष.शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र के द्वारा मनुष्य जीवन में कितना भाग्यशाली सिद्ध होता है कि एक मोर का पंख हमारे जीवन कि दिशा बदलने में कितना सहायक है

जरा ध्यान से इसे नित्य प्रयोग में लाने से असंभव कार्य भी संभव से होने लगते है निम्न प्रयोगों के
द्वारा आपभी शुभ मोर के पंखों से ला उठा सकते है।

घर के दक्षिण.पूर्व कोण में लगाने से बरकत बढती है व अचानक कष्ट नहीं आता है

यदि मोर का एक पंख किसी मंदिर में श्री राधा.कृष्ण कि मूर्ती के मुकुट में ४० दिन के लिए स्थापित कर प्रतिदिन मक्खन.मिश्री काभोग सांयकाल को लगाए ४१ वें दिन उसी मोर के पंख को मंदिर से दक्षिणा भोग दे कर घर लाकर अपने खजाने या लाकर्स में स्थापित करें तो आप स्वयं ही अनुभव करेंगे कि धन-सुख.शान्ति कि वृद्धि हो रही है सी रुके कार्य भी इस प्रयोग के कारण बनते जा रहे है

=====काल.सर्प के दोष को भी दूर करने की इस मोर के पंख में अद्भुत क्षमता है काल.सर्प वाले व्यक्ति को अपने तकिये के खौल के अंदर ७ मोर के पंख सोमवार रात्री काल में डालें तथा प्रतिदिन इसी तकिये का प्रयोग करे और अपने बैड रूम की पश्चिम दीवार पर मोर के पंख का पंखा जिसमे कम से कम ११ मोर के पंख तो हों लगा देने से काल सर्प दोष के कारण आयी बाधा दूर होती है

बच्चा जिद्दी हो तो इसे छत के पंखे के पंखों पर लगा दे ताकि पंखा चलने पर मोर के पंखो की हवा बच्चे को लगे धीरे.धीरे हव जिद्द कम होती जायेगी

जैसे कि पहलें वर्णन किया कि मोर व सर्प में शत्रुता है अर्थात सर्प, शनि तथा राहू के संयोग से बनता है यदि मोर का पंख घर के पूर्वी और उत्तर. पश्चिम दीवार में या अपनी जेब व डायरी में रखा हो तो राहू का दोष की भी नहीं परेशान करता है तथा घर में सर्प मच्छर बिच्छू आदि विषेलें जंतुओं का य नहीं रहता है…

नवजात बालक के सिर की तरफ दिन.रात एक मोर का पंख चांदी के ताबीज में डाल कर रखने से बालक डरता नहीं है तथा कोईभी नजर दोष और अला.बला से बचा
रहता है.

जयति पुण्य सनातन संस्कृति,,,
जयति पुण्य भूमि भारत,,,

सदा सर्वदा सुमंगल,,,,
वृन्दावन बिहारी लाल की जय,,,
जय श्री कृष्ण~~
जय श्री राम,,

विजय कृष्ण पांडेय

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

पहचानो अघोरी, कौन है यह महिला?

एक चित्र दिखाता शव अघोरी का मार्ग रोककर प्रश्न कर रहा है। अघोरी ठिठका और चित्र देखकर शून्य में देखता रह गया।

शव ने चेतावनी सी दी और कहा- “यदि तुम जानबूझकर चुप रह गए तो इतिहास तुम्हें सदैव अपराधी ठहराएगा और तुम प्रेत बनकर भटकते रहोगे। सत्य के पक्षधर बनो अघोरी और ईश्वर के न्याय से डरो।”

अघोरी ने बोलना प्रारम्भ किया- “1970 के राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार से सम्मानित बहुचर्चित दक्षिण भारतीय अभिनेत्री, संस्कार फ़िल्म से विश्वप्रसिद्ध हुई कलाकार, कन्नड़, तमिल और तेलुगु सिनेमा की लोकप्रिय अभिनेत्री और प्रोड्यूसर। यह और कोई नही, स्नेहलता रेड्डी है। वही जिसने अपने पति के साथ मिलकर इंदिरा गांधी के आपातकाल के विरुद्ध सड़कों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया और बदले में उसे जेल में डालकर इतना मारा गया कि मर गई।

आज मोदी की सरकार को किसी भी तरीके से नीचा दिखाने के लिए सबकुछ करने को तैयार सिनेमा कलाकारों को देख बरबस स्नेहलता याद आ गई जिसके बारे में मधु दण्डवते ने लिखा है कि रात को उसकी हृदयभेदी चीखें मेरे सेल तक आती थी और मैं सोचता था कि यदि ईश्वर है तो उसे यह अधर्म क्यों नहीं दिखता।
छोटे बच्चों सी सरलता और चपलता से भरपूर इस कलाकार को जिस बेदर्दी से मार डाला गया उसे याद करके आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं।

स्नेहलता अकेली नही, ऐसी हजारों युवतियां और युवक थे जिनका अंत कर दिया इंदिरा गांधी ने। राहुल गांधी ठीक कहते हैं कि कांग्रेस एक सोच है। एक घृणित सोच जिसमें आजतक कोई परिवर्तन नहीं हुआ। मुझे कोई आश्चर्य नहीं हुआ इंडिया गेट पर प्रियंका गांधी और उसकी बच्ची के शरीर को टटोलने वाले कांग्रेसियों के बारे में सुनकर।

कोई कह दो राहुल गांधी से कि यदि आप बेटियों की सुरक्षा चाहते हैं तो कांग्रेस की उस घृणित सोच को समाप्त करिए। स्नेहलता रेड्डी की चीखों को याद करो और इंदिरा का गुणगान करने वाले भारतीयों से पूछो की वे इंदिरा को कितना जानते हैं। पूछो की वो महात्मा कहे जाने वाले गांधी को कितना जानते हैं जिन्होंने अनेको महिलाओं का शारीरिक-मानसिक शोषण किया। कांग्रेस एक सोच ही है राहुल, और यह बहुत गन्दी सोच है।
लोकतंत्र को बचाने के लिए इसे समाप्त होना पड़ेगा।”

शव स्तब्ध रह गया और अघोरी मार्ग पर बढ़ चला। उसके पदचाप से स्वर आ रहे थे- “कोटि कोटि कण्ठ कलकल निनाद कराले।”

विपिन खुराना

राम राम…
मेरा जन्म आपातकाल के दौरान ही हुआ था। माननीय अटल जी के निर्देश पर पूज्य पिताश्री भूमिगत हो गए थे। वह दिन भर छिपे रहते थे और रात में उन कार्यकर्ताओं के परिवार के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं का प्रबन्ध करते थे, जो जेल में बन्द थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए वह वेश बदल कर रहते थे।

कांग्रेस (इन्दिरा) सरकार ने उनके नाम का वारण्ट जारी कर रखा था। उन्हें न खोज पाने से खीज कर पुलिस ने मेरे आवास की कुर्की करवाई। सभी सामानों के साथ साथ पुलिसवालों ने खिड़की, दरवाजे भी उखाड़ लिए। जब वह मेरा पालना और दूध की बोतल ले जाने लगे तो माँ सामने आ गयी और कहा कि ये तो मेरी लाश पर से ही जाएगा।

माँ, बुआ, 3.5 वर्ष की दीदी और गोद में नवजात मैं, हम 4 प्राणी 2.5 वर्ष तक बिना खिड़की, दरवाजे के घर में रहे।

पूज्य पिताजी ने आपातकाल के दौरान कांग्रेस द्वारा विरोधियों पर किये गए अत्याचार के बारे में बताया था। जनसंघ के कार्यकर्ताओं को जिन्दा चूने के ड्रम में डलवाना, पागल कुत्तों से कटवाना आम बात थी।

हमें कांग्रेस मुक्त भारत चाहिए और आदरणीय मोदी जी हमें दिला कर रहेंगे।