Posted in सुभाषित - Subhasit

👉 ” पहले इन्सान बनो फिर हिन्दू , इंसानियत पहले धर्म बाद में ” 👈

यह तोते की तरह रटा हुआ बोल, धर्म के लक्षण से अपरिचित लोगों को धोखा देने वाला हैं ।

” इंसानियत ” से जो मनुष्योचित गुणावली अभिप्रेत है , शास्त्र में वह गुणावली धर्मलक्षण के अन्तर्गत कही गयी ।

अतः इसकी अंतर्भुक्ति वैदिकधर्म में हो जाने से पहले इंसान और बाद में हिन्दू – यह कहना निरर्थक है ।

अहिंसा आदि गुण , सामान्यधर्म में अन्तर्भुक्त हैं और मनुष्यमात्र के लिए इसका अनुष्ठान करना कर्तव्य है –

धृति: क्षमा दमोऽस्‍तेयं शौचमिन्‍द्रियनिग्रह:।
धीर्विद्या सत्‍यमक्रोधो दशकं धर्मलक्षणम्‌।। ~ मनुस्‍मृति ६.९२

।। जय श्री राम ।।

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