Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

~💐~ बालि का वरदान और रामभक्त हनुमान ~💐~
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कथा का आरंभ तब का है , जब बालि को ब्रम्हा जी से ये वरदान प्राप्त हुआ, कि जो भी उससे युद्ध करने उसके सामने आएगा, उसकी आधी ताक़त बालि के शरीर मे चली जायेगी, और इससे बालि हर युद्ध मे अजेय रहेगा ।
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सुग्रीव, बालि दोनों ब्रम्हा के औरस ( वरदान द्वारा प्राप्त ) पुत्र हैं, और ब्रम्हा जी की कृपा बालि पर सदैव बनी रहती है ।
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बालि को अपने बल पर बड़ा घमंड था, उसका घमंड तब और भी बढ़ गया, जब उसने करीब करीब तीनों लोकों पर विजय पाए हुए रावण से युद्ध किया और रावण को अपनी पूँछ से बांध कर छह महीने तक पूरी दुनिया घूमी । रावण जैसे योद्धा को इस प्रकार हरा कर बालि के घमंड की कोई सीमा न रही ।
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अब वो अपने आपको संसार का सबसे बड़ा योद्धा समझने लगा था, और यही उसकी सबसे बड़ी भूल हुई ।
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अपनी ताकत के मद में चूर एक दिन एक जंगल मे पेड़ पौधों को तिनके के समान उखाड़ फेंक रहा था, हरे भरे वृक्षों को तहस नहस कर दे रहा था, अमृत समान जल के सरोवरों को मिट्टी से मिला कर कीचड़ कर दे रहा था, एक तरह से अपनी ताक़त के नशे में बालि पूरे जंगल को उजाड़ कर रख देना चाहता था, और बार बार अपने से युद्ध करने की चेतावनी दे रहा था- है कोई जो बालि से युद्ध करने की हिम्मत रखता हो, है कोई जो अपने माँ का दूध पिया हो, जो बालि से युद्ध करके बालि को हरा दे । इस तरह की गर्जना करते हुए बाली उस जंगल को तहस नहस कर रहा था ।
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संयोग वश उसी जंगल के बीच मे हनुमान जी, राम नाम का जाप करते हुए तपस्या में बैठे थे ।
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बालि की इस हरकत से हनुमान जी को राम नाम का जप करने में विघ्न लगा, और हनुमान जी बालि के सामने जाकर बोले- हे वीरों के वीर,, हे ब्रम्ह अंश,, हे राजकुमार बालि,, ( तब बालि किष्किंधा के युवराज थे) क्यों इस शांत जंगल को अपने बल की बलि दे रहे हो, क्यों हरे भरे पेड़ों को उखाड़ फेंक रहे हो, क्यों फलों से लदे वृक्षों को मसल दे रहे हो, क्यों अमृत समान सरोवरों को दूषित मलिन मिट्टी से मिला कर उन्हें नष्ट कर रहे हो, इससे तुम्हे क्या मिलेगा । तुम्हारे औरस पिता ब्रम्हा के वरदान स्वरूप कोई तुम्हे युद्ध मे नही हरा सकता, क्योंकि जो कोई तुमसे युद्ध करने आएगा, उसकी आधी शक्ति तुममे समाहित हो जाएगी ।
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इसलिए हे कपि राजकुमार अपने बल के घमंड को शांत कर, और राम नाम का जाप कर, इससे तेरे मन में अपने बल का भान नही होगा, और राम नाम का जाप करने से ये लोक और परलोक दोनों ही सुधर जाएंगे ।
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इतना सुनते ही बालि अपने बल के मद में चूर हनुमान जी से बोला- ए तुच्छ वानर,, तू हमें शिक्षा दे रहा है, राजकुमार बालि को, जिसने विश्व के सभी योद्धाओं को धूल चटाई है, और जिसके एक हुंकार से बड़े से बड़ा पर्वत भी खंड खंड हो जाता है, जा तुच्छ वानर, जा और तू ही भक्ति कर अपने राम नाम की, और जिस राम की तू बात कर रहा है, वो है कौन, और केवल तू ही जानता है राम के बारे में, मैंने आजतक किसी के मुँह से ये नाम नही सुना, और तू मुझे राम नाम जपने की शिक्षा दे रहा है ।
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हनुमान जी ने कहा- प्रभु श्री राम, तीनो लोकों के स्वामी है, उनकी महिमा अपरंपार है, ये वो सागर है जिसकी एक बूंद भी जिसे मिले वो भवसागर को पार कर जाए ।
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बालि बोला – इतना ही महान है राम तो बुला ज़रा, मैं भी तो देखूं कितना बल है उसकी भुजाओं में, बालि के भगवान राम के विरुद्ध ऐसे कटु वचन हनुमान जो को क्रोध दिलाने के लिए पर्याप्त थे ।
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हनुमान जी बोले – ए बल के मद में चूर बालि, तू क्या प्रभु राम को युद्ध मे हराएगा, पहले उनके इस तुच्छ सेवक को युद्ध में हरा कर दिखा ।
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बालि बोला – तब ठीक है कल के कल नगर के बीचों बीच तेरा और मेरा युद्ध होगा ।
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हनुमान जी ने बालि की बात मान ली ।
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बालि ने नगर में जाकर घोषणा करवा दिया कि कल नगर के बीच हनुमान और बालि का युद्ध होगा ।
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अगले दिन तय समय पर जब हनुमान जी बालि से युद्ध करने अपने घर से निकलने वाले थे, तभी उनके सामने ब्रम्हा जी प्रकट हुए ।
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हनुमान जी ने ब्रम्हा जी को प्रणाम किया और बोले – हे जगत पिता आज मुझ जैसे एक वानर के घर आपका पधारने का कारण अवश्य ही कुछ विशेष होगा ।
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ब्रम्हा जी बोले – हे अंजनीसुत, हे शिवांश, हे पवनपुत्र, हे राम भक्त हनुमान, मेरे पुत्र बालि को उसकी उद्दंडता के लिए क्षमा कर दो, और युद्ध के लिए न जाओ ।
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हनुमान जी ने कहा- हे प्रभु, बालि ने मेरे बारे में कहा होता तो मैं उसे क्षमा कर देता, परन्तु उसने मेरे आराध्य श्री राम के बारे में कहा है जिसे मैं सहन नही कर सकता, और उसने मुझे युद्ध के लिए चुनौती दी है, जिसे मुझे स्वीकार करना ही होगा, अन्यथा सारी विश्व मे ये बात कही जाएगी कि हनुमान कायर है जो ललकारने पर युद्ध करने इसलिए नही जाता है क्योंकि एक बलवान योद्धा उसे ललकार रहा है ।
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तब कुछ सोंच कर ब्रम्हा जी ने कहा – ठीक है हनुमान जी, पर आप अपने साथ अपनी समस्त शक्तियों को साथ न लेकर जाएं, केवल दसवां भाग का बल लेकर जाएं, बाकी बल को योग द्वारा अपने आराध्य के चरणों में रख दे, युद्ध से आने के उपरांत फिर से उन्हें ग्रहण कर लें ।
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हनुमान जी ने ब्रम्हा जी का मान रखते हुए वैसे ही किया और बालि से युद्ध करने घर से निकले ।
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उधर बालि ने नगर के बीच मे एक जगह को अखाड़े में बदल दिया था, और हनुमान जी से युद्ध करने को व्याकुल होकर बार बार हनुमान जी को ललकार रहा था ।
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पूरा नगर इस अदभुत और दो महायोद्धाओं के युद्ध को देखने के लिए जमा था ।
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हनुमान जी जैसे ही युद्ध स्थल पर पहुँचे, बालि ने हनुमान जी को अखाड़े में आने के लिए ललकारा ।
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ललकार सुन कर जैसे ही हनुमान जी ने एक पाँव अखाड़े में रखा, उनकी आधी शक्ति बालि में चली गई ।
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बालि में जैसे ही हनुमान जी की आधी शक्ति समाई, बालि के शरीर मे बदलाव आने लगे, उसके शरीर मे ताकत का सैलाब आ गया, बालि का शरीर बल के प्रभाव में फूलने लगा, उसके शरीर से फट कर खून निकलने लगा, बालि को कुछ समझ नही आ रहा था ।
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तभी ब्रम्हा जी बालि के पास प्रकट हुए और बालि को कहा- पुत्र जितना जल्दी हो सके यहां से दूर अति दूर चले जाओ ।
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बालि को इस समय कुछ समझ नही आ रहा रहा था , उसने सिर्फ ब्रम्हा जी की बात को सुना और सरपट दौड़ लगा दिया ।
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सौ मील से ज्यादा दौड़ने के बाद बालि थक कर गिर गया, कुछ देर बाद जब होश आया तो अपने सामने ब्रम्हा जी को देख कर बोला – ये सब क्या है ? हनुमान से युद्ध करने से पहले मेरा शरीर का फटने की हद तक फूलना, फिर आपका वहां अचानक आना और ये कहना कि वहां से जितना दूर हो सके चले जाओ, मुझे कुछ समझ नही आया ।
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ब्रम्हा जी बोले – पुत्र जब तुम्हारे सामने हनुमान जी आये, तो उनका आधा बल तुममे समा गया, तब तुम्हे कैसा लगा ?

बालि बोला – मुझे ऐसा लग जैसे मेरे शरीर में शक्ति का सागर लहरें ले रहा है, ऐसे लगा जैसे इस समस्त संसार मे मेरे तेज़ का सामना कोई नही कर सकता, पर साथ ही साथ ऐसा लग रहा था जैसे मेरा शरीर अभी फट पड़ेगा ।
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ब्रम्हा जो बोले- हे बालि, मैंने हनुमान जी को उनके बल का केवल दसवां भाग ही लेकर तुमसे युद्ध करने को कहा था, पर तुम तो उनके दसवें भाग के आधे बल को भी नही संभाल सके, सोचो…., यदि हनुमान जी अपने समस्त बल के साथ तुमसे युद्ध करने आते तो उनके आधे बल से तुम उसी समय फट जाते जब वो तुमसे युद्ध करने को घर से निकलते ।
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इतना सुन कर बालि पसीना पसीना हो गया, और कुछ देर सोच कर बोला – प्रभु, यदि हनुमान जी के पास इतनी शक्तियां है तो वो इसका उपयोग कहाँ करेंगे ?
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ब्रम्हा जी बोले – हनुमान जी कभी भी अपने पूरे बल का प्रयोग नही कर पाएंगे, क्योंकि ये पूरी सृष्टि भी उनके बल के दसवें भाग को नही सह सकती ।
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ये सुन कर बालि ने वही हनुमान जी को दंडवत प्रणाम किया और बोला – 🌷एक हनुमान जी, जिनके पास अथाह बल होते हुए भी शांत और रामभजन गाते रहते है और एक मैं हूँ जो उनके एक बाल के बराबर भी नही हूँ और उनको ललकार रहा था, मुझे क्षमा करें ।🌷
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आत्मग्लानि से भर कर बालि ने भगवान राम का तप किया और अपने मोक्ष का मार्ग उन्ही से प्राप्त किया ।

तो बोलो,
🌹पवनपुत्र हनुमान की जय🌹
🌹सियावर रामचंद्रजी की जय🌹

🌹 जय श्री राम, जय श्री राम🌹

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🙏🙏 सारे जगत को राम राम जी🙏🙏

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