Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

जिसके लिए सूर्य मात्र एक फल था :- और सौ योजन समुद्र एक तालाब
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एक भक्त का अपने इष्टदेव के साथ याद किया जाना किसी भी सच्चे भक्त के लिए सबसे बडा वरदान है ! शायद इस सुची मे सबसे उपर राम भक्त हनुमान आते है ! जितना भगवान राम का नाम माता सीता के साथ लिया जाता है उतना ही हनुमान जी भी श्री राम के साथ याद किए जाते है !

हमारे पौराणीक ग्रंथो मे ऐसे न जाने कितने किस्से है जो हनुमान जी की बेहद ही नटखट और
लुभावने व्यवहार की बाते करते है !

तो आइये आज हम आपको सुनाते है हनुमान जी की बाल्यावस्था की वो कहानी जब उन्होने सूरज को एक फल समझ कर खाना चाहा था !

कथा :–

” बाल समय रवि भक्ष लियो तव तिनो ही लोक भयो अंधियारो ”

एक समय की बात है जब हनुमान जी अपनी बाल्यावस्था मे थे, ये एक ऐसा काल था जब हनुमान जी का अपनी शक्तियो पर वश नही था ! वो बहुत ही उत्पाति बालको की श्रेणी मे आते थे ! उनकी माता अंजना उनके इस व्यवहार से रोज परेशान रहती थी !

एक बार माता अंजना किसी कार्य से महल के बाहर थी, काफी समय से बाहर होने की वजह से हनुमान जी को किसी ने खाना नही खिलाया ! भुख से व्याकुल हनुमान बेचैन होकर अपनी अटारी पर आ जाते है ! वहां से सूर्य को आकाश मे चमकते देखते है, उन्हे वो एक फल जैसा लगता है ! वो तुरन्त ही उड पडते सूर्य को निगलने के लिए ! हनुमान को उडते देख वायुदेव और तेजी से बहने लगते है, ताकी हनुमान जी जल्दी से जल्दी सूर्य तक पहुंचे !
हनुमान को अपने पास आते देख सूर्यदेव अपने तेज को कम कर लेते है, ताकी हनुमान जी जलें ना !

जिस समय हनुमान सूर्य को निगलने के लिए बढ रहे थे, उसी समय राहु भी सूर्य देव पर ग्रहण लगाने के लिए बढ रहां था ! हनुमान ने सूर्यदेव को निगल लिया ! ये देखते ही राहु भयभीत होकर इंद्र के पास गया , उसने इंद्र को सारी बात बताई !

भगवान इंद्र गुस्से मे आये और उन्होने हनुमान जी की ठुड्डी पर बज्र से प्रहार किया ! प्रहार के फलस्वरुप सूर्यदेव हनुमान जी के मुख से मुक्त हो गये, पर हनुमान जी मुर्छित होकर पर्वत पर जा गिरें !

ये देखकर वायुदेव को क्रोध आ गया, उन्होने धरती पर अपना प्रवाह ही रोक दिया ! इस वजह से धरती पर सभी को सांस लेने मे परेशानी होने लगी ! तब भगवान इंद्रदेव ने वायुदेव से विनती की और ब्राह्मा जी ने हनुमान जी को वापस होश मे लाने मे मदद की ! ये देखकर वायुदेव शांत हुए, और पुनः अपने पुराने वेग मे बहने लगे !

तब इंद्र ने हनुमान जी को वरदान दिये की इस बालक का शरीर वज्र जितना मजबुत हो जायेगा ! और इसके शरीर को कोई भी अस्त्र भेद नही पायेगा !

ऊँ श्री हनुमते नमः
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देव शर्मा

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