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“क्यों लगाया जाता है हनुमान जी को संदूर”
हिन्दू धर्म में सिंदूर को सुहाग का प्रतीक माना जाता है। प्रत्येक सुहागन स्त्री इसे अपनी मांग में लगाती है। सिंदूर का हिन्दू धर्म में पूजा पाठ में भी महत्तव है। कई देवी देवताओं को सिंदूर चढ़ाया जाता है। लेकिन गणेश जी, भैरू जी (भैरव जी) और हनुमान जी को तो सिंदूर का पूरा चोला चढाने की परम्परा है।
रामचरित मानस के अनुसार जब राम जी लक्ष्मण और सीता सहित अयोध्या लौट आए तो एक दिन हनुमान जी माता सीता के कक्ष में पहुंचे। उन्होंने देखा कि माता सीता लाल रंग की कोई चीज मांग में सजा रही हैं। हनुमान जी ने उत्सुक हो माता सीता से पूछा यह क्या है जो आप मांग में सजा रही हैं। माता सीता ने कहा यह सौभाग्य का प्रतीक सिंदूर है। इसे मांग में सजाने से मुझे राम जी का स्नेह प्राप्त होता है और उनकी आयु लंबी होती है। यह सुन कर हनुमान जी से रहा न गया और उन्होंने अपने पूरे शरीर को सिंदूर से रंग लिया तथा मन ही मन विचार करने लगे इससे तो मेरे प्रभु श्रीराम की आयु और लम्बी हो जाएगी और वह मुझे अति स्नेह भी करेंगे। सिंदूर लगे हनुमान जी प्रभु राम जी की सभा में चले गए।
राम जी ने जब हनुमान को इस रुप में देखा तो हैरान रह गए। राम जी ने हनुमान से पूरे शरीर में सिंदूर लेपन करने का कारण पूछा तो हनुमान जी ने साफ-साफ कह दिया कि इससे आप अमर हो जाएंगे और मुझे भी माता सीता की तरह आपका स्नेह मिलेगा। हनुमान जी की इस बात को सुनकर राम जी भाव विभोर हो गए और हनुमान जी को गले से लगा लिया। उस समय से ही हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय है और सिंदूर अर्पित करने वाले पर हनुमान जी प्रसन्न रहते हैं।

Sanjay Gupta

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🌹सात ठाकुर जो वृंदावन में प्रकट हुए हैं🌹

🌹1. गोविंददेव जी🌹
कहाँ से मिली : वृंदावन के गौमा टीला से
यहाँ है स्थापित :जयपुर के राजकीय महल में
रूप गोस्वामी को श्री कृष्ण की यह मूर्ति वृंदावन के गौमा टीला नामक स्थान से वि.सं.1535 में मिली थी। उन्होंने उसी स्थान पर छोटी सी कुटिया में इस मूर्ति को स्थापित किया। इसके बाद रघुनाथ भट्ट गोस्वामी ने गोविंददेव जी की सेवा पूजा संभाली। उन्ही के समय में आमेर नरेश मानसिंह ने गोविंददेव जी का भव्य मंदिर बनवाया और इस मंदिर में गोविंददेव जी 80 साल विराजे। औरंगजेब के शासन काल में बृज पर हुए हमले के समय गोविंद जी को उनके भक्त जयपुर ले गए। तबसे गोविंदजी जयपुर के राजकीय महल मंदिर में विराजमान हैं।

🌹2. मदन मोहन जी🌹
कहाँ से मिली :वृंदावन के कालीदह के पास द्वादशादित्य टीले से
यहाँ है स्थापित : करौली (राजस्थान ) में
यह मूर्ति अद्वैत प्रभु को वृंदावन के द्वादशादित्य टीले से प्राप्त हुई थी। उन्होंने सेवा पूजा के लिए यह मूर्ति मथुरा के एक चतुर्वेदी परिवार को सौंप दी और चतुर्वेदी परिवार से मांग कर सनातन गोस्वामी ने वि.सं 1590 (सन् 1533) में फिर से वृंदावन के उसी टीले पर स्थापित किया। बाद मे क्रमश: मुलतान के नामी व्यापारी रामदास कपूर और उड़ीसा के राजा ने यहाँ मदन मोहन जी का विशाल मंदिर बनवाया। मुगलिया आक्रमण के समय भक्त इन्हे जयपुर ले गए पर कालांतर मे करौली के राजा गोपाल सिंह ने अपने राजमहल के पास बड़ा सा मंदिर बनवाकर मदनमोहन जी की मूर्ति को स्थापित किया। तब से मदनमोहन जी करौली में दर्शन दे रहे हैं।

🌺3. गोपीनाथ जी🌷
कहाँ से मिली : यमुना किनारे वंशीवट से
यहैं है स्थापित : पुरानी बस्ती, जयपुर
श्री कृष्ण की यह मूर्ति संत परमानंद भट्ट को यमुना किनारे वंशीवट पर मिली और उन्होंने इस प्रतिमा को निधिवन के पास स्थापित कर मधु गोस्वामी को इनकी सेवा पूजा सौंपी। बाद में रायसल राजपूतों ने यहाँ मंदिर बनवाया पर औरंगजेब के आक्रमण के दौरान इस प्रतिमा को भी जयपुर ले जाया गया। तबसे गोपीनाथ जी वहाँ पुरानी बस्ती स्थित गोपीनाथ मंदिर में विराजमान हैं।

🌺4. जुगलकिशोर जी💐
कहाँ से मिली : वृंदावन के किशोरवन से
यहाँ है स्थापित : पुराना जुगलकिशोर मंदिर, पन्ना (म .प्र)
भगवान जुगलकिशोर की यह मुर्ति हरिराम व्यास को वि. सं 1620 की माघ शुक्ल एकादशी को वृंदावन के किशोरवन नामक स्थान पर मिली। व्यास जी ने उस प्रतिमा को वही प्रतिष्ठित किया।बाद मे ओरछा के राजा मधुकर शाह ने किशोरवन के पास मंदिर बनवाया। यहाँ भगवान जुगलकिशोर अनेक वर्षो तक विराजे पर मुगलिया हमले के समय उनके भक्त उन्हें ओरछा के पास पन्ना ले गए। ठाकुर आज भी पन्ना के पुराने जुगलकिशोर मंदिर मे दर्शन दे रहे है।

🌹5. राधारमण जी🌿🌾
कहाँ से मिली : नेपाल की गंडकी नदी से
यहाँ है स्थापित : वृंदावन
गोपाल भट्ट गोस्वामी को नेपाल की गंडक नदी मे एक शालिग्राम मिला। वे उसे वृंदावन ले आए और केसीघाट के पास मंदिर मे प्रतिष्ठित कर दिया। एक दिन किसी दर्शनार्थी ने कटाक्ष कर दिया कि चंदन लगाए शालिग्राम जी तो एसे लगते है मानो कढ़ी में बैंगन पड़े हों। यह सुनकर गोस्वामी जी बहुत दुःखी हुए पर सुबह होते ही शालिग्राम से राधारमण जी की दिव्य प्रतिमा प्रकट हो गई। यह दिन वि. सं 1599 (सन् 1542) की वैशाख पूर्णिमा का था। वर्तमान मंदिर मे इनकी प्रतिष्ठापना सन् 1884 मे कि गई।
उल्लेखनीय है कि मुगलिया हमले के बावजूद यही एक मात्र ऐसी प्रतिमा है जो वृंदावन से कहीं बाहर नहीं गई। इसे भक्तों ने वृंदावन में ही छुपाकर रखा।इसकी सबसे विषेश बात यह है कि जन्माष्टमी पर जहाँ दुनिया के सभी कृष्ण मंदिरो में रात्रि बारह बजे उत्सव होता है, वहीं राधारमण जी का जन्म अभिषेक दोपहर बारह बजे होता है। मान्यता है कि ठाकुर जी सुकोमल होते हैं इसलिए उन्हें रात्रि में जागना ठीक नहीं।

🌺6. राधावल्लभ जी🌿🌾
कहाँ से मिली : यह प्रतिमा हित हरिवंश जी को दहेज में मिली थी
यहाँ है स्थापित : वृंदावन
भगवान श्रीकृष्ण की यह सुदंर प्रतिशत प्रतिमा हित हरिवंश जी को दहेज मे मिली थी। उनका विवाह देवबंद से वृंदावन आते समय चटथावल गाव में आत्मदेव नामक एक ब्राह्मण की बेटी से हुआ था। पहले वृंदावन के सेवाकुंज में (वि. सं 1591)और बाद में सुंदरलाल भटनागर द्वारा बनवाया गया (कुछ लोग इसका श्रेय रहीम को देते है ) लाल पत्थर वाले पुराने मंदिर में प्रतिष्ठित हुए।
मुगलिया हमले के समय भक्त इन्हे कामा (राजस्थान ) ले गए थे। वि. सं 1842 में एक बार फिर भक्त इस प्रतिमा को वृंदावन ले आये और यहा नवनिर्मित मंदिर में प्रतिष्ठित किया। तब से राधावल्लभ जी की प्रतिमा यहीं विराजमान है।

🌹7. बांकेबिहारी जी🌹
कहाँ से मिली : वृंदावन के निधिवन से
यहैं है स्थापित : वृंदावन
मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को स्वामी हरिदासजी की आराधना को साकार रूप देने के लिए बांकेबिहारी जी की प्रतिमा निधिवन मे प्रकट हुई। स्वामी जी ने उस प्रतिमा को वहीं प्रतिष्ठित कर दिया। मुगलिया आक्रमण के समय भक्त इन्हें भरतपुर (राजस्थान ) ले गए। वृंदावन में ‘भरतपुर वाला बगीचा’ नाम के स्थान पर वि. सं 1921 में मंदिर निर्माण होने पर बांकेबिहारी जी एक बार फिर वृंदावन मे प्रतिष्ठित हुए। तब से बिहारीजी यहीं दर्शन दे रहे है।
बिहारी जी की प्रमुख विषेश बात यह है कि इन की साल में केवल एक दिन (जन्माष्टमी के बाद भोर में) मंगला आरती होती है, जबकि अन्य वैष्णव मंदिरों में नित्य सुबह मंगला आरती होने की परंपरा है।
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🌺🌹🌻 श्री राधे राधे बोलना तो पड़ेगा जी 🌻🌹🌺
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Sanjay gupta

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चाणक्य और मोदी

चाणक्य ने पहली बार जब मगध की राजधानी पाटलिपुत्र पर हमला किया (मतलब उनकी सेना ने) तो बुरी तरह मुंह की खायी और बा-मुश्किल जान बचाकर भागे।
भागते भागते चाणक्य भी एक बुढ़िया की झोपडी में आकर छुप गए।

वह रसोई के साथ ही कुछ मन अनाज रखने के लिए बने मिट्टी के निर्माण के पीछे छुपकर खड़े थे।

पास ही चौके में एक दादी अपने पोते को खाना खिला रही थी।

दादी ने उस रोज खिचड़ी बनाई थी।

खिचड़ी गरमा-गरम थी। दादी ने खिचड़ी के बीच में छेद करके गरमा-गरम घी भी डाल दिया था और घड़े से पानी भरने गई थी।

थोड़ी ही देर के बाद बच्चा जोर से चिल्ला रहा था और कह रहा था- जल गया, जल गया।

दादी ने आकर देखा तो पाया कि बच्चे ने गरमा-गरम खिचड़ी के बीच में अंगुलियां डाल दी थीं।

दादी बोली, तू चाणक्य की तरह मूर्ख है, अरे गरम खिचड़ी का स्वाद लेना हो तो उसे पहले कोनों से खाया जाता है और तूने मूर्खों की तरह बीच में ही हाथ डाल दिया और अब रो रहा है’।

चाणक्य बाहर निकल आए, बुढ़िया के पांव छूए और बोले- आप सही कहती हैं कि, मैं मूर्ख ही था तभी राज्य की राजधानी पर आक्रमण कर दिया और आज हम सबको जान के लाले पड़े हुए हैं।

चाणक्य ने उसके बाद मगध को चारों तरफ से धीरे-धीरे कमजोर करना शुरू किया और एक दिन चंद्रगुप्त मौर्य को मगध का शासक बनाने में सफल हुआ।

आज जब मैं इन भक्तों और 70 साल से एक पार्टी के “बंधुआ मजदूरों” को देखता हूँ तो ये कहानी याद आती है।

JNU ढहा दो, नक्सलियों को मारने में क्या प्रॉब्लम है? कश्मीर के आतंकवादियों को एकदम से क्यों नहीं मार देते अरे भाई, जैसे कि नक्सली और आतंकवादी सामने से आकर कहते हैं कि, लो मुझे मार दो!!

जो लोग देश के खिलाफ नारे लगाते हैं उन्हें गोली से उड़ाने में क्या प्रॉब्लम है?
जनाब हमारा संविधान ही ऐसा बनाया गया है के किसी को भी सिर्फ इसलिए देशद्रोही नहीं माना जा सकता कि, उसने देश के खिलाफ नारे लगाए हैं जब तक की उन नारों की वजह से हिंसा या पब्लिक disorder ना हो।

कश्मीर के पत्थर बाजों को क्यों नहीं गोली मार देते? तो जनाब सुप्रीम कोर्ट का आर्डर है कि, किसी भी तरह की मौत के लिए जो कि मिलिट्री फायरिंग से होती है उसमे FIR फाइल करी जायेगी और जांच local police करेगी और उन दरिंदों को ये अधिकार हमारी पिछली सरकारों ने ही दिए है

अब मुझे बताओ कि अगर आप के हाथ में बन्दूक दे दें तो क्या आप गोली चला पाओगे?

ध्यान रहे किसी भी मौत के लिए आप को prove करना होगा कि आप क़ी गलती नहीं है।

वैसे पिछली सरकार एक कानून भी बनाकर गयी है कि, अगर सामने वाले के हाथ में हथियार है तब भी आप उसका उपयोग नहीं कर सकते जब तक कि, सामने वाला आतंकवादी गोली न चलाये!!

तो क्या करना चाहिए?

अब सरकार पैलेट गन का विकल्प लायी (ध्यान रहे ये इसी सरकार ने किया है) तो माननीय मीलोर्ड ने पानी की बौछार का विकल्प सुझाया है… आगे आप खुद समझदार हैं।

कुछ लोग कहते हैं कि JNU को बंद करने में क्या प्रॉब्लम है भारत के खिलाफ बोलने वाले पत्रकारों को जेल में क्यों नहीं डाल देते?

तो जनाब JNU और ये सेकुलर पत्रकार प्रॉब्लम नहीं हैं , ये सिर्फ mouth piece हैं जिनका काम लोगों को और सरकार को सिर्फ उलझाना है असली प्रॉब्लम है चाइना, पकिस्तान का nexus, अरब देशों और वेस्टर्न कन्ट्रीज से आ रहा धन जो कि conversion, terrorism और naxalite activities में use होता है और देश के विकास ने बाधक बनता है।

इसीलिए सरकार ने पहला कदम इन NGOs को बंद करने का लिया जिनके मार्फ़त ये धन आता था।

आप की समझ में ना आये तो अलग बात है वैसे नोट बंदी भी उसी योजना का एक हिस्सा भर थी।

हमारे यहाँ कुछ शूरवीर ऐसे भी हैं जो कहते हैं कि विकास होता रहेगा पहले पाकिस्तान को सबक सिखाओ।

ये वो ही शूरवीर हैं जो कि 4 एटीएम withdrawl के बाद 20 रुपया शुल्क लगने से चिल्लाने लगते हैं कि, हाय हाय हम मर गए हमें नहीं चाहिए ऐसी सरकार जो गरीबों के पेट पर लात मारती हो।

क्या ये शूरवीर लड़ेंगे पाक से युद्ध? वैसे इन समझदारों को पता नहीं कि, युद्ध लड़ने से पहले बहुत तैय्यारी करनी पड़ती है, देश में गोलाबारी का पर्याप्त स्टॉक होना चाहिए, अच्छे टैंक, विमान और सैनिकों के पास अच्छी गन होनी चाहिए जो कि पिछली सरकार की कृपा से न्यूनतम से भी नीचे पहुँच गया था। कुछ लोग कहते हैं की फोड़ दो पाकिस्तान पर परमाणु बम जो होगा देखा जाएगा। ये वो महानुभाव हैं जो की बैंक की लाइन ने अगर 4 घंटे खड़े रहें तो इन्हें चक्कर आ जाते हैं और परमाणु युद्ध इन्हें बच्चों का खेल लगता है। वैसे इन्हें ये भी नहीं पता कि, अगर हिन्दुस्तान पाकिस्तान आपस में परमाणु युद्ध लड़कर तबाह हो गए तो चाइना कितनी आसानी से हमारे ऊपर कब्ज़ा कर लेगा।

खैर सोशल मीडिया पर शूरवीर बनने में क्या जाता है इसमें तो ATM withdrawl का 20 रुपया भी नही लगता और अगर लगने लग जाए तो ये शूरवीर यहाँ से भी गायब हो जायेंगे और बोलेंगे नहीं चाहिये युद्ध मुझे मेरे 20 रूपये वापस दो!!
खैर ये तो हुई problem अब solution क्या है और इस सरकार और पिछली सरकार में फर्क क्या है?

फर्क है नीयत का और कार्यो का।

ये सरकार देश में अवैध धन लाने वाले 13000 NGO को बंद करती है।
ये सरकार देश में राफेल विमानों को लाती है जो की दुनिया का सर्वश्रेष्ठ लड़ाकू विमान (या उनमे से एक है), डिफेन्स procurement को फ़ास्ट ट्रैक करती है। सैनिकों के लिए बुलेट प्रूफ जैकेट, नाईट विज़न और बढ़िया क्वालिटी के हेलमेट खरीदती है, उनके लड़ने के लिए लेज़र और बेहतर क्वालिटी की गन खरीदती है।नयी तोपें खरीदी जाती हैं जो कि पिछ्ले 30 सालों में नहीं हुआ था।इजराइल से समझोते किये जाते हैं ताकि युद्ध की स्थिति में गोला बारूद की आपूर्ति निर्बाध जारी रहे।इरान और अफगानिस्तान में बेस बनाए जाते हैं कि जिससे युद्ध की स्थिति में दूसरा मोर्चा खोला जा सके। चाइना बॉर्डर पर ब्रहोस (परमाणु क्षमता वाली) नियुक्त की जाती है और इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत किया जाता है।

चाइना के खिलाफ उसके पड़ोसी देशो से समझोते किये जाते हैं ताकि युद्ध की स्थिति में उसे बाँधा जा सके। और हाँ देश में तेल रिज़र्व भी बनाया जा रहा है जिससे कि किसी भी आपात स्थिति का सामना करा जा सके क्योंकि देश तेल के लिए अरब कन्ट्रीज पर निर्भर है जो कि अभी तक पाकिस्तान के साथ रहे हैं।

मोदी इन्हें भी अपने साथ लाने का प्रयास कर रहा है और इसीलिए विदेश भी जाता है।
एक बात और,इन सब चीज़ों के पैसे लगते हैं, फ्री में नहीं आतीं और इसीलिए तेल के दाम भी अभी कम नहीं होंगे और ना ही टैक्स अभी कम होंगे।

पोस्ट बहुत लम्बी हो गयी है तो संक्षेप में सुनो मोदी खिचड़ी खाने वाला व्यक्ति है, जो ठंडा करके खा रहा है , क्योंकि हमें गलती करने पर दुबारा मौका नहीं मिलेगा , इसलिए पहली बार में ही लडाई जीतनी है।

और हाँ सीधी लड़ाई से बचा जाएगा और पकिस्तान को टुकड़ों में बांटा जाएगा लेकिन सीधी लड़ाई की तैय्यारी भी पूरी रखेगा और जब तक तैयारी पूरी न हो कुछ बड़ा नहीं होने वाला।

सीमा पर छोटीमोटी मुठभेड़ जारीच रहेंगी।

हमारे कुछ सैनिकों को वीरगति भी प्राप्त होगी और कश्मीर भी सुलगता रहेगा।
ये सेकुलर पत्रकार भी गला फाड़कर चिल्लाते रहेंगे, JNU की झोला छाप intellectual class भी शोर मचाएगी यानी कि सब कुछ पहले जैसा ही रहेगा (बल्कि ज्यादा चिल्लायेंगे)। लेकिन मोदी पर कोई असर नहीं पड़ेगा वो बिलकुल चुपचाप रहेगा और अपना काम करता रहेगा।

इन सब की चिल्ली पौं का काम तमाम एक झटके में होगा तब तक आप की मर्ज़ी है कि आप भी इनकी तरह से शोर मचाएंगे या चुपचाप बैठकर तमाशा देखेंगे (क्योंकि ना मेरे ना आप के हाथ में कुछ है और ना ही इन लोगों के)।

मैं देखना चाहता हूँ एक सशक्त भारत और उसके लिए मैं इंतज़ार करने को तैयार हूँ।
मेरे लिए पाकिस्तान के दस, सौ या फिर हज़ार सैनिको के सर से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी सम्पूर्ण हार है और मैं उस बड़ी जीत के लिए इंतज़ार करने को तैयार हूँ।

साभार

Vipin Khurana

Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

એક રાજા ના દરબારમાં એક અજાણી વ્યક્તિ નોકરી માટે આવે છે.

રાજા તેની લાયકાત પુછે છે.

જવાબમાં અજાણી વ્યક્તિ કહે છે કે હું અક્કલથી કોઇ પણ જાતનો ગુચવાયેલો કોયડો ઉકેલી શકું છું.

રાજા એ એમને ધોડાના તબેલા ની જવાબદારી સોંપી દે છે.

થોડા દિવસો પછી રાજા તેમના અતિ મોંધા અને પ્રિય ધોડા બાબતે અભીપ્રાય પુછયો..

જવાબમાં નોકરે કંહ્યુ કે “ ધોડો અસલી નથી”

રાજા એ તપાસ કરાવી તો જાણવા મળ્યું કે ધોડાની નસલ તો અસલી છે,પરંતુ તેની માં મરી ગઈ હતી એટલે તે ગાયને ધાવીને મોટો થયો હતો.

રાજા એ નોકરને પુંછયું કે તને આ કેવી રીતે ખબર પડી ?

નોકરે જવાબ આપ્યો કે નામદાર ધોડાઓ મોઢામાં ધાસ લઈને મોઢુ ઉંચુ કરીને ખાય છે જયારે આ ધોડો ગાયની માફક નિચે નમીને મોઢુ નિચે રાખીને ધાસ ખાતો હતો.

રાજા એ ખુશ થઈને નોકરના ધરે અનાજ,ધી,અને પક્ષીઓનું માંસ વિ.મોકલી આપ્યું,અને નોકરને બઢતી આપીને તેને રાણી નાં મહેલમા નોકરી આપી,અને પછી રાજા એ તેની રાણી બાબતે સવાલ કર્યો તો જવાબમાં નોકરે કંહ્યુ કે રાણી ની રહેણીકરણી તો મલિકા જેવી છે પણ તે રાજકુમારી નથી.

રાજા આશ્ચર્ય ચકીત થઈ ગયો..તરતજ તેણે તેની સાસુને બોલાવી..સાસુએ ખુલાસો કર્યો કે મારી દિકરી જન્મી કે તરતજ તમારી સાથે તેની સગાઇ કરી નાખવામાં આવી હતી.પરંતુ છ મહિનામાં જ મારી દિકરી મરી ગઈ ..એટલે બીજી કોઇ છોકરીને અમે ગોદ લીધી જે આજે તમારી રાણી છે.

રાજા એ નોકરને પુંછયુ કે તને આ કઈ રીતે ખબર પડી ?

નોકરે જવાબ આપ્યો કે ખાનદાન લોકોનો અન્ય લોકો સાથેનો વ્યવહાર ખુબજ સાલસ અને નમ્ર હોય છે જે આપની રાણી માં નથી.

રાજા એ ખુશ થઈને ફરીથી નોકરને ધરે અનાજ, ધેટા,બકરા વિ.ઇનામમાં આપીને પોતાના દરબારમાં સ્થાન આપ્યું.

થોડા વખત પછી રાજા એ નોકરને બોલાવ્યો અને તેમણે પોતાનાં વિષે જાણવાની ઇચ્છા પ્રગટ કરી જવાબમાં નોકરે કંહ્યુ કે “અભય વચન આપો તો તમારી અસલીયત બાબત કંહુ”

રાજા એ આપ્યું.., એટલે નોકરે કંહ્યુ કે “ ના તો આપ રાજા છો કે ના તો તમારો વ્યવહાર રાજા જેવો છે”

રાજા ગુસ્સાથી લાલપીળો થઈ ગયો પણ જાન માફીનું વચન આપ્યું હતું એટલે સમસમીને ચુપ રહ્યો અને રાજા એ પોતાના પિતા પાસે જઈને પુછયું કે હું ખરેખર કોનો દીકરો છું…??

જવાબમાં તેના પિતા એ કંહ્યુ કે હા સાચી વાત છે. મારે કોઇ ઓલાદ ના હતી તેથી મેં તને એક કસાઈ પાસેથી ગોદ લીધો છે.

રાજા અચરજ પામી ગયો અને નોકરને પુછયું કે તને કેવી રીતે ખબર પડી …???

જવાબમાં નોકરે કંહ્યુ કે ‘ બાદશાહ જયારે કોઇને ઇનામ આપે તો તે હીરા ,મોતી અને ઝવેરાતના રૂપમાં આપે છે”…, પરંતુ તમે તો મને કાયમ અનાજ,માંસ, ધેટા બકરા વિ.ઇનામમાં આપ્યા જે વહેવાર કોઇ કસાઈ ની ઓલાદ જેવો હતો…

બોધ- ઇંસાનની અસલિયત તેના ખુનનો પ્રકાર,સંસ્કાર, વ્યવહાર અને નિયત ઉપર નિર્ભર કરે છે.

હેસિયત બદલાઇ જાય છે ,પણ ઔકાત તો તેની તે જ રહે છે…‼

વિજ્ઞાન માં D.N.A. ની શોધ અમથી જ નથી થઈ..,

પૈસો આવે એટલે મન ની અમીરાત પણ આવે તેવું હોતું નથી…..‼ 👣👣👣🙏🏼🙏🏼

તેના માટે સંસ્કારી ખાનદાન નાં D. N. A. જરુરી હોય છે…!!!!