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बहुत देर हो गई ……………
संध्या का समय था। कलकत्ते के एक बड़े जमींदार पश्चिमी लिबास पहने हाथ में एक छड़ी घुमाते अपने विशाल संगमरमरी महल की सीढियों पर राजसी अदाऔर मस्ती से कदम रखते हुए उतर रहे थे,

अपनी कार में बैठकर संध्या की टहल के लिये।

वह अपने महल के भीतरी भाग से निकलने ही वाले थे कि उन्हें एक स्त्री की आवाज सुनायी दी जो उनके महल में उनके परिवार के वस्त्रों को धोने के लिये ले जाती थी,
यह एक सामान्य बात ही थी। जमींदार साहब को देखते ही वह एक ओर हट गयी और झुककर अभिवादन किया।

जमींदार साहब ने भी अभिवादन स्वीकार किया राजसी अंदाज में।
वह तनिक सा ही आगे बढ़े थे कि स्त्री ने आवाज लगायी –
“रानी साहिब ! धोने के कपड़े दिलवा दीजिये, बहुत देर हो गयी।” “बहुत देर हो गयी।”

जमींदार साहब के पैर थम गये, उन्होंने आकाश की ओर देखा, एक बिजली सी कौंधी, क्षण से भी कम समय में एक नया जन्म हो गया..
“बहुत देर हो गयी।”

वह वापिस पलटे और प्रसाद के भीतर चले गये, अब कहीं नहीं जाना,बहुत देर हो गयी।

वह कपड़े धोने वाली स्त्री ‘प्रथम गुरु’ हो गयी, “गुरु” क्योंकि उसने चेता दिया।

विस्मृत को स्मृत करा दिया।
स्वरुप का बोध करा दिया।

उस स्त्री को नहीं पता कि आज उसके सामान्य शब्दों ने क्या प्रभाव दिखाया है,उसे बोध ही नहीं और यही तो मेरे प्रभु की अहैतुकी कृपा है।

यथाशीघ्र उन्होंने सब कुछ परिजनों के सुपुर्द किया और एक सफ़ेद धोती पहिनकर आ गये
श्रीधाम वृन्दावन ! ठाकुरजी के पास।

ठाकुरजी के अतिरिक्त कुछ न सुहावे,
ब्रजरज में ही पड़ा रहना भावे,
यही स्मरण रहे कि..
“बहुत देर हो गयी।”

उन अकारण करुणा वरुणालय को तो ऐसे ही पागल भाते हैं और उन्हें कृपाकर बुलाते भी तो वही हैं;

अन्यथा किसकी सामर्थ्य हैं जो स्वयं उन तक पहुँच पावे।

नेह भरा बंधन खूब निभा।

अपने अंतिम समय में उन संत की ऐसी ही इच्छा रही कि मेरे देह-त्याग के उपरांत भी मेरी इस देह को रस्सी से बाँधकर श्रीधाम वृन्दावन की कुन्ज-गलियों में खींचना ताकि संस्कार से पहिले इसमें भी खूब ब्रज-रज लग जावे और यह अधम देह भी ब्रजरज के स्पर्श से पवित्र हो जावे।

श्रीकिशोरीजी की न जाने कब कृपा हो जावे, न जाने कब कौन सा “शब्द/अक्षर” आपके मन-प्राणों को झकझोर कर रख दे,

न जाने कब अपने वास्तविक स्वरुप की स्मृति हो आवे,
न जाने कब अनायास ही गुरु मिल जावें,
न जाने कब हमें साक्षात श्रीयुगल-किशोर मिल जावें…….😭😭
जय जय श्री रराधेकृष्णजी🌺
🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🌟🌟🌟🌟🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁🍁

Sadhna sharma

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