Posted in Uncategorized

💥संसार में जिसने जन्म लिया है उसे अपने पूर्वजन्मों के कर्मों के हिसाब से कष्ट भोगने ही होंगे आत्महत्या कर लेने से उन कष्टों से निजात नहीं मिलती……. बहुत ही ज्ञानवर्धक लेख जरूर पढे।
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
किसी ने पूछा भगवान दु:ख दूर करते हैं
साधु ने कहा ना रे भगवान किसी का दुःख दूर नहीं करते !यदि दुख ही दूर करना होता तो देते ही क्यों
फिर दुःख दूर कौन करता है
साधु बोले भगवान का नाम दु:ख दूर करता है उनके स्मरण में मन का रमण होने लगे तो दुःख का मरण है।
➖➖➖➖➖➖➖➖➖➖
उत्तर भारत में प्रसिद्ध संत हुये हैं बाबा फकीर चंद गोसाईं ,
उनके पास काफी दर्शनार्थी आते रहते थे और अपने मनोभावों के अनुसार अपनी जिज्ञासा का समाधान लेते रहते थे.
बाबा फकीर चंद गोसाईं उनका सुंदर और व्यावहारिक निदान देते थे.
उनके आश्रम के पास एक अध्यापक रहते थे. वह अक्सर उनके आश्रम आते-जाते रहते, प्रवचनों का लाभ लिया करते थे.
एक बार अध्यापक महोदय अपने परिवार में होने वाली रोज-रोज की कलह से बुरी तरह त्रस्त हो गये.
जहां शांति नहीं होती वहां लक्ष्मी भी नहीं ठहरतीं. इस कलह का परिणाम ऐसा रहा कि घर के आय के स्रोतों को नाश होने लगा.
बात बिगड़ती-बिगड़ती ऐसी स्थिति तक पहुंच गई जब अध्यापक महोदय को भी सुधरो वरना नौकरी से विदाई का नोटिस दे दिया गया.
कलह से चिंतित थे ही अब तो परिवार की दाल-रोटी पर भी संकट खड़ा होने वाला था. जिसे कोई राह नहीं दिखती उसे जीवन निरर्थक लगता ही है.
आखिर थक-हारकर उन्होंने सोचा कि रोज-रोज की समस्याओं की मुक्ति का एक ही रास्ता है जीवन से छुटटी.
अध्यापक महोदय ने आत्महत्या की सोची किन्तु आत्महत्या का निर्णय लेना इतना आसान तो था नहीं. सांसारिक प्राणी को तो अपने प्रियजनों और संतानों की चिंता अंत समय तक रहती ही है.
वह जीना भी चाहते थे परंतु जीवन जीने लायक भी नहीं दिखता था. ऐसे उहापोह में पड़ा वह व्यक्ति बाबा फकीर चंद गोसाईं जी के आश्रम में पहुंचा और उन्हें प्रणाम करके सारी बात बताई.
घुमा-फिराकर उन्होंने गोसाईं जी से आत्महत्या के विषय में उनकी राय जाननी चाही. गोसाईं जी उस समय आश्रमवासियों के भोजन के लिए बड़ी सावधानी से पत्तलें बना रहे थे. वह चुपचाप उसकी बातें सुनते रहे, कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.
उस व्यक्ति ने सोचा कि शायद निर्णय लेने में गोसाईं जी को विलम्ब हो रहा है.
थोड़ी देर में उसे खीझ भी होने लगी कि वह इतनी बड़ी समस्या से जूझ रहा है और गोसाईं जी पत्तल बनाने में जुटे हैं.
गोसाईं जी के परिश्रम और तल्लीनता को देख उसे आश्चर्य भी हुआ.
उसने आखिर पूछ ही लिया- गोसाईं जी! आप इन पत्तलों को इतने परिश्रम से बना रहे हैं, लेकिन थोड़ी देर बाद भोजन के उपरांत ये कूडे में फेंक दिये जायेंगे.
गोसाईं जी मुस्कुराते हुए बोले- आप ठीक कहते हैं, लेकिन किसी वस्तु का पूरा उपयोग हो जाने के बाद उसको फेंकना बुरा नहीं, बुरा तब कहा जायेगा जब उसका उपयोग किए बिना अच्छी अवस्था में ही कोई उसे फेंक दे. आप तो समझदार हैं मेरे कहने का आशय तो भली-भांति समझ गए होंगे.
इन शब्दों से अध्यापक महोदय की समस्या का समाधान हो गया. उस परिस्थिति में भी उनमें जीने का उत्साह आ गया और उन्होंने आत्महत्या का विचार त्याग दिया.
संसार एक समुद्र है. उसमें असुविधा रूपी तरंगे आती ही रहेंगी. मनुष्य विपरीत परिस्थितियों में कई बार विचलित हो जाता है और इस समय कोरे उपदेश उसके मन पर अनुकूल प्रभाव भी नहीं छोडते.
इसलिए ज्ञानी पुरूष ज्यादा शब्दों का प्रयोग किये बिना ही व्यक्ति की अशुभ वृत्तियों को समाप्त कर देते हैं.
संसार में जिसने जन्म लिया है उसे अपने पूर्वजन्मों के कर्मों के हिसाब से कष्ट भोगने ही होंगे. आत्महत्या कर लेने से उन कष्टों से निजात नहीं मिलती. वे कष्ट आप अगले जन्मों में भोगेंगे.
इसे आप अपने ऊपर चढ़े उस कर्ज की तरह लें. जितनी जल्दी कर्ज चुकता होगा, उस पर ब्याज कम लगेगा. यदि इस जन्म में काटने वाले कष्टों को अगले जन्मों के लिए रखेंगे तो ब्याज के साथ ज्यादा कष्ट भोगने होंगे.
फिर कितने जन्मों तक आत्महत्या करके भागेंगे आप? क्या अच्छा नहीं कि इसी जन्म में हिसाब चुकता कर लिया जाए!
आजकल एक प्रवृति, लोगों में महत्वाकांक्षा बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है. संतोष नहीं है. महत्वाकांक्षा का कोई अंत तो है नहीं, स्वाभाविक है कि सारी इच्छाएं पूरी होंगी नहीं. बस यहीं से शुरू होती है हताशा.
जो लोग स्वभाव से जिद्दी रहे हैं, सबकुछ अपनी मर्जी से कराने वाले रहेे हैं, जरा सा भी समय के उलटफेर को सहन नहीं कर सकते उनमें जीवन छोडने की प्रवृति बहुत ज्यादा आ जाती है. इसलिए आजकल लोग आत्महत्या को विकल्प के रूप में समझने की भूल करते हैं.
इसलिए जिद्दीपन छोड़कर ऐसा ख्याल मन में लाने से पहले अपने और अपने परिवार के बारे में अवश्य सोचें।

Sanjay Gupta

Author:

Buy, sell, exchange old books

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s