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#संगतकाअसर*
एक बार एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी कीड़े के साथ हो गई ,
कीड़े ने भंवरे से कहा कि भाई  तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो
इस लिये मेरे यहाँ भोजन पर आओ 😊अब अगले दिन भंवरा सुबह सुबह तैयार हो गया और अपने बच्चो के साथ
गोबरी कीड़े के यहाँ भोजन के लिये पहुँचा
कीड़ा भी उन को देखकर बहुत खुश हुआ और सब का आदर करके भोजन परोसा।
भोजन में गोबर की गोलियां परोसी गई और कीड़े ने कहा कि खाओ भाई रुक क्यों गए।,
भंवरा सोच में पड़ गया
कि मैने बुरे का संग किया
इस लिये मुझे तो
गोबर खाना ही पड़ेगा।
भंवरा ने सोचा की ये मुझे इस का संग करने से
मिला और फल भी पाया
अब इस को भी मेरे संग का फल मिलना चाहिये..
भंवरा बोला भाई
आज तो में आप के यहाँ
भोजन के लिये आया
अब तुम कल मेरे यहाँ आओगे..
अगले दिन कीड़ा तैयार होकर भंवरे के यहाँ पहुँचा ,
भवरे ने कीड़े को उठा कर
गुलाब के फूल में बिठा दिया और रस पिलाया,
कीड़े ने खूब फूलो का रस पिया और मजे  किये अपने मित्र का धन्यवाद किया और कहाँ मित्र तुम तो बहुत अच्छी जगह रहते हो
और अच्छा खाते हो..
इस के बाद कीड़े ने सोचा क्यों न अब में यहीं रहूँ और ये सोच कर यही फूल में बैठा रहा
इतने में ही पास के मंदिर
का पुजारी आया और फूल तोड़ कर ले गया
और चढ़ा दिया इस को प्रभु चरणों में..
कीड़े को भगवान के दर्शन भी हुवे और उनके चरणों में बैठा।
इस के बाद सन्ध्या में
पुजारी ने सारे फूल इक्कठा किये और गंगा जी में छोड़ दिए,
कीड़ा गंगा की लहरों पर
लहर रहा था और अपनी किस्मत पर हैरान था
कि कितना पूण्य हो गया
इतने में ही भंवरा उड़ता हुवा
कीड़े के पास आया और बोला  मित्र अब बताओ क्या हाल है?
कीड़ा बोला भाई अब जन्म जन्म के पापो से
मुक्ति हो चुकी है जहाँ गंगा जी में मरने के बाद
अस्थियो को छोड़ा जाता है
वहाँ में जिन्दा ही आ गया हूं
ये सब मुझे तेरी मित्रता और अच्छी संगत का ही फल मिला है और ख़ुशी से निहाल हूं 😊
तेरा धन्यवाद !! जिस को में अपनी जन्नत समझता था वो गन्दगी थी और जो तेरी वजह से मिला
ये ही स्वर्ग है.. 😊
किसी महात्मा ने सही कहा है:

जैसे संग करोगे वैसे बन जाअोगे

शराबी का संग करोगे शराबी बन जाओगे
जुआरी का संग करोगे जुआरी बन जाओगे
स्वार्थी या संग करोगे स्वार्थी बन जाओगे
दानी का संग करोगे दानी बन जाओगे
संतो,भक्तो का संग करोगे
तो प्रभु नाम मीठा
लगने लग जायेगा
प्रभु से प्रेम हो जायेगा

जैसी संगत वैसी रंगत
       🌳🌴🌾🌾🌴🌳

सतीश शशांक

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बिटिया बड़ी हो गयी, एक रोज उसने बड़े सहज भाव में अपने पिता से पूछा – “पापा, क्या मैंने आपको कभी रुलाया” ?

पिता ने कहा -“हाँ ”

उसने बड़े आश्चर्य से पूछा – “कब” ?

पिता ने बताया – ‘उस समय तुम करीब एक साल की थीं,
घुटनों पर सरकती थीं।
मैंने तुम्हारे सामने पैसे, पेन और खिलौना रख दिया क्योंकि मैं ये देखना चाहता था कि, तुम तीनों में से किसे उठाती हो तुम्हारा चुनाव मुझे बताता कि, बड़ी होकर तुम किसे अधिक महत्व देतीं।
जैसे पैसे मतलब संपत्ति, पेन मतलब बुद्धि और खिलौना मतलब आनंद।

मैंने ये सब बहुत सहजता से लेकिन उत्सुकतावश किया था क्योंकि मुझे सिर्फ तुम्हारा चुनाव देखना था।

तुम एक जगह स्थिर बैठीं टुकुर टुकुर उन तीनों वस्तुओं को देख रहीं थीं।
मैं तुम्हारे सामने उन वस्तुओं की दूसरी ओर खामोश बैठा बस तुम्हें ही देख रहा था।
तुम घुटनों और हाथों के बल सरकती आगे बढ़ीं,
मैं अपनी श्वांस रोके तुम्हें ही देख रहा था और क्षण भर में ही तुमने तीनों वस्तुओं को आजू बाजू सरका दिया और उन्हें पार करती हुई आकर सीधे मेरी गोद में बैठ गयीं।
मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि, उन तीनों वस्तुओं के अलावा तुम्हारा एक चुनाव मैं भी तो हो सकता था।
तभी तुम्हारा तीन साल का भाई आया ओर पैसे उठाकर चला गया,

वो पहली और आखरी बार था बेटा जब, तुमने मुझे रुलाया और बहुत रुलाया…

भगवान की दी हुई सबसे अनमोल धरोहर है बेटी…

क्या खूब लिखा है एक पिता ने…

हमें तो सुख मे साथी चाहिये दुख मे तो हमारी बेटी अकेली ही काफी है…❤❤❤👌👌👌👌
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किसी ने मुझ से पूछा वृन्दावन धाम कैसा है ।

मैं बोला…
” अरे , बिल्कुल मत जाना । बड़ी मायावी नगरी है , एक बार गए तो सही सलामत वापिस नही आ पाओगे।” कहीं से भी ढोल , नगाड़े , मंजीरे बज उठते हैं और पांव नाचने को मजबूर हो जाते हैं ।

“क्यों ? ऐसा क्या है उस नगरी में ?”

माया की नगरी है , वहां का राजा जादूगर है और बहुत बड़ा लूटेरा भी । इधर कदम धरा , उधर सब लुट गया समझो। मनुष्य को बांवरा कर देता है। पागल से भी बदतर ।

मैं बहुत समझदार हूँ , मैं ना आता उसकी बातों में।

वो बात करेगा तभी तो समझदारी दिखाओगे। तुम्हारा काम तो उस कान्हा राजा की नगरी में पांव धरते ही हो जाएगा। सयाने लोगों को तो वो चुन चुन कर अपने पागलखाने में भर्ती करता है।  जो जितना ज्ञानी उतना बड़ा उसका शिकार ।

मै छुप कर जाऊंगा उस नगरी, फिर देखता हूँ कैसे पागल बनाता है।

हाहाहा , भाई वहां का पत्ता पत्ता उस का गुप्तचर है ।

हवाएं उसके इशारे पर चलती हैं ।
तुम उसकी सीमा में गये नही कि लूट जाओगे ।

ऐसे कैसे लूट लेगा ?
सुना है , उसने गाय फैला रखी हैं गुप्तचर बना कर और उनकी आंखों में कैमरे हैं जो घुसते ही तुम्हारी फ़ोटो खींच उसे भेज देंगी । वो गाय ऐसा गोबर करती है कि उसकी खुशबू से मनुष्य के दिमाग पर असर होना शुरू हो जाता है।

मैं सतर्क रहूँगा । मुंह ढक कर नाक बांध कर जाऊंगा ।

भाई , किस किस से छुपेगा। उसके मायावी ग्वाल बाल बात बात में तुझपर जादू कर देंगे। उसका एक जादुई मंत्र है जो वहां हर वक्त हवा में तैरता रहता है “🙏राधे 🙏राधे🙏 राधे🙏”।

ये मन्त्र सुना नही कि तू बेसुध हो जाएगा ।

मैं कान में रुई डाल लूंगा ।

वहां की मिट्टी तो सबसे अधिक खतरनाक है इधर तुम्हारे पैर को छूई नही कि हो गया तुम्हारा काम, स्वयं चल कर सीधे राजा के दरबार में पहुंच जाओगे ।

ऐसा क्या ?? मैं अच्छे से जुराब जूते बांध कर जाऊंगा।

अरे भाई , वहां जा कर तो अपनी देह भी देह नही रहती । साफ इंकार कर देती है कि मैं तो इस काले राजा की हूँ तेरी ना मानूंगी । वहां के मनुष्य , पशु , पक्षी , पेड़ पौधे सब मायावी हैं ।
इतने मनमोहक हैं कि तुम नज़र ही ना हटा पाओगे और इधर सीधी नज़र मिली नही कि तुम तो गए ।

मेरे पास एक विदेशी चश्मा है जिसपर किसी प्रकार की किरणें काम नही करती ।

हाहा , चश्मा??

उस कान्हा राजा ने एक वानर सेना इसी काम के लिए लगा रखी है। चश्मा कब उतार कर ले गए, तुम जान भी ना पाओगे।

चलो , कोई बात नही । अब जो होगा देखा जाएगा ।

यह बताओ वहां घूमने को कोई बाग है।

हैं , पर वो भी राजा की माया से बंधे है। वहां गोपियों को तुलसी वेश मे दिन भर रहना पड़ता है और रात में राजा उन सब के साथ नृत्य करता है।
रात का दृश्य तो देखने वाला होगा फिर ।

ना यह भूल मत करना । सुना है वहां जो रात रुक गया वो सही सलामत  बाहर नही निकला ।

सन्त , शोधकर्ता सब की समाधियां हैं वहां ।

👳🏻‍♀– यह कैसा राजा है ??

👵🏻– बचपन से ही यह राजा ऐसा है , सुना है 5 दिन का था तो दूध पिलाने आई एक राक्षसी को मार डाला था ।
इतना शरारती कि खेल खेल में जहरीले नाग को मार डाला ।
यह तो बचपन से ही लुटेरा है , बेचारी ग्वालने अपने बच्चों को माखन नही देती थी ताकि राजा कंस का कर चुका सकें  और यह छोरा उनका माखन लूट कर अपने साथियों को खिला देता था , ऐसा जादू करता था कि नंदगांव के छोरे अपने ही घर को लुटवाते थे।
बच्चे तो कच्चे होते हैं उनको तो कोई भी छका सकता है ।

वो तो बड़े से बड़े का मन लूट लेता है।

उसके काले स्वरूप से आंख मत मिला लेना । पता नहीं कया जादू है उन आंखों में कि मनुष्य बांवरा होकर सड़कों पर नाचने लगता है ।
खुद की सुध नही रहती, बस जी चाहता है कि उसी की नगरी में रम जाऊं और अगर परिजन तुम्हारी देह को वहां से ले भी आते हैं तो भी मन वापिस नही आता।

दिल में बैठ कर घर आ जाता है वो छलिया और फिर खूब नाच नचाता है।
पहले सारे परिजनों को दीवाना करता है फिर मित्रों को और फिर सारे नगर को । छूत के रोग की तरफ फैल जाता है और सबको लूट लेता है ।

कया सोच रहे हो जाऊं या नही ?

मेरा कर्तव्य था बताना, अब तुम्हारी मर्जी, पर जब भी जाओगे मुझे साथ ले लेना। उस छलिये ने मुझे भी लूट रखा है, सोच रहा हूँ बचा खुचा भी लुटा ही आऊं…🚩 चलो जी चले वृंदावन बांके बिहारी के करेंगे दर्शन🚩

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:::::::::::::श्री भगवान् का ऐश्वर्य लीला :::::::::

ब्रज में एक बार सब ग्वाल बाल जिद पे अड़ गए,और श्री भगवान से उनका ईश्वरिय रूप दिखाने की जिद करने लगे। बोलने लगे…. अरे कृष्णा मेरे बाबा बोलते है की तू भगवान है। क्या तू सच में भगवान है ? अगर है तो अपना भगवान वाला रूप दिखा, दूसरा गोप बालक बोला हा ये भगवान है मेरी मइया बोलती है जब ये पैदा हुआ था तो जेल के दरवाजे अपने आप खुल गए थे और देवी दुर्गा  दुष्ट कंस को चेतावनी देते हुए बोली थी की रे मुर्ख कंस त्रिभुवन पति का जन्म हो चूका है तू उनसे नहीं बच सकता वो समस्त देवताओ के भी स्वामी है और वो ही तेरा संहार करेंगे।
एक और ग्वाल बाल बोला मेरे बाबा बोलते है ना जब ये पैदा हुआ था तो भगवान शिव इसके दर्शन को आये थे। इसको गोद में लेकर खूब प्रेम कर रहे थे प्रेम वश महादेव की आँखों से अश्रु प्रवाहित हो रहे थे। और बार बार बोल रहे थे कि ये ही समस्त सृष्टि के ईश्वर है जो आज बाल रूप में मेरे गोद में है,मैं हमेशा समाधि लगाकर इनका ध्यान करता हूं,इनके ही नाम का सैदव जाप करता रहता हुँ ।
तो इसका मतलब हमारा कान्हा सच में भगवान हैं। एक गोप बालक बोला नहीं मेरी मैया बोलती है कि कान्हा तो हम लोग जिनको भगवान समझते है ये  उनका भी भगवान है। शिव जी ,ब्रम्हा जी ,देवी जी,समस्त देवताओं ने इसके ऊपर पुष्प वर्षा की थी इसके जन्मोत्सव के अवसर पर …….और ये जन्म लेते ही असुरो को मारने लगा था। ये हमारा कान्हा ही सच्चा भगवान है।

फिर तो सब गोप बालक मिल कर बोले…. सुन कान्हा आज अपना भगवान वाला रूप दिखा हम सबको। सब सुन लो भाई अगर आज कृष्णा ने हमको,अपना भगवान वाला रूप नहीं दिखाया तो इसको अपने साथ गेंद नहीं खेलने देंगे। और आगे से भी इसके साथ कोई नहीं खेलेगा।

भक्तवत्सल श्री भगवान ग्वाल बालकों की जिद मान गए और अगले ही पल गोपवृन्द बैकुंठ धाम में पहुच गये। वहाँ का ऐश्वर्य भला कौन वर्णन कर सकता है। हजारों जन्मो की तपस्या से भी जिस धाम में जाना असम्भव है। योगी,मुनि ॐ जप कर लाख जतन करते हैं बैकुंठ दर्शन करने को,…. धन्य है वो गोप बालक जो अपने कृष्ण से इतना प्रेम करते है की स्वमं भगवान उनके संग खेल रहे है और प्रेमवश अपने बैकुंठ धाम का दर्शन भी करा रहे है। ये है जीव का ईश्वर से परम प्रेम जो पूर्ण पुरुषोत्तम भी अपने अधीन कर लेता है।

ग्वाल बालक देखते है की बैकुंठ में कान्हा महाराजा के जैसे एक रत्नजड़ित ऊँचे सिंहासन पे विराजित है और और समस्त देवी देवता उनका उत्तम स्तोत्रों से स्तुति कर रहें हैं।
गोप बालक सबसे पीछे है वो अपने कान्हा की स्तुति होते हुए देख रहें हैं।काफी समय हो गया श्री भगवान की स्तुति तो बंद ही नहीं हो रही समस्त देवगण उनकी स्तुति सेवा में लगे ही हैं। सेवा,आरती ,स्तुति ,पूजा चलती ही जा रही रही है…….
अब तो बहुत समय हो गया, गोप बालकों से रहा नहीं गया किसी तरह से हिम्मत जुटा कर एक गोप बालक ने पीछे से आवाज दे ही दिया ……..ये कान्हा गइया कब चऱायेगा ? गोधन बेला हो गई बालक के इतना बोलते ही श्री भगवान की स्तुति में लगें देवगण भी पीछे मुड़कर देखने लगें गोप बालक तो डर गए किन्तु देवगण सोचने लगे धन्य हैं ब्रज के ये सब बालक, ना जाने कितने जन्मों के उनके पुण्य है जो ब्रज में जन्म लिए और समस्त चराचर पति हम देवताओं के स्वामी उनसे इतना स्नेह करते है। मनुष्य रूप में उनके संग बाल लीला करते है। ब्रज के ग्वालबालों की जय हो।

अगले ही पल श्री भगवान ने अपने ऐश्वर्य लीला का समापन कर दिया सभी गोपवृन्द वापस ब्रज में अपने सखा कृष्ण के साथ खेल खेलने में व्यस्त हो गए। वो अपने कृष्ण को भगवान नहीं अपना सखा मानते है। उनका कान्हा अब उनके साथ है,वो सब मिलकर गइया चऱायंगे, खेल खेलेंगे ,कान्हा उनके साथ भोजन करेंगे।

समस्त ऐशवर्य कि देवी श्रीमती लक्ष्मी देवी भगवान के कोमल चरणकमलो की सेवा में सदा लगी रहती है। सारे देवगण श्री भगवान की सेवा में सदा लगे रहते है। भगवान कृष्ण समस्त जीवो के रचयिता है सबसे प्रेम करते है हम सबको भी उनसे प्रेम करना चाहिए। श्री भगवान अपने भक्तों के प्रेम के भूखे है।
माधव भक्तवत्सल करुणासागर है। हम कृष्ण से थोड़ा सा भी प्रेम करे तो बदले में वो हमसे कई गुना ज्यादा प्रेम करते है ये उनकी दायलुता है।

भगवान श्री कृष्ण की जय हो।