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सुप्रभातम !
अभी कुछ दिनों पहले मैंने लोकल ट्रेन में पटना से भभुआ की यात्रा की थी। अगले स्टेशन पर ही एक बेहद तेजस्वी और आकर्षक महिला सामने वाली सीट पर आकर बैठ गयी, अब आप उनकी और मेरी बातचीत जरा ध्यान से पढिये
महिला – ये ट्रेन सासाराम  जायेगी ?
मैंने हाँ में गर्दन हिला दी
महिला – कितना दूर है???
मैं – थोड़ा दूर है जब आने वाला होगा मैं आपको बता दूंगा।
महिला – थैंक्स वैसे आप क्या करते हो ?
मैं – मै एक शिक्षक हूं और आप क्या करती है?
महिला – मैंने तो भौतिक जगत से ऊपर उठकर अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित कर दिया है। अब मैं बहुत खुश हूं। यीशु की महिमा अपरंपार है।
मैं – मै तो भौतिक जगत में रहकर ही बहुत खुश हूं क्योंकि मैं भगवान शिव के कर्मयोग का अनुसरण कर रहा हु। शिव की महिमा अलौकिक है।
महिला – जी सही बात है, वैसे आप प्रभु यीशु के विषय में जानते है?
मैं – मैं इसकी जरूरत ही नही समझता।
महिला – क्यों?
मैं – यीशु से पूर्व ही हमारे देश में बेहद महान पुरुषों ने जन्म लिया है। मेरे वेद उपनिषद मेरे लिये पर्याप्त है मुझे यूरोप में जन्मे व्यक्ति की शिक्षा की आवश्यकता नही है।
महिला – चलिये अच्छी बात है हालाँकि मैंने भी वेदों का बहुत ही बारीखी से अध्ययन किया है। उनमे कुछ त्रुटियां है।
(अब मेरी समझ में पूरा माजरा आ गया मैडम मुझे ईसाई बनाने का लक्ष्य लिये बैठी थी)
मैं – आपने सच में बहुत सूक्ष्मता से अध्ययन किया है??
महिला – जी बिल्कुल
मैं – धर्म के 10  लक्षण क्या क्या है?
(महिला का पूरा वेद ज्ञान चीथड़े चीथड़े उड़ गया चेहरे पर ऐसा भाव दे रही थी जैसे किसी कंपनी का वित्तीय विश्लेषण करने को कह दिया हो।)
मैं – क्या हुआ आपने बहुत ही सूक्ष्मता से अध्ययन किया है ना 10 लक्षण तो बताइए।
(धृति क्षमा दमो$स्तेयं, शौचं इंद्रिय निग्रह:।
धीर्विद्या स्तेयं$क्रोधो,दशकं धर्मं लक्षणम्।।)
महिला – वो मुझे याद नही आ रहे।
मैं – चलिये कोई बात नही मनुष्य के 3 गुण क्या क्या है ?
(अब तो यीशु जी की भक्त को पसीना ही आने लग गया। मेरे बेग में टीशू पेपर थे मैंने एक निकाल कर दे दिया। साथ ही आसपास के 5-6 लोग भी अब यह वाक्युद्ध बड़े ध्यान से सुनने लग गए।)
महिला तब बोली – देखिये यीशु का मार्ग बेहद सरल है
मैं – मैं तो शिव के मार्ग पर ही खुश हूं
महिला – देखिये हम यूनानी सभ्यता के ईसाई है ।हमने मानव सभ्यता विकसित की है।
मैं – उसमे क्या है हम भी सिंधु घाटी के हिन्दू है और मानव सभ्यता सबसे पहले हमने विकसित की आप लोगो ने नही।
(अब तो अब तो आसपास के लोग तक महिला पर हँसने लग गए।
सब अब महिला की ओर ही उत्सुकता से देख रहे थे। मैडम ने अपना मोबाइल निकालकर किसी को फोन लगाया, थोड़ी बात की और फोन काट दिया। तभी औरंगाबाद आ गया था महिला उतरने के लिये उठी।)
मैंने कहा कि सासाराम अभी 2 स्टेशन आगे है उसने कहा नही एक जरुरी काम आ गया इसलिए यही उतर रही हु। फिर उसने हाथ बढ़ाते हुए बड़ी मायूसी से कहा आपसे मिलकर ख़ुशी हुई, मैंने भी हाथ मिलाते हुए कहा मुझसे ज्यादा नही हुई होगी। बस बेचारी चुपचाप औरंगाबाद ही उतर गयी।
तो मुद्दा यही है कि आप अपने धर्म को जानिये वरना लोग आपके मुँह पर आपके धर्म की बुराई गिनाते रहेंगे और आप कुछ नही कह सकोगे। कम से कम धर्म के कुछ लक्षण तो याद रखिये…..
CP
साभार शिव शंकर गिरि।

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