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वास्तु दोष – घर में चित्र कैसे लगाए ?

घरों में तस्वीर या चित्र लगाने से घर सुंदर दिखता है,
परंतु बहुत कम ही लोग यह जानते हैं कि घर में
लगाए गए चित्र का प्रभाव वहां रहने वाले लोगों के
जीवन पर भी पड़ता है। वास्तु शास्त्र के
अनुसार घर में श्रृंगार, हास्य व शांत रस उत्पन्न करने
वाली तस्वीरें ही लगाई
जानी चाहिए।
घर के अन्दर और बाहर सुन्दर चित्र , पेंटिंग , बेल- बूटे ,
नक्काशी लगाने से ना सिर्फ
सुन्दरता बढती है , वास्तु दोष भी दूर होते
है।
1- फल-फूल व हंसते हुए
बच्चों की तस्वीरें जीवन
शक्ति का प्रतीक है। उन्हें पूर्वी व
उत्तरी दीवारों पर लगाना शुभ होता है। इनसे
जीवन में खुशहाली आती है।
2- लक्ष्मी व कुबेर की तस्वीरें
भी उत्तर दिशा में लगानी चाहिए। ऐसा करने
से धन लाभ होने की संभावना अधिक
होती है।
3- यदि आप पर्वत आदि प्राकृतिक
दृश्यों की तस्वीरें लगाना चाहते हैं
तो दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगाएं।
4- नदियों-झरनों आदि की तस्वीरें
उत्तरी व पूर्वी दिशा में लगाना शुभ होता है।
5- वसुदेव द्वारा बाढग़्रस्त यमुना से श्रीकृष्ण
को टोकरी में ले जाने वाली तस्वीर
समस्याओं से उबरने की प्रेरणा देती है।
इसे हॉल में लगाना चाहिए।
युद्ध प्रसंग, रामायण या महाभारत के युद्ध के चित्र, क्रोध, वैराग्य,
डरावना, वीभत्स, दुख की भावना वाला, करुण
रस से ओतप्रोत स्त्री, रोता बच्चा, अकाल, सूखे पेड़ कोई
भी चित्र घर में न लगायें।
घर में दक्षिण दीवार पर हनुमान जी का लाल
रंग का चित्र लगाएं। ऐसा करने से अगर मंगल आपका अशुभ है
तो वो शुभ परिणाम देने लगेगा। हनुमान
जी का आशीर्वाद आपको मिलने लगेगा। साथ
ही पूरे परिवार का स्वास्थय अच्छा रहेगा।
घर का उत्तर पूर्व कोना (इशान कोण) स्वच्छ रखें व वंहा बहते
पानी का चित्र लगायें | (ध्यान रहे इस चित्र में पहाड़/
पर्वत न हो )
अपनी तस्वीर उत्तर या पूर्व दिशा मैं लगायें
उत्तर क्षेत्र की दीवार पर
हरियाली या हरे चहकते हुए पक्षियों (तोते
की तस्वीर) का शुभ चित्र लगाएं। ऐसा करने
से परिवार के लोगों की एकाग्रता बनेगी साथ
ही बुध ग्रह के शुभ परिणाम मिलेंगे। उत्तर दिशा बुध
की होती है।
लक्ष्मी व कुबेर की तस्वीरें
भी उत्तर दिशा में लगानी चाहिए। ऐसा करने
से धन लाभ होने की संभावना है।
घर में जुडवां बत्तख व हंस के चित्र लगाना लगाना श्रेष्ठ रहता है।
ऐसा करने से समृद्धि आती है।
घर की तिजोरी के पल्ले पर
बैठी हुई
लक्ष्मीजी की तस्वीर
जिसमें दो हाथी सूंड उठाए नजर आते हैं, लगाना बड़ा शुभ
होता है। तिजोरी वाले कमरे का रंग क्रीम
या ऑफ व्हाइट रखना चाहिए।
घर में नाचते हुए गणेश की तस्वीर
लगाना अति शुभ होता है।
बच्चाा जिस तरफ मुंह करके पढता हो, उस दीवार पर
मां सरस्वती का चित्र लगाएं। पढाई में रूचि जागृत
होगी।
बच्चों के उत्तर-पूर्व दीवार में लाल पट्टी के
चायनीज बच्चों की युगल फोटों लगाएं।
ऎसा करने से घर में खुशियां आएंगी और आपके
बच्चो का करियर अच्छा बनेगा। इन उपायों को अपनाकर आप अपने
बच्चे को एक अच्छा करियर दे सकते हैं और जीवन में
सफल बना सकते हैं।
अध्ययन कक्ष में मोर, वीणा, पुस्तक, कलम, हंस,
मछली आदि के चित्र लगाने चाहिए।
बच्चों के शयन कक्ष में हरे फलदार वृक्षों के चित्र, आकाश, बादल,
चंद्रमा अदि तथा समुद्र तल की शुभ आकृति वाले चित्र
लगाने चाहिए।
फल-फूल व हंसते हुए बच्चों की तस्वीरें
जीवन शक्ति का प्रतीक है। उन्हें
पूर्वी व उत्तरी दीवारों पर
लगाएं।
ऐसे नवदम्पत्ति जो संतान सुख पाना चाहते हैं वे
श्रीकृष्ण का बाल रूप दर्शाने
वाली तस्वीर अपने बेडरूम में लगाएं।
यदि आप अपने वैवाहिक रिश्ते को अधिक मजबुत और प्रसन्नता से
भरपूर बनाना चाहते हैं तो अपने बेडरुम में नाचते हुए मोर का चित्र
लगाएं।
यूं तो पति-पत्नी के कमरे में पूजा स्थल
बनवाना या देवी-देवताओं
की तस्वीर लगाना वास्तुशास्त्र में निषिद्ध है
फिर भी राधा-कृष्ण
अथवा रासलीला की तस्वीर
बेडरूम में लगा सकते हैं। इसके साथ
ही बांसुरी, शंख, हिमालय आदि के चित्र
दाम्पत्य सुख में वृद्धि के कारक होते हैं।
कैरियर में सफलता प्राप्ति के लिए उत्तर दिशा में जंपिंग फिश, डॉल्फिन
या मछालियों के जोड़े का प्रतीक चिन्ह लगाए जाने चाहिए।
इससे न केवल बेहतर कैरियर
की ही प्राप्ति होती है
बल्कि व्यक्ति की बौद्धिक
क्षमता भी बढ़ती है।
अपने शयन कक्ष
की पूर्वी दीवार पर उदय होते
हुए सूर्य की ओर पंक्तिबद्ध उड़ते हुए शुभ
उर्जा वाले पक्षियों के चित्र लगाएं। निराश, आलस से परिपूर्ण,
अकर्मण्य, आत्मविश्वास में कमी अनुभव करने वाले
व्यक्तियों के लिए यह विशेष प्रभावशाली है।
अगर किसी का मन बहुत ज्यादा अशांत रहता है
तो अपने घर के उत्तर-पूर्व में ऐसे बगुले का चित्र लगाना चाहिए
जो ध्यान मुद्रा मैं हो।
स्वर्गीय परिजनों के चित्र दक्षिण
की दीवार पर लगाने से सुख
समृधि बढेगी
यदि ईशान कोण में शौचालय हो, तो उसके बाहर शिकार करते हुए शेर
का चित्र लगाएं।
अग्नि कोण में रसोई घर नहीं हो, तो उस कोण में यज्ञ
करते हुए ऋषि-विप्रजन
की चित्राकृति लगानी चाहिए।
रसोई घर में माँ अन्नपूर्णा का चित्र शुभ माना जाता है।
रसोई घर आग्नेय कोण में नहीं है
तो ऋषि मुनियों की तस्वीर लगाए।
मुख्य द्वार यदि वास्तु अनुरूप ना हो तो उस पर
नक्काशी , बेल बूटे बनवाएं।
दाम्पत्य जीवन को सुखमय बनाने के लिए घर में
राधा कृष्ण की तस्वीर लगाएं।
पढने के कमरे में माँ सरस्वती , हंस ,
वीणा या महापुरुषों की तस्वीर
लगाएं।
व्यापर में सफलता पाने के लिए कारोबार स्थल पर सफल और
नामी व्यापारियों के चित्र लगाएं।
ईशान कोण में शौचालय होने पर उसके बाहर शेर का चित्र लगाएं।
पूर्वजों की तस्वीर देवी देवताओं
के साथ ना लगाएं।उनकी तस्वीर का मुंह
दक्षिण की ओर होना चाहिए।
दक्षिण मुखी भवन के द्वार पर नौ सोने
या पीतल के नवग्रह यंत्र लगाए और
हल्दी से स्वस्तिक बनाए।
सोने का कमरा आग्नेय कोण में
हो तो पूर्वी दीवार के मध्य में समुद्र
का चित्र लगाए।

विक्रम प्रकाश

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मकरध्वज नामक हनुमान जी का पुत्र था ?
जब हनुमान जी अपने पुत्र मकरध्वज से मिले.
वाल्मीकि जी ने रामायण में लिखा है
कि युद्ध के दौरान रावण की आज्ञानुसार अहिरावण
राम-लक्ष्मण का अपहरण कर उन्हें पाताल पुरी ले
गया जिसके बाद रावण के भाई विभीषण ने यह भेद
हनुमान जी के समक्ष प्रकट किया कि भगवान राम और
लक्ष्मण को कहां ले जाया गया है. तब राम-लक्ष्मण
की सहायता करने लिए हनुमान जी पाताल पुरी पहुंचे.
जैसे ही हनुमान जी पाताल के द्वार पर पहुंचते हैं तो उन्हें
एक वानर दिखाई देता है, जिसे देख वो हैरत में पड़ जाते
हैं और मकरध्वज से उनका परिचय देने को कहते हैं.
मकरध्वज अपना परिचय देते हुए बोलते हैं कि ‘मैं हनुमान
पुत्र मकरध्वज हूं और पातालपुरी का द्वारपाल हूं’.
मकरध्वज का परिचय सुनकर हनुमान जी क्रोधित
हो कर कहते हैं कि ‘यह तुम क्या कह रहे हो ? मैं
ही हनुमान हूं और मैं बाल ब्रह्मचारी हूं. फिर भला तुम
मेरे पुत्र कैसे हो सकते हो’ ? हनुमान जी का परिचय पाते
ही मकरध्वज उनके चरणों में गिर गए और हनुमान
जी को प्रणाम कर अपनी उत्पत्ति की कथा सुनाई.
मकरध्वज, हनुमान जी को देखते हुए कहते हैं ‘
जब आपने अपनी पूंछ से रावण की लंका दहन की थी,
उसी दौरान लंका नगरी से उठने वाली ज्वाला के कारण
आपको तेज पसीना आने लगा था. पूंछ में लगी आग
को बुझाने के लिए आप समुद्र में पहुंच गए तब आपके
शरीर से टपकी पसीने की बूंद को एक मछली ने अपने मुंह
में ले लिया जिस कारण मछली गर्भवती हो गई. कुछ
समय बाद पाताल के राजा और रावण के भाई अहिरावण
के सिपाही समुद्र से उस मछली को पकड़ लाए.
मछली का पेट काटने पर उसमें से एक मानव
निकला जो वानर जैसा दिखता था और वो वानर मैं
ही था पिता जी! बाद में जाकर सैनिकों ने मुझे पाताल
का द्वारपाल बना दिया’.
!! जय श्री राम !! —

विक्रम प्रकाश

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धनवान बनने के चमत्कारिक उपाय


घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। आर्थिक पक्ष को लेकर
समस्याएं न उत्पन्न हों, ऐसी प्रत्येक
व्यक्ति की कामना होती है। यहॉ मैं
आर्थिक सम्पन्नता देने
वाली ऐसी छोटी-
छोटी बातें लिख रहा हॅू जो अधिकांश
लोगों को पता तो होती हैं, परंतु कुछ तो आलस्यवश
तथा कुछ अज्ञानतावश वह उनसे मिलने वाले लाभ से वंचित रह
जाते हैं। इन्हें अपनाने का कोई विशेष नियम
भी नहीं है। सहज मन से
कभी और किसी भी समय इन्हें
प्रारंभ किया जा सकता है। अन्य उपायों की तरह इनके
प्रयाग से अहित की लेशमात्र
भी संभावना नहीं है। इन छोटी-
छोटी बातों के लिए आत्मविश्वास परम आवश्यक है। इन
उपायों के शुभप्रभाव में विलम्ब तो अवश्य हो सकता है परंतु उनसे
जब लाभ मिलना प्रारंभ होगा तो वह होगा स्थाई रूप से। ऽ प्रातःकाल
उठ कर सर्वप्रथम अपने
दोनों हाथों की हथेलियों को कुछ क्षण देखकर उन्हें चूमें
और उन्हें परस्पर रगड़ कर अपने चेहरे पर तीन चार
बार फिराएं। ऽ नाक के छिद्रों में से एकाग्र होकर यह देखें
कि उसका दायों स्वर चल रहा है या बायां। जो भी स्वर
चल रहा हो, सर्वप्रथम उस ओर के हाथ
की उंगली से धरती का स्पर्श
करके माथे से लगाएं और उसके बाद पहला स्वर चलने वाला पैर
ही धरती से लगाएं। ऽ घर में बनने वाले
खाने में से पहली रोटी गाय
की निकालें। ऽ अपने खाने में से थोड़ा सा अंश निकाल कर
कौओें अथवा अन्य पक्षीयों को डाला करें। ऽ रात्रि के खाने
के पश्चात बचे खाने का कुछ भाग कुत्ते के नाम का निकाला करें। घर
का बचा खाना नाली में न फेकें, पशु-पक्षियों को दे दिया करें।
ऽ यदि घर में आटा गेंहॅू पीस कर उपलब्ध होता है
तो आटा केवल शनिवार को ही पिसवाने का नियम बना लें।
आटा पिसते समय उसमें 100 ग्राम काले चने भी पिसने के
लिए डाल दिया करें। ऽ शनिवार को खाने में
किसी भी रुप में काला चना अवश्य ले
लिया करें। ऽ घर की रसोई में
किसी भी दिन कहीं से एक
काली तुम्वी लाकर टांग दें। ऽ जब
भी मन करे
चीटिंयों को चीनी मिश्रित
आटा खिलाया करें। यथा संभव यह प्रयास किया करें आपके पैरों से
चीटियॉ अथवा अन्य निरीह छोटे-छोटे
कीट-पतंगे कुचले न जाएं। ऽ घर में उपलब्ध प्रत्येक
देवी-देवताओं और टंगे हुए दिवंगत आत्माओं के
चित्रों पर रोली, अष्टगंध तथा अक्षत का तिलक अवश्य
लगा लिया करें। अपने पूर्वजों के चित्रों पर फूलों का हार
भी चढ़ाया करें। ऽ प्रातःकाल कुछ भी खाने से
पूर्व सर्वप्रथम घर में झाड़़ू. अवश्य लगानी चाहिए। ऽ
संध्या समय जब दोनों समय मिलते है, घर में झाड़़ू.-पोंछे का कार्य न
करें। ऽ संध्या होने पूर्व घर का कोई भी सदस्य घर में
प्रकाश अवश्य कर दिया करे। ऽ घर की कोई
सौभाग्यशाली विवाहित स्त्री इस समय तैयार
होकर प्रफुल्ल मन से देवी-देवताओं धूप-
दीप दिखाया करें। ऽ घर से प्रातः चाहे
जितनी जल्दी निकलना पड़े, बिना झाड़़ू. लगे न
निकले। ऽ घर से बाहर जब
भी किसी उद्देश्य से अथवा धन
सम्बन्धी किसी कार्य को निकलें, निराहार
मॅुह न निकलें। कुछ न कुछ खा अवश्य लें। निकलने से पूर्व
यदि मीठा दही खाकर निकलें तो और
भी सौभाग्यशाली है। ऽ घर
की कोई स्त्री व्यक्ति को विदा करने से पूर्व
नहा-धोकर स्वच्छ अवश्य हो जाए। ऽ किसी सुहागिन
स्त्री को गुरुवार के दिन सुहाग अथवा श्रृंगार प्रसाधन
देने से लक्ष्मी प्रसन्न होती है। ऽ घर
बाहर स्त्री का आदर करने से
तथा कुआरी कन्याओं (दस वर्ष से कम आयु
की) को देवी स्वरुप मान कर प्रसन्न करने
से सुख- समृद्धि की वृद्धि होती है। ऽ
किसी दरिद्र अथवा असहाय
व्यक्ति की निःस्वार्थ भाव से सेवा कर सकते है तो कर
दें, उसका तिरस्कार अथवा उपहास कदापि न करें। ऽ
किसी न किसी तरह दरिद्र, असहाय और
हिजड़ों की शुभकामनाएं लिया करें। ऽ
शीतकाल में
किसी भी अमवस्या की अर्द्धरात्रि में
एक कम्बल शीत से ठिठुरते
किसी भिखारी के ऊपर चुपचाप डाल कर घर
लौट आएं। ऽ दरिद्र को यथाशक्ति भोजन और कपड़ा दान दिया करें।
ऽ धन सम्बन्धी समस्त कार्यो के लिए सोमवार
अथवा बुधवार चुना करें। ऽ घर के पूजास्थल में एक जटा वाला नरियल
रखा करें। ऽ धन सम्बन्धी कार्य पर निकलने से पूर्व
घर में उपलब्ध देवी-देवताओं के चित्र, मूर्ति अथवा यंत्र
के दर्शन अवश्य किया करें। उन पर चढ़ाये हुए फूलों में से एक
अपनी जेब में रखकर साथ ले जाया करें। ऽ
किसी प्रकार अपने पूर्वजों के चित्र
आदि भी देखकर यात्रा किया करें। ‘प्रबिशि नगर
कीजे सब काजा, हृदय राखि कौशलपुर राजा।’ मंत्र बोलकर
घर से प्रस्थान करने पर प्रभु आपकी सद्यात्रा में सदैव
रक्षा करते हैं। ऽ नौकरी, व्यवसाय आदि शुभकार्यों में
प्रस्थान करने से पूर्व घर कोई भी सदस्य एक
मुठठी काले उड़द आपके ऊपर से धरती पर
छोड़ दें, कार्य सिद्ध होगा। ऽ घर खाली हाथ
कभी न लौटें। बिना क्रय की हुई कोई
भी वस्तु घर लाने का नियम बना लें, भले
ही वह राह में पड़ा हुआ कागज
का टुकड़ा अथवा ऐसा ही कुछ अन्य। ऽ रविवार
को सहदेई वृक्ष की जड़ घर लायें। उसे लाल कपड़े में
लपेटकर कहीं पवित्र स्थान पर रख दें। ऽ
काली हल्दी मिल जाए तों घर में रख लें। ऽ
सफेद रत्ती, एकाक्षी नरियल,
दक्षिणवर्ती शंख, हाथ जोड़ी, सियार
सिंही, बिल्ली की जेल, एक
मुखी रुद्राक्ष, गोरोचन, नागकेसर, सांप
की अखंडित केंचुली, मोर के पंख, अष्टगंध
आदि में
श्री लक्ष्मी जी को रिझाने
का विलक्षण गुण होता है। ये वस्तुएं, सुलभ हो सकें तो उन्हें ऐसे
ही घर में रख लें, लक्ष्मी प्रसन्न
होगीं। ऽ मिर्च तथा नींबू
की तरह निर्गुण्डी का जड़ सहित पूरा पौधा,
नागकेसर और पीली सरसों के दाने एक साथ
किसी बुधवार को दुकान के द्वार पर टांगने से व्यापार में
वृद्धि होती है। ऽ पुष्य नक्षत्र में बहेड़ा वृक्ष
की जड़ तथा उसका एक पत्ता लाकर पैसे रखने के स्थान
में रख लिया करें। ऽ शंखपुष्पी की जड़
रवि-पुष्य नक्षत्र में लाकर घर में रखा करें। इसे
चांदी की डिब्बी में रख सकें
तो अधिक शुभ होगा। ऽ घर की दीवारों,
फर्श आदि में बच्चों को पेन्सिल, चॉक, कोयले आदि से
लकीरें न बनाने दें, इससे ऋण बड़ता है। ऽ शेर का दॉत
मिल जाए तो जेब में रखा करें। ऽ बरगद अथवा बड़ के ताजे तोड़े पत्ते
पर हल्दी से स्वास्तिक बना कर पुष्य नक्षत्र में घर में
रखें। ऽ खच्चर का दॉत बुधवार को धोकर साफ कर लें। धन
सम्बन्धी कार्य पर जाते समय उसे साथ रखा करें। ऽ
दीवाली की रात
अथवा किसी भी ग्रहण काल में एक- एक
लौंग तथा छोटी इलाइची जला कर भस्म
बना लें। इस भस्म से देवी देवताओं के
चित्रों अथवा यंत्रों पर तिलक लगाया करें। ऽ
किसी भी सूर्य के नक्षत्र में ऐसे पेड़
की टहनी तोड़ कर
अपनी कुर्सी अथवा गद्दी के
नीचे रख लें, जहॉ चमगादड़ों का स्थाई वास हो। ऽ
व्यापार सम्बन्धी पत्राचार करते समय उस पर
हल्दी अथवा केसर के छींटे लगा दिया करें।
ऽ ऐसे पत्रों में देवताओं पर चढ़े फूल के टुकड़े भी रख
दिया करें। ऽ बैंक में पैसा जमा करते समय
लक्ष्मी जी का कोई मंत्र मन
ही मन जप लिया करें। ऽ बैंक की किताब,
चैक बुक अथवा धन सम्बन्धी पेपर आप
श्रीयंत्र अथवा कुबेर यंत्र के पास रखा करें। ऽ मुर्गे के
पेट में यदा-कदा एक सफेद रंग
की पथरी निकलती है, उसे साफ
करके घर में रख लें। शुभ कार्य में जाते समय यह साथ रखें। ऽ
सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें नियमित रुप से लाल फूल,
लाल चंदन, गौरोचन, केसर, जावित्री, जौ अथवा तिल युक्त
जल चढ़ाएं। ऽ कार्यालय, दुकान आदि खोलने पर सर्वप्रथम अपने
इष्टदेव को अवश्य याद किया करें। ऽ अपने से बड़ों को प्रसन्न
करके उनका आशीर्वाद लिया करें। ऽ
कभी कोई कर्म ऐसा न करें जिससे
किसी की आत्मा को लेशमात्र
भी कष्ट पहॅुचे। ऽ गीता के नवे अध्याय
का नित्य पाठ करें। ऽ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ जिस घर में
होता है वहॉ लक्ष्मी जी निवास
करती हैं। ऽ दुर्गा सप्तशती का नियमित रुप
से पाठ करें। ऽ वेदों में ‘अधमर्षण सूक्त’ दरिद्रता नाश करने
वाला माना गया है। ऽ इसी प्रकार
‘श्री सूक्त’, ‘नासदीय सूत्र’ धन
सम्बन्धी कायरें में लाभदायक है। ऽ ‘राम रक्षा स्तोत्र’
का लक्ष्मी दायक यह मंत्र धनलाभ करवाने में बहुत
उपयोगी सिद्ध होता है। ‘‘आपदाम् अपहर्तारम् दातारम्
सर्व सम्पदाम्। लोकाभिरामम् श्री रामम्
भूयो भूयो नमाम्यहम्।। ऽ श्रम प्रधान बनें और ऋण लेने से
सर्वदा बचे रहें। ऽ लक्ष्मी-साधकों के लिए
ऊनी और रेशमी आसन तथा कमलगट्टे
की माला विशेष रुप से सिद्धि प्रदायक
होती है। ऽ आध्यात्मिक क्षेत्र में आडम्बर के स्थान
पर पवित्रतता और सात्विकता को महत्व देना आवश्यक है। ऽ
लक्ष्मी जी का परमप्रिय फूल कमल
माना गया है। ऽ
लक्ष्मी जी को तुलसी अर्थात्
मंजरी भेंट नहीं करनी चाहिए।
ऽ साधना कक्ष में लक्ष्मी उपासना के समय पुष्प उनके
सामने, अगरबत्ती बाएं, नैवेद्य दक्षिण में
तथा दीप सदा दायीं ओर रखें। ऽ साधना के
समय पश्चिम अथवा पूरब दिशा की ओर
ही मुंह करके बैठें। ऽ हवन सामग्री में
काले तिल, जौ, देसी घी और कमल गट्टे
भी अवश्य मिलाया करें, इससे
लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। ऽ यह
धारणा मन में स्थिर कर लें कि प्रारब्ध के अतिरिक्त वर्तमान में किए
गए सत्कर्म भी धन सम्बन्धी विषयों में
आशानुकूल परिणाम देते हैं। ऽ प्रत्येक शनिवार को घर से
गन्दगी निकालने का नियम बना लें। इस दिन घर के
मकड़ी के जाले, रद्दी, टूटी-
फूटी घर में प्रयोग होने
वाली सामग्री आदि घर से बाहर कूड़े में फेंक
दिया करें। ऽ घर के मुख्य द्वार के ऊपर गणेश
जी की प्रतिमा अथवा चित्र इस प्रकार लगाएं
जिससे कि उनका मुंह घर के अन्दर की ओर रहे। ऽ
मन में पूर्णतया यह निष्ठा जागृत कर लें कि मैं धनवान
बनूंगा ही। ऽ प्रातः और सांय काल जहॉ तक सम्भव
हो घर का प्रत्येक सदस्य प्रसन्नचित रहे। ऽ सूर्योदय और
सूर्यास्त के समय घर में बच्चे और बीमार के अतिरिक्त
अन्य कोई न सोया करे। ऽ बिल्ली की जेल,
हत्था जोड़ी तथा सफेद आक में
लक्ष्मी जी को रिझाने का गुणधर्म छुपा है।
यह पदार्थ कहीं सुलभ हो तो घर में रख लें। ऽ
हीरा रत्न यदि रास आ जाए तो अतुलित वैभव देता है।
ऽ घर में यदि तुलसी लगी हो तो सायंकाल
वहॉ एक दीपक जला दिया करें। ऽ
शंखपुष्पी की जड़ घर में
लाना मंगलकारी है। ऽ कभी ऐसा देखने
को मिलता है कि एक वृक्ष पर दूसरा वृक्ष निकल आता है। यह
वृक्ष के सन्धि स्थल पर होता है। इस संयोग को बांदा कहते हैं।
अशोक, पीपल, अनार, वट, गूलर, आम, बड़
आदि वृक्षों के बांदे मिल जाएं तो शुभ मुहुर्त में घर ले आएं। ऽ
श्वेत अपराजिता का पौधा धन लक्ष्मी को आकर्षित
करता है। ऽ जिस सघन वृक्ष पर चमगादड़ों का स्थाई वास होता है,
उसकी छोटी-
सी लकड़ी ग्रहण काल में तोड़ लाएं। इसे
अपने कर्म स्थल
की कुर्सी अथवा गद्दी के

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धनवान बनने के चमत्कारिक उपाय


घर में सुख-समृद्धि बनी रहे। आर्थिक पक्ष को लेकर
समस्याएं न उत्पन्न हों, ऐसी प्रत्येक
व्यक्ति की कामना होती है। यहॉ मैं
आर्थिक सम्पन्नता देने
वाली ऐसी छोटी-
छोटी बातें लिख रहा हॅू जो अधिकांश
लोगों को पता तो होती हैं, परंतु कुछ तो आलस्यवश
तथा कुछ अज्ञानतावश वह उनसे मिलने वाले लाभ से वंचित रह
जाते हैं। इन्हें अपनाने का कोई विशेष नियम
भी नहीं है। सहज मन से
कभी और किसी भी समय इन्हें
प्रारंभ किया जा सकता है। अन्य उपायों की तरह इनके
प्रयाग से अहित की लेशमात्र
भी संभावना नहीं है। इन छोटी-
छोटी बातों के लिए आत्मविश्वास परम आवश्यक है। इन
उपायों के शुभप्रभाव में विलम्ब तो अवश्य हो सकता है परंतु उनसे
जब लाभ मिलना प्रारंभ होगा तो वह होगा स्थाई रूप से। ऽ प्रातःकाल
उठ कर सर्वप्रथम अपने
दोनों हाथों की हथेलियों को कुछ क्षण देखकर उन्हें चूमें
और उन्हें परस्पर रगड़ कर अपने चेहरे पर तीन चार
बार फिराएं। ऽ नाक के छिद्रों में से एकाग्र होकर यह देखें
कि उसका दायों स्वर चल रहा है या बायां। जो भी स्वर
चल रहा हो, सर्वप्रथम उस ओर के हाथ
की उंगली से धरती का स्पर्श
करके माथे से लगाएं और उसके बाद पहला स्वर चलने वाला पैर
ही धरती से लगाएं। ऽ घर में बनने वाले
खाने में से पहली रोटी गाय
की निकालें। ऽ अपने खाने में से थोड़ा सा अंश निकाल कर
कौओें अथवा अन्य पक्षीयों को डाला करें। ऽ रात्रि के खाने
के पश्चात बचे खाने का कुछ भाग कुत्ते के नाम का निकाला करें। घर
का बचा खाना नाली में न फेकें, पशु-पक्षियों को दे दिया करें।
ऽ यदि घर में आटा गेंहॅू पीस कर उपलब्ध होता है
तो आटा केवल शनिवार को ही पिसवाने का नियम बना लें।
आटा पिसते समय उसमें 100 ग्राम काले चने भी पिसने के
लिए डाल दिया करें। ऽ शनिवार को खाने में
किसी भी रुप में काला चना अवश्य ले
लिया करें। ऽ घर की रसोई में
किसी भी दिन कहीं से एक
काली तुम्वी लाकर टांग दें। ऽ जब
भी मन करे
चीटिंयों को चीनी मिश्रित
आटा खिलाया करें। यथा संभव यह प्रयास किया करें आपके पैरों से
चीटियॉ अथवा अन्य निरीह छोटे-छोटे
कीट-पतंगे कुचले न जाएं। ऽ घर में उपलब्ध प्रत्येक
देवी-देवताओं और टंगे हुए दिवंगत आत्माओं के
चित्रों पर रोली, अष्टगंध तथा अक्षत का तिलक अवश्य
लगा लिया करें। अपने पूर्वजों के चित्रों पर फूलों का हार
भी चढ़ाया करें। ऽ प्रातःकाल कुछ भी खाने से
पूर्व सर्वप्रथम घर में झाड़़ू. अवश्य लगानी चाहिए। ऽ
संध्या समय जब दोनों समय मिलते है, घर में झाड़़ू.-पोंछे का कार्य न
करें। ऽ संध्या होने पूर्व घर का कोई भी सदस्य घर में
प्रकाश अवश्य कर दिया करे। ऽ घर की कोई
सौभाग्यशाली विवाहित स्त्री इस समय तैयार
होकर प्रफुल्ल मन से देवी-देवताओं धूप-
दीप दिखाया करें। ऽ घर से प्रातः चाहे
जितनी जल्दी निकलना पड़े, बिना झाड़़ू. लगे न
निकले। ऽ घर से बाहर जब
भी किसी उद्देश्य से अथवा धन
सम्बन्धी किसी कार्य को निकलें, निराहार
मॅुह न निकलें। कुछ न कुछ खा अवश्य लें। निकलने से पूर्व
यदि मीठा दही खाकर निकलें तो और
भी सौभाग्यशाली है। ऽ घर
की कोई स्त्री व्यक्ति को विदा करने से पूर्व
नहा-धोकर स्वच्छ अवश्य हो जाए। ऽ किसी सुहागिन
स्त्री को गुरुवार के दिन सुहाग अथवा श्रृंगार प्रसाधन
देने से लक्ष्मी प्रसन्न होती है। ऽ घर
बाहर स्त्री का आदर करने से
तथा कुआरी कन्याओं (दस वर्ष से कम आयु
की) को देवी स्वरुप मान कर प्रसन्न करने
से सुख- समृद्धि की वृद्धि होती है। ऽ
किसी दरिद्र अथवा असहाय
व्यक्ति की निःस्वार्थ भाव से सेवा कर सकते है तो कर
दें, उसका तिरस्कार अथवा उपहास कदापि न करें। ऽ
किसी न किसी तरह दरिद्र, असहाय और
हिजड़ों की शुभकामनाएं लिया करें। ऽ
शीतकाल में
किसी भी अमवस्या की अर्द्धरात्रि में
एक कम्बल शीत से ठिठुरते
किसी भिखारी के ऊपर चुपचाप डाल कर घर
लौट आएं। ऽ दरिद्र को यथाशक्ति भोजन और कपड़ा दान दिया करें।
ऽ धन सम्बन्धी समस्त कार्यो के लिए सोमवार
अथवा बुधवार चुना करें। ऽ घर के पूजास्थल में एक जटा वाला नरियल
रखा करें। ऽ धन सम्बन्धी कार्य पर निकलने से पूर्व
घर में उपलब्ध देवी-देवताओं के चित्र, मूर्ति अथवा यंत्र
के दर्शन अवश्य किया करें। उन पर चढ़ाये हुए फूलों में से एक
अपनी जेब में रखकर साथ ले जाया करें। ऽ
किसी प्रकार अपने पूर्वजों के चित्र
आदि भी देखकर यात्रा किया करें। ‘प्रबिशि नगर
कीजे सब काजा, हृदय राखि कौशलपुर राजा।’ मंत्र बोलकर
घर से प्रस्थान करने पर प्रभु आपकी सद्यात्रा में सदैव
रक्षा करते हैं। ऽ नौकरी, व्यवसाय आदि शुभकार्यों में
प्रस्थान करने से पूर्व घर कोई भी सदस्य एक
मुठठी काले उड़द आपके ऊपर से धरती पर
छोड़ दें, कार्य सिद्ध होगा। ऽ घर खाली हाथ
कभी न लौटें। बिना क्रय की हुई कोई
भी वस्तु घर लाने का नियम बना लें, भले
ही वह राह में पड़ा हुआ कागज
का टुकड़ा अथवा ऐसा ही कुछ अन्य। ऽ रविवार
को सहदेई वृक्ष की जड़ घर लायें। उसे लाल कपड़े में
लपेटकर कहीं पवित्र स्थान पर रख दें। ऽ
काली हल्दी मिल जाए तों घर में रख लें। ऽ
सफेद रत्ती, एकाक्षी नरियल,
दक्षिणवर्ती शंख, हाथ जोड़ी, सियार
सिंही, बिल्ली की जेल, एक
मुखी रुद्राक्ष, गोरोचन, नागकेसर, सांप
की अखंडित केंचुली, मोर के पंख, अष्टगंध
आदि में
श्री लक्ष्मी जी को रिझाने
का विलक्षण गुण होता है। ये वस्तुएं, सुलभ हो सकें तो उन्हें ऐसे
ही घर में रख लें, लक्ष्मी प्रसन्न
होगीं। ऽ मिर्च तथा नींबू
की तरह निर्गुण्डी का जड़ सहित पूरा पौधा,
नागकेसर और पीली सरसों के दाने एक साथ
किसी बुधवार को दुकान के द्वार पर टांगने से व्यापार में
वृद्धि होती है। ऽ पुष्य नक्षत्र में बहेड़ा वृक्ष
की जड़ तथा उसका एक पत्ता लाकर पैसे रखने के स्थान
में रख लिया करें। ऽ शंखपुष्पी की जड़
रवि-पुष्य नक्षत्र में लाकर घर में रखा करें। इसे
चांदी की डिब्बी में रख सकें
तो अधिक शुभ होगा। ऽ घर की दीवारों,
फर्श आदि में बच्चों को पेन्सिल, चॉक, कोयले आदि से
लकीरें न बनाने दें, इससे ऋण बड़ता है। ऽ शेर का दॉत
मिल जाए तो जेब में रखा करें। ऽ बरगद अथवा बड़ के ताजे तोड़े पत्ते
पर हल्दी से स्वास्तिक बना कर पुष्य नक्षत्र में घर में
रखें। ऽ खच्चर का दॉत बुधवार को धोकर साफ कर लें। धन
सम्बन्धी कार्य पर जाते समय उसे साथ रखा करें। ऽ
दीवाली की रात
अथवा किसी भी ग्रहण काल में एक- एक
लौंग तथा छोटी इलाइची जला कर भस्म
बना लें। इस भस्म से देवी देवताओं के
चित्रों अथवा यंत्रों पर तिलक लगाया करें। ऽ
किसी भी सूर्य के नक्षत्र में ऐसे पेड़
की टहनी तोड़ कर
अपनी कुर्सी अथवा गद्दी के
नीचे रख लें, जहॉ चमगादड़ों का स्थाई वास हो। ऽ
व्यापार सम्बन्धी पत्राचार करते समय उस पर
हल्दी अथवा केसर के छींटे लगा दिया करें।
ऽ ऐसे पत्रों में देवताओं पर चढ़े फूल के टुकड़े भी रख
दिया करें। ऽ बैंक में पैसा जमा करते समय
लक्ष्मी जी का कोई मंत्र मन
ही मन जप लिया करें। ऽ बैंक की किताब,
चैक बुक अथवा धन सम्बन्धी पेपर आप
श्रीयंत्र अथवा कुबेर यंत्र के पास रखा करें। ऽ मुर्गे के
पेट में यदा-कदा एक सफेद रंग
की पथरी निकलती है, उसे साफ
करके घर में रख लें। शुभ कार्य में जाते समय यह साथ रखें। ऽ
सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए उन्हें नियमित रुप से लाल फूल,
लाल चंदन, गौरोचन, केसर, जावित्री, जौ अथवा तिल युक्त
जल चढ़ाएं। ऽ कार्यालय, दुकान आदि खोलने पर सर्वप्रथम अपने
इष्टदेव को अवश्य याद किया करें। ऽ अपने से बड़ों को प्रसन्न
करके उनका आशीर्वाद लिया करें। ऽ
कभी कोई कर्म ऐसा न करें जिससे
किसी की आत्मा को लेशमात्र
भी कष्ट पहॅुचे। ऽ गीता के नवे अध्याय
का नित्य पाठ करें। ऽ विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ जिस घर में
होता है वहॉ लक्ष्मी जी निवास
करती हैं। ऽ दुर्गा सप्तशती का नियमित रुप
से पाठ करें। ऽ वेदों में ‘अधमर्षण सूक्त’ दरिद्रता नाश करने
वाला माना गया है। ऽ इसी प्रकार
‘श्री सूक्त’, ‘नासदीय सूत्र’ धन
सम्बन्धी कायरें में लाभदायक है। ऽ ‘राम रक्षा स्तोत्र’
का लक्ष्मी दायक यह मंत्र धनलाभ करवाने में बहुत
उपयोगी सिद्ध होता है। ‘‘आपदाम् अपहर्तारम् दातारम्
सर्व सम्पदाम्। लोकाभिरामम् श्री रामम्
भूयो भूयो नमाम्यहम्।। ऽ श्रम प्रधान बनें और ऋण लेने से
सर्वदा बचे रहें। ऽ लक्ष्मी-साधकों के लिए
ऊनी और रेशमी आसन तथा कमलगट्टे
की माला विशेष रुप से सिद्धि प्रदायक
होती है। ऽ आध्यात्मिक क्षेत्र में आडम्बर के स्थान
पर पवित्रतता और सात्विकता को महत्व देना आवश्यक है। ऽ
लक्ष्मी जी का परमप्रिय फूल कमल
माना गया है। ऽ
लक्ष्मी जी को तुलसी अर्थात्
मंजरी भेंट नहीं करनी चाहिए।
ऽ साधना कक्ष में लक्ष्मी उपासना के समय पुष्प उनके
सामने, अगरबत्ती बाएं, नैवेद्य दक्षिण में
तथा दीप सदा दायीं ओर रखें। ऽ साधना के
समय पश्चिम अथवा पूरब दिशा की ओर
ही मुंह करके बैठें। ऽ हवन सामग्री में
काले तिल, जौ, देसी घी और कमल गट्टे
भी अवश्य मिलाया करें, इससे
लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं। ऽ यह
धारणा मन में स्थिर कर लें कि प्रारब्ध के अतिरिक्त वर्तमान में किए
गए सत्कर्म भी धन सम्बन्धी विषयों में
आशानुकूल परिणाम देते हैं। ऽ प्रत्येक शनिवार को घर से
गन्दगी निकालने का नियम बना लें। इस दिन घर के
मकड़ी के जाले, रद्दी, टूटी-
फूटी घर में प्रयोग होने
वाली सामग्री आदि घर से बाहर कूड़े में फेंक
दिया करें। ऽ घर के मुख्य द्वार के ऊपर गणेश
जी की प्रतिमा अथवा चित्र इस प्रकार लगाएं
जिससे कि उनका मुंह घर के अन्दर की ओर रहे। ऽ
मन में पूर्णतया यह निष्ठा जागृत कर लें कि मैं धनवान
बनूंगा ही। ऽ प्रातः और सांय काल जहॉ तक सम्भव
हो घर का प्रत्येक सदस्य प्रसन्नचित रहे। ऽ सूर्योदय और
सूर्यास्त के समय घर में बच्चे और बीमार के अतिरिक्त
अन्य कोई न सोया करे। ऽ बिल्ली की जेल,
हत्था जोड़ी तथा सफेद आक में
लक्ष्मी जी को रिझाने का गुणधर्म छुपा है।
यह पदार्थ कहीं सुलभ हो तो घर में रख लें। ऽ
हीरा रत्न यदि रास आ जाए तो अतुलित वैभव देता है।
ऽ घर में यदि तुलसी लगी हो तो सायंकाल
वहॉ एक दीपक जला दिया करें। ऽ
शंखपुष्पी की जड़ घर में
लाना मंगलकारी है। ऽ कभी ऐसा देखने
को मिलता है कि एक वृक्ष पर दूसरा वृक्ष निकल आता है। यह
वृक्ष के सन्धि स्थल पर होता है। इस संयोग को बांदा कहते हैं।
अशोक, पीपल, अनार, वट, गूलर, आम, बड़
आदि वृक्षों के बांदे मिल जाएं तो शुभ मुहुर्त में घर ले आएं। ऽ
श्वेत अपराजिता का पौधा धन लक्ष्मी को आकर्षित
करता है। ऽ जिस सघन वृक्ष पर चमगादड़ों का स्थाई वास होता है,
उसकी छोटी-
सी लकड़ी ग्रहण काल में तोड़ लाएं। इसे
अपने कर्म स्थल
की कुर्सी अथवा गद्दी के

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[01/11, 7:31 a.m.] ‪+91 94531 11156‬: किसान के घर जन्म लिया है तो एक बार ज़रूर पढ़े_

एक किसान की मन की बात:-
😞😞😞😞😞😞😞😞😞
कहते हैं..

इन्सान सपना देखता है
तो वो ज़रूर पूरा होता है.
मगर
किसान के सपने
कभी पूरे नहीं होते।

बड़े अरमान और कड़ी मेहनत से फसल तैयार करता है, और जब तैयार हुई फसल को बेचने मंडी जाता है।

बड़ा खुश होते हुए जाता है…

बच्चों से कहता है…
आज तुम्हारे लिये नये कपड़े लाऊंगा फल और मिठाई भी लाऊंगा।।

पत्नी से कहता है..
तुम्हारी साड़ी भी कितनी पुरानी हो गई है फटने भी लगी है आज एक साड़ी नई लेता आऊंगा।।
😞😞😞😞😞
पत्नी:–”अरे नही जी..!”
“ये तो अभी ठीक है..!”
“आप तो अपने लिये
जूते ही लेते आना कितने पुराने हो गये हैं और फट भी तो गये हैं..!”

जब
किसान मंडी पहुँचता है।

ये उसकी मजबूरी है..
वो अपने माल की कीमत खुद नहीं लगा पाता।

व्यापारी
उसके माल की कीमत
अपने हिसाब से तय करते हैं…

एक
साबुन की टिकिया पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.।

एक
माचिस की डिब्बी पर भी उसकी कीमत लिखी होती है.।

लेकिन किसान
अपने माल की कीमत खु़द नहीं कर पाता .।

खैर..
माल बिक जाता है,
लेकिन कीमत
उसकी सोच अनुरूप नहीं मिल पाती.।

माल तौलाई के बाद
जब पेमेन्ट मिलता है..

वो सोचता है..
इसमें से दवाई वाले को देना है, खाद वाले को देना है, मज़दूर को देना है ,

अरे हाँ,
बिजली का बिल
भी तो जमा करना है.

सारा हिसाब
लगाने के बाद कुछ बचता ही नहीं.।।

वो मायूस हो
घर लौट आता है।।

बच्चे उसे बाहर ही इन्तज़ार करते हुए मिल जाते हैं…

“पिताजी..! पिताजी..!” कहते हुये उससे लिपट जाते हैं और पूछते हैं:-
“हमारे नये कपडे़ नहीं ला़ये..?”

पिता:–”वो क्या है बेटा..,
कि बाजार में अच्छे कपडे़ मिले ही नहीं,
दुकानदार कह रहा था,
इस बार दिवाली पर अच्छे कपडे़ आयेंगे तब ले लेंगे..!”

पत्नी समझ जाती है, फसल
कम भाव में बिकी है,
वो बच्चों को समझा कर बाहर भेज देती है.।

पति:–”अरे हाँ..!”
“तुम्हारी साड़ी भी नहीं ला पाया..!”

पत्नी:–”कोई बात नहीं जी, हम बाद में ले लेंगे लेकिन आप अपने जूते तो ले आते..!”

पति:– “अरे वो तो मैं भूल ही गया..!”

पत्नी भी पति के साथ सालों से है पति का मायूस चेहरा और बात करने के तरीके से ही उसकी परेशानी समझ जाती है
लेकिन फिर भी पति को दिलासा देती है .।

और अपनी नम आँखों को साड़ी के पल्लू से छिपाती रसोई की ओर चली जाती है.।

फिर अगले दिन..
सुबह पूरा परिवार एक नयी उम्मीद ,
एक नई आशा एक नये सपने के साथ नई फसल की तैयारी के लिये जुट जाता है.।
….

ये कहानी…
हर छोटे और मध्यम किसान की ज़िन्दगी में हर साल दोहराई जाती है।।
…..

हम ये नहीं कहते
कि हर बार फसल के
सही दाम नहीं मिलते,

लेकिन…
जब भी कभी दाम बढ़ें, मीडिया वाले कैमरा ले के मंडी पहुच जाते हैं और खबर को दिन में दस दस बार दिखाते हैं.।।

कैमरे के सामने शहरी महिलायें हाथ में बास्केट ले कर अपना मेकअप ठीक करती मुस्कराती हुई कहती हैं…
सब्जी के दाम बहुत बढ़ गये हैं हमारी रसोई का बजट ही बिगड़ गया.।।
………

कभी अपने बास्केट को कोने में रख कर किसी खेत में जा कर किसान की हालत तो देखिये.।

वो किस तरह
फसल को पानी देता है.।।

15 लीटर दवाई से भरी हुई टंकी पीठ पर लाद कर छिङ़काव करता है||

20 किलो खाद की
तगाड़ी उठा कर खेतों में घूम-घूम कर फसल को खाद देता है.||

अघोषित बिजली कटौती के चलते रात-रात भर बिजली चालू होने के इन्तज़ार में जागता है.||

चिलचिलाती धूप में
सिर का पसीना पैर तक बहाता है.|

ज़हरीले जन्तुओं
का डर होते भी
खेतों में नंगे पैर घूमता है.||
……

जिस दिन
ये वास्तविकता
आप अपनी आँखों से
देख लेंगे, उस दिन आपके
किचन में रखी हुई सब्ज़ी, प्याज़, गेहूँ, चावल, दाल, फल, मसाले, दूध
सब सस्ते लगने लगेंगे.||

तभी तो आप भी एक मज़दूर और किसान का दर्द समझ सकेंगे।।

अगर आगे नहीं भेज सकते तो वापस मुझे भेज देना।
मैं भी किसान का बेटा हुँ😌😌😌😌😌😌

जय जवान जय किसान
[01/11, 7:39 a.m.] ‪+91 99365 69696‬: 1990 की घटना..
आसाम से दो सहेलियाँ रेलवे में भर्ती हेतु गुजरात रवाना हुई. रास्ते में एक स्टेशन पर गाडी बदलकर आगे का सफ़र उन्हें तय करना था लेकिन पहली गाड़ी में कुछ लड़को ने उनसे छेड़-छाड़ की इस वजह से अगली गाड़ी में तो कम से कम सफ़र सुखद हो यह आशा मन में रखकर भगवान से प्रार्थना करते हुए दोनों सहेलियाँ स्टेशन पर उतर गयी और भागते हुए रिजरवेशन चार्ट तक वे पहुची और चार्ट देखने लगी.चार्ट देख दोनों परेशान और भयभीत हो गयी क्यों की उनका रिजर्वेशन कन्फर्म नहीं हो पाया था.
मायूस और न चाहते उन्होंने नज़दीक खड़े TC से गाड़ी में जगह देने के लिए विनती की TC ने भी गाड़ी आने पर कोशिश करने का आश्वासन दिया….एक दूसरे को शाश्वती देते दोनों गाड़ी का इंतज़ार करने लगीआख़िरकार गाड़ी आ ही गयी और दोनों जैसे तैसे कर गाड़ी में एक जगह बैठ गए…अब सामने देखा तो क्या!
सामने दो पुरूष बैठे थे. पिछले सफ़र में हुई बदसलूकी कैसे भूल जाती लेकिन अब वहा बैठने के अलावा कोई चारा भी नहीं था क्यों की उस डिब्बे में कोई और जगह ख़ाली भी नहीं थी।गाडी निकल चुकी थी और दोनों की निगाहें TC को ढूंढ रही थी शायद कोई दूसरी जगह मिल जाये……कुछ समय बाद गर्दी को काटते हुए TC वहा पहुँच गया और कहने लगा कही जगह नहीं और इस सीट का भी रिजर्वेशन अगले स्टेशन से हो चूका है कृपया आप अगले स्टेशन पर दूसरी जगह देख लीजिये.यह सुनते ही दोनों के पैरो तले जैसे जमीन ही खिसक गयी क्यों की रात का सफ़र जो था.गाड़ी तेज़ी से आगे बढ़ने लगी . जैसे जैसे अगला स्टेशन पास आने लगा दोनों परेशान होने लगी लेकिन सामने बैठे पुरूष उनके परेशानी के साथ भय की अवस्था बड़े बारीकी से देख रहे थे जैसे अगला स्टेशन आया दोनो पुरूष उठ खड़े हो गए और चल दिये….अब दोनों लड़कियो ने उनकी जगह पकड़ ली और गाड़ी निकल पड़ी कुछ क्षणों बाद वो नौजवान वापस आये और कुछ कहे बिना निचे सो गए ।दोनों सहेलियाँ यह देख अचम्भित हो गयी और डर भी रही थी जिस प्रकार सुबह के सफ़र में हुआ उसे याद कर डरते सहमते सो गयी….सुबह चाय वाले की आवाज़ सुन नींद खुली दोनों ने उन पुरूषों को धन्यवाद कहा तो उनमे से एक पुरूष ने कहा ” बेहेन जी गुजरात में कोई मदद चाहिए हो तो जरुर बताना ” …अब दोनों सहेलियों का उनके बारे में मत बदल चूका था खुद को बिना रोके एक लड़की ने अपनी बुक निकाली और उनसे अपना नाम और संपर्क लिखने को कहा…दोनों ने अपना नाम और पता बुक में लिखा और “हमारा स्टेशन आ गया है”
ऐसा कह उतर गए और गर्दी में कही गुम हो गए !
दोनों सहेलियों ने उस बुक में लिखे नाम पढ़े वो नाम थे #नरेंद्र_मोदी और शंकर सिंह #वाघेला……
वह लेखिका फ़िलहाल General Manager of the centre for railwayinformation system Indian railway New Delhi में कार्यरत है और यह लेख
“The Hindu “इस अंग्रेजी पेपर में पेज नं 1 पर
“A train journey and two names to remember ” इस नाम से दिनांक 1 जुन 2014 को प्रकाशित हुआ है… !
तो क्या आप अब भी ये सोचते है की हमने गलत #प्रधानमन्त्री चुना है?

Thanks to Vijay Thakkar for this useful information…
[01/11, 7:39 a.m.] ‪+91 99271 67888‬: #दोगला_चरित्र

जब से मोदी जी प्रधानमंत्री बने हैं इस देश एक अजीब तरह की भीड़ पैदा हो गयी है .(भीड़ इसलिए कहा क्योंकि भीड़ का कोई बिशेष चरित्र नहीं होता,ये अफवाह से ज्यादा ग्रसित होती है)

इस भीड़ ने मोदी को वोट नहीं दिया पर इसे अपने अकाउंट में 15 लाख चाहिए , एक व्हाट्सप्प मेसेज की अफवाह पर 400 रूपये किलो नमक खरीदने वाली इस भीड़ को तुअर दाल 20 रूपये किलो चाहिए और यह भीड़ किसान को इसी तुअर दाल के 5000 रूपये प्रति क्विंटल मिलते भी देखना चाहती है !

कहने का तात्पर्य है कि यह भीड़ चाहती है कि सरकार किसान से 50रूपये किलो में दाल खरीदे और 20 रूपये किलो में आम जनता को बेचे और 30 रूपये घाटा खाकर भी बेहतर सुरक्षा , बेहतर सड़कें , कम रेट पर 24 घंटे बिजली पानी , रोजगार , उद्द्योग , कम रेट पर रेल , विमान यात्रा और अन्य सुविधाएं प्रदान करे !

बिडम्बना देखिये कि यह सब संभव भी हो सकता है अगर यह भीड़ और इनका तंत्र सरकार का साथ दे . सरकार देश में अनाधिकृत रूप से रह रहे करोड़ों बांग्लादेशी , रोहिंग्या घुसपैठियों को देश से बाहर निकालना चाहती है ! जगजाहिर है कि यदि यह करोड़ों घुसपैठिये भारत से बाहर निकाल दिए गए तो हर चीज की कीमत में गिरावट आ जायेगी , रोजगार के अवसर बढ़ जाएंगे , अपराध कम हो जाएंगे ,जीडीपी से लेकर रूपये तक मजबूत हो जाएगा !

पर बिडम्बना और दोगलापन देखिये कि यही भीड़ जो मोदी से ही सभी अच्छे कामों की अपेक्षा करती है वही बांग्लादेशी/रोहिंग्या घुसपैठियों का समर्थन करने वाली पार्टियों और नेताओं के साथ खड़ी होती है !

में यह नहीं कहता कि मोदी का विरोध मत कीजिये , कीजिये खूब कीजिये ….. पर इस दोगला चरित्र रखने वाली भीड़ का हिस्सा मत बनिए ! अगर सबकुछ बेहतर और सस्ता चाहते हैं तो इस काम में जो रुकावट पैदा कर रहे हैं उनका भी विरोध कीजिये !

पूछिए ममता बनर्जी से क्यों हमारा हक़ मारकर बांग्लादेशियों को दिया जा रहा है?

पूछिए केजरीवाल से कि घुसपैठियों को बाहर करने के लिए मोदी के समर्थन में ट्वीट क्यों नहीं करता?

पूछिये सुप्रीम कोर्ट के जजों और वकीलों से कि घुसपैठियों के लिए इतनी सहानुभूति क्यों?

पूछिए हर उस नेता,पत्रकार, ब्यूरोक्रेट्स, NGO से कि इस देश की सम्पदा पर घुसपैठियों को हक़ क्यों ?

इनसे पूछेगें , इनका विरोध कर पाएंगे…..या सिर्फ उस दोगली भीड़ का हिस्सा बनकर हर बात के लिए मोदी से सवाल करेंगे ???

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