Posted in छोटी कहानिया - १००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक वृद्ध सन्यासी महात्मा हिमालय की कन्दराओं में कहीं रहते थे।


एक वृद्ध सन्यासी महात्मा हिमालय की कन्दराओं में कहीं रहते थे।
उनकी सहृदयता, ज्ञान,और बुद्धिमत्ता की ख्याति दूर -दूर तक फैली थी।
एक दिन एक महिला उनके पास पहुंची,दण्डवत प्रणाम कर रुआंसी होते हुए अपना दुखड़ा सन्यासी महात्माजी को बताया……
.
“बाबा जी!, मेरे पति मुझसे बहुत प्रेम करते थे, लेकिन जबसे वह युद्ध से लौटें हैं ठीक से बात तक भी नहीं करते।”
.
“युद्ध लोगों के साथ ऐसा ही करता है।” सन्यासी महात्मा जी ने जवाब दिया।
.
“महात्मन!सुना है कि आपकी दी हुई औषधि इंसान में फिर से प्रेम उत्पन्न कर सकती है,कृपया मेरी मनोस्थिति को समझते हुए आपश्री मुझे वह औषध प्रदान करने एवम उसकी सेवन विधि बताने की अनुकम्पा करें।”
महिला ने कातर स्वर में विनती की l
.
सन्यासी महात्मा ने कुछ देर मन ही मन विचार किया और बोले,…….
देवी! मैं तुम्हे वह औषधि ज़रूर दे देता किन्तु उसे बनाने के लिए ऐसी वस्तु की आवश्यकता है जो इस समय मेरे पास नहीं है,मेरे शिष्य भी सुदूर तीर्थ यात्रा पर गए हुए हैं एवम मेरे लिए उस वस्तु का इंतज़ाम करना फिलहाल तो दुष्कर है।”
.
“मेरे लिए औषध निर्माण हेतु आपश्री को जिस भी वस्तु की आवश्यकता हो कृपया अवगत करवाएं।मैं हर हाल में उसे आपश्री के श्रीचरणों में समर्पित करूंगी।”
.
करबद्ध होकर महिला ने विश्वाश पूर्वक कहा।
.
“मुझे बाघ की मूंछ का एक बाल चाहिए।” सन्यासी महात्मा शान्त स्वर में बोले।
.
अगले ही दिन महिला बाघ की तलाश में जंगल में निकल पड़ी ,बहुत खोजने के बाद उसे नदी के किनारे एक बाघ दिखाई दिया,बाघ उसे देखते ही दहाड़ उठा। महिला सहम गयी और तेजी से वापस चली गयी l
अगले कुछ दिनों तक यही हुआ, महिला हिम्मत कर उस बाघ के पास जाती और डर कर वापस चली जाती।
महीना बीतते-बीतते बाघ महिला की मौजूदगी का अभ्यस्त हो गया और अब वह उसे देख कर भी सामान्य ही रहता l
अब तो महिला बाघ के लिए मांस भी लाने लगी , और बाघ बड़े चाव से उसे खाता।
.
बाघ और महिला की दोस्ती बढ़ने लगी और तो और महिला तो बाघ को थपथपाने भी लगी और देखते देखते एक दिन वह भी आ गया जब उसने हिम्मत दिखाते हुए बाघ की मूंछ का एक बाल भी निकाल लिया l
फिर क्या था,बिना कोई देरी किये महिला जा पँहुची सन्यासी महात्मा जी के पास।
खुश होते हुए बोली, “ले आई बाघ की मूँछ का बाल।”
लेकिन यह क्या….
“बहुत अच्छा” कहते हुए सन्यासी ने उस बाल को जलती हुई आग में फ़ेंक दिया l
.
“अरे यह क्या बाबा जी, आप नहीं जानते इस बाल को लाने के लिए मैंने कितने प्रयत्न किये और आपने इसे जला दिया ……अब मेरी औषधि कैसे बनेगी ?” महिला घबराते हुए बोली l
.
“अब तुम्हे किसी औषधि की ज़रुरत ही नहीं रही” सन्यासी महात्मा मुस्कुराते हुए बोले,” जरा सोचो! तुमने बाघ को किस तरह अपने वश में किया, जब एक हिंसक पशु को धैर्य और प्रेम से जीता जा सकता है तो क्या एक इंसान को नहीं ? जाओ जिस तरह तुमने बाघ को अपना मित्र बना लिया उसी तरह अपने पति के अन्दर प्रेम भाव जागृत करो l”
.
महिला महात्मा जी की बात समझ गयी,एक नए आत्मविश्वास के साथ लौट पड़ी अपने पति का वही पुराना प्रेम पाने को।
जीवन बहुत छोटा है।उसे सरल रूप से जिया जाय तभी बेहतर है,अन्यथा उलझकर तो हम अपनी परेशानियों को ही बढ़ाते है।
मनुष्य चाहे तो अपने आत्मविश्वास धैर्य और प्रेम से क्या नहीं कर सकता।

Advertisements

Author:

Hello, Harshad Ashodiya I have 12,000 Hindi, Gujarati ebooks

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s