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बकरा ईद पर दोगले मुस्लिमो से एक यक्ष प्रश्न


बकरा ईद पर दोगले मुस्लिमो से एक यक्ष प्रश्न – है कोई तर्क ??? 2500 साल पहले यहूदी थे ! 2000 साल पहले ईसाई समुदाय का जन्म हुआ ! 1400 साल पहले इस्लाम अस्तित्व में आया ! अब्राहम (लगभग 1800 ई.पू.) इब्रानी अर्थात्‌ यहूदी जाति के पितामह थे ! हजरत मूसा (यहूदी), हजरत ईसा (ईसाई) और हजरत मुहम्मद (इस्लाम) अब्राहम (यहूदी) के सबसे महान्‌ वंशज माने जाते हैं। अब्राहम (यहूदी) को ईश्वर का दास और मित्र कहा गया है। ईश्वर के आदेश पर ये अपने एकमात्र पुत्र इश्माइल का बलिदान करने के लिए तैयार थे। सवाल ये है कि भारत के फर्जी मुस्लिम कहते है कि हम तो #ईदउलजुहा में इसलिए जानवर काटेंगे क्यूंकि हमारे इस्लाम में हमारे हजरत ने अपने बच्चे की कुर्बानी दी थी ! लेकिन आज तक मुस्लिमो ने अपने उस हजरत साहब का नाम नहीं बताया ! मजेदार बात ये है कि कुर्बानी तो अब्राहम (यहूदी) ने 1800 ई.पू. अपने बच्चे की दी थी, उस समय तो इस्लाम का जन्म भी नहीं हुआ था ! अगर कुर्बानी की बात कोई यहूदी कहता तो हम मान भी लेते ! पर एक मुसलमान ऐसी बात कहेगा तो वो दोगला ही कहलायेगा क्यूंकि अगर वो अपने हजरत साहब अब्राहम का नाम लेंगे तो यहूदी कहलायेंगे ! लेकिन मुस्लिम सिर्फ मोहम्मद साहब को ही अपना पैगम्बर मानते है ! अब्राहम और पैगंबर मोहम्मद साहब के बीच कितनी पीढियों का अंतर है यह भी एक बार देख लें !

विकाश खुराना

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किसी भी प्रकार के दान करने से पहले इसे जरूर पढ़ें।


किसी भी प्रकार के दान करने से पहले इसे जरूर पढ़ें। 💐 💐 🌷 💐 💐 🌷 💐 💐 🌷 💐 💐 🌷 💐 💐 🌷 💐 💐 ज्योतिष शास्त्र में प्रत्येक वस्तु का दान करने के पीछे एक उद्देश्य, उससे मिलने वाला परिणाम एवं उसमें छिपा विज्ञान है। हर वस्तु अपने दान के उपरांत उससे संबंधित परिणाम देती है। ऐसा कहा जाता है कि दान की गई वस्तुओं में कुछ ऐसी शक्ति होती है कि जिसके माध्यम से ही हमें मन मुताबिक फल की प्राप्ति होती है। आपने यह तो सुना होगा कि जन्म कुण्डली के विभिन्न ग्रहों को शांत करने के लिए भिन्न-भिन्न प्रकार के दान कर्म किए जाते हैं। जैसा हमें ज्योतिषी बताते हैं हम उसी अनुसार वस्तुओं का दान करते हैं। लेकिन क्या कभी किसी ज्योतिषी ने आपको बताया है कि किस समय कैसा दान नहीं करना चाहिए? जन्म कुण्डली में कुछ ग्रहों को मजबूत एवं दुष्ट ग्रहों को शांत करने के लिए तो हम दान-पुण्य करते ही हैं, लेकिन ग्रहों की कैसी स्थिति में हमें कैसा दान नहीं करना चाहिए, यह भी जानने योग्य बात है। 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 सूर्य ग्रह सूर्य मेष राशि में होने पर उच्च तथा सिंह राशि में होने पर अपनी स्वराशि का होता है। यदि किसी जातक की कुण्डली में सूर्य इन्हीं दो राशियों में से किसी एक में हो तो उसे लाल या गुलाबी रंग के पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा गुड़, आटा, गेहूं, तांबा आदि दान नहीं करना चाहिए। सूर्य की ऐसी स्थिति में ऐसे जातक को नमक कम करके, मीठे का सेवन अधिक करना चाहिए। चंद्र ग्रह 🌝🌝🌝🌝🌝🌝🌝🌝 चन्द्र वृष राशि में उच्च तथा कर्क राशि में अपनी राशि का होता है। यदि किसी जातक की जन्मकुंडली में चंद्र ग्रह ऐसी स्थिति में हो तो, उसे खाद्य पदार्थों में दूध, चावल एवं आभूषणों में चांदी एवं मोती का दान नहीं करना चाहिए। ऐसे जातक के लिए माता या अपने से बड़ी किसी भी स्त्री से दुर्व्यवहार करना हानिकारक हो सकता है। किसी स्त्री का अपमान करने पर ऐसे जातक मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। मानसिक तनाव हो सकता है जिस जातक के लिए चंद्र ग्रह स्वराशि हो उसे किसी नल, टयूबवेल, कुआं, तालाब अथवा प्याऊ निर्माण में कभी आर्थिक रूप से सहयोग नहीं करना चाहिए। यह उस जातक के लिए आर्थिक रूप से हानिकारक सिद्ध हो सकता है। मंगल ग्रह 🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺🔺 मंगल मेष या वृश्चिक राशि में हो तो स्वराशि का तथा मकर राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। यदि आपकी कुण्डली में मंगल ग्रह ऐसी स्थिति में है तो, मसूर की दाल, मिष्ठान अथवा अन्य किसी मीठे खाद्य पदार्थ का दान ना करें। मीठे खाद्य पदार्थ का दान निषेध आपके घर यदि मेहमान आए हों तो उन्हें कभी सौंफ खाने को न दें अन्यथा वह व्यक्ति कभी किसी अवसर पर आपके खिलाफ ही कटु वचनों का प्रयोग करेगा। यदि मंगल ग्रह के प्रकोप से बचना चाहते हैं तो किसी भी प्रकार का बासी भोजन न तो स्वयं खाएं और न ही किसी अन्य को खाने के लिए दें। बुध ग्रह ✳✳✳✳✳✳✳✳ बुध मिथुन राशि में तो स्वराशि तथा कन्या राशि में हो तो उच्च राशि का कहलाता है। यदि किसी जातक की जन्मपत्रिका में बुध उपरोक्त वर्णित किसी स्थिति में है तो, उसे हरे रंग के पदार्थ और वस्तुओं का दान कभी नहीं करना चाहिए। हरे रंग के वस्त्र हरे रंग के वस्त्र, वस्तु और यहां तक कि हरे रंग के खाद्य पदार्थों का दान में ऐसे जातक के लिए निषेध है। इसके अलावा इस जातक को न तो घर में मछलियां पालनी चाहिए और न ही स्वयं कभी मछलियों को कभी दाना डालना चाहिए। बृहस्पति ग्रह 🔆🔆🔆🔆🔆🔆🔆 बृहस्पति जब धनु या मीन राशि में हो तो स्वगृही तथा कर्क राशि में होने पर उच्चता को प्राप्त होता है। जिस जातक की कुण्डली में बृहस्पति ग्रह ऐसी स्थिति में हो तो, उसे पीले रंग के पदार्थ नहीं करना चाहिए। सोना, पीतल, केसर, धार्मिक साहित्य या वस्तुओं आदि का दान नहीं करना चाहिए। इन वस्तुओं का दान करने से समाज में सम्मान कम होता है। शुक्र ग्रह ⭐🌟🌟🌟🌟🌟🌟⭐ शुक्र ग्रह वृष या तुला राशि में हो स्वराशि का एवं मीन राशि में हो तो उच्च भाव का होता है। जिस जातक की कुण्डली में शुक्र ग्रह की ऐसी स्थिति हो, तो उसे श्वेत रंग के सुगन्धित पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए अन्यथा व्यक्ति के भौतिक सुखों में कमी आने लगती है। इसके अलावा नई खरीदी गई वस्तुओं का एवं दही, मिश्री, मक्खन, शुद्ध घी, इलायची आदि का दान भी नहीं करना चाहिए। शनि ग्रह 🔵🔵🔵🔵🔵🔵🔵🔵 शनि यदि मकर या कुम्भ राशि में हो तो स्वगृही तथा तुला राशि में हो तो उच्च राशि का कहलाता है। यदि आपकी कुण्डली में शनि की स्थिति है तो आपको काले रंग के पदार्थों का दान कभी भूलकर भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा लोहा, लकड़ी और फर्नीचर, तेल या तैलीय सामग्री, बिल्डिंग मैटीरियल आदि का दान नहीं करना चाहिए। काला रंग ऐसे जातक को अपने घर में काले रंग का कोई पशु जैसे कि भैंस अथवा काले रंग की गाय, काला कुत्ता आदि नहीं पालना चाहिए। ऐसा करने से जातक की निजी एवं सामाजिक दोनों रूप से हानि हो सकती है। राहु ग्रह ⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫⚫ राहु यदि कन्या राशि में हो तो स्वराशि का तथा वृष एवं मिथुन राशि में हो तो उच्च का होता है। जिस जातक की कुण्डली इसमें से किसी भी एक स्थिति का योग बने, तो ऐसे जातक को नीले, भूरे रंग के पदार्थों का दान नहीं करना चाहिए। इसके अलावा अन्न का अनादर करने से परहेज करना चाहिए। जब भी ये खाना खाने बैठें, तो उतना ही लें जितनी भूख हो, थाली में जूठन छोड़ना इन्हें भारी पड़ सकता है। केतु ग्रह 🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩🚩 केतु यदि मीन राशि में हो तो स्वगृही तथा वृश्चिक या फिर धनु राशि में हो तो उच्चता को प्राप्त होता है। यदि आपकी कुण्डली में केतु उपरोक्त स्थिति में है तो आपको घर में कभी पक्षी नहीं पालना चाहिए, अन्यथा धन व्यर्थ के कामों में बर्बाद होता रहेगा। इसके अलावा भूरे, चित्र-विचित्र रंग के वस्त्र, कम्बल, तिल या तिल से निर्मित पदार्थ आदि का दान नहीं करना चाहिए। 💐💐🌷💐💐🌷💐💐🌷💐💐🌷💐💐🌷💐💐नोट – अपना भुत-भविष्य जानने के लिए और सटीक उपायो के लिए सम्पर्क करे मगर ध्यान रहे ये सेवाएं सशुल्क और पेड़ कंसल्टिंग के तहत है , जानने के लिए अपनी फ़ोटो, वास्तु की फ़ोटो, दोनों हथेलियो की फ़ोटो और बर्थ डिटेल्स भेजे ज्योतिषाचार्य,लाल किताब, वास्तु तज्ञ,kp, वैदिक पराशरी जैमिनी एक्सपर्ट ,तन्त्र प्रवीण ज्योतिष भास्कर त्रिवीक्रम Whats app no 9021076371 अपॉइंटमेंट लेने के बाद ही कॉल करे

विक्रम प्रकाश राइसोनि

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एक बार की बात है। सूर्यास्त का समय था,


एक बार की बात है। सूर्यास्त का समय था, शीतल मंद हवा बह रही थी। समुद्र का तट था। राम सेतु के समीप भक्तराज हनुमान अपने प्रभु भगवान राम के ध्यान में लीन थे, उसी समय वहां न जाने कहां से सूर्यपुत्र शनि आ गए। शनि देव को गर्व था कि वह जहां भी जाते हैं उनके भय से सभी देवतागण उनके मार्ग से हट जाते हैं तथा उनसे दूर ही रहना पसंद करते हैं। यहां उन्हें बड़ा आघात लगा कि उनके मार्ग में रामभक्त हनुमान ध्यान लगाए बैठे हैं तथा उनकी ओर देख भी नहीं रहे हैं। वह अपनी इस दशा को अपमान समझ रहे थे। उन्हें गर्व था कि इस सृष्टि में उनके समान बल वाला और कोई नहीं है तो यह वानर क्यों नहीं घबरा रहा है। हनुमान जी के समीप पहुंच कर शनि देव ने अपने कर्कश स्वर में कहा, ‘‘मैं प्रख्यात शक्तिशाली शनि तुम्हारे सम्मुख हूं और तुम मेरी ओर देख भी नहीं रहे हो। मैं तुम्हें युद्ध के लिए आमंत्रण देता हूं।’’ इस पर पवनपुत्र हनुमान ने बड़ी विनम्रता से सूर्यपुत्र शनि को कहा—हे शनिदेव! मैं बहुत वृद्ध हो गया हूं और अपने प्रभु का ध्यान कर रहा हूं इसमें व्यवधान न डालें, कृपापूर्वक आप कहीं और चले जाएं। इस पर शनिदेव ने कहा, ‘‘मैं कहीं आकर लौटना नहीं जानता और जहां जाता हूं वहां मेरा ही वर्चस्व चलता है इसलिए मैं तुम्हें पुन: युद्ध के लिए ललकारता हूं।’’ यह कह कर उन्होंने हनुमान जी का हाथ पकड़ लिया। इस पर हनुमान जी ने झटक कर अपना हाथ छुड़ा लिया और पुन: उनको जाने के लिए कहा। परंतु शनि कहां मानने वाले थे, वह हनुमान जी को युद्ध करने के लिए उकसाते रहे। वह कहने लगे,‘‘ कहां गई तुम्हारी वीरता।’’ ऐसा कह कर पुन: हनुमान जी पर वह अपना बल प्रयोग करने लगे। ऐसा बार-बार करने पर हनुमान जी ने कहा हे शनि, तुम यहां से चले जाओ, मेरा अब राम सेतु की परिक्रमा का समय हो रहा है। अत: मैं तुमसे युद्ध नहीं कर सकता। इसके पश्चात भी जब शनिदेव नहीं माने तो पवनपुत्र हनुमान ने अपनी पूंछ लंबी कर उनको उसमें लपेटना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में शनिदेव उनकी पूंछ में बंध गए। अब पवनपुत्र राम सेतु की परिक्रमा के लिए निकल पड़े। शनिदेव की सम्पूर्ण शक्ति से भी उनका बंधन शिथिल न हो सका। हनुमानजी के दौडऩे से उनकी विशाल पूंछ जिससे शनि देव जकड़े हुए थे वह शिलाखंडों पर गिरती जा रही थी जिससे शनि के शरीर में भारी चोटें लगने लगीं। कई बार हनुमानजी अपनी पूंछ को जानबूझ कर भी इन शिलाखंडों पर पटक देते थे, जिससे शनि देव को और पीड़ा हो रही थी। उनका शरीर लहूलुहान हो गया। वह असहाय थे, कुछ कर भी नहीं सकते थे क्योंकि उनका पूरा शरीर पूंछ में जकड़ा हुआ था। अपनी इस दशा से पीड़ित होकर अब शनिदेव हनुमान जी से क्षमा याचना करने लगे कि उन्हें अब उनकी उद्दंडता का दंड मिल गया है। मुझे अपने बंधन से मुक्त कर दें, आगे वह कभी ऐसी गलती नहीं करेंगे। इस पर हनुमानजी ने शनि से कहा, ‘‘यदि तुम मेरे भक्त की राशि पर कभी न जाने का वचन दो तो मैं तुम्हें मुक्त कर सकता हूं।’’ इस पर शनिदेव ने कहा, ‘‘हे महावीर, मैं वचन देता हूं कि मैं आपके भक्तों पर अपना दुष्प्रभाव कभी नहीं डालूंगा और न ही उनकी राशि पर आने पर उनको पीड़ित करूंगा।’’ ऐसा कहने पर हनुमान जी ने उन्हें बंधन मुक्त कर दिया। शनि देव का शरीर बुरी तरह से घायल हो चुका था। उनको बहुत पीड़ा हो रही थी। वह हनुमान जी के चरणों में पड़ कर अपनी देह पर लगाने के लिए तेल मांगने लगे। हनुमान जी ने उन्हें तेल दिया जिसे उन्होंने अपने पूर्ण शरीर में मला तथा कहा, ‘‘जो व्यक्ति मुझे तेल देगा मैं उसको कभी पीड़ित नहीं करूंगा और अपने आशीर्वाद से उसके जीवन में खुशियां भर दूंगा।’’ तभी से शनि को तेल चढ़ाने की परम्परा चली आ रही है। हनुमान जी का ध्यान करते हुए शनि देव पर तेल अर्पित करने से आप पर मंडरा रहा हर संकट होगा दूर एवं हर डर का होगा अंत लष्मीकांत वर्शनय

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किसी गाँव मेँ एक साधु रहता था जो दिन भर लोगोँ को उपदेश दिया करता था।


किसी गाँव मेँ एक साधु रहता था जो दिन भर लोगोँ को उपदेश दिया करता था। उसी गाँव मेँ एक नर्तकी थी, जो लोगोँ के सामनेँ नाचकर उनका मन बहलाया करती थी। एक दिन गाँव मेँ बाढ़ आ गयी और दोनोँ एक साथ ही मर गये। मरनेँ के बाद जब ये दोनोँ यमलोक पहूँचे तो इनके कर्मोँ और उनके पीछे छिपी भावनाओँ के आधार पर इन्हेँ स्वर्ग या नरक दिये जानेँ की बात कही गई। साधु खुद को स्वर्ग मिलनेँ को लेकर पुरा आश्वस्त था। वहीँ नर्तकी अपनेँ मन मेँ ऐसा कुछ भी विचार नहीँ कर रही थी। नर्तकी को सिर्फ फैसले का इंतजार था। तभी घोषणा हूई कि साधु को नरक और नर्तकी को स्वर्ग दिया जाता है। इस फैसले को सुनकर साधु गुस्से से यमराज पर चिल्लाया और क्रोधित होकर पूछा , “यह कैसा न्याय है महाराज?, मैँ जीवन भर लोगोँ को उपदेश देता रहा और मुझे नरक नसीब हुआ! जबकि यह स्त्री जीवन भर लोगोँ को रिझानेँ के लिये नाचती रही और इसे स्वर्ग दिया जा रहा है। ऐसा क्योँ?” यमराज नेँ शांत भाव से उत्तर दिया ,” यह नर्तकी अपना पेट भरनेँ के लिये नाचती थी लेकिन इसके मन मेँ यही भावना थी कि मैँ अपनी कला को ईश्वर के चरणोँ मेँ समर्पित कर रही हूँ। जबकि तुम उपदेश देते हुये भी यह सोँचते थे कि कि काश तुम्हे भी नर्तकी का नाच देखने को मिल जाता ! हे साधु ! लगता है तुम इस ईश्वर के इस महत्त्वपूर्ण सन्देश को भूल गए कि इंसान के कर्म से अधिक कर्म करने के पीछे की भावनाएं मायने रखती है। अतः तुम्हे नरक और नर्तकी को स्वर्ग दिया जाता है। “ हम कोई भी काम करें , उसे करने के पीछे की नियत साफ़ होनी चाहिए , अन्यथा दिखने में भले लगने वाले काम भी हमे पुण्य की जगह पाप का ही भागी बना देंगे। रामचंद्र आर्य

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હું તકલીફ માં હોવ ત્યારે આ મેસેજ એક થી બેવાર જરૂર વાંચું છું


Morpinchh 09012017 _/_ હું તકલીફ માં હોવ ત્યારે આ મેસેજ એક થી બેવાર જરૂર વાંચું છું મારી નજરે ભગવાન 💎💡 “શ્રીકૃષ્ણ” 💡💎 *શ્રીકૃષ્ણ* ભગવાન ની કથા એમ કહે છે કે તેઓ જન્મ્યા પહેલાજ તેમને મારી નાખવાની તૈયારી થઇ ગયી હતી. પણ તેમાંથી તેઓ આબાદ ઉગરી ગયા આગળ તેમના જીવન માં ઘણા સંકટો આવ્યા પણ તેઓ લડતા રહ્યા કોઈ ને કોઈ યુક્તિ કરીને હંમેશા બચતા રહ્યા કોઈ પ્રસંગ માં તો તેઓ રણ છોડી ભાગી પણ ગયા હતા, પણ મારા જીવન માં આટલી બધી તકલીફો કેમ છે કરી ને તેઓ કોઈ દિવસ પણ કોઈ ને પણ પોતાની જન્મકુંડળી બતાવવા નથી ગયા કે એવી કોઈ નોધ મેં નથી વાચી, ના કોઈ ઉપવાસ કર્યા, ના ખુલ્લા પગે ક્યાંય ચાલવા ની માનતા કરી, કે કોઈ માતાજી ના ભુવા પાસે દાણા જોવડાવ્યા, મારે આ પ્રસંગ યાદ રાખવા જેવો ને વિચારવા જેવો છે તેમણે તો યજ્ઞ કર્યો તે ફક્ત અને ફક્ત કર્મો નો. યુદ્ધ ના મૈદાન માં જયારે અર્જુને ધનુષ્ય બાણ નીચે નાખી દીધા, ત્યારે ભગવાન *શ્રીકુષ્ણ* એ ના તો અર્જુન ના જન્માક્ષર જોયા, ના તો તેને કોઈ દોરો કે તાવીજ તેને આપ્યા, આ તારું યુદ્ધ છે અને તારેજ કરવાનું છે એમ અર્જુન ને સ્પષ્ટ કહી દીધું, અર્જુને જયારે ધનુષ્ય નાખી દીધું ત્યારે તે ધનુષ ઉપાડી ભગવાને અર્જુન વતી લડાઈ નથી કરી। બાકી *શ્રીકુષ્ણ* ભગવાન ખુદ મહાન યોદ્ધા હતા. તેઓ એકલા હાથે આખી કૌરવો ની સેના ને હરાવી શકે તેમ હતા,પણ ભગવાને શસ્ત્ર હાથ માં નહોતું પકડ્યું પણ જો અર્જુને લડવાની તૈયારી બતાવી તો તેઓ તેના સારથી ( માર્ગદર્શક ) બનવા તૈયાર હતા. આ રીતે ભગવાન *શ્રીકૃષ્ણ* મને સમજાવે છે કે જો દુનિયા ની તકલીફો માં તું જાતે લડીશ તો હું હંમેશા તારી આગળ ઉભો હોઈશ તારી તકલીફો ને હું હળવી કરી નાખીશ અને તને માર્ગદર્શન પણ આપીશ, કદાચ આજ ગીતા નો સહુથી સંક્ષિપ્ત સાર છે. જયારે હું પ્રભુ સન્મુખ થાવ ત્યારે ભગવાન ને એટલીજ વિનંતી કરું કે ભગવાન મારી તકલીફો થી લડવાની મને શક્તિ આપજો, નહિ કે ભગવાન મારી તકલીફો થી છુટકારો આપજો, ભગવાન મારી પાસે ઉપવાસ નથી માંગતા નહિ કે તું ચાલતો આવ કે બીજું કઈ, ભગવાન માંગે છે તો મારુ કર્મ, માટે મારે કર્મ કરતા રહેવું. 💡🙏 *જય શ્રીકૃષ્ણ*🙏💡