Posted in संस्कृत साहित्य

कबड्डी


भारतीय खेल “कबड्डी” ♻कबड्डी मात्र एक खेल नहीं है, भारतीय संस्कृति का दर्पण है । मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप मे खेली जाती है। कबड्डी नाम का प्रयोग प्राय: उत्तर भारत में किया जाता है, इस खेल को दक्षिण में चेडुगुडु और पूरब में हु तू तू के नाम से भी जानते हैं। यह खेल भारत के पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और पाकिस्तान, ईरान में भी उतना ही लोकप्रिय है। 🇮🇳तमिल, कन्नड और मलयालम में ये मूल शब्द, “कै” (हाथ), “पिडि” (पकडना) का रूपान्तरण है, जिसका अनुवाद है ‘हाथ पकडे रहना’। साधारण शब्दों में इसे ज्यादा अंक हासिल करने के लिए दो टीमों के बीच की एक स्पर्धा कहा जा सकता है। अंक पाने के लिए एक टीम का रेडर (कबड्डी-कबड्डी एक श्वास में ) बोलते हुए विपक्षी पाले (कोर्ट) में जाकर वहाँ मौजूद खिलाडियों को छूने का प्रयास करता है। 🎪इस दौरान विपक्षी टीम के स्टापर (रेडर को पकड़ने वाले) अपने पाले में आए रेडर को पकड़कर वापस जाने से रोकते हैं और अगर वह इस प्रयास में सफल होते हैं तो उनकी टीम को इसके बदले एक अंक मिलता है। और अगर रीडर किसी स्टापर को छूकर सफलतापूर्वक अपने पाले में चला जाता है तो उसकी टीम के एक अंक मिल जाता और जिस स्टापर को उसने छुआ है उसे नियमत: कोर्ट से बाहर जाना पड़ता है। 👎जिसे मरा हुआ मानते हैं ,वो तभी जीवित हो सकता है जबकि उसका कोई साथी विरोधी पीला में किसकी को मार कर आये या फिर सभी के मरने पर सभी जीवित हो उठते हैं । इसी क्रम में १०-२-१० या १५-२-१५ या २०-२-२० के अंतराल का मैच हो सकता है ।बीच में खिलाडी बदलने की अधिकतम सीमा तय रहती है ,मध्यांतर पर भी खिलाडी बदले जा सकते हैं । 🤝कबड्डी भारतीय जीवन दर्शन का दर्पण है ,जो ज्ञान महाभारत के समय कृष्ण ने गीता में अर्जुन को दिया था ,उसी का प्रकटीकरण मात्र ही ये खेल है ।आत्मा अजर है ,अमर है ,उसको कोई मार नहीं सकता ,अपना कर्म करो यदि आत्मा मरती भी है तो फिर जीवित हो जाती है । 🥋खेल के माध्यम से संगठन की शिक्षा मिलती है , ७ खिलाड़ी संघठित रूप से तालमेल बिठाते हुए बगैर जात-पात, ऊँच-नीच, अमीर-गरीब, दलित-स्वर्ण का भेदभाव मन में रखे ,नेतृत्व करता के निर्देशनुसार घर में घुसे विरोधी(विपक्षी) से अपने दल की रक्षा करता है । 🤼‍♂ उसके मन में स्वतः यही भाव जागृत होते हैं जिससे वो अपने देश की, अपने राष्ट्र की, अपनी संस्कृति की रक्षा अपने दिलो जान से करता है । चाहे इसके लिए उसे कितनी बार मरना ही क्यों ना पड़े । खेल कबड्डी के माध्यम से चुस्ती ,फुर्ती, आपसी तालमेल, तंदुरस्ती, शारीरिक क्षमता का विकास तो होता ही है, इसके अलावा श्वास प्रश्वास पर कंट्रोल भी करना सीखता है । 🤼‍♀भारतीय जीवन दर्शन में बताये अनुसार श्वास तय है उसका अधिकतम सार्थक उपयोग किस प्रकार करना है ,एक छोटे से खेल के माध्यम से समझा जा सकता है । एक श्वास में कबड्डी-कबड्डी बोलते हुए विरोधी दल के ७ जनों के मध्य जाना बगैर डरे लड़ते, मरते मारते उनको छू कर वापिस आना है। 🤗चातुर्य का, शारीरिक क्षमता का, सभी पर निगाह रखते हुए उनके गढ़ को ढहाने का प्रशिक्षण का खेल है, ये संयम के विकास का खेल है। ये खेल सभी के समान विकास का खेल है , कोई भी एक कड़ी चाहे केचर हो या रेडर हो कमजोर है तो जीतना सम्भव नहीं ,सभी को सक्रिय रूप से तन-मन लगाकर ही खेल भावना से खेलना होता है । इस खेल में शिक्षक का बड़ा सम्मान होता है, उसके निर्णय पर आपत्ति नहीं होती ।

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