Posted in संस्कृत साहित्य

प्राचीन भारतीय विज्ञान पर चुप्पी टूटी सौ साल बाद


प्राचीन भारतीय विज्ञान पर चुप्पी टूटी सौ साल बाद 🎖 समय के पन्नों पर अमिट लिखावट 🇮🇳 प्राचीन भारतीय विज्ञान की वे उपलब्धियाँ जो समय-सिद्ध, तर्कसिद्ध और प्रमाण सिद्ध हैं उन्हें हमें जानना चाहिए और दुनिया को उनके बारे में बताना चाहिए। 🔋 सुश्रुत संहिता में ११२० बीमारियों, ७०० औषधीय वनस्पतियों के बारे में बतलाया गया है। साथ ही खनिजों अथवा लवणों से बनने वाली ६४ और जीव जंतुओें से मिलने वाली ५७ दवाओं का वर्णन है । ⚙ इसमें अनेक प्रकार की जटिल शल्य चिकित्साओं, भ्रूण विकास, अस्थि विकास आदि के बारे में विस्तार से बताया गया है। आँखों की बीमारियों के बारे में और मोतियाबिंद की शल्यचिकित्सा का भी वर्णन है। 💔 हृतशूल के नाम से एनजाइना पैक्टोरिस, मधुमेह, रक्त संचरण तंत्र, हाइपरटैंशन, कुष्ठरोग, पथरी आदि की व्याख्या और इलाज बतलाया गया। प्लास्टिक सर्जरी का भी वर्णन मिलता है। सुश्रुत संहिता का ८वीं शताब्दी में किताब-ए-सुस्रुद् नाम से अरबी में भाषांतर हुआ। 🌎यहाँ से यह ज्ञान इटली होते हुए यूरोप पहुंचा। १७९४ में लंदन की जैंटलमैन्स मैगज़ीनमें “कुमार वैद्य” नामक भारतीय की नाक का पुनर्निर्माण (प्लास्टिक सर्जरी) विषय पर रिपोर्ट छपी। 🐌 आज से २०० साल पहले ब्रिटिश सर्जन जोसेफ कॉन्स्टैण्टाइन कार्प ने २० वर्षों तक भारतीय प्लास्टिक सर्जरी का अध्ययन किया और १९२० में पश्चिमी जगत की पहली प्लास्टिक सर्जरी की। औजार वही थे जो सुश्रुत संहिता में बतलाए गए थे। 💂�टीपू सुल्तान और ब्रिटिश फौजों के बीच १७९२ में हुई मैसूर की लड़ाई में टीपू सुल्तान द्वारा बंधकों के नाक और हाथ काटने का वर्णन आता है। बाद में भारतीय वैद्यों ने उनमें से अनेक की नाक का पुनर्निर्माण कर दिया। 🇬🇧 दो ब्रिटिश डॉक्टरों थॉमस क्रूसो और जेम्स फिंडले इस घटना के गवाह बने। मद्रास गज़ेट ने इस घटना को फोटो फीचर के साथ छापा। बाद में यही रिपोर्ट जैंटलमैन मैगजीन में प्रकाशित हुई। ⌛प्रसिद्घ इतिहासकार विल ड्यू्रॉण्ट ने दि स्टोरी ऑफ सिविलाइजे़शन नामक पुस्तक में ‘अवर ओरिएंटल हैरिटेज’ नामक अध्याय में भारत के धातु विज्ञान के बारे में इन शब्दों में लिखा है- गुप्त साम्राज्य के दौरान भारत में रसायन और कास्ट आयरन सहित उच्च औद्योगिक विकास हुआ, जिसके कारण रोम साम्राज्य भी भारत को रसायन उद्योग जैसे रंगाई, टैनिंग, साबुन निर्माण, कांच और सीमेंट आदि के उत्पादन में सबसे कुशल राष्ट्र मानता था। ⚖ छठवीं शताब्दी में हिंदू यूरोप के रसायन उद्योग से मीलों आगे थे। वे कैल्सिनेशन, डिस्टिलेशन, सब्लिमेशन, स्टीमिंग, फिक्सेशन, बिना ऊष्मा के प्रकाश उत्पन्न करना, धात्विक लवणों, रसायनों और मिश्र धातुओं के निर्माण के उस्ताद थे। स्टील निर्माण में भी वे पूर्णता हासिल कर चुके थे। ♋इसी प्रकार गणित में भारत के योगदान को बताते हुए प्रो़ सी.के. राजू अपनी किताब कल्चरल फाउंडेशन्स ऑफ मैथेमेटिक्स (पीयर्सन लॉन्गमैन, २००७) में लिखते हैं कि आकलन (कैलकुलस) भारत से यूरोप पहुँचा। भारतीय गणितज्ञों माधव, नीलकंठ और ज्येष्ठदेव के कार्य का लाभ यूरोपीय गणितज्ञों ने उठाया। परंतु किसी ने भारत के इस योगदान का अध्ययन करने का प्रयास नहीं किया। ⛳ ऋषि कणाद ने २५०० वर्ष पूर्व वेदों में लिखे सूत्रों के आधार पर परमाणु सिद्धांत का प्रतिपादन किया था। भारतीय इतिहास में ऋषि कणाद को परमाणुशास्त्र का जनक माना जाता है। आचार्य कणाद ने बताया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं। 🏅 ऋषि भारद्वाज ने राइट बंधुओं से २५०० वर्ष पूर्व वायुयान की खोज भारद्वाज ऋषि ने कर ली थी। पुष्पक विमान का उल्लेख इस बात का प्रमाण है। ऋषि भारद्वाज ने ६०० ईसा पूर्व इस पर एक विस्तृत शास्त्र लिखा था। जिसे विमान शास्त्र के नाम से जाना जाता है। 🏹 ऋषि बोधायन भारत के प्राचीन गणितज्ञ और शुल्ब सूत्र तथा श्रौतसूत्र के रचयिता हैं। पाइथागोरस के सिद्धांत से पूर्व ही बोधायन ने ज्यामिति के सूत्र रचे थे। उन्होंने २८०० वर्ष पूर्व रेखागणित, ज्यामिति के महत्वपूर्ण नियमों की खोज की थी। ……….✍विकास खुराना ♈🚩

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