Posted in छोटी कहानिया - १०,००० से ज्यादा रोचक और प्रेरणात्मक

एक बार पहलवानों के लिए एक सेठ जी ने पूरा बकरा भेज दिया अखाड़े में ।


एक बार पहलवानों के लिए एक सेठ जी ने पूरा बकरा भेज दिया अखाड़े में । बड़े वाले चूल्हे पे बड़ी वाली कड़ाही चढ़ी । पहलवानों में दो लड़के मुसलमाँ थे । उन ने सबसे पहले ये enquiry की कि झटका है या हलाल । ज़्यादातर लड़के तो ये जानते ही नहीं थे कि ये झटका हलाल क्या होता है । हमने सेठ जी को फोन किया । भैया बताओ । झटका है या हलाल । सेठ जी ने आगे फोन घुमाया और enquiry की । बताया कि भैया ये झटका है । ज़ाहिद पहलवान ने मना कर दिया । मैं तो जी ये नहीं खाऊंगा ? अब सारे पहलवानों का माथा ठनका । क्यों नहीं खायेगा भाई ? मैंने उन्हें झटका हलाल का अंतर समझाया और विस्तार से बताया कि इस्लाम में सिर्फ हलाल गोश्त ही खाया जाता है । एक लड़के ने सवाल किया ? इसका मतलब हम हिन्दू झटका खाते हैं ? अच्छा आज तक जो अखाड़े में बनता था जो ये रोज़ खाता था वो हलाल होता था । इसका मतलब कि हम सब आज तक हलाल खा रहे थे ? साला हम हलाल खा सकते हैं ? ये झटका नहीं खा सकता ? और इस मुद्दे पे अखाड़े में पहली बार लड़कों को हिन्दू मुसलमाँ का फर्क समझ आया । खैर ……. ज़ाहिद पहलवान के लिए अलग से एक किलो हलाल meat आया । और वहीं बड़े चूल्हे के बगल में ही gas पे ज़ाहिद पहलवान का meat भी पकने लगा । और गलती से बड़ी कड़ाही की कलछी किसी ने ज़ाहिद के meat में डाल दी । ohhh …….. ये क्या किया ? झटके की कलछी हलाल में डाल दी ? ज़ाहिद का meat तो भ्रष्ट हो गया । ज़ाहिद पहलवान ने उस meat का परित्याग कर दिया । लड़कों ने बहुत समझाया । sorry बोला । अबे कुछ ना होता ……. सिर्फ कलछी ही तो touch की है । ज़ाहिद पहलवान नहीं माना । हमने वो एक किलो भी उठा के अपनी बड़ी कड़ाही में पलट लिया । तभी एक लड़के ने कट्टर हिन्दू लकड़बग्घे का रूप धार लिया । अब हमारा झटका क्यों भ्रष्ट किया ? इसमें हलाल क्यों डाला ? पर हिन्दू majority चूँकि moderate है इसलिए सबने उसे चुप करा दिया । साले खाना है तो खा नहीं भाग ……. हमारा तो ऐसे ही बनेगा । हम ना मानते झटका हलाल । हम इतने जाहिल कोन्या …….. बहरहाल ये इतनी लंबी स्टोरी इसलिए सुनाई कि आज हज के लिए पहली flight जायेगी भारत से । इस्लाम में कर्ज़ा ले के या किसी की आर्थिक सहायता ले के हज पे जाना हराम है । हज सिर्फ सक्षम लोगों के लिए है । न जाने किस कमबख्त ने हिन्दुस्तानी मुसलामानों को हज में जहाज भाड़े में subsidy दे दी । हज की subsidy वैसी ही है जैसे किसी ने झटके की कलछी हलाल में डाल दी है । 5 – 10 हज़ार के लिए मुसलमाँ अपना हज भ्रष्ट कर रहे है । मुसलामानों को चाहिए की जैसे हमने LPG की subsidy छोड़ दी , वो भी हज की subsidy छोड़ दें । आइये subsidy छोड़ें …….. किसी गरीब के जीवन में खुशियाँ जोडें । अजित सिंह की पोस्ट Copied

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भगवान् श्रीकृष्ण जी के 51 नाम और उन के अर्थ


*भगवान् श्रीकृष्ण जी के 51 नाम और उन के अर्थ:…..* *1 कृष्ण* : सब को अपनी ओर आकर्षित करने वाला.। **** *2 गिरिधर*: गिरी: पर्वत ,धर: धारण करने वाला। अर्थात गोवर्धन पर्वत को उठाने वाले। **** *3 मुरलीधर*: मुरली को धारण करने वाले। **** *4 पीताम्बर धारी*: पीत :पिला, अम्बर:वस्त्र। जिस ने पिले वस्त्रों को धारण किया हुआ है। **** *5 मधुसूदन:* मधु नामक दैत्य को मारने वाले। **** *6 यशोदा या देवकी नंदन*: यशोदा और देवकी को खुश करने वाला पुत्र। **** *7 गोपाल*: गौओं का या पृथ्वी का पालन करने वाला। **** *8 गोविन्द*: गौओं का रक्षक। **** *9 आनंद कंद:* आनंद की राशि देंने वाला। **** *10 कुञ्ज बिहारी*: कुंज नामक गली में विहार करने वाला। **** *11 चक्रधारी*: जिस ने सुदर्शन चक्र या ज्ञान चक्र या शक्ति चक्र को धारण किया हुआ है। **** *12 श्याम*: सांवले रंग वाला। **** *13 माधव:* माया के पति। **** *14 मुरारी:* मुर नामक दैत्य के शत्रु। **** *15 असुरारी*: असुरों के शत्रु। **** *16 बनवारी*: वनो में विहार करने वाले। **** *17 मुकुंद*: जिन के पास निधियाँ है। **** *18 योगीश्वर*: योगियों के ईश्वर या मालिक। **** *19 गोपेश* :गोपियों के मालिक। **** *20 हरि*: दुःखों का हरण करने वाले। **** *21 मदन:* सूंदर। **** *22 मनोहर:* मन का हरण करने वाले। **** *23 मोहन*: सम्मोहित करने वाले। **** *24 जगदीश*: जगत के मालिक। **** *25 पालनहार*: सब का पालन पोषण करने वाले। **** *26 कंसारी*: कंस के शत्रु। **** *27 रुख्मीनि वलभ*: रुक्मणी के पति । **** *28 केशव*: केशी नाम दैत्य को मारने वाले. या पानी के उपर निवास करने वाले या जिन के बाल सुंदर है। **** *29 वासुदेव*:वसुदेव के पुत्र होने के कारन। **** *30 रणछोर*:युद्ध भूमि स भागने वाले। **** *31 गुड़ाकेश*: निद्रा को जितने वाले। **** *32 हृषिकेश*: इन्द्रियों को जितने वाले। **** *33 सारथी*: अर्जुन का रथ चलने के कारण। *** **** *35 पूर्ण परब्रह्म:* :देवताओ के भी मालिक। **** *36 देवेश*: देवों के भी ईश। **** *37 नाग नथिया*: कलियाँ नाग को मारने के कारण। **** *38 वृष्णिपति*: इस कुल में उतपन्न होने के कारण **** *39 यदुपति*:यादवों के मालिक। **** *40 यदुवंशी*: यदु वंश में अवतार धारण करने के कारण। **** *41 द्वारकाधीश*:द्वारका नगरी के मालिक। **** *42 नागर*:सुंदर। **** *43 छलिया*: छल करने वाले। **** *44 मथुरा गोकुल वासी*: इन स्थानों पर निवास करने के कारण। **** *45 रमण*: सदा अपने आनंद में लीन रहने वाले। **** *46 दामोदर*: पेट पर जिन के रस्सी बांध दी गयी थी। **** *47 अघहारी*: पापों का हरण करने वाले। **** *48 सखा*: अर्जुन और सुदामा के साथ मित्रता निभाने के कारण। **** *49 रास रचिया*: रास रचाने के कारण। **** *50 अच्युत*: जिस के धाम से कोई वापिस नही आता है। **** *51 नन्द लाला*: नन्द के पुत्र होने के कारण। *।। जय राधामाधव ।।*विष्णु कान्त शास्त्री वृन्दावन 9828970531

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श्री कृष्ण पूजा


श्री कृष्ण पूजा

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श्री कृष्ण पूजन का हर शास्त्र में विशेष महत्व बताया गया है। आइए 6 विशेष मंत्रों के माध्यम से जानें कि क्या लाभ मिलता है श्रीकृष्ण का ध्यान लगाने से… उनके पूजन से, उनकी आराधना से…
श्री शुकदेवजी राजा परीक्षित्‌ से कहते हैं-
सकृन्मनः कृष्णापदारविन्दयोर्निवेशितं तद्गुणरागि यैरिह।
न ते यमं पाशभृतश्च तद्भटान्‌ स्वप्नेऽपि पश्यन्ति हि चीर्णनिष्कृताः॥
जो मनुष्य केवल एक बार श्रीकृष्ण के गुणों में प्रेम करने वाले अपने चित्त को श्रीकृष्ण के चरण कमलों में लगा देते हैं, वे पापों से छूट जाते हैं, फिर उन्हें पाश हाथ में लिए हुए यमदूतों के दर्शन स्वप्न में भी नहीं होते।
अविस्मृतिः कृष्णपदारविन्दयोः
क्षिणोत्यभद्रणि शमं तनोति च।
सत्वस्य शुद्धिं परमात्मभक्तिं
ज्ञानं च विज्ञानविरागयुक्तम्‌॥
श्रीकृष्ण के चरण कमलों का स्मरण सदा बना रहे तो उसी से पापों का नाश, कल्याण की प्राप्ति, अन्तः करण की शुद्धि, परमात्मा की भक्ति और वैराग्ययुक्त ज्ञान-विज्ञान की प्राप्ति आप ही हो जाती है।
पुंसां कलिकृतान्दोषान्द्रव्यदेशात्मसंभवान्‌।
सर्वान्हरित चित्तस्थो भगवान्पुरुषोत्तमः॥
भगवान पुरुषोत्तम श्रीकृष्ण जब चित्त में विराजते हैं, तब उनके प्रभाव से कलियुग के सारे पाप और द्रव्य, देश तथा आत्मा के दोष नष्ट हो जाते हैं।
शय्यासनाटनालाप्रीडास्नानादिकर्मसु।
न विदुः सन्तमात्मानं वृष्णयः कृष्णचेतसः॥
श्रीकृष्ण को अपना सर्वस्व समझने वाले भक्त श्रीकृष्ण में इतने तन्मय रहते थे कि सोते, बैठते, घूमते, फिरते, बातचीत करते, खेलते, स्नान करते और भोजन आदि करते समय उन्हें अपनी सुधि ही नहीं रहती थी।
वैरेण यं नृपतयः शिशुपालपौण्ड्र-
शाल्वादयो गतिविलासविलोकनाद्यैः।
ध्यायन्त आकृतधियः शयनासनादौ
तत्साम्यमापुरनुरक्तधियां पुनः किम्‌॥
जब शिशुपाल, शाल्व और पौण्ड्रक आदि राजा वैरभाव से ही खाते, पीते, सोते, उठते, बैठते हर वक्त श्री हरि की चाल, उनकी चितवन आदि का चिन्तन करने के कारण मुक्त हो गए, तो फिर जिनका चित्त श्री कृष्ण में अनन्य भाव से लग रहा है, उन विरक्त भक्तों के मुक्त होने में तो संदेह ही क्या है?
एनः पूर्वकृतं यत्तद्राजानः कृष्णवैरिणः।
जहुस्त्वन्ते तदात्मानः कीटः पेशस्कृतो यथा॥
श्रीकृष्ण से द्वेष करने वाले समस्त नरपतिगण अन्त में श्री भगवान के स्मरण के प्रभाव से पूर्व संचित पापों को नष्ट कर भगवद  रूप हो जाते हैं,  अतएव श्रीकृष्ण का स्मरण सदा करते रहना चाहिए।
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मूर्खों के लक्षण


एक अभियान मूर्खों के खिलाफ

मूर्खों के लक्षण
🍄🍄🍄
👉🏾 🚶🏿 महा निकम्मे =फ्री में बैलेंस, मोबाइल, pendrive, T-shirt, झुनझुना आदि के लिए मैसेज भेजते रहते हैं, जो इन्हें कभी नहीं मिलते।

👉🏾 🦉 महा मूर्ख =ये 2-2 साल पुराने मैसेज को मार्किट में नया है कहकर फारवर्ड करते रहते हैं।
जैसे फलां जगह बच्ची मिली है इसे घर वालों तक पहुंचाओ। इनमें तारीख़ नहीं होती। तारीख़ होती तो पोल खुल जाती।

🐒 कुछ पागल = ऐसे एक्सीडेंट की खबरे भेजते हैं, जो 2 साल पहले हुआ था। इनमें भी तारीख़ कभी नहीं होती।

👉🏾 💩 महा बेवकूफ =व्यर्थ की साईं इमेज, फूल, पत्ती या 1121 ॐ 786 लिखकर कसम देकर लोगों को फारवर्ड करके अपनी बला ग्रुप के मेम्बरों पर चिपकाते हैं। ( क्या मिलता है भाई???)

👉🏾 🤓 महा मदं बुद्धि =”पुजारी मंदिर में पूजा कर रहा था फिर एक सांप/बन्दर आया और उसने इंसान का रूप ले लिया” इसे आगे भेजो लाटरी निकल जायेगी। (अरे मूर्ख तेरी ही नहीं निकली तो दूसरे की क्या खाक निकलेगी?)

👉🏽 🤥 कुछ मदं बुद्दी =अभी अभी पैदा हुए बच्चे के गले में आलपिन फंस गई, 50 लाख लगेंगे बच्चे के गले में आलपिन कौन डालेगा ? कौनसे ऑपरेशन में 50 लाख लगते हैं भाई ?
ऊपर से बोलेंगे कि प्रति शेयर 50 पैसा व्हाट्सऐप की तरफ से मिलेगा।

👉🏽सबसे बड़ी बेवकूफी तो तब होती है जब कोई कहता है कि- “मैसेज आगे भेजो आपकी बैटरी फुल चार्ज 🔋हो जायगी”/ घोडा दौड़ने लगेगा, भैंस का रंग बदल जायेगा या ताला खुल जायेगा। (भाई physics नाम की भी कोई चीज़ होती है।)

👉🏾 👽 कुछ लल्लू = किसी आदमी के डॉक्यूमेंट, डिग्रियाँ गिर गए हैं, ये मैसेज उस तक पहुचाने में मदद करें. (अरे मंदबुद्धि डॉक्यूमेंट आधार कार्ड ,अंकसूचि,परिचय पत्र में उसका पता नहीं है क्या???)

👆🏻यदि इनमें से कोई भी लक्षण आप में हैं, तो आप भी Whatsapp पर अपनी अल्प बुद्धि का परिचय दे रहे हैं।

निवेदन है आप ऐसे संदेश भेजकर अपना और दूसरों का समय बरबाद न करें।

अनावश्यक पोस्ट डालकर मोबाइल को कूड़ाघर नहीं बनायें। कोई भी msg पोस्ट करने से पहले सोच लें कि आप क्या पोस्ट कर रहे हैं। थोड़ा अपना दिमाग लगाएँ।

अगर आपको भी बेकार के मैसेज से बचना है तो इस msg को रोजाना 2बार 10 ग्रुप में भेजो और तब तक भेजो जब तक ये मंदबुद्धि उन्हें पढ़ न लें। आपको फालतू के msg आना बंद हो जायेंगे। और ऐसे पागलो से पीछा छूट जायेगा

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યશોદા તને કાનુડા પર ભરોસો નહી કે નહી કે


યશોદા તને કાનુડા પર ભરોસો નહી કે
નહી કે
યશોદાનો લાલ કેવો નટખટ
નટખટ
નટખટ માખણ ખાય કેવુ ફટફટ
ફટફટ
માખણની મટકી કેવી ગોલ ગોલ
ગોલ ગોલ
યશોદા તુ કાન્હા સાથે મીઠુ બોલ
મીઠુ બોલ
યશોદા તને કાનુડા પર ભરોસો નહી કે
નહી કે
યશોદાનો લાલ વગાડે વાંસળી
વાંસળી
વાંસળીની ધુન સાંભળી ગોપીઓ જાય હાંફળી
હાંફળી
એમા કાનુડાનો નથી કોઈ રોલ રોલ
રોલ રોલ
યશોદા તુ કાનુડા સાથે મીઠુ બોલ
મીઠુ બોલ
યશોદા તમને ગોપાલ પર ભરોસો નહી
નહી કે
કાનુડાની ફરિયાદથી યશોદા જાય થાકી
થાકી
કાનુડાની મસ્તીમાં નથી રહ્યુ કશુ બાકી
બાકી
કાનુડાની મસ્તીનો નથી કોઈ મોલ મોલ
મોલ મોલ
યશોદા તુ કાનુડા સાથે મીઠુ બોલ
મીઠુ બોલ
કાનુડા તને માખણથી ફુરસદ નથી કે
નથી કે
નથી કે .. નથી કે.. નથી કે..
નંદ ઘેર આનંદ ભયો જય કનૈયા લાલ કી
જય કનૈયા લાલ કી હાથી ઘોડા પાલકી

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एक पेड़ का डंठल अचानक टूट कर गिरता है।


एक पेड़ का डंठल अचानक टूट कर गिरता है।

जिसके कारण पेड़ के नीचे सोया हुआ एक बूढ़े व्यक्ति की मौत हो जाती है।

आस-पास के चतुर लोग इस घटना का विश्लेषण करते हुए बूढ़े व्यक्ति के मौत के लिए पेड़ को दोषी ठहरा देते है।

इस पर दूसरा चतुर आदमी बोलता है की पेड़ का क्या दोष, दोषी तो वो है, जो इस कमजोर मिटटी में पेड़ लगाया था।

अब पेड़ लगाने वाले को बुलाकर उससे बूढ़े का मौत का जिम्मेदार ठहराया जाता है।

पेड़ लगाने वाला भी चतुर था वो बोला- इसमें मेरा क्या दोष, इस पेड़ की डाली में बगुलों का झुण्ड आकर बैठ गया, जिसके वजन से डाली टूट गई और बूढ़े के ऊपर गिर गई।

इसलिए दोषी बगुले है।

दूसरा चतुर आदमी बोला- इन बेजुबान बगुलों का कोई दोष नहीं, ये बगुले पहले स्टेट बैंक के पास वाले पेड़ पर बैठते थे।

लेकिन

आज-कल वहाँ लम्बी-लम्बी लाइन लगी है और बहुत शोर होता है,

जिसके कारण बगुले वहा से यहाँ शिफ्ट हो गए है । दोषी तो स्टेट बैंक है।

इस पर एक और चतुर आदमी बोलता है- स्टेट बैंक का क्या दोष,

*दोषी तो नरेंद्र मोदी है*,

जिसने नोट बंदी लगा दिया और उसी के कारण इस बूढ़े की मौत हो गई।

अंत में सभी चतुर लोग एक मत से फैसला करते है की स्टेट बैंक से कोसो दूर एक पेड़ की डाली के नीचे सोये हुए बूढ़े की मौत नरेंद्र मोदी के कारण हुआ हैं।

इस घटना का यूपी मे ऑक्सीजन वाली घटना से कोई सम्बंध नही है ॥

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इस बार जन्माष्टमी को लेकर लोगों में शंका हो रही है कि जन्माष्टमी 14 को मनाई जाए या 15 को – 2017


इस बार जन्माष्टमी को लेकर लोगों में शंका हो रही है कि जन्माष्टमी 14 को मनाई जाए या 15 को तो मैं कुछ शास्त्र प्रमाणों के साथ बताने की कोशिश करता हूँ जिस से कि आप का भ्रम दूर हो जाए

अग्नि पुराण में लिखा है कि

वर्जनीया प्रयत्नेन सप्तमीसंयुताष्टमी|

विना ऋक्षेण कर्तव्या नवमी संयुताष्टमी|

 

अथवा जिस दिन सप्तमी में सूर्योदय हो कर रात को अष्टमी आ रही हो उस दिन भले ही रोहिणी नक्षत्र हो पर उस दिन व्रत नहीं करना चाहिए दूसरे दिन नवमी युक्त अष्टमी को ही व्रत करना चाहिए |

 

पद्म पुराण में लिखा है कि

 

पुत्रान् हन्ति पशून् हन्ति हन्ति राष्ट्रं सराजकम् |

हन्ति जातानजातांश्च सप्तमीसहिताष्टमी |

 

अष्टमी यदि सप्तमी विद्धा हो  और उस में व्रत उपवास करे तो पुत्र पशु राज्य राष्ट्र जात अजात सब को नष्ट कर देती है |

 

स्कन्द पुराण में लिखा है कि

 

पलवेधेपि विप्रेन्द्र सप्तम्यामष्टमीं त्यजेत् |

सुरया बिन्दुना स्पृष्टं गंगांभः कलशं यथा |

 

जिस प्रकार गंगाजल से भरा हुआ कलश एक बूंद मदिरा से दूषित हो जाता है उसी प्रकार लेश मात्र भी सप्तमी हो तो वह अष्टमी व्रत उपवास के लिए दूषित हो जाती है |

इस बार 14 तारीख को पूरे दिन सप्तमी है वैसे भी सभी शास्त्रों की मान्यता है कि तिथि वही सफल होती है जो सूर्योदयी होती है ऐसे शास्त्रों के सैकड़ों प्रमाण हैं जो यहाँ उद्धृत करना संभव नहीं है इसलिए शुद्ध और शास्त्र संमत जन्माष्टमी 15 तारीख मंगलवार को ही है व्रत उपवास अनुष्ठान पूजा आप इसी दिन करें |

 

भगवान बालकृष्ण गोपाल जी आप की मनोकामना पूरी करें |

जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ

🙏🙏 पं.  प्रदीप तिवारी 🙏🙏

🙏श्री सनातन धर्म मन्दिर डी ब्लॉक जनकपुरी नई दिल्ली🙏

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जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी।


जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी, कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी। उसे वो उपयुक्त स्थान लगा शिशु को जन्म देने के लिये।

 

वहां पहुँचते  ही उसे प्रसव पीडा शुरू हो गयी।

उसी समय आसमान में घनघोर बादल वर्षा को आतुर हो उठे और बिजली कडकने लगी।

 

उसने दाये देखा, तो एक शिकारी तीर का निशाना, उस की तरफ साध रहा था। घबराकर वह दाहिने मुडी, तो वहां एक भूखा शेर, झपटने को तैयार बैठा था। सामने सूखी घास आग पकड चुकी थी और पीछे मुडी, तो नदी में जल बहुत था।

 

मादा हिरनी क्या करती ? वह प्रसव पीडा से व्याकुल थी। अब क्या होगा ? क्या हिरनी जीवित बचेगी ? क्या वो अपने शावक को जन्म दे पायेगी ? क्या शावक जीवित रहेगा ?

 

क्या जंगल की आग सब कुछ जला देगी ? क्या मादा हिरनी शिकारी के तीर से बच पायेगी ?क्या मादा हिरनी भूखे शेर का भोजन बनेगी ?

वो एक तरफ आग से घिरी है और पीछे नदी है। क्या करेगी वो ?

 

हिरनी अपने आप को शून्य में छोड, अपने बच्चे को जन्म देने में लग गयी। कुदरत का कारिष्मा देखिये। बिजली चमकी और तीर छोडते हुए, शिकारी की आँखे चौंधिया गयी। उसका तीर हिरनी के पास से गुजरते, शेर की आँख में जा लगा,शेर दहाडता हुआ इधर उधर भागने लगा।और शिकारी, शेर को घायल ज़ानकर भाग गया। घनघोर बारिश शुरू हो गयी और जंगल की आग बुझ गयी। हिरनी ने शावक को जन्म दिया।

 

*हमारे जीवन में भी कभी कभी कुछ क्षण ऐसे आते है, जब हम चारो तरफ से समस्याओं से घिरे होते हैं और कोई निर्णय नहीं ले पाते। तब सब कुछ नियति के हाथों सौंपकर अपने उत्तरदायित्व व प्राथमिकता पर ध्यान केन्द्रित करना चाहिए।अन्तत: यश, अपयश ,हार ,जीत, जीवन,मृत्यु का अन्तिम निर्णय ईश्वर करता है।हमें उस पर विश्वास कर उसके निर्णय का सम्मान करना चाहिए।*

 

कुछ लोग हमारी *सराहना* करेंगे,

कुछ लोग हमारी *आलोचना* करेंगे।

 

दोनों ही मामलों में हम *फायदे* में हैं,

 

एक हमें *प्रेरित* करेगा और

दूसरा हमारे भीतर *सुधार* लाएगा।।

 

*अच्छा सोचें*

तो अच्छा ही होगा।

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12000 करोड़ का मालिक रेमण्ड कम्पनी का मालिक आज बेटे की बेरुखी के कारण किराये के घर में रह रहा है।


  1. 12000 करोड़ का मालिक रेमण्ड कम्पनी का मालिक आज बेटे की बेरुखी के कारण किराये के घर में रह रहा है।
  2. अरबपति महिला मुम्बई के पॉश इलाके के अपने करोडो के फ्लैट में पूरी तरह गल कर कंकाल बन गयी…करोड़पति बेटे को पता ही नहीं माँ कब मर गयी।
  3. बक्सर के क्लेक्टर ने तनाव के कारण आत्महत्या की।

….ये तीन घटनाये बताती है जीवन में पद पैसा प्रतिष्ठा ये सब कुछ काम का नहीं….यदि आपके जीवन में ख़ुशी संतुष्टी और अपने नहीं है तो….वरना एक क्लेक्टर को क्या जरुरत थी जो उसे आत्महत्या करना पड़ा।

…आनंदित रहो…खुश रहो।

…कभी सड़क किनारे धूल में नंगे खेलते गरीबो के बच्चों को देखना…उतनी ख़ुशी अमीरो के बच्चों को भी नहीं मिलती।खुशियाँ पैसो से नहीं मिलती..अपनों से मिलती है।

स्वस्थ रहो खुश रहो आनंदित रहो बस यही सबसे बड़ा धन है।

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गुडिया की कीमत प्रेरक कहानी


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एक 6 वर्ष का लडका अपनी 4 वर्ष की छोटी बहन के साथ बाजार से जा रहा था।
अचानक से उसे लगा कि, उसकी बहन पीछे रह गयी है।

वह रुका, पीछे मुड़कर देखा तो जाना कि, उसकी बहन एक खिलौने के दुकान के सामने खडी कोई चीज निहार रही है।

लडका पीछे आता है और बहन से पूछता है, “कुछ चाहिये तुम्हें?”

 लडकी एक गुड़िया की तरफ उंगली उठाकर दिखाती है।

बच्चा उसका हाथ पकडता है, एक जिम्मेदार बडे भाई की तरह अपनी बहन को वह गुड़िया देता है। बहन बहुत खुश हो गयी ।

दुकानदार यह सब देख रहा था, बच्चे का व्यवहार देखकर आश्चर्यचकित भी हुआ ….

अब वह बच्चा बहन के साथ काउंटर पर आया और दुकानदार से पूछा, “कितनी कीमत है इस गुड़िया की ?”

दुकानदार एक शांत और गहरा व्यक्ति था, उसने जीवन के कई उतार देखे थे, उन्होने बड़े प्यार और अपनत्व से बच्चे से पूछा,
“बताओ बेटे, आप क्या दे सकते हो ??”

बच्चा अपनी जेब से वो सारी सीपें बाहर निकालकर दुकानदार को देता है जो उसने थोड़ी देर पहले बहन के साथ समुंदर किनारे से चुन चुन कर बीनी थी !!!

दुकानदार वो सब लेकर यूँ गिनता है जैसे कोई पैसे गिन रहा हो।

सीपें गिनकर वो बच्चे की तरफ देखने लगा तो बच्चा बोला,”सर कुछ कम हैं क्या ??”

दुकानदार :-” नहीं – नहीं, ये तो इस गुड़िया की कीमत से भी ज्यादा है, ज्यादा मैं वापस देता हूँ ” यह कहकर उसने 4 सीपें रख ली और बाकी की बच्चे को वापिस दे दी।बच्चा बड़ी खुशी से वो सीपें जेब मे रखकर बहन को साथ लेकर चला गया।

यह सब उस दुकान का कामगार देख रहा था, उसने आश्चर्य से मालिक से पूछा, ” मालिक ! इतनी महंगी गुड़िया आपने केवल 4 सीपों के बदले मे दे दी ?”

दुकानदार एक स्मित संतुष्टि वाला हास्य करते हुये बोला,

“हमारे लिये ये केवल सीप है पर उस 6 साल के बच्चे के लिये अतिशय मूल्यवान है और अब इस उम्र में वो नहीं जानता, कि पैसे क्या होते हैं ?

पर जब वह बडा होगा ना…

और जब उसे याद आयेगा कि उसने सीपों के बदले बहन को गुड़िया खरीदकर दी थी, तब उसे मेरी याद जरुर आयेगी, और फिर वह सोचेगा कि,,,,,,
“यह विश्व अच्छे मनुष्यों से भी भरा हुआ है।”*